15-03-2019-Hin

"मीठे बच्चे - अन्तर्मुखी बन विचार सागर मंथन करो तो खुशी और नशा रहेगा, तुम बाप समान टीचर बन जायेंगे"

Q- किस आधार पर अन्दर की खुशी स्थाई रह सकती है?

A- स्थाई खुशी तब रहेगी जब औरों का भी कल्याण कर सबको खुश करेंगे। रहमदिल बनो तो खुशी रहे। जो रहमदिल बनते हैं उनकी बुद्धि में रहता कि ओहो, हमें सर्व आत्माओं का बाप पढ़ा रहे हैं, पावन बना रहे हैं, हम विश्व का महाराजा बनते हैं! ऐसी खुशी का वह दान करते रहते हैं।

D- 1) हम गोपी-वल्लभ की गोप-गोपियां हैं - इस खुशी वा नशे में रहना है। अन्तर्मुखी बन विचार सागर मंथन कर बाप समान टीचर बनना है।-----2) सुदामा मिसल अपना सब कुछ ट्रान्सफर करने के साथ-साथ पढ़ाई भी अच्छी रीति पढ़नी है। विनाश के पहले बाप से पूरा वर्सा लेना है। कुम्भकरण की नींद में सोये हुए को जगाना है।

V- त्रिकालदर्शी बन दिव्य बुद्धि के वरदान को कार्य में लगाने वाले सफलता सम्पन्न भव-----बापदादा ने हर बच्चे को दिव्य बुद्धि का वरदान दिया है। दिव्य बुद्धि द्वारा ही बाप को, अपने आपको और तीनों कालों को स्पष्ट जान सकते हो। सर्वशक्तियों को धारण कर सकते हो। दिव्य बुद्धि वाली आत्मा कोई भी संकल्प को कर्म वा वाणी में लाने के पहले हर बोल वा कर्म के तीनों काल जानकर प्रैक्टिकल में आती है। उनके आगे पास्ट और फ्युचर भी इतना स्पष्ट होता है जितना प्रेजन्ट स्पष्ट है। ऐसे दिव्य बुद्धि वाले त्रिकालदर्शी होने के कारण सदा सफलता सम्पन्न बन जाते हैं।

S- सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करने वाले ही परमानन्द का अनुभव कर सकते हैं।