16.02.2021

"मीठे बच्चे - तुमने अपनी जीवन डोर एक बाप से बांधी है, तुम्हारा कनेक्शन एक से है, एक से ही तोड़ निभाना है''

प्रश्नः-

संगमयुग पर आत्मा अपनी डोर परमात्मा के साथ जोड़ती है, इसकी रस्म अज्ञान में किस रीति से चलती आ रही है?

उत्तर:-

शादी के समय स्त्री का पल्लव पति के साथ बांधते हैं। स्त्री समझती है जीवन भर उनका ही साथी होकर रहना है। तुमने तो अब अपना पल्लव बाप के साथ जोड़ा है। तुम जानते हो हमारी परवरिश आधाकल्प के लिए बाप द्वारा होगी।

वरदान:-

सर्व खजानों को विश्व कल्याण प्रति यूज़ करने वाले सिद्धि स्वरूप भव

जैसे अपने हद की प्रवृत्ति में, अपने हद के स्वभाव-संस्कारों की प्रवृत्ति में बहुत समय लगा देते हो, लेकिन अपनी-अपनी प्रवृत्ति से परे अर्थात् उपराम रहो और हर संकल्प, बोल, कर्म और सम्बन्ध-सम्पर्क में बैलेन्स रखो तो सर्व खजानों की इकॉनामी द्वारा कम खर्च बाला नशीन बन जायेंगे। अभी समय रूपी खजाना, एनर्जी का खजाना और स्थूल खजाने में कम खर्च बाला नशीन बनो, इन्हें स्वयं के बजाए विश्व कल्याण प्रति यूज़ करो तो सिद्धि स्वरूप बन जायेंगे।

स्लोगन:-

एक की लगन में सदा मगन रहो तो निर्विघ्न बन जायेंगे।