11.07.2020

"मीठे बच्चे - सदा एक ही फिक्र में रहो कि हमें अच्छी रीति पढ़कर अपने को राजतिलक देना है, पढ़ाई से ही राजाई मिलती है''

प्रश्नः-

बच्चों को किस हुल्लास में रहना है? दिलशिकस्त नहीं होना है क्यों?

उत्तर:-

सदा यही हुल्लास रहे कि हमें इन लक्ष्मी-नारायण जैसा बनना है, इसका पुरुषार्थ करना है। दिलशिकस्त कभी नहीं होना है क्योंकि यह पढ़ाई बहुत सहज है, घर में रहते भी पढ़ सकते हो, इसकी कोई फीस नहीं है, लेकिन हिम्मत जरूर चाहिए।

वरदान:-

सदा एकान्त और सिमरण में व्यस्त रहने वाले बेहद के वानप्रस्थी भव

वर्तमान समय के प्रमाण आप सब वानप्रस्थ अवस्था के समीप हो। वानप्रस्थी कभी गुड़ियों का खेल नहीं करते हैं। वे सदा एकान्त और सिमरण में रहते हैं। आप सब बेहद के वानप्रस्थी सदा एक के अन्त में अर्थात् निरन्तर एकान्त में रहो साथ-साथ एक का सिमरण करते हुए स्मृति स्वरूप बनो। सभी बच्चों प्रति बापदादा की यही शुभ आश है कि अब बाप और बच्चे समान हो जाएं। सदा याद में समाये रहें। समान बनना ही समाना है - यही वानप्रस्थ स्थिति की निशानी है।

स्लोगन:-

आप हिम्मत का एक कदम बढ़ाओ तो बाप मदद के हजार कदम बढ़ायेंगे।