14.01.2021

"मीठे बच्चे - बाप तुम्हें जो पढ़ाई पढ़ाते हैं वह बुद्धि में रख सबको पढ़ानी है, हर एक को बाप का और सृष्टि चक्र का परिचय देना है''

प्रश्नः-

आत्मा सतयुग में भी पार्ट बजाती और कलियुग में भी लेकिन अन्तर क्या है?

उत्तर:-

सतयुग में जब पार्ट बजाती है तो उसमें कोई पाप कर्म नहीं होता है, हर कर्म वहाँ अकर्म हो जाता है क्योंकि रावण नहीं है। फिर कलियुग में जब पार्ट बजाती है तो हर कर्म विकर्म वा पाप बन जाता है क्योंकि यहाँ विकार हैं। अभी तुम हो संगम पर। तुम्हें सारा ज्ञान है।

वरदान:-

समय पर हर गुण वा शक्ति को यूज़ करने वाले अनुभवी मूर्त भव

ब्राह्मण जीवन की विशेषता है अनुभव। अगर एक भी गुण वा शक्ति की अनुभूति नहीं तो कभी न कभी विघ्न के वश हो जायेंगे। अभी अनुभूति का कोर्स शुरू करो। हर गुण वा शक्ति रूपी खजाने को यूज करो। जिस समय जिस गुण की आवश्यकता है उस समय उसका स्वरूप बन जाओ। नॉलेज की रीति से बुद्धि के लाकर में खजाने को रख नहीं दो, यूज़ करो तब विजयी बन सकेंगे और वाह रे मैं का गीत सदा गाते रहेंगे।

स्लोगन:-

नाज़ुकपन के संकल्पों को समाप्त कर शक्तिशाली संकल्प रचने वाले ही डबल लाइट रहते हैं।