18.02.2021

"मीठे बच्चे - सुख देने वाले एक बाप को याद करो, इस थोड़े समय में योगबल जमा करो तो अन्त में बहुत काम आयेगा''

प्रश्नः-

बेहद के वैरागी बच्चे, तुम्हें कौन सी स्मृति सदा रहनी चाहिए?

उत्तर:-

यह हमारा छी-छी चोला है, इसे छोड़ वापिस घर जाना है - यह स्मृति सदा रहे। बाप और वर्सा याद रहे, दूसरा कुछ भी याद न आये। यह है बेहद का वैराग्य। कर्म करते याद में रहने का ऐसा पुरूषार्थ करना है जो पापों का बोझा सिर से उतर जाये। आत्मा तमोप्रधान से सतोप्रधान बन जाये।

वरदान:-

ज्ञानी तू आत्मा बन ज्ञान सागर और ज्ञान में समाने वाले सर्व प्राप्ति स्वरूप भव

जो ज्ञानी तू आत्मायें हैं वह सदा ज्ञान सागर और ज्ञान में समाई रहती हैं, सर्व प्राप्ति स्वरूप होने के कारण इच्छा मात्रम् अविद्या की स्टेज स्वत: रहती है। जो अंश मात्र भी किसी स्वभाव-संस्कार के अधीन हैं, नाम-मान-शान के मंगता हैं। क्या, क्यों के क्वेश्चन में चिल्लाने वाले, पुकारने वाले, अन्दर एक बाहर दूसरा रूप है - उन्हें ज्ञानी तू आत्मा नहीं कहा जा सकता।

स्लोगन:-

इस जीवन में अतीन्द्रिय सुख व आनंद की अनुभूति करने वाले ही सहजयोगी हैं।