14.07.2020

"मीठे बच्चे - इस शरीर की वैल्यु तब है जब इसमें आत्मा प्रवेश करे, लेकिन सजावट शरीर की होती, आत्मा की नहीं''

प्रश्नः-

तुम बच्चों का फ़र्ज क्या है? तुम्हें कौन-सी सेवा करनी है?

उत्तर:-

तुम्हारा फ़र्ज है - अपने हमजिन्स को नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी बनने की युक्ति बताना। तुम्हें अब भारत की सच्ची रूहानी सेवा करनी है। तुम्हें ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है तो तुम्हारी बुद्धि और चलन बड़ी रिफाइन होनी चाहिए। किसी में मोह ज़रा भी न हो।

वरदान:-

क्यों, क्या के क्वेश्चन की जाल से सदा मुक्त रहने वाले विश्व सेवाधारी चक्रवर्ती भव

जब स्वदर्शन चक्र राइट तरफ चलने के बजाए रांग तरफ चल जाता है तब मायाजीत बनने के बजाए पर के दर्शन के उलझन के चक्र में आ जाते हो जिससे क्यों और क्या के क्वेश्चन की जाल बन जाती है जो स्वयं ही रचते और फिर स्वयं ही फंस जाते इसलिए नॉलेजफुल बन स्वदर्शन चक्र फिराते रहो तो क्यों क्या के क्वेश्चन की जाल से मुक्त हो योगयुक्त, जीवनमुक्त, चक्रवर्ती बन बाप के साथ विश्व कल्याण की सेवा में चक्र लगाते रहेंगे। विश्व सेवाधारी चक्रवर्ती राजा बन जायेंगे।

स्लोगन:-

प्लेन बुद्धि से प्लैन को प्रैक्टिकल में लाओ तो सफलता समाई हुई है।