25-10-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 19.02.2012 "बापदादा"    मधुबन


घर का गेट खोलने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा देह-अभिमान के मैं का त्याग करो, बर्थ डे पर दृढ़ता द्वारा कहना और करना एक कर सफलतामूर्त बनो


वरदान:-
अपने एकाग्र स्वरूप द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव करने वाले अन्तर्मुखी भव

एकाग्रता का आधार अन्तर्मुखता है। जो अन्तर्मुखी हैं वे अन्दर ही अन्दर सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव करते हैं। आत्माओं का आह्वान करना, आत्माओं से रूहरिहान करना, आत्माओं के संस्कार स्वभाव को परिवर्तन करना, बाप से कनेक्शन जुड़वाना - ऐसे रूहों की दुनिया में रूहानी सेवा करने के लिए एकाग्रता की शक्ति को बढ़ाओ, इससे सर्व प्रकार के विघ्न स्वत: समाप्त हो जायेंगे।

स्लोगन:-
सर्व प्राप्तियों को स्वयं में धारण कर विश्व की स्टेज पर प्रत्यक्ष होना ही प्रत्यक्षता का आधार है।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

कोई रोज़ आपकी ग्लानि करे, वो सदा अकल्याण करे, आप उससे किनारा करने के बजाए उसका भी कल्याण करते रहो, यही आप ज्ञानी तू आत्मा का कर्तव्य है। जैसे बाप की महिमा में विशेष रहमदिल का गुण गाया जाता है। चाहे देश में, चाहे विदेश में बाप के आगे जायेंगे तो रहमदिल, मर्सीफुल कहेंगे। तो आप सभी भी मास्टर रहमदिल हो। ऐसे रहमदिल बन सब पर उपकार करो।