11-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - तुम्हें गुप्त खुशी होनी चाहिए कि हम परमात्मा बाप की युनिवर्सिटी के स्टूडेन्ट हैं, भविष्य नई दुनिया का वर्सा पाने के लिए पढ़ रहे हैं''

Q- किस स्मृति में सदा रहो तो दैवीगुण धारण होते रहेंगे?

A- हम आत्मा शिवबाबा की सन्तान हैं, बाबा हमें कांटों से फूल बनाने आये हैं - यही स्मृति सदा रहे तो दैवीगुण धारण होते रहेंगे। पढ़ाई और योग पर पूरा ध्यान रहे, विकारों से ऩफरत हो तो दैवीगुण आते जायेंगे। जिस समय कोई विकार वार करे तो समझना चाहिए - मैं कांटा हूँ, मुझे तो फूल बनना है।

D- 1) किसी की दिल को दु:खी नहीं करना है। अन्दर कोई भी भूत है तो जांच करके उसे निकालना है, फूल बन सबको सुख देना है।-----2) हम ज्ञान सागर के बच्चे हैं तो अन्दर ज्ञान की लहरें सदा उठती रहें। सर्विस की युक्तियां रचनी हैं, ट्रेन में भी सर्विस करनी है। साथ-साथ पावन बनने के लिए याद की यात्रा पर भी रहना है।

V- योगबल द्वारा माया की शक्ति पर जीत प्राप्त करने वाले सदा विजयी भव-----ज्ञान बल और योग बल सबसे श्रेष्ठ बल है। जैसे साइन्स का बल अंधकार पर विजय प्राप्त कर रोशनी कर देता है। ऐसे योगबल सदा के लिए माया पर जीत प्राप्त कर विजयी बना देता है। योगबल इतना श्रेष्ठ बल है जो माया की शक्ति इसके आगे कुछ भी नहीं है। योगबल वाली आत्मायें स्वप्न में भी माया से हार नहीं खा सकती। स्वप्न में भी कोई कमजोरी आ नहीं सकती। ऐसा विजय का तिलक आपके मस्तक पर लगा हुआ है।

S- नम्बरवन में आना है तो व्यर्थ को समर्थ में परिवर्तन कर दो।