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 01 / 09 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बीमारी में भी एक बाप की याद रही ?*

 

➢➢ *बुधीयोग अपने स्वीट साइलेंस होम में लगाया ?*

 

➢➢ *सदा कंबाइंड स्वरुप की स्मृति द्वारा मुश्किल कार्य को सहज किया ?*

 

➢➢ *कारण का निवारण कर संतुष्ट रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कोई भी हिसाब-चाहे इस जन्म का, चाहे पिछले जन्म का, लग्न की अग्नि-स्वरूप स्थिति के बिना भस्म नहीं होता।* सदा अग्नि-स्वरूप स्थिति अर्थात् शक्तिशाली याद की स्थिति, बीजरूप लाइट हाउस, माइट हाउस स्थिति इस पर अब विशेष अटेंशन दो तब रहे हुए सब हिसाब-किताब पूरे होंगे।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं कमल पुष्प समान न्यारा और बाप का प्यारा हूँ"*

 

✧  सदा अपने को कमल पुष्प समान न्यारे और बाप के प्यारे अनुभव करते हो? *क्योंकि जितना न्यारापन होगा उतना ही बाप का प्यारा होगा। चाहे कैसी भी परिस्थितियां हो, समस्यायें हों लेकिन समस्याओंके अधीन नहीं, अधिकारी बन समस्याओ को ऐसे पार करें, जैसे खेल-खेल में पार कर रहे हैं। खेल में सदा खुशी रहती है।* चाहे कैसा भी खेल हो, लेकिन खेल है तो कैसा भी पार्ट बजाते हुए अन्दर खुशी में रहते हो? चाहे बाहर से रोने का भी पार्ट हो लेकिन अन्दर हो कि यह सब खेल है। तो ऐसे ही जो भी बातें सामने आती हैं-ये बेहद का खेल है, जिसको कहते हो ड्रामा और ड्रामा के आप सभी हीरो एक्टर हो, साधारण एक्टर तो नहीं हो ना।

 

✧  तो हीरो एक्टर अर्थात् एक्यूरेट पार्ट बजाने वाले। तब तो उसको हीरो कहा जाता है। तो सदा ये बेहद का खेल है-ऐसे अनुभव करते हो? कि कभी-कभी खेल भूल जाता है और समस्या, समस्या लगती है। कैसी भी कड़ी परिस्थिति हो लेकिन खेल समझने से कड़ी समस्या भी हल्की बन जाती है। *तो जो न्यारा और प्यारा होगा वो सदा हल्का अनुभव करने के कारण डबल लाइट होगा। कोई बोझ नहीं। क्योंकि बाप का बनना अर्थात् सब बोझ बाप को दे दिया।* तो सब बोझ दे दिया है या थोड़ा-थोड़ा अपने पास रख लिया है? थोड़ा बोझ उठाना अच्छा लगता है। सब कुछ बाप के हवाले कर दिया या थोड़ा-थोड़ा जेबखर्च रख लिया है? छोटे बच्चे जेबखर्च नहीं रखते हैं। रोज उनको जेब खर्च देते हैं, खाओ, पीयो, मौज करो। कोई भी चीज रखी होती है तो डाकू आता है।

 

  जब पता होता है कि ये मालदार है, कुछ मिलेगा तब डाका लगाते हैं। यदि पता हो कि कुछ नहीं मिलेगा तो डाका लगाकर क्या करेंगे। अगर थोड़ा भी रखते हैं तो डाकू माया जरूर आती है और वह अपनी चीज तो ले ही जाती है लेकिन जो बाप द्वारा शक्तियां मिली हैं वो भी साथ में ले जाती है। इसीलिये कुछ भी रखना नहीं है। सब दे दिया। *डबल लाइट का अर्थ ही है सब-कुछ बाप-हवाले करना। तन भी मेरा नहीं। ये तन तो सेवा अर्थ बाप ने दिया है। आप सबने तो वायदा कर लिया ना कि तन भी तेरा, मन भी तेरा, धन भी तेरा।* ये वायदा किया है कि तन तेरा है बाकी आपका है? जब तन ही नहीं तो बाकी क्या। तो सदा कमल पुष्प का दृष्टान्त स्मृति में रहे कि मैं कमल पुष्प समान न्यारी और प्यारी हूँ।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अपने ही दर्पण में अपने तकदीर की सूरत को देखो। यह ज्ञान अर्थात नॉलेज दर्पण है। तो सबके पास दर्पण है ना तो अपनी सूरत देख सकते हो ना। *अभी बहुत समय के अधिकारी बनने का अभ्यास करो।* ऐसे नहीं अंत में तो बन ही जायेंगे। *अगर अंत में बनेंगे तो अंत का एक जन्म थोडा-सा राज्य कर लेंगे।*

 

✧  लेकिन यह भी याद रखना कि अगर बहुत समय का अब से अभ्यास नहीं होगा वा आदि से अभ्यासी नहीं बने हो, आदि से अब तक यह विशेष कार्यकर्ता आपको अपने अधिकार में चलाते हैं वा डगमग स्थिति करते रहते हैं अर्थात धोखा देते रहते हैं, *दु:ख की लहर का अनुभव कराते रहते हैं तो अंत में भी धोखा मिल जायेगा।*

 

✧  धोखा अर्थात दु:ख की लहर जरूर आयेगी। तो अंत में भी पचाताप के दु:ख की लहर आयेगी। इसलिए बापदादा सभी बच्चों को फिर से स्मृति दिलाते हैं कि *राजा बनो* और अपने विशेष सहयोगी कर्मचारी वा *राज्य कारोबारी साथियों को अपने अधिकार से चलाओ।* समझा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ जैसे ब्रह्मा बाप ने साकार जीवन में कर्मातीत होने के पहले न्यारे और प्यारे रहने के अभ्यास का प्रत्यक्ष अनुभव कराया। जो सभी बच्चे अनुभव सुनाते हो - सुनते हुए न्यारे, कार्य करते हुए न्यारे, बोलते हुए न्यारे रहते थे। सेवा को वा कोई कर्म को छोड़ा नहीं लेकिन न्यारे हो लास्ट दिन भी बच्चों की सेवा समाप्त की। *न्यारापन हर कर्म में सफलता सहज अनुभव कराता है। करके देखो। एक घंटा किसको समझाने की भी मेहनत करके देखो और उसके अंतर में 15 मिनट में सुनते हुए, बोलते हुए न्यारेपन की स्थिति में स्थित होके दूसरी आत्मा को भी न्यारेपन की स्थिति का वायब्रेशन देकर देखो। जो 15 मिनट में सफलता होगी वह एक घंटे में नहीं होगी। यही प्रेक्टिस ब्रह्मा बाप ने करके दिखाई। तो समझा। कया करना है!*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- प्राणेश्वर बाप आया है बच्चों को ज्ञान की मीठी मुरली सुनाकर प्राण बचाने"*

 

_ ➳  झील के किनारे बैठी मैं आत्मा निहार रही हूँ झील में ऊपर से गिरते झरने के पानी को... झर झर करते हुए ये झरना झील को भरपूर कर रहा है... उसकी सुन्दरता को बढ़ा रहा है... प्यारे बाबा ऊपर अपने धाम से नीचे उतरकर मुझ आत्मा को सुन्दर बना रहे हैं, भरपूर कर रहे हैं... *बेहद का बाबा बेहद की सेवा कर नरक को स्वर्ग बना रहे हैं... पुरानी दुनिया को नई बना रहे हैं... मैं आत्मा और ज्यादा सुन्दर बनने मीठे बाबा के पास वतन में पहुँच जाती हूँ...*     

 

   *ब्रह्मा तन में अवतरित होकर राजयोग सिखलाते हुए निराकार प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे बच्चे... *यह भारतभूमि भी किस कदर भाग्यशाली है कि स्वयं भगवान यहाँ ही उतरता है... और आप बच्चे का भाग्य भी कितना खूबसूरत है की भगवान स्वयं सेवा में उपस्थित होकर राज योग सिखाता है...* इस मीठे नशे में भर जाओ...

 

_ ➳  *अपने सत्य स्वरुप को पहचान हीरे जैसी सजकर मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा किस कदर भाग्य शाली हूँ.... *ईश्वर पिता ने आकर मुझे राज योग सिखाकर मेरा जीवन सच्चे सुखो से भर दिया...* मै आत्मा सदा की मुस्करा उठी हूँ...

 

   *सबको पतित से पावन बनाने की सेवा करते हुए निरहंकारी प्यारे बाबा कहते हैं:-* मीठे प्यारे बच्चे... भारत देश ईश्वरीय जन्मभूमि होकर महानता को छू रहा है... *अपने फूल से बच्चों को विकारो की अग्नि में झुलसता देख पिता का कलेजा द्रवित हो यही उतरता है...* बच्चे फिर से वही राजभाग से भर जाय... इस सेवा में जुटता है...

 

_ ➳  *बाबा की मत पर चलकर दैवीय गुणों को धारण कर स्वर्ग में जाने लायक बनते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा आपके मीठे साये में बैठ राजयोग से निखर रही हूँ... वही खूबसूरत आभा वही नूर पाकर दमक रही हूँ...* कितना मीठा भाग्य कि विश्व पिता मेरी सेवा कर रहा है...

 

   *मेरे बाबा इस धरा पर आकर हथेली पर बहिश्त की सौगात लाकर कहते हैं:-* प्यारे बच्चे... आप बच्चों की सेवा में धरती पर आता हूँ... सदा का राजा बना सुख के अथाह खजाने देने आया हूँ... *भारत भूमि पर ही आता हूँ और महान भाग्य जगाता हूँ...* इन मीठे अहसासो में डूब जाओ... और यादो की गहराई में उतर जाओ...

 

_ ➳  *बेहद की सेवा के लिए प्यारे बाबा का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा राजयोगी बन गई हूँ... आपकी खूबसूरत सेवा की मुरीद हो गई हूँ... *इस महान भूमि पर हूँ जिस पर निराकार बाबा आया है... इन सुखद अहसासो में डूब गयी हूँ...*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अपनी ऊंची तकदीर बनाने के लिए पूरा - पूरा निश्चय बुद्धि बनना है*"

 

_ ➳  मेरे कौड़ी तुल्य जीवन को हीरे तुल्य बनाने वाले, सर्व सम्बन्धो का मुझे सुख देकर मेरे जीवन को खुशहाल बनाने वाले मेरे दिलाराम बाबा ने मेरे जीवन मे आकर जो अनगिनत उपकार मुझ पर किये हैं, उनका तो बदला चुकाया भी नही जा सकता। *लेकिन उनके स्नेह का रिटर्न देने के लिए मैं सदा उनकी वफादार फरमानबरदार बनकर रहूँगी। अपने ऐसे सच्चे बाबा के प्रति निश्चय में मैं कभी कमी नही आने दूँगी। चाहे दुनिया कितने भी इल्जाम लगाए लेकिन अपने दिलाराम बाबा का हाथ और साथ मैं कभी नही छोडूंगी*। मन ही मन स्वयं से बातें करते हुए मैं बाबा के प्रति निश्चय में कभी भी ना हिलने की दृढ़ प्रतिज्ञा करती हूँ और अपने प्यारे ब्रह्मा बाबा के बारे में विचार करती हूँ जिन्होंने समाज का विरोध सहन करके भी सम्पूर्ण निश्चय बुद्धि बन परमात्म कर्तव्य को सम्पूर्ण समर्पण भाव से पूरा किया और भगवान के दिल रूपी तख्त पर सदा के लिए विराजमान हो गए।

 

_ ➳  ऐसे कदम - कदम पर फ़ॉलो फादर कर, ब्रह्मा बाप समान सम्पूर्ण निश्चय बुद्धि बन, परमात्म कार्य मे सदा सहयोगी बनने का संकल्प लेकर मैं अपने दिलाराम बाबा की दिल को आराम देने वाली मीठी सी प्यारी सी याद में अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ। *मन को शीतलता देने वाली सागर की मीठी - मीठी लहरों के समान मेरे मीठे बाबा की मीठी - मीठी याद मेरे मन और बुद्धि को भी शान्त और शीतल बना देती है और शरीर को पूरी तरह रिलैक्स कर देती है*। यह रिलैक्सेशन मेरे सारे शरीर से चेतना को धीरे - धीरे समेट कर मेरे सम्पूर्ण ध्यान को दोनों आईब्रोज के बीच भृकुटि के मध्य भाग पर केंद्रित कर देती है।  

 

_ ➳  मैं महसूस कर रही हूँ देह का भान पूरी तरह समाप्त हो गया है और स्वयं को मैं अशरीरी आत्मा देख रही हूँ। केवल एक अति सूक्ष्म चमकता हुआ शाइनिंग स्टार मुझे दिखाई दे रहा है। जिसमे से निकल रही किरणे मन को आनन्दित करती हुई चारों और फैल रही हैं। *देह भान से पूरी तरह मुक्त यह अशरीरी स्थिति मुझे मेरे सातों गुणों और अष्ट शक्तियों से सम्पन्न, ओरिजनल स्वरूप का स्पष्ट अनुभव करवा रही है। अपने स्वधर्म में मैं पूरी तरह स्थित हो कर अपने सत्य स्वरूप का भरपूर आनन्द ले रही हूँ*। दुनियावी आकर्षणों से बोझ से मुक्त स्वयं को मैं बहुत ही हल्का अनुभव कर रही हूँ और हल्की हो कर ऊपर की औऱ उड़ रही हूँ। *पाँच तत्वों से निर्मित इस भौतिक जगत को पार करके, उससे ऊपर सूक्ष्म लोक को भी पार करके मैं पहुँच गई हूँ ब्रह्मलोक में अपने दिलाराम शिव पिता के पास जिनके साथ मेरा जन्म - जन्म का अनादि सम्बन्ध है*।

 

_ ➳  अपनी अनन्त शक्तियों की किरणों रूपी बाहों को फैलाये मेरे मीठे शिव बाबा मेरे सामने खड़े हैं। बिना एक पल भी व्यर्थ गंवाये अपने प्यारे पिता के पास जाकर मैं उनकी किरणों रूपी बाहों में समा जाती हूँ। *पूरे पाँच हजार वर्ष उनसे बिछड़ कर उनसे दूर रहने की सारी पीड़ा को मैं उनकी किरणों रूपी बाहों में समाकर, अतीन्द्रिय सुख की गहन अनुभूति में खोकर, भुला रही हूँ*। प्यार के सागर अपने शिव पिता के प्यार की गहराई में समाकर मैं स्वयं को उनके निस्वार्थ प्यार से भरपूर कर रही हूँ। मेरे शिव पिता का अविनाशी प्यार उनके स्नेह की किरणों के रूप में निरन्तर मुझ पर बरस रहा है। *उनसे आ रही स्नेह की किरणों की मीठी फुहारें मुझे रोमांचित कर रही हैं और मेरे निश्चय को दृढ़ रखने का बल मुझे दे रही हैं*।

 

_ ➳  अपने दिलाराम बाबा की सर्व शक्तियों से स्वयं को भरपूर करके, उनके प्यार के खूबसूरत मीठे मधुर अति सुखद एहसास के साथ अब मैं वापिस देह और देह की दुनिया में लौट रही हूँ। बड़े से बड़ी परिस्थितियां भी अब बाबा के प्रति मेरे निश्चय को डिगा नही पाती क्योंकि मेरे बाबा का प्यार ढाल बन कर मुझमें असीम शक्ति का संचार प्रतिपल करता रहता है। *अपने सर्वशक्तिवान बाबा की सर्वशक्तियों की छत्रछाया को मैं सदा अपने ऊपर महसूस करते हुए, सम्पूर्ण निश्चयबुद्धि बन अब माया के हर पेपर को अपने पिता के सहयोग से सहज ही पार करती जा रही हूँ*। स्वयं पर, बाबा पर और ड्रामा पर सम्पूर्ण निश्चय मुझे व्यर्थ के हर संकल्प विकल्प से मुक्त रखते हुए, मेरी साइलेन्स की शक्ति को बढ़ाकर मेरी स्थिति को एकरस और अचल अडोल बनाता जा रहा है।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं सदा कम्बाइण्ड स्वरूप की स्मृति में रहने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं मुश्किल कार्य को सहज बनाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं डबल लाइट आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा किसी भी कारण का निवारण कर देती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा संतुष्ट रहती और करती हूँ  ।*

   *मैं संतुष्टमणि हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *कई बच्चे कहते हैं हम तो बहुत सेवा करते हैंबहुत मेहनत करते हैं लेकिन प्राप्ति इतनी नहीं होती है। उसका कारण क्या? वरदान सबको एक है६० साल वालों को भी एक तो एक मास वाले को भी एक है। खजाने सभी को एक जैसे हैं। पालना सबको एक जैसी हैदिनचर्यामर्यादा सबके लिए एक जैसी है।* दूसरी-दूसरी तो नहीं है ना! ऐसे तो नहींविदेश की मर्यादायें और हैंइण्डिया की और हैंऐसे तो नहींथोड़ा-थोड़ा फर्क हैनहीं हैतो जब सब एक है फिर किसको सफलता मिलती हैकिसको कम मिलती है - क्यों?कारणबाप मदद कम देता है क्याकिसको ज्यादा देता हो, किसको कम, ऐसे हैनहीं है।

 

 _ ➳  फिर क्यों होता हैमतलब क्या हुआअपनी गलती है। *या तो बाडी-कान्सेस वाला मैं-पन आ जाता हैया कभी-कभी जो साथी हैं उन्हों की सफलता को देख ईर्ष्या भी आ जाती है। उस ईर्ष्या के कारण जो दिल से सेवा करनी चाहियेवो दिमाग से करते हैं लेकिन दिल से नहीं।* और फल मिलता है दिल से सेवा करने का। कई बार बच्चे दिमाग यूज करते हैं लेकिन दिल और दिमाग दोनों मिलाके नहीं करते। दिमाग मिला है उसको कार्य में लगाना अच्छा है लेकिन सिर्फ दिमाग नहीं। जो दिल से करते हैं तो दिल से करने के दिल में बाप की याद भी सदा रहती है। सिर्फ दिमाग से करते हैं तो थोड़ा टाइम दिमाग में याद रहेगा-हाँबाबा ही कराने वाला हैहाँ बाबा ही कराने वाला है लेकिन कुछ समय के बाद फिर वो ही मैं-पन आ जायेगा। *इसलिए दिमाग और दिल दोनों का बैलेन्स रखो।*

 

✺   *ड्रिल :-  "सेवा में दिमाग और दिल दोनों का बैलेन्स रखना"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा चांदनी रात में एकांत में बैठी हुई हूँ... *ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में विराजमान शिव बाबा के पास मैं सफेद प्रकाश का आकारी शरीर धारण किये धीरे-धीरे सूक्ष्मवतन में पहुँचती हूँ...* वहाँ चारों तरफ फूलों से सजावट है... जैसे ही मैं वहां पहुँचती हूँ, बाबा मुझ फ़रिश्ते पर फूलों की बरसात करना शुरू कर देते है...

 

 _ ➳  बाबा की दृष्टि से, मस्तक से निकलता लाल रंग की ठंडी किरणों का फव्वारा मुझ फ़रिश्ते पर पड़ रहा है... मैं किरणों से भीग चुकी हूँ...अनेक जन्मों के विकारों भरे संस्कार जलकर राख बन रहे है... *मैं अब सर्व गुणों का अनुभव कर रही हूँ...* विकार के वशीभूत देहअभिमान, ईर्ष्या, मेरापन सब समाप्त हो रहा है...

 

 _ ➳  बाबा मुझे लाल रंग का तिलक लगा रहे हैं... बाबा मुझे हीरों का बना ताज पहना रहे है... *मैं अब भूल चुकी हूँ कि देहअभिमान क्या होता है, मैं भूल चुकी हूँ ईर्ष्या क्या होती हैं... मैं भूल चुकी हूँ मेरापन क्या होता है...*

 

 _ ➳  अब मैं विकारों के वशीभूत देहअभिमान में नही आती हूँ... *जैसे ही मैं स्थूल या मन्सा सेवा करने लगती हूँ तो बाबा का लगाया हुआ लाल तिलक ही याद आता है... सब बाबा करा रहे हैं... मैं अब निमित्त भाव से हर कर्म कर रही हूँ... केवल सेवा के लिए निमित्त हूँ...* मेरे जो साथी है उनकी सफलता देख मैं खुशी से झूम उठती हूँ... हर कर्म करते मुझे बाबा ही याद आ रहे हैं...

 

_  ➳  *अब मैं दिल और दिमाग दोनों का बैलेंस रखकर देहीअभिमानी का अनुभव कर रही हूँ...* दिल से सेवा करने पर मैं दिलाराम बाप की सबसे स्नेही बच्ची बन चुकी हूँ... सभी आत्माएं मेरे इस अनुभव से बाबा की ओर आकर्षित हो रही है... मैं अब चढ़ती कला का अनुभव कर रही हूँ और सर्व को करा रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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