12-09-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अभी यह रावण राज्य, पुरानी दुनिया खत्म हो नई दुनिया आ रही है इसलिए श्रीमत पर चल पवित्र बनो तो श्रेष्ठ देवी देवता बनेंगे''

प्रश्नः-
बाप अपने बच्चों को सत्य नारायण की कथा सुनाते हैं, उस कथा का रहस्य क्या है?

उत्तर:-
उसका रहस्य है - बादशाही लेना और गँवाना। अल्फ को अल्लाह मिला, तो गदाई छोड़ दी। जो विश्व के मालिक थे वही 84 जन्म ले राजाई गँवा देते हैं फिर बाप उन्हें राजाई देते हैं। पतित से पावन बनना, गदाई छोड़ राजाई लेना - यही सच्ची सत्य नारायण की कथा बाप सुनाते हैं।

गीत:-
आखिर वह दिन आया आज...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप के गले की माला बन विष्णु के गले में पिरोने के लिए सम्पूर्ण सतोप्रधान बनना है। एक बाप की मत पर चलना है।

2) ऐसी सेवा करनी है जो अनेक आत्माओं की आशीर्वाद मिलती रहे। त्राहि-त्राहि होने के पहले बाप से पूरा-पूरा वर्सा लेना है।

वरदान:-
स्नेही बनने के गुह्य रहस्य को समझ सर्व को राज़ी करने वाले राज़युक्त, योगयुक्त भव

जो बच्चे एक सर्वशक्तिमान् बाप के स्नेही बनकर रहते हैं वे सर्व आत्माओं के स्नेही स्वत: बन जाते हैं। इस गुह्य रहस्य को जो समझ लेते वह राजयुक्त, योगयुक्त वा दिव्यगुणों से युक्तियुक्त बन जाते हैं। ऐसी राज़युक्त आत्मा सर्व आत्माओं को सहज ही राज़ी कर लेती है। जो इस राज़ को नहीं जानते वे कभी अन्य को नाराज़ करते और कभी स्वयं नाराज रहते हैं इसलिए सदा स्नेही के राज़ को जान राजयुक्त बनो।

स्लोगन:-
जो निमित्त हैं वह जिम्मेवारी सम्भालते भी सदा हल्के हैं।

अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

जैसे बापदादा सदा बड़ी दिल वाले बेहद की दिल वाले हैं, इसलिए सर्व की दिल लेने वाले दिलाराम हैं, ऐसे बच्चे भी बेहद की दिल फ्राकदिल दातापन की दिल रखने वाले, सदा दिल खुश से जहान को खुश करने वाली खुशनसीब आत्मायें हैं। आप श्रेष्ठ आत्मायें ही जहान के आधार हो। आप सभी जगते, जागती ज्योत बनते तो जहान वाले भी जगते। आप सबकी चढ़ती कला होती है तो सर्व आत्माओं का कल्याण हो जाता है।