15-02-2020-Hin

“मीठे बच्चे - आत्मा रूपी ज्योति में ज्ञान-योग का घृत डालो तो ज्योत जगी रहेगी, ज्ञान और योग का कॉन्ट्रास्ट अच्छी रीति समझना है”

Q- बाप का कार्य प्रेरणा से नहीं चल सकता, उन्हें यहाँ आना ही पड़े क्यों?

A- क्योंकि मनुष्यों की बुद्धि बिल्कुल तमोप्रधान है। तमोप्रधान बुद्धि प्रेरणा को कैच नहीं कर सकती। बाप आते हैं तब तो कहा जाता है छोड़ भी दे आकाश सिंहासन....।

D- 1) याद के बल से अपनी कर्मेन्द्रियों को शीतल, शान्त बनाना है। फुल पास होने के लिए यथार्थ रीति बाप को याद कर पावन बनना है।-----2) उठते-बैठते बुद्धि में रहे कि अभी हम यह पुराना शरीर छोड़ वापस घर जायेंगे। जैसे बाप में सब ज्ञान है, ऐसे मास्टर ज्ञान सागर बनना है।

V- लोहे समान आत्मा को पारस बनाने वाले मास्टर पारसनाथ भव-----आप सब पारसनाथ बाप के बच्चे मास्टर पारसनाथ हो-तो कैसी भी लोहे समान आत्मा हो लेकिन आप के संग से लोहा भी पारस बन जाए। यह लोहा है-ऐसा कभी नहीं सोचना। पारस का काम ही है लोहे को पारस बनाना। यही लक्ष्य और लक्षण सदा स्मृति में रख हर संकल्प, हर कर्म करना, तब अनुभव होगा कि मुझ आत्मा के लाइट की किरणें अनेक आत्माओं को गोल्डन बनाने की शक्ति दे रही हैं।

S- हर कार्य साहस से करो तो सर्व का सम्मान प्राप्त होगा।