13.09.2020

वरदान:-

रोब के अंश का भी त्याग करने वाले स्वमानधारी पुण्य आत्मा भव

स्वमानधारी बच्चे सभी को मान देने वाले दाता होते हैं। दाता अर्थात् रहमदिल। उनमें कभी किसी भी आत्मा के प्रति संकल्प मात्र भी रोब नहीं रहता। यह ऐसा क्यों? ऐसा नहीं करना चाहिए, होना नहीं चाहिए, ज्ञान यह कहता है क्या...यह भी सूक्ष्म रोब का अंश है। लेकिन स्वमानधारी पुण्य आत्मायें गिरे हुए को उठायेंगी, सहयोगी बनायेंगी वह कभी यह संकल्प भी नहीं कर सकती कि यह तो अपने कर्मो का फल भोग रहे हैं, करेंगे तो जरूर पायेंगे.. इन्हें गिरना ही चाहिए...। ऐसे संकल्प आप बच्चों के नहीं हो सकते।

स्लोगन:-

सन्तुष्टता और प्रसन्नता की विशेषता ही उड़ती कला का अनुभव कराती है।