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 01 / 04 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *सबसे बुधी की प्रीत तोड़ एक बाप से जोड़ी ?*

 

➢➢ *अवस्था बहुत खुशमिजाज़ बनायी ?*

 

➢➢ *एक बाप की स्मृति से सच्चे सुहाग का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *अंतर्मुखी बन फिर बाह्यमुखता में आये ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अभ्यास की प्रयोगशाला में बैठ, योग का प्रयोग करो तो एक बाप का सहारा और माया के अनेक प्रकार के विघ्नों का किनारा अनुभव करेंगे। *अभी ज्ञान के सागर, गुणों के सागर, शक्तियों के सागर में ऊपर-ऊपर की लहरों में लहराते हो इसलिए अल्पकाल की रिफ्रेशमेंट अनुभव करते हो। लेकिन अब सागर के तले में जाओ तो अनेक प्रकार के विचित्र अनुभव कर रत्न प्राप्त करेंगे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं विघ्न-विनाशक अचल-अड़ोल आत्मा हूँ"*

 

  सदा अपने को अचल अडोल आत्मायें अनुभव करते हो? किसी भी प्रकार की हलचल अचल अडोल स्थिति में विघ्न नहीं डाले। ऐसी विघ्न-विनाशक अचल अडोल आत्मायें बने हो। विघ्न-विनाशक आत्मायें हर विघ्न को ऐसे पार करती जैसे विघ्न नहीं - एक खेल है। तो खेल करने में सदा मजा आता है ना। कोई परिस्थिति को पार करना और खेल करना अन्तर होगा ना। *अगर विघ्न-विनाशक आत्मायें हैं तो परिस्थिति खेल अनुभव होती है। पहाड़ राई के समान अनुभव होता है। ऐसे विघ्न-विनाशक हो, घबराने वाले तो नहीं।*

 

  नालेजफुल आत्मायें पहले से ही जानती हैं कि यह सब तो आना ही है, होना ही है। जब पहले से पता होता है तो कोई बात-बड़ी बात नहीं लगती। अचानक कुछ होता है तो छोटी बात भी बडी लगती। पहले से पता होता तो बडी बात भी छोटी लगती। *आप सब नालेजफुल हो ना। वैसे तो नालेजफुल हो लेकिन जब परिस्थितियों का समय होता है उस समय नालेजफुल की स्थिति भूले नहीं, अनेक बार किया हुआ अब सिर्फ रिपीट कर रहे हो। जब नथिंग न्यु है तो सब सहज है।*

 

  आप सब किले की पक्की ईटें हो। एक-एक ईट का बहुत महत्व है। एक भी ईट हिलती तो सारी दिवार को हिला देती। *तो आप ईट अचल हो, कोई कितना भी हिलाने की कोशिश करे लेकिन हिलाने वाला हिल जाए आप न हिलें।  ऐसी अचल आत्माओंको, विघ्न विनाशक आत्माओंको बापदादा रोज मुबारक देते हैं।* ऐसे बच्चे ही बाप की मुबारक के अधिकारी हैं। ऐसे अचल अडोल बच्चों को बाप और सारा परिवार देखकर हर्षित होता है।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अपरोक्ष रीति से वतन का अनुभव बताया। अपरोक्ष रूप से कितना समय वतन में साथ रहते हो? जैसे इस वक्त जिसके साथ स्नेह होता है, वह कहां विदेश में भी है तो उनका मन ज्यादा उस तरफ रहता है। जिस देश में वह होता है उस देश का वासी अपने को समझते हैं। *वैसे ही तुमको अब सूक्ष्मवतनवासी बनना है*।

  

✧  सूक्ष्मवतन को स्थूलवतन में इमर्ज करते हो वा खुद को सूक्ष्मवतन में साथ समझते हो? क्या अनुभव है? *सूक्ष्मवतनवासी बाप को यहाँ इमर्ज करते हो वा अपने को भी सूक्ष्मवतनवासी बनाकर साथ रहते हो*? बापदादा तो यही समझते हैं कि स्थूलवतन में रहते भी सूक्ष्मवतनवासी बन जाते, यहाँ भी जो बुलाते हो यह भी सूक्ष्मवतन के वातावरण में ही सूक्ष्म से सर्वीस ले सकते हो। अव्यक्त स्थिती में स्थित होकर मदद ले सकते हो। व्यक्त रूप में अव्यक्त मदद मिल सकती है।

     

✧  *अभी ज्यादा समय अपने को फरिश्ते ही समझो*। फरिश्तों की दुनिया में रहने से बहुत ही हल्कापन अनुभव होगा जैसे कि सूक्ष्म वतन को ही स्थूलवतन में बसा दिया है। स्थूल और सूक्ष्म में अन्तर नहीं रहेगा। तब सम्पूर्ण स्थिती में भी अन्तर नहीं रहेगा। यह व्यक्त देश जैसे अव्यक्त देश बन जायेगा। सम्पूर्णता के समीप आ जायेगे।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *ऐसे समझें अन्त तक पहले पाठ के अभ्यासी रहेंगे?* अन्त तक अभ्यासी हो रहेंगे व स्वरूप भी बनेंगे? *अन्त के कितना समय पहले ये अभ्यास समाप्त होगा और स्वरूप बन जायेंगे? जब तक शरीर छोड़ेंगे तब तक अभ्यासी रहेंगे?*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ईश्वरीय सैलवेशन आर्मी बन सबको सदगति देना"*

 

_ ➳  मीठे मधुबन के शांति स्तम्भ की शांत तरंगो में एकांत में बेठ... मीठे बाबा के प्यार में मगन, मै आत्मा अपने ज्ञान धन को निहार रही हूँ, और सोच रही हूँ... कितने अथाह खजानो से मीठे बाबा ने मुझे भर कर धनवान् बना दया है... *इतनी अमीरी से सजाकर भगवान ने जनमो की तपस्या का फल दे दिया है.*. और सामने बाबा कब से खड़े मेरे मन भावो को पढ़ते पढ़ते मुस्कराते जा रहे है...

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा में महान भाग्य की अनुभूतियों को जगाते हुए बोले :-*  " मीठे प्यारे फूल बच्चे... ईश्वर पिता द्वारा पसन्द किये गए, भाग्यवान फूल हो... और रूहानी सेना बनकर मुस्करा रहे हो... *ईश्वरीय याद द्वारा असीम शक्तियो स्वयं में भरकर विश्व रक्षक हो गए हो.*.. सर्व आत्माओ को आप समान सुखी बना रहे हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा के ज्ञान रत्नों को पाकर ख़ुशी से झूम रही हूँ और कह रही हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा... *आपसे पायी जिन खुशियो में मै आत्मा मुस्करा रही हूँ..*. उन्ही खुशियो को हर दिल पर दिल खोल कर लुटा रही हूँ... सबके जीवन को विकारो से मुक्त कराकर... सच्चे सुख शांति को आपसे दिलवा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा अपने सारे खजाने मुझ पर लुटाते हुए बोले :-* "मीठे लाडले बच्चे... ईश्वरीय बाँहों में रूहानी सेना बनकर पूरे विश्व का कल्याण करने वाले हो... *अपने इस भाग्य को बार बार स्म्रति में रखकर शुद्ध नशे से भर जाओ..*. श्रीमत पर चलकर रावण राज्य का सफाया कर... सुखो भरा रामराज्य लाने वाले महान भाग्यवान हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने प्यारे बाबा और अपने महान भाग्य की स्म्रति में खोयी हुई कह रही हूँ :-* "प्राणप्रिय बाबा मेरे... देह समझ कर सदा असुरक्षित थी.. और *आत्मिक स्वरूप में कितनी निश्चिन्त और निर्भय बन गयी हूँ..*. माया के हर वार से सावधान होकर... सबकी रक्षा करने वाली रूहानी सेना बन मुस्करा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा मुझ आत्मा को रूहानी नशे से भरते हुए ज्ञान वर्षा में भिगो रहे है और कह रहे है :-* "प्यारे सिकीलधे बच्चे मेरे... रूहानी सेना बनकर विश्व धरा को सुखो की बगिया बनाओ... सबको विकारो रुपी रावण से मुक्त कराकर देवताई राज्य भाग्य दिलवाओ... *ईश्वरीय खजानो के मालिक बनाकर, सबके दामन में असीम खुशियो को सजाओ..*."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने भाग्य की खूबसूरती पर मोहित होकर मीठे बाबा से कहती हूँ :-* "प्यारे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा *आपसे अथाह शक्तियाँ पाकर पूरे विश्व में सुख शांति की मीठी बयार ला रही हूँ..*. ज्ञान रत्नों को अपनी झोली से छलका कर.. सबको ज्ञान सागर पिता का दीवाना बना रही हूँ..." मीठे बाबा से प्यार भरी रुहरिहानं कर मै आत्मा स्थूल जग में आ गयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सच्चा - सच्चा रूहानी ख़िदमतगार बनना है*"

 

_ ➳  5 विकारों रूपी माया रावण की जेल में कैद सभी आत्मा रूपी सीताओं को इस जेल से छुड़ाये, उन्हें सेल्वेज करने के लिए स्वयं जगत के नियन्ता प्रभु राम अर्थात *परम पिता परमात्मा शिव बाबा ने आकर जो ईश्वरीय सेल्वेशन आर्मी बनाई है, उस ईश्वरीय सेल्वेशन आर्मी का प्रमुख सैनिक और अपने प्रभु राम का सच्चा - सच्चा खुदाई खिदमतगार बन सभी आत्मा रूपी सीताओं को रावण की कैद से छुड़ाना और सबको माया से लिबरेट करना हर ब्राह्मण बच्चे का मुख्य कर्तव्य है*।

 

_ ➳  इस बात को स्मृति में लाकर अपने लाइट के फ़रिश्ता स्वरूप को धारण कर, सच्चा - सच्चा खुदाई खिदमतगार बन सबको माया से लिबरेट करने के, अपने खुदा बाप के फरमान का पालन करने के लिए मैं उड़ चलता हूँ ऊपर की ओर। *सारे विश्व मे भ्रमण करते हुए मैं देख रहा हूँ विश्व की सर्व आत्माओं को जो विकारों की अग्नि में जल रही हैं। माया रावण के चंगुल से छूटने का भरसक प्रयास कर रही हैं किन्तु सामर्थ्य ना होने के कारण उसके आकर्षक जाल में और ही फँस कर दुर्गति को पाती जा रही हैं*।

 

_ ➳  अपने इन सभी आत्मा भाइयों को माया से लिबरेट करने के लिये अब मैं अपने प्यारे बापदादा का आह्वान करती हूँ। *बापदादा के साथ कम्बाइंड हो कर, विश्व ग्लोब पर बैठ, बापदादा से सर्वशक्तियाँ ले कर अब मैं विश्व की सर्व आत्माओं में प्रवाहित कर रही हूँ*। 5 विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की अग्नि में जल रही आत्माओं पर ये शक्तियां शीतल फुहारों के रूप में बरस कर विकारों की अग्नि को शांत कर, उन्हें शीतलता का अनुभव करवा रही है। *शीतलता की यह अनुभूति उन्हें सुकून दे रही हैं। सर्व आत्माओं को परमात्म सन्देश और परमात्म परिचय मिल रहा है*।

 

_ ➳  सच्चा सच्चा खुदाई ख़िदमतगार बन विश्व की सर्व आत्माओं को परमात्म परिचय दे कर, उन्हें माया से लिबरेट होने का सहज रास्ता बता कर, अब मैं स्वयं को परमात्म बल से भरपूर करने के लिए अपने निराकारी स्वरूप में स्थित होकर अपनी निराकारी दुनिया की ओर चल पड़ती हूँ। *विश्व ग्लोब से ऊपर, सूक्ष्म वतन को पार कर मैं पहुंच जाती हूँ निराकारी आत्माओं की दुनिया परमधाम में। परमधाम में अपने मीठे प्यारे शिव बाबा के सानिध्य में बैठ अब मैं स्वयं को उनकी सर्वशक्तियों से भरपूर कर रही हूँ*।

 

_ ➳  ऐसा लग रहा है जैसे बाबा अपनी सारी शक्तियाँ मुझ आत्मा में भरकर अपनी समस्त पावर मेरे अंदर समाहित कर रहे हैं ताकि *संपूर्ण ऊर्जावान बन मैं विश्व की सर्व आत्माओं को, जो 5 विकारों रूपी माया रावण की जेल में फंस कर दुखी हो रही हैं और उसकी कैद से छूटने के लिए छटपटा रही हैं, उन सबको माया से लिबरेट कर, परमात्म शक्तियों से उन्हें बलशाली बना कर विकारों से मुक्त होने का बल उनमें भर सकूँ*।

 

_ ➳  परमात्म शक्तियों से स्वयं को भरपूर कर, सम्पूर्ण ऊर्जावान बन अब मैं परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और साकारी दुनिया मे आकर अपने साकारी तन में प्रवेश कर, अपने ब्राह्मण स्वरूप को धारण कर लेती हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरुप में स्थित होकर सच्चा - सच्चा खुदाई ख़िदमतगार बन, अपने शुद्ध और श्रेष्ठ संकल्पों की शक्ति से, सबको माया से लिबरेट करने की ऑन गॉडली सर्विस पर अब मैं सदैव तत्पर रहती हूँ*। सेल्वेशन आर्मी बन सबको विकारों की दुबन से निकाल उन्हें सेल्वेज करने का रूहानी धन्धा अब मैं हर समय कर रही हूँ।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं एक बाप की स्मृति से सच्चे सुहाग का अनुभव करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं भाग्यवान आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव अंतर्मुखी बन फिर बाह्यमुखता में आती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदैव अपनी स्थिति को श्रेष्ठ बनाती हूँ  ।*

   *मैं श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  आजकल के लोग एक तरफ स्व प्राप्ति के लिए इच्छुक भी हैं, लेकिन हिम्मतहीन हैं। हिम्मत नहीं है। सुनने चाहते भी हैं, लेकिन बनने की हिम्मत नहीं है। ऐसी आत्माओं को परिवर्तन करने के लिए पहले तो आत्माओं को हिम्मत के पँख लगाओ। हिम्मत के पँख के आधार है अनुभव। अनुभव कराओ। *अनुभव ऐसी चीज है, जरा सी अंचली मिलने के बाद अनुभव किया तो अनुभव के पँख कहो, या अनुभव के पाँव कहो उससे हिम्मत में आगे बढ़ सकेंगे।* इसके लिए विशेष इस वर्ष निरन्तर अखण्ड महादानी बनना पड़े, अखण्ड। मन्सा द्वारा शक्ति स्वरूप बनाओ। महादानी बन मन्सा द्वारा, वायब्रेशन द्वारा निरन्तर शक्तियों का अनुभव कराओ। वाचा द्वारा ज्ञान दान दो, कर्म द्वारा गुणों का दान दो। *सारा दिन चाहे मन्सा, चाहे वाचा, चाहे कर्म तीनों द्वारा अखण्ड महादानी बनो। समय प्रमाण अभी दानी नहीं, कभी-कभी दान किया, नहीं, अखण्ड दानी क्योंकि आत्माओं को आवश्यकता है।*

 

✺   *ड्रिल :-  "आत्माओं को हिम्मत के पँख लगाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा कितनी सौभाग्यशाली हूँ जो स्वयं भगवान ने मुझे ढूंढ लिया और सृष्टि के आदि मध्य अंत का ज्ञान दे मुझे भटकने से बचा लिया... बाबा के दिये ज्ञान को बुद्धि में बिठा मैं आत्मा अपने जीवन को परिवर्तित कर रही हूँ... बाबा से योग लगा कर उनकी सर्व शक्तियों को स्वयं में भरकर अपने विकारों को दूर कर रही हूँ... *एक ओर जहां विश्व की अन्य आत्मायें ईश्वर को पाने के लिए भटक रही हैं और व्रत तप उपवास तीर्थ यात्रायें कर रही हैं वहीं मैं आत्मा हर रोज़ आपसे मिलन मना रही हूँ...* मेरे बाबा से मिले प्यार को और उनके परिचय को अब मुझे सभी आत्माओ को देना है... मैं आत्मा अपने प्राण प्यारे बाबा को याद कर रही हूँ और देह के बंधन से मुक्त होकर ऊपर की ओर उड़ जाती हूँ... फरिश्ता बन कर सूक्ष्म वतन में प्रवेश करती हूँ...

 

 _ ➳  सूक्ष्म वतन में ब्रह्मा बाबा के सम्मुख आकर ठहरती हूँ... *बाबा से निकलते सफेद प्रकाश से सारा सूक्ष्म वतन चांदनी सा जगमगा रहा है...* बाबा की ये शीतल किरणें मुझ पर पड़ने से मैं भी चमक उठी हूँ... मैं बड़े से प्यार से बाबा से दृष्टि ले रही हूँ और देखती हूँ कि ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में शिव बाबा प्रवेश करते हैं... *शिवबाबा के प्रवेश करने से ब्रह्मा बाबा दिव्य तेज से आलोकित होने लगते हैं...* और बापदादा की ये अत्यन्त ही पॉवरफुल किरणें मुझ फरिश्ते में भी समाने लगती हैं... मैं बापदादा के प्रेम में डूबती जा रही हूँ और उनके स्नेह को स्वयं में समाकर इस सृष्टि का चक्र लगाने नीचे की ओर आ रही हूँ...

 

 _ ➳  नीचे की ओर उतरते हुए मैं विश्व के ग्लोब पर आकर बैठ गई हूँ... और विश्व की समस्त आत्माओ को देख रही हूँ... मैं देखती हूँ कि कई आत्मायें जिन्होंने बाबा का ज्ञान भी सुना है और स्वयं को परिवर्तन भी करना चाहती हैं परंतु आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाती... स्वप्राप्ति की इच्छा रखती हैं पर हिम्मत की कमी से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं... *ऐसी सभी आत्माओ को मैं शक्तिशाली वाइब्रेशन दे रही हूँ जिससे ये आत्मायें हिम्मतवान बन अपनी कमी कमज़ोरियों को दूर कर रही हैं और स्वयं को परिवर्तित कर रही हैं...*

 

 _ ➳  अब मैं आत्मा साकार लोक में वापस आती हूँ और अपनी देह में फरिश्ते रूप से प्रवेश कर रही हूं... मैं आत्मा स्वयं को बेहद शक्तिशाली महसूस कर रही हूँ... मैं आत्मा अन्य आत्माओ के सम्पर्क में आती हूँ तो *मेरे चेहरे की मुस्कान और मीठे स्वभाव से आत्मायें महसूस करती हैं कि इन्हें ज़रूर कुछ मिल गया है जो ये इतने परिवर्तित हो गए हैं...* और मेरे साथ उनका ये अनुभव उन्हें भी परिवर्तित होने में मदद कर रहा है... मुझ आत्मा को देख कर उनमे भी हिम्मत आती है कि वे भी स्व को परिवर्तन कर सकती हैं... *मैं अपने अनुभव से उन्हें भी उमंग उत्साह के पंख देकर उनको आगे बढ़ाने के निमित बन रही हूँ...*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने सर्व ओर की आत्माओ को निरंतर पॉवरफुल वाइब्रेशन दे रही हूँ... सभी आत्मायें इन वाइब्रेशन को कैच करती हैं और स्वयं में शक्तियों को अनुभव कर रही हैं... *मैं आत्मा कभी उनको मन्सा द्वारा शक्तियों का अनुभव करा रही हूँ तो कभी वाणी से उन्हें ज्ञान देकर उनके मन को शक्तिशाली बना रही हूँ...* कभी कर्म द्वारा उन्हें गुणों का दान दे रही हूँ... अपने प्यारे बाबा की संतान मैं आत्मा मन्सा वाचा कर्मणा गुणों और शक्तियों का दान अपने सभी भाई बहनों को देकर उन्हें भी हिम्मत के पंख दे आगे बढ़ाती जा रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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