16-03-2019-Hin

“मीठे बच्चे - अपने को आत्मा भाई-भाई समझ एक-दो से रूहानी प्रेम रखो, सतोप्रधान बनना है तो किसी की खामी नहीं निकालो''

Q- किस आधार पर बाप से पद्मों का वर्सा ले सकते हो?

A- बाप से पद्मों का वर्सा लेने के लिए याद की यात्रा पर रहो। एक बाप के सिवाए और सब बातें भूलते जाओ। फलाना ऐसा करता, वह ऐसा है..... इन बातों में टाइम वेस्ट मत करो। मंज़िल भारी है इसलिए सदा सतोप्रधान बनने का लक्ष्य रहे। बाप के लव में चटके रहो, अपनी सूक्ष्म चेकिंग करते रहो तब पूरा वर्सा ले सकेंगे।

D- 1. देही-अभिमानी अवस्था धारण कर सुखदाई बनना है। किसी की भी खामियां (कमियां) नहीं निकालनी हैं। आपस में बहुत-बहुत प्यार से रहना है, मतभेद में नहीं आना है।-----2. और सब बातों को छोड़ एक बाप से गुण ग्रहण करना है। सतोप्रधान बनने का फुरना (फा) रखना है। किसी की बात न सुननी है, न ग्लानी करनी है। मिया मिट्ठू नहीं बनना है।

V- लाइट के आधार पर ज्ञान-योग की शक्तियों का प्रयोग करने वाले प्रयोगशाली आत्मा भव-----जैसे प्रकृति की लाइट साइन्स के अनेक प्रकार के प्रयोग प्रैक्टिकल में करके दिखाती है, ऐसे आप अविनाशी परमात्म लाइट, आत्मिक लाइट और साथ-साथ प्रैक्टिकल स्थिति की लाइट द्वारा ज्ञान योग की शक्तियों का प्रयोग करो। यदि स्थिति और स्वरूप डबल लाइट है तो प्रयोग की सफलता बहुत सहज होती है। जब हर एक स्वयं के प्रति प्रयोग में लग जायेंगे तो प्रयोगशाली आत्माओं का पावरफुल संगठन बन जायेगा।

S- विघ्नों के अंश और वंश को समाप्त करने वाले ही विघ्न-विनाशक हैं।