12-05-2022 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - इस समय बूढ़े, बच्चे, जवान सबकी वानप्रस्थ अवस्था है, क्योंकि सभी को वाणी से परे मुक्ति-धाम जाना है, तुम उन्हें घर का रास्ता बताओ''

प्रश्नः-
बाप की श्रीमत हर बच्चे के प्रति अलग-अलग है, एक जैसी नहीं - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि बाप हर बच्चे की नब्ज देख, सरकमस्टांश देख श्रीमत देते हैं। समझो कोई निर्बन्धन हैं। बूढ़ा है या कुमारी है, सर्विस के लायक है तो बाबा राय देंगे इस सेवा में पूरा लग जाओ। बाकी सबको तो यहाँ नहीं बिठा देंगे। जिसके प्रति बाप की जो श्रीमत मिलती है उसमें कल्याण है। जैसे मम्मा बाबा, शिवबाबा से वर्सा लेते हैं ऐसे फालो कर उन जैसी सर्विस कर वर्सा लेना है।

गीत:-
भोलेनाथ से निराला....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पुरानी दुनिया की किसी भी चीज़ में लागत (लगाव) नहीं रखना है। इस दुनिया में किसी भी बात का शौक नहीं रखना है क्योंकि यह कब्रिस्तान होने वाली है।

2) अब नाटक पूरा होता है, हिसाब-किताब चुक्तू कर घर जाना है इसलिए योगबल द्वारा पापों से मुक्त हो पुण्य आत्मा बनना है। डबल दानी बनना है।

वरदान:-
खुशी की खुराक द्वारा मन और बुद्धि को शक्तिशाली बनाने वाले अचल-अडोल भव

वाह बाबा वाह और वाह मेरा भाग्य वाह!'' सदा यही खुशी के गीत गाते रहो। खुशी' सबसे बड़ी खुराक है, खुशी जैसी और कोई खुराक नहीं। जो रोज़ खुशी की खुराक खाते हैं वे सदा तन्दरूस्त रहते हैं। कभी कमजोर नहीं होते, इसलिए खुशी की खुराक द्वारा मन और बुद्धि को शक्तिशाली बनाओ तो स्थिति शक्तिशाली रहेगी। ऐसी शक्तिशाली स्थिति वाले सदा ही अचल-अडोल रहेंगे।

स्लोगन:-
मन और बुद्धि को अनुभव की सीट पर सेट कर दो तो कभी अपसेट नहीं होंगे।