16-09-2021 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - बेहद का बाप इस बेहद की महफिल में गरीब बच्चों को गोद लेने के लिए आये हैं, उन्हें देवताओं की महफिल में आने की जरूरत नहीं''

प्रश्नः-
बच्चों को कौन सा दिन बड़े ही धूमधाम से मनाना चाहिए?

उत्तर:-
जिस दिन मरजीवा जन्म हुआ, बाप में निश्चय हुआ... वह दिन बड़े ही धूमधाम से मनाना चाहिए। वही तुम्हारे लिए जन्माष्टमी है। अगर अपना मरजीवा जन्म दिन मनायेंगे तो बुद्धि में याद रहेगा कि हमने पुरानी दुनिया से किनारा कर लिया। हम बाबा के बन गये अर्थात् वर्से के अधिकारी बन गये।

गीत:-
महफिल में जल उठी शमा...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हर बात के लिए पुरुषार्थ जरूर करना है। ड्रामा कहकर बैठ नहीं जाना है। कर्मयोगी, राजयोगी बनना है। कर्म संन्यासी, हठयोगी नहीं।

2) बिगर सजा खाये बाप के साथ घर चलने के लिए याद में रहकर आत्मा को सतोप्रधान बनाना है। सांवरे से गोरा बनना है।

वरदान:-
अपनी श्रेष्ठता द्वारा नवीनता का झण्डा लहराने वाले शक्ति स्वरूप भव

अभी समय प्रमाण, समीपता के प्रमाण शक्ति रूप का प्रभाव जब दूसरों पर डालेंगे तब अन्तिम प्रत्यक्षता समीप ला सकेंगे। जैसे स्नेह और सहयोग को प्रत्यक्ष किया है ऐसे सर्विस के आइने में शक्ति रूप का अनुभव कराओ। जब अपनी श्रेष्ठता द्वारा शक्ति रूप की नवीनता का झण्डा लहरायेंगे तब प्रत्यक्षता होगी। अपने शक्ति स्वरूप से सर्वशक्तिमान् बाप का साक्षात्कार कराओ।

स्लोगन:-
मन्सा द्वारा शक्तियों का और कर्म द्वारा गुणों का दान देना ही महादान है।