12-10-2020-Hin

“मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम बच्चों को तैरना सिखलाने, जिससे तुम इस दुनिया से पार हो जाते हो, तुम्हारे लिए दुनिया ही बदल जाती है''

Q- जो बाप के मददगार बनते हैं, उन्हें मदद के रिटर्न में क्या प्राप्त होता है?

A- जो बच्चे अभी बाप के मददगार बनते हैं, उन्हें बाप ऐसा बना देते हैं जो आधाकल्प कोई की मदद लेने वा राय लेने की दरकार ही नहीं रहती है। कितना बड़ा बाप है, कहते हैं बच्चे तुम मेरे मददगार नहीं होते तो हम स्वर्ग की स्थापना कैसे करते।

D- 1) बाप से पूरी-पूरी प्रीत रख मददगार बनना है। माया से हार खाकर कभी नाम बदनाम नहीं करना है। पुरूषार्थ कर देह सहित जो कुछ दिखाई देता है उसे भूल जाना है।-----2) अन्दर में खुशी रहे कि हम अभी शान्तिधाम, सुखधाम जाते हैं। बाबा ओबीडियन्ट टीचर बन हमको घर ले जाने के लायक बनाते हैं। लायक, सपूत बनना है, कपूत नहीं।

V- त्रि-स्मृति स्वरूप का तिलक धारण करने वाले सम्पूर्ण विजयी भव-----स्वयं की स्मृति, बाप की स्मृति और ड्रामा के नॉलेज की स्मृति - इन्हीं तीन स्मृतियों में सारे ज्ञान का विस्तार समाया हुआ है। नॉलेज के वृक्ष की यह तीन स्मृतियां हैं। जैसे वृक्ष का पहले बीज होता है, उस बीज द्वारा दो पत्ते निकलते हैं फिर वृक्ष का विस्तार होता है, ऐसे मुख्य है बीज बाप की स्मृति फिर दो पत्ते अर्थात् आत्मा और ड्रामा की सारी नॉलेज। इन तीन स्मृतियों को धारण करने वाले स्मृति भव वा सम्पूर्ण विजयी भव के वरदानी बन जाते हैं।

S- प्राप्तियों को सदा सामने रखो तो कमजोरियाँ सहज समाप्त हो जायेंगी।