12-09-2021     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 19.03.88 "बापदादा"    मधुबन


याद' में रमणीकता लाने की युक्तियाँ
 


वरदान:-
सेकण्ड में देह रूपी चोले से न्यारा बन कर्मभोग पर विजय प्राप्त करने वाले सर्व शक्ति सम्पन्न भव

जब कर्मभोग का जोर होता है, कर्मेन्द्रियां कर्मभोग के वश अपनी तरफ आकर्षित करती हैं अर्थात् जिस समय बहुत दर्द हो रहा हो, ऐसे समय पर कर्मभोग को कर्मयोग में परिवर्तन करने वाले, साक्षी हो कर्मेन्द्रियों से भोगवाने वाले ही सर्व शक्ति सम्पन्न अष्ट रत्न विजयी कहलाते हैं। इसके लिए बहुत समय का देह रूपी चोले से न्यारा बनने का अभ्यास हो। यह वस्त्र, दुनिया की वा माया की आकर्षण में टाइट अर्थात् खींचा हुआ न हो तब सहज उतरेगा।

स्लोगन:-
सर्व का मान प्राप्त करने के लिए निर्मानचित बनो - निर्मानता महानता की निशानी है।