13.11.2020

"मीठे बच्चे - यह भूल-भुलैया का खेल है, तुम घड़ी-घड़ी बाप को भूल जाते हो, निश्चयबुद्धि बनो तो इस खेल में फसेंगे नहीं''

प्रश्नः-

कयामत के समय को देखते हुए तुम बच्चों का कर्तव्य क्या है?

उत्तर:-

तुम्हारा कर्तव्य है - अपनी पढ़ाई में अच्छी रीति लग जाना, और बातों में नहीं जाना है। बाप तुम्हें नयनों पर बिठाकर, गले का हार बनाकर साथ ले जायेंगे। बाकी तो सबको अपना-अपना हिसाब-किताब चुक्तू करके जाना ही है। बाप आये हैं सबको अपने साथ घर ले जाने।

वरदान:-

लगन की अग्नि द्वारा एक दीप से अनेक दीप जगाने वाले सच्चे सेवाधारी भव

जैसे दीपावली पर एक दीप से अनेक दीप जगाते, दीपमाला मनाते हैं। दीपक में अग्नि होती है ऐसे आप दीपकों में लगन की अग्नि है। अगर एक एक दीपक की एक दीपक के साथ लगन लग गई तो यही सच्ची दीपमाला है। तो देखना है कि हम दीपक लगन लगाकर अग्नि रूप बनने वाले, अपनी रोशनी से अज्ञानता का अंधकार मिटाने वाले ही सच्चे सेवाधारी हैं।

स्लोगन:-

एक बल, एक भरोसा-इस पाठ को सदा पक्का रखो तो बीच भंवर से सहज निकल जायेंगे।