14.02.2021

वरदान:-

सेवा की स्टेज पर समाने की शक्ति द्वारा सफलता मूर्त बनने वाले मास्टर सागर भव

जब सेवा की स्टेज पर आते हो तो अनेक प्रकार की बातें सामने आती हैं, उन बातों को स्वयं में समा लो तो सफलतामूर्त बन जायेंगे। समाना अर्थात् संकल्प रूप में भी किसी की व्यक्त बातों और भाव का आंशिक रूप समाया हुआ न हो। अकल्याणकारी बोल कल्याण की भावना में ऐसे बदल दो जैसे अकल्याण का बोल था ही नहीं। अवगुण को गुण में, निंदा को स्तुति में बदल दो - तब कहेंगे मास्टर सागर।

स्लोगन:-

विस्तार को न देख सार को देखने वा स्वयं में समाने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं।