13-02-2020-Hin

“मीठे बच्चे - शान्ति चाहिए तो अशरीरी बनो, इस देह-भान में आने से ही अशान्ति होती है, इसलिए अपने स्वधर्म में स्थित रहो”

Q- यथार्थ याद क्या है? याद के समय किस बात का विशेष ध्यान चाहिए?

A- अपने को इस देह से न्यारी आत्मा समझकर बाप को याद करना - यही यथार्थ याद है। कोई भी देह याद न आये, यह ध्यान रखना जरूरी है। याद में रहने के लिए ज्ञान का नशा चढ़ा हुआ हो, बुद्धि में रहे बाबा हमें सारे विश्व का मालिक बनाते हैं, हम सारे समुद्र, सारी धरनी के मालिक बनते हैं।

D- 1) विकर्माजीत बनने के लिए योगबल से विकर्मों पर जीत प्राप्त करनी है। यहाँ देखते हुए बुद्धियोग बाप और वर्से में लगा रहे।-----2) बाप के वर्से का पूरा अधिकार प्राप्त करने के लिए मातेला बनना है। एक बाप की ही श्रीमत पर चलना है। बाप जो समझाते हैं वह समझकर दूसरों को समझाना है।

V- सम्पूर्णता की रोशनी द्वारा अज्ञान का पर्दा हटाने वाले सर्च लाइट भव-----अभी प्रत्यक्षता का समय समीप आ रहा है इसलिए अन्तर्मुखी बन गुह्य अनुभवों के रत्नों से स्वयं को भरपूर बनाओ, ऐसे सर्च लाइट बनो जो आपके सम्पूर्णता की रोशनी से अज्ञान का पर्दा हट जाए। क्योंकि आप धरती के सितारे इस विश्व को हलचल से बचाए सुखी संसार, स्वर्णिम संसार बनाने वाले हो। आप पुरूषोत्तम आत्मायें विश्व को सुख-शान्ति की सांस देने के निमित्त हो।

S- माया और प्रकृति की आकर्षण से दूर रहो तो सदा हर्षित रहेंगे।