14-10-2020-Hin

“मीठे बच्चे - संगमयुग पर ही तुम्हें आत्म-अभिमानी बनने की मेहनत करनी पड़ती सतयुग अथवा कलियुग में यह मेहनत होती नहीं''

Q- श्रीकृष्ण का नाम उनके माँ बाप से भी अधिक बाला है, क्यों?

A- क्योंकि श्रीकृष्ण से पहले जिनका भी जन्म होता है वो जन्म योगबल से नहीं होता। कृष्ण के माँ बाप ने कोई योगबल से जन्म नहीं लिया है। 2- पूरी कर्मातीत अवस्था वाले राधे-कृष्ण ही हैं, वही सद्गति को पाते हैं। जब सब पाप आत्मायें खत्म हो जाती हैं तब गुलगुल (पावन) नई दुनिया में श्रीकृष्ण का जन्म होता है, उसे ही वैकुण्ठ कहा जाता है। 3- संगम पर श्रीकृष्ण की आत्मा ने, सबसे अधिक पुरुषार्थ किया है इसलिए उनका नाम बाला है।

D- 1) बुद्धि को पवित्र बनाने के लिए याद की यात्रा में मस्त रहना है। कर्म करते भी एक माशूक याद रहे - तब विकर्माजीत बनेंगे।-----2) इस छोटे से युग में मनुष्य से देवता बनने की मेहनत करनी है। अच्छे कर्मों के अनुसार अच्छे संस्कारों को धारण कर अच्छे कुल में जाना है।

V- जहान के नूर बन भक्तों को नज़र से निहाल करने वाले दर्शनीय मूर्त भव-----सारा विश्व आप जहान के आंखों की दृष्टि लेने के लिए इन्तजार में है। जब आप जहान के नूर अपनी सम्पूर्ण स्टेज तक पहुचेंगे अर्थात् सम्पूर्णता की आंख खोलेंगे तब सेकण्ड में विश्व परिवर्तन होगा। फिर आप दर्शनीय मूर्त आत्मायें अपनी नज़र से भक्त आत्माओं को निहाल कर सकेंगी। नज़र से निहाल होने वालों की लम्बी क्यू है इसलिए सम्पूर्णता की आंख खुली रहे। आंखों का मलना और संकल्पों का घुटका व झुटका खाना बन्द करो तब दर्शनीय मूर्त बन सकेंगे।

S- निर्मल स्वभाव निर्मानता की निशानी है। निर्मल बनो तो सफलता मिलेगी।