16-04-2019-Hin

''मीठे बच्चे - बाप जो शिक्षायें देते हैं, उन्हें अमल में लाओ, तुम्हें प्रतिज्ञा कर अपने वचन से फिरना नहीं है, आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना है''

Q- तुम्हारी पढ़ाई का सार क्या है? तुम्हें कौन-सा अभ्यास अवश्य करना है?

A- तुम्हारी पढ़ाई है वानप्रस्थ में जाने की। इस पढ़ाई का सार है वाणी से परे जाना। बाप ही सबको वापस ले जाते हैं। तुम बच्चों को घर जाने के पहले सतोप्रधान बनना है। इसके लिए एकान्त में जाकर देही-अभिमानी रहने का अभ्यास करो। अशरीरी बनने का अभ्यास ही आत्मा को सतोप्रधान बनायेगा।

D- 1) सतोप्रधान बनने के लिए याद की यात्रा से अपनी बैटरी चार्ज करनी है। अभुल बनना है। अपना रजिस्टर अच्छा रखना है। कोई भी ग़फलत नहीं करनी है।-----2) कोई भी बेकायदे कर्म नहीं करना है, माया के त़ूफानों की परवाह न कर, कर्मेन्द्रिय जीत बनना है। लीवरघड़ी समान एक्यूरेट पुरुषार्थ करना है।

V- संबंध और प्राप्तियों की स्मृति द्वारा सदा खुशी में रहने वाले सहजयोगी भव-----सहजयोग का आधार है - संबंध और प्राप्ति। संबंध के आधार पर प्यार पैदा होता है और जहाँ प्राप्तियां होती हैं वहाँ मन-बुद्धि सहज ही जाता है। तो संबंध में मेरेपन के अधिकार से याद करो, दिल से कहो मेरा बाबा और बाप द्वारा जो शक्तियों का, ज्ञान का, गुणों का, सुख-शान्ति, आंनद, प्रेम का खजाना मिला है उसे स्मृति में इमर्ज करो, इससे अपार खुशी रहेगी और सहजयोगी भी बन जायेंगे।

S- देह-भान से मुक्त बनो तो दूसरे सब बन्धन स्वत: खत्म हो जायेंगे।