27-11-2019-Hin

“मीठे बच्चे - बाबा की दृष्टि हद और बेहद से भी पार जाती है, तुम्हें भी हद (सतयुग), बेहद (कलियुग) से पार जाना है''

Q- ऊंच ते ऊंच ज्ञान रत्नों की धारणा किन बच्चों को अच्छी होती है?

A- जिनका बुद्धियोग एक बाप के साथ है, पवित्र बने हैं, उन्हें इन रत्नों की धारणा अच्छी होगी। इस ज्ञान के लिए शुद्ध बर्तन चाहिए। उल्टे-सुल्टे संकल्प भी बन्द हो जाने चाहिए। बाप के साथ योग लगाते-लगाते बर्तन सोना बने तब रत्न ठहर सकें।

D- 1) बुद्धि में ज्ञान रत्नों को धारण कर दान करना है। हद बेहद से पार ऐसी स्थिति में रहना है जो कभी भी उल्टा-सुल्टा संकल्प वा विकल्प न आये। हम आत्मा भाई-भाई हैं, यही स्मृति रहे।-----2) माया के तूफानों से बचने के लिए मुख में बाप की याद का मुहलरा डाल लेना है। सब कुछ सहन करना है। छुईमुई नहीं बनना है। माया से हार नहीं खानी है।

V- सर्व सत्ताओं को सहयोगी बनाए प्रत्यक्षता का पर्दा खोलने वाले सच्चे सेवाधारी भव-----प्रत्यक्षता का पर्दा तब खुलेगा जब सब सत्ता वाले मिलकर कहेंगे कि श्रेष्ठ सत्ता, ईश्वरीय सत्ता, आध्यात्मिक सत्ता है तो यही एक परमात्म सत्ता है। सभी एक स्टेज पर इकट्ठे हो ऐसा स्नेह मिलन करें। इसके लिए सबको स्नेह के सूत्र में बांध समीप लाओ, सहयोगी बनाओ। यह स्नेह ही चुम्बक बनेगा जो सब एक साथ संगठन रूप में बाप की स्टेज पर पहुंचेंगे। तो अब अन्तिम प्रत्यक्षता के हीरो पार्ट में निमित्त बनने की सेवा करो तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी।

S- सेवा द्वारा सर्व की दुआयें प्राप्त करना - यह आगे बढ़ने की लिफ्ट है।