11-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - सत्य बाप सचखण्ड स्थापन करते हैं, तुम बाप के पास आये हो नर से नारायण बनने की सच्ची-सच्ची नॉलेज सुनने''

प्रश्नः-
तुम बच्चों को अपने गृहस्थ व्यवहार में बहुत-बहुत सम्भाल कर चलना है - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि तुम्हारी गत-मत सबसे न्यारी है। तुम्हारा गुप्त ज्ञान है इसलिए विशाल बुद्धि बन सबसे तोड़ निभाना है। अन्दर में समझना है हम सब भाई-भाई वा भाई-बहिन हैं। बाकी ऐसे नहीं स्त्री अपने पति को कहे तुम मेरे भाई हो। इससे सुनने वाले कहेंगे इनको क्या हो गया। युक्ति से चलना है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस कयामत के समय जबकि सतयुग की स्थापना हो रही है तो पावन जरूर बनना है। बाप और बाप के कार्य में कभी संशय नहीं उठाना है।

2) ज्ञान और सम्बन्ध गुप्त है, इसलिए लौकिक में बहुत युक्ति से विशाल बुद्धि बनकर चलना है। कोई ऐसे शब्द नहीं बोलने हैं जो सुनने वाले मूँझ जाएं।

वरदान:-
मनमत, परमत को समाप्त कर श्रीमत पर पदमों की कमाई जमा करने वाले पदमापदम भाग्यशाली भव

श्रीमत पर चलने वाले एक संकल्प भी मनमत वा परमत पर नहीं कर सकते। स्थिति की स्पीड यदि तेज नहीं होती है तो जरूर कुछ न कुछ श्रीमत में मनमत वा परमत मिक्स है। मनमत अर्थात् अल्पज्ञ आत्मा के संस्कार अनुसार जो संकल्प उत्पन्न होता है वह स्थिति को डगमग करता है इसलिए चेक करो और कराओ, एक कदम भी श्रीमत के बिना न हो तब पदमों की कमाई जमा कर पदमापदम भाग्यशाली बन सकेंगे।

स्लोगन:-
मन में सर्व के कल्याण की भावना बनी रहे - यही विश्व कल्याणकारी आत्मा का कर्तव्य है।