16.07.2020

"मीठे बच्चे - यह संगमयुग विकर्म विनाश करने का युग है, इस युग में कोई भी विकर्म तुम्हें नहीं करना है, पावन जरूर बनना है''

प्रश्नः-

अतीन्द्रिय सुख का अनुभव किन बच्चों को हो सकता है?

उत्तर:-

जो अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरपूर हैं, उन्हें ही अतीन्द्रिय सुख का अनुभव हो सकता है। जो जितना ज्ञान को जीवन में धारण करते हैं उतना साहूकार बनते हैं। अगर ज्ञान रत्न धारण नहीं तो गरीब हैं। बाप तुम्हें पास्ट, प्रेजन्ट, फ्युचर का ज्ञान देकर त्रिकालदर्शी बना रहे हैं।

वरदान:-

देह, सम्बन्ध और वैभवों के बन्धन से स्वतंत्र बाप समान कर्मातीत भव

जो निमित्त मात्र डायरेक्शन प्रमाण प्रवृत्ति को सम्भालते हुए आत्मिक स्वरूप में रहते हैं, मोह के कारण नहीं, उन्हें यदि अभी-अभी आर्डर हो कि चले आओ तो चले आयेंगे। बिगुल बजे और सोचने में ही समय न चला जाए - तब कहेंगे नष्टोमोहा इसलिए सदैव अपने को चेक करना है कि देह का, सम्बन्ध का, वैभवों का बन्धन अपनी ओर खींचता तो नहीं है। जहाँ बंधन होगा वहाँ आकर्षण होगी। लेकिन जो स्वतंत्र हैं वे बाप समान कर्मातीत स्थिति के समीप हैं।

स्लोगन:-

स्नेह और सहयोग के साथ शक्ति रूप बनो तो राजधानी में नम्बर आगे मिल जायेगा।