12-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - अन्तर्मुखी हो याद का अभ्यास करो, चेक करो कि आत्म-अभिमानी और परमात्म-अभिमानी कितना समय रहते हैं''

Q- जो बच्चे एकान्त में जाकर आत्म-अभिमानी बनने की प्रैक्टिस करते हैं उनकी निशानी क्या होगी?

A- उनके मुख से कभी उल्टा-सुल्टा बोल नहीं निकलेगा। 2-भाई-भाई का आपस में बहुत लव होगा। सदा क्षीरखण्ड होकर रहेंगे। 3-धारणा बहुत अच्छी होगी। उनसे कोई विकर्म नहीं होगा। 4-उनकी दृष्टि बहुत मीठी होगी। कभी देह-अभिमान नहीं आयेगा। 5-कोई को भी दु:ख नहीं देंगे।

D- 1) शरीर विनाशी है, उससे प्यार निकाल अविनाशी आत्मा से प्यार रखना है। अविनाशी बाप को याद करना है। आत्मा भाई-भाई है, हम भाई से बात करते हैं - यह अभ्यास करना है।-----2) विचार सागर मंथन कर अपनी ऐसी अवस्था बनानी है जो मुख से कभी कोई उल्टा-सुल्टा बोल न निकले। क़दम-क़दम पर अपना पोतामेल चेक करना है।

V- ईश्वरीय संग में रह उल्टे संग के वार से बचने वाले सदा के सतसंगी भव-----कैसा भी खराब संग हो लेकिन आपका श्रेष्ठ संग उसके आगे कई गुणा शक्तिशाली है। ईश्वरीय संग के आगे वह संग कुछ भी नहीं है। सब कमजोर है। लेकिन जब खुद कमजोर बनते हो तब उल्टे संग का वार होता है। जो सदा एक बाप के संग में रहते हैं अर्थात् सदा के सतसंगी हैं वह और किसी संग के रंग में प्रभावित नहीं हो सकते। व्यर्थ बातें, व्यर्थ संग अर्थात् कुसंग उन्हें आकर्षित कर नहीं सकता।

S- बुराई को भी अच्छाई में परिवर्तन करने वाले ही प्रसन्नचित्त रह सकते हैं।