20.02.2021

"मीठे बच्चे - तुम ईश्वरीय सम्प्रदाय हो, तुम्हें ज्ञान सूर्य बाप मिला है, अभी तुम जागे हो तो दूसरों को भी जगाओ''

प्रश्नः-

अनेक प्रकार के टकराव का कारण तथा उसका निवारण क्या है?

उत्तर:-

जब देह-अभिमान में आते हो तो अनेक प्रकार के टकराव होते हैं। माया की ग्रहचारी बैठती है। बाबा कहते देही-अभिमानी बनो, सर्विस में लग जाओ। याद की यात्रा में रहो तो ग्रहचारी मिट जायेगी।

वरदान:-

अपनी श्रेष्ठ धारणाओं प्रति त्याग में भाग्य का अनुभव करने वाले सच्चे त्यागी भव

ब्राह्मणों की श्रेष्ठ धारणा है सम्पूर्ण पवित्रता। इसी धारणा के लिए गायन है "प्राण जाएं पर धर्म न जाये।'' किसी भी प्रकार की परिस्थिति में अपनी इस धारणा के प्रति कुछ भी त्याग करना पड़े, सहन करना पड़े, सामना करना पड़े, साहस रखना पड़े तो खुशी-खुशी से करो - इसमें त्याग को त्याग न समझ भाग्य का अनुभव करो तब कहेंगे सच्चे त्यागी। ऐसी धारणा वाले ही सच्चे ब्राह्मण कहे जाते हैं।

स्लोगन:-

सर्वशक्तियों को अपने ऑर्डर में रखने वाले ही मास्टर सर्वशक्तिमान हैं।