22.07.2020

"मीठे बच्चे - तुम बहुत रॉयल स्टूडेन्ट हो, तुम्हें बाप, टीचर और सतगुरू की याद में रहना है, अलौकिक खिदमत (सेवा) करनी है''

प्रश्नः-

जो अपने आपको बेहद का पार्टधारी समझकर चलते हैं, उनकी निशानी सुनाओ?

उत्तर:-

उनकी बुद्धि में कोई भी सूक्ष्म वा स्थूल देहधारी की याद नहीं होगी। वह एक बाप को और शान्तिधाम घर को याद करते रहेंगे क्योंकि बलिहारी एक की है। जैसे बाप सारी दुनिया की खिदमत करते हैं, पतितों को पावन बनाते हैं। ऐसे बच्चे भी बाप समान खिदमतगार बन जाते हैं।

वरदान:-

सदा बेहद की स्थिति में स्थित रहने वाले बन्धनमुक्त, जीवनमुक्त भव

देह-अभिमान हद की स्थिति है और देही अभिमानी बनना - यह है बेहद की स्थिति। देह में आने से अनेक कर्म के बन्धनों में, हद में आना पड़ता है लेकिन जब देही बन जाते हो तो ये सब बन्धन खत्म हो जाते हैं। जैसे कहा जाता बन्धनमुक्त ही जीवनमुक्त है, ऐसे जो बेहद की स्थिति में स्थित रहते हैं वह दुनिया के वायुमण्डल, वायब्रेशन, तमोगुणी वृत्तियां, माया के वार इन सबसे मुक्त हो जाते हैं। इसको ही कहा जाता है जीवनमुक्त स्थिति, जिसका अनुभव संगमयुग पर ही करना है।

स्लोगन:-

निश्चयबुद्धि की निशानी - निश्चित विजयी और निश्चितं, उनके पास व्यर्थ आ नहीं सकता।