13-11-2019-Hin

“मीठे बच्चे - बाप की श्रीमत पर चलना ही बाप का रिगार्ड रखना है, मनमत पर चलने वाले डिसरिगार्ड करते हैं”

Q- गृहस्थ व्यवहार में रहने वालों को किस एक बात के लिए बाबा मना नहीं करते लेकिन एक डायरेक्शन देते हैं - वह कौन सा?

A- बाबा कहते - बच्चे, तुम भल सभी के कनेक्शन में आओ, कोई भी नौकरी आदि करो, सम्पर्क में आना पड़ता है, रंगीन कपड़े पहनने पड़ते हैं तो पहनो, बाबा की मना नहीं है। बाप तो सिर्फ डायरेक्शन देते हैं - बच्चे, देह सहित देह के सब सम्बन्धों से ममत्व निकाल मुझे याद करो।

D- 1) कभी भी याहुसैन नहीं मचाना है। बुद्धि में रहे हम विश्व का मालिक बनने वाले हैं, हमारी चलन, वार्तालाप बहुत अच्छा होना चाहिए। कभी भी रोना नहीं है।-----2) निश्चयबुद्धि बन एक बाप की मत पर चलते रहना है, कभी मूँझना वा घुटका नहीं खाना है। निश्चय में ही विजय है, इसलिए अपनी पाई-पैसे की मत नहीं चलानी है।

V- अपने पुरुषार्थ की विधि में स्वयं की प्रगति का अनुभव करने वाले सफलता के सितारे भव-----जो अपने पुरुषार्थ की विधि में स्वयं की प्रगति वा सफलता का अनुभव करते हैं, वही सफलता के सितारे हैं, उनके संकल्प में स्वयं के पुरुषार्थ प्रति भी कभी “पता नहीं होगा या नहीं होगा”, कर सकेंगे या नहीं कर सकेंगे - यह असफलता का अंश-मात्र भी नहीं होगा। स्वयं प्रति सफलता अधिकार के रूप में अनुभव करेंगे, उन्हें सहज और स्वत: सफलता मिलती रहती है।

S- सुख स्वरूप बनकर सुख दो तो पुरुषार्थ में दुआयें एड हो जायेंगी।