12-01-2017-Hin

“मीठे बच्चे– यह तुम्हारी वानप्रस्थ अवस्था है इसलिए एक बाप को याद करना है, निर्वाणधाम में चलने की तैयारी करनी है”

Q- बाप के पास किस बात का भेद नहीं है?

A- गरीब व साहूकार का। हर एक को पुरूषार्थ से अपना ऊंच पद पाने का अधिकार है। आगे चल सबको अपने पद का साक्षात्कार होगा। बाबा कहते हैं मैं हूँ गरीब निवाज इसलिए अभी गरीब बच्चों की सब आशायें पूरी होती हैं। यह अन्तिम समय है। किसकी दबी रहेगी धूल में..... जो बाप को इनश्योर करते हैं, उनका सफल होता है।

D- 1) माया के तूफानों को पार करते हुए बाप से पूरा-पूरा वर्सा लेना है। मात-पिता की आज्ञाओं को अमल में लाना है। 2) पुरानी दुनिया को भूल नई दुनिया को याद करना है। मौत के पहले बाप के पास स्वयं को इनश्योर कर देना है।

V- समर्पण भाव से सेवा करते सफलता प्राप्त करने वाले सच्चे सेवाधारी भव ! --------- सच्चे सेवाधारी वह हैं जो समर्पण भाव से सेवा करते हैं। सेवा में जरा भी मेरे पन का भाव न हो। जहाँ मेरा पन है वहाँ सफलता नहीं। जब कोई यह समझ लेते हैं कि यह मेरा काम है, मेरा विचार है, यह मेरी फर्ज-अदाई है-तो यह मेरापन आना अर्थात् मोह उत्पन्न होना। लेकिन कहाँ भी रहते सदा स्मृति रहे कि मैं निमित्त हूँ, यह मेरा घर नहीं लेकिन सेवा-स्थान है तो समर्पण भाव से निर्माण और नष्टोमोहा बन सफलता को प्राप्त कर लेंगे।

S- सदा अपने स्वमान की सीट पर रहो तो सर्व शक्तियां आर्डर मानती रहेंगी।