17-06-2022 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन


मीठे बच्चे - याद में रह अपने विकर्मों की प्रायश्चित करो तो विकर्माजीत बन जायेंगे, पुराने सब हिसाब-किताब चुक्तू हो जायेंगे''

प्रश्नः-
किन बच्चों से हर बात का त्याग सहज हो जाता है?

उत्तर:-
जिन बच्चों को अन्दर से वैराग्य आता है - वह हर बात का त्याग सहज ही कर लेते हैं, तुम बच्चों के अन्दर अब यह इच्छायें नहीं होनी चाहिए कि यह पहनूं, यह खाऊं, यह करूं... देह सहित सारी पुरानी दुनिया का ही त्याग करना है। बाप आये हैं तुम्हें हथेली पर बहिस्त देने तो इस पुरानी दुनिया से बुद्धियोग हट जाना चाहिए।

गीत:-
माता ओ माता....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पुण्य आत्मा बनने के लिए याद की मेहनत करनी है। सब हिसाब-किताब समाप्त कर पास विद ऑनर हो इज्जत से जाना है इसलिए कर्मभोग से डरना नहीं है, खुशी-खुशी चुक्तू करना है।

2) सदा इसी नशे में रहना है कि हम भविष्य प्रिन्स-प्रिन्सेज बन रहे हैं। यह है प्रिन्स-प्रिन्सेज बनने की कॉलेज।

वरदान:-
अचल स्थिति द्वारा मास्टर दाता बनने वाले विश्व कल्याणकारी भव

जो अचल स्थिति वाले हैं उनके अन्दर यही शुभ भावना, शुभ कामना उत्पन्न होती है कि यह भी अचल हो जाएं। अचल स्थिति वालों का विशेष गुण होगा - रहमदिल। हर आत्मा के प्रति सदा दाता-पन की भावना होगी। उनका विशेष टाइटल ही है विश्व कल्याणकारी। उनके अन्दर किसी भी आत्मा के प्रति घृणा भाव, द्वेष भाव, ईर्ष्या भाव या ग्लानी का भाव उत्पन्न नहीं हो सकता। सदा ही कल्याण का भाव होगा।

स्लोगन:-
शान्ति की शक्ति ही अन्य के क्रोध अग्नि को बुझाने का साधन है।