15-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


'मीठे बच्चे - अभी तुम अमरलोक की यात्रा पर हो, तुम्हारी यह बुद्धि की रूहानी यात्रा है, जो तुम सच्चे-सच्चे ब्राह्मण ही कर सकते हो"

प्रश्नः-
अपने आपसे वा आपस में कौन सी वार्तालाप करना ही शुभ सम्मेलन है?

उत्तर:-
अपने आपसे बातें करो कि हम आत्मा अब इस पुराने छी-छी शरीर को छोड़ वापिस घर जायेंगे। यह तन कोई काम का नहीं, अब तो बाबा के साथ जायेंगे। आपस में जब मिलते हो तो यही वार्तालाप करो कि सर्विस वृद्धि को कैसे पाये, सबका कल्याण किस तरह हो, सबको रास्ता कैसे बतायें... यही शुभ सम्मेलन है।

गीत:-
दिल का सहारा टूट न जाये...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) आपस में शुभ सम्मेलन कर सर्विस की वृद्धि के प्लैन बनाने हैं। अपने और सर्व के कल्याण की युक्ति रचनी है। कभी भी कोई व्यर्थ (फालतू) बातें नहीं करनी हैं।

2) सवेरे-सवेरे उठकर अपने आपसे बातें करनी हैं, विचार सागर मंथन करना है। भोजन बनाते एक बाप की याद में रहना है। मन्सा भी बाहर न भटके, यह ध्यान रखना है।

वरदान:-
विनाश के समय पेपर में पास होने वाले आकारी लाइट रूपधारी भव

विनाश के समय पेपर में पास होने वा सर्व परिस्थितियों का सामना करने के लिए आकारी लाइट रूपधारी बनो। जब चलते फिरते लाइट हाउस हो जायेंगे तो आपका यह रूप (शरीर) दिखाई नहीं देगा। जैसे पार्ट बजाने समय चोला धारण करते हो, कार्य समाप्त हुआ चोला उतारा। एक सेकण्ड में धारण करो और एक सेकण्ड में न्यारे हो जाओ - जब यह अभ्यास होगा तो देखने वाले अनुभव करेंगे कि यह लाइट के वस्त्रधारी हैं, लाइट ही इन्हों का श्रंगार है।

स्लोगन:-
उमंग-उत्साह के पंख सदा साथ हों तो हर कार्य में सफलता सहज मिलती है।