12-02-2019-Hin

"मीठे बच्चे-टीचर विदेही है इसलिए याद की मेहनत करनी है, याद करते-करते जब इम्तहान पूरा होगा तब घर चले जायेंगे''

Q- बच्चों को याद में रहने की मेहनत करनी है, किस धोखे में कभी भी नहीं आना है?

A- आत्मा का साक्षात्कार हुआ, झिलमिल देखी-इससे कोई फायदा नहीं, ऐसे नहीं कि साक्षात्कार से या बाबा की दृष्टि पड़ने से कोई पाप कट जायेंगे या मुक्ति मिल जायेगी। नहीं। यह तो और ही धोखे में रह जायेंगे। याद की मेहनत करो, मेहनत से ही कर्मातीत अवस्था होगी। ऐसे नहीं बाबा दृष्टि देंगे तो तुम पावन बन जायेंगे। मेहनत करनी है।

D- 1) स्वदर्शन चक्र को धारण कर अपने पापों को भस्म करना है। सम्भाल करो - कर्मेन्द्रियों से कोई भी पाप कर्म न हो। कर्मातीत बनने की स्वयं मेहनत करो।-----2) साक्षात्कार की आश नहीं रखनी है, साक्षात्कार करने से मुक्ति नहीं मिलती, पाप नहीं कटते, साक्षात्कार से फायदा नहीं है। जंक निकलेगी बाप और नॉलेज को याद करने से।

V- स्वयं को निमित्त समझ व्यर्थ संकल्प वा व्यर्थ वृत्ति से मुक्त रहने वाले विश्व कल्याणकारी भव-----मैं विश्व कल्याण के कार्य अर्थ निमित्त हूँ - इस जिम्मवारी की स्मृति में रहो तो कभी भी किसी के प्रति वा अपने प्रति व्यर्थ संकल्प वा व्यर्थ वृत्ति नहीं हो सकती। जिम्मेवार आत्मायें एक भी अकल्याणकारी संकल्प नहीं कर सकते। एक सेकण्ड भी व्यर्थ वृत्ति नहीं बना सकते क्योंकि उनकी वृत्ति से वायुमण्डल का परिवर्तन होना है इसलिए सर्व के प्रति उनकी शुभ भावना, शुभ कामना स्वत: रहती है।

S- अज्ञान की शक्ति क्रोध है और ज्ञान की शक्ति शान्ति है।