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 01 / 10 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *याद से बुधी रुपी बर्तन को सोने का बनाया ?*

 

➢➢ *"हम विश्व के मालिक बन रहे हैं" - इसी नशे में रहे ?*

 

➢➢ *अपनी दृष्टि और वृत्ति का परिवर्तन किया ?*

 

➢➢ *सेवा के उमंह उत्साह के साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति भी रही ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *कर्मातीत स्थिति को प्राप्त करने के लिए सदा साक्षी बन कार्य करो।* साक्षी अर्थात् सदा न्यारी और प्यारी स्थिति में रह कर्म करने वाली अलौकिक आत्मा हूँ, अलौकिक अनुभूति करने वाली, अलौकिक जीवन, श्रेष्ठ जीवन वाली आत्मा हूँ-यह नशा रहे। *कर्म करते यही अभ्यास बढ़ाते रहो तो कर्मातीत स्थिति को प्राप्त कर लेंगे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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✺   *"मैं डबल लाइट हूँ"*

 

✧  सदा अपने को डबल लाइट अनुभव करते हो? *जो डबल लाइट रहता है वह सदा उड़ती कला का अनुभव करता है। क्योंकि जो हल्का होता है वह सदा ऊँचा उड़ता है, बोझ वाला नीचे जाता है। तो डबल लाइट आत्मायें अर्थात् सर्व बोझ से न्यारे बन गये।*

 

✧  *बाप का बनने से 63 जन्मों का बोझ समाप्त हो गया। सिर्फ अपने पुराने संकल्प वा व्यर्थ संकल्प का बोझ न हो। क्योंकि कोई भी बोझ होगा तो ऊँची स्थिति में उड़ने नहीं देगा। तो डबल लाइट अर्थात् आत्मिक स्वरूप में स्थित होने से हल्का-पन स्वत: हो जाता है। ऐसे डबल लाइट को ही 'फरिश्ता' कहा जाता है।*

 

✧  फरिश्ता कभी किसी भी बन्धन में नहीं बँधता। तो कोई भी बँधन तो नहीं है! मन का भी बन्धन नहीं। जब बाप से सर्वशक्तियाँ मिल गई तो सर्व शक्तियों से निर्बन्धन बनना सहज है। *फरिश्ता कभी भी इस पुरानी दुनिया के, पुरानी देह के आकर्षण में नहीं आता। क्योंकि है ही डबल लाइट। तो सदा ऊँची स्थिति में रहने वाले। उड़ती कला में जाने वाले 'फरिश्ते' हैं, यही स्मृति अपने लिए वरदान समझ, समर्थ बनते रहना।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *मास्टर सर्वशक्तिवान को कोई रोक नहीं सकता।* जहाँ सर्व शक्तियाँ हैं वहाँ कौन रोकेगा! कोई भी शक्ति की कमी होती है तो समय पर धोखा मिल सकता है।

 

✧  मानो सहनशक्ति आप में हैं लेकिन निर्णय करने की शक्ति कमजोर है, तो जब ऐसी कोई परिस्थिति आयेगी जिसमें निर्णय करना हो, उस समय नुकसान हो जायेगा, होती एक ही घडी निर्णय करने की है - हाँ या ना, लेकिन उसका परिणाम कितना बडा होता है तो *सब शक्तियाँ अपने पास चेक करो, ऐस नहीं ठीक है, चल रहे हैं, योग तो लगा रहे हैं।*

 

✧  *लेकिन योग से जो प्राप्तियाँ हैं - वह सब हैं?* या थोडे में खुश हो गये कि बाप तो अपना हो गया। बाप तो अपना है लेकिन प्रापर्टी (वसा) भी अपनी है ना या सिर्फ बाप को पा लिया - ठीक है? वर्से के मालिक बनना है ना?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *तो साक्षीपन का तख्त छोड़ो नहीं। जो अलग-अलग पुरुषार्थ करते हो उसमें थक जाते हो। आज मन्सा का किया, कल वाचा का किया, सम्बन्ध-सम्पर्क का किया तो थक जाते हो। एक ही पुरुषार्थ करो कि साक्षी और खुशनुम: तख्तनशीन रहना है। यह तख्त कभी नहीं छोड़ना है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ब्राहमण से देवता बनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मधुबन जाने के लिए ट्रेन में बैठकर खिड़की से प्रकृति के सौंदर्य को निहारती हुई बाबा को याद कर रही हूँ...* डग-मगाती, झिल-मिलाती, सीटी बजाती, ठंडी हवाओं को बिखेरती ट्रेन... पेड़-पौधों, पहाड़ों, जंगलों, मैदानों को पीछे छोडती हुई अपने गंतव्य की ओर जा रही है... बाबा का आह्वान करते ही प्यारे बाबा मेरे बाजू में आकर बैठ जाते हैं... और मीठी रूह-रिहान करते हैं...

 

  *मेरे प्यारे बाबा मनुष्य से देवता बनने की रूहानी यात्रा का महत्व समझाते हुए कहते हैं:-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... जरा स्वयं को पहचानो... क्या से क्या बन रहे हो इस नशे को रग रग में समाओ... ईश्वरीय पसन्द हो गोद में खिले हुए फूल हो... *ब्राह्मण से सीधे देवता बन सजोगे... इतना प्यारा निराला भाग्य है...* तो अब विकारो की गन्दगी से परे हो जाओ... और देवता बनने के नशे से भर जाओ..."

 

_ ➳  *पटरियों पर झूमती ट्रेन जैसे, मैं आत्मा बाबा के प्यार की गोदी में झूमती हुई कहती हूँ:-* "हाँ मेरे *मीठे प्यारे बाबा मै आत्मा अपनी ऊँची जाति के नशे में भरकर सारे दुर्गुणों और विकारो से स्वयं को मुक्त कराती जा रही हूँ...* मीठे बाबा का प्यार पाकर विकारो से निकल सम्पूर्ण पवित्रता को अपना रही हूँ..."

 

  *मीठे बाबा अपनी नूरानी सुगंध मुझमें भरते हुए कहते हैं:-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... अपने सुंदर स्वमान से भर उठो... विश्व पिता की नजरो में समाये नूर हो इस मीठे अहसास में डूब जाओ... और अब जो खुशबु से सुवासित फूल बन रहे हो तो सारे विकारी काँटों से न्यारे हो जाओ... *ईश्वरीय प्यार की कस्तूरी में इस कदर खो जाओ कि सिवाय याद के और कुछ याद ही न रहे..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मनुष्य से देवता बनने के अपने लक्ष्य पर आगे बढ़ती हुई कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा मीठे बाबा की यादो में कितनी मीठी प्यारी और खुबसूरत होती जा रही हूँ... *सुंदर देवता बन सुखो से भरे स्वर्ग की अधिकारी बन रही हूँ...* विकारो की गन्दगी से अछूती होकर निर्मल पवित्र हो रही हूँ..."

 

  *मधुबन की इस यात्रा में मेरे बाबा अपनी मधुर मुस्कान से मधु पिलाते हुए कहते हैं:-* "प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *मनुष्य से देवता बनने वाले अति अति भाग्यशाली आप बच्चे ही हो...* तो इस मीठे नशे में डूब जाओ... और दिव्य गुण और शक्तियो की धारणा कर सुंदर सजीले बन जाओ... अब विकारो के मटमैलेपन से मुक्त होकर... अपनी सच्ची सुनहरी रंगत को स्मृतियों में भर लो..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा बाबा के हाथों में हाथ डाल, बाबा की दृष्टि से निहाल होती हुई कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा मीठे बाबा की श्रीमत की ऊँगली थामे... विकारो के दलदल से निकल उजली होती जा रही हूँ... कंचन तन कंचन मन से कंचन महल में सज रही हूँ... *अपने खुबसूरत देवताई स्वरूप के नशे में डूबती जा रही हूँ..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- हम विश्व के मालिक बन रहें हैं - इस नशे में रहना है*"

 

_ ➳  अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के नशे में बैठी, अपने मीठे बाबा के प्रेम की लगन में मगन मैं उनकी मीठी यादों में रमण करती हुई *अनुभव करती हूँ कि जैसे मेरे शिव पिता अपने साकार रथ पर विराजमान हो कर, अपनी बाहें पसारे मुझे बुला रहें हैं और कह रहे हैं:- "आओ मेरे डबल सिरताज बच्चे, मेरे पास आओ"*। अव्यक्त बापदादा के ये अव्यक्त महावाक्य जैसे ही मेरे कानों में सुनाई पढ़ते हैं मैं अपनी अव्यक्त स्थिति में स्थित हो जाती हूँ और सूक्ष्म आकारी देह धारण कर, अपने साकारी तन से बाहर निकल कर, बापदादा के पास उनके अव्यक्त वतन की ओर चल पड़ती हूँ।

 

_ ➳  अपनी लाइट की सूक्ष्म आकारी देह को धारण किये मैं फ़रिशता साकार लोक में भ्रमण करता हुआ, आकाश को पार करके पहुँच जाता हूँ सूक्ष्म आकारी फरिश्तों की उस अति सुंदर मनोहारी दुनिया में जहां बापदादा बाहें पसारे मेरा इंतजार कर रहें हैं। बापदादा के सामने पहुँच कर, मैं बिना कोई विलम्ब किये उनकी बाहों में समा जाता हूँ। *अपने बाबा की ममतामयी बाहों के झूले में झूलते हुए मैं असीम आनन्द से विभोर हो रहा हूँ*। बाबा का प्रेम और वात्सलय बाबा के हाथों के स्पर्श से मैं स्पष्ट अनुभव कर रहा हूँ।ऐसे निस्वार्थ प्रेम को पा कर मेरी आँखों से खुशी के आँसू छलक रहें हैं। बाबा मेरे आंसू पोंछते हुए बड़ी मीठी दृष्टि से मुझे देख रहें हैं।

 

_ ➳  बाबा की मीठी दृष्टि से, बाबा की सर्वशक्तियाँ मुझ फ़रिश्ते में समा रही हैं। मैं स्वयं को परमात्म बल से भरपूर होता हुआ अनुभव कर रहा हूँ। *बापदादा के प्यार की शीतल छाया में मैं फरिश्ता असीम सुख और आनन्द का अनुभव कर रहा हूँ*। बापदादा अपना वरदानीमूर्त हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे वरदानों से भरपूर कर रहे हैं। हर प्रकार की सिद्धि से बाबा मुझे सम्पन्न बना रहे हैं। सर्व सिद्धियों, शक्तियों और वरदानों से मुझे भरपूर करके अब बाबा मुझे भविष्य नई दुनिया का साक्षात्कार करवा रहें हैं।

 

_ ➳  ज्ञान के दिव्य चक्षु से मैं देख रहा हूँ, बाबा मेरा हाथ पकड़ कर मुझे आने वाली नई सतयुगी दुनिया मे ले जा रहें हैं और बड़े स्नेह से मुझे कह रहे हैं देखो, बच्चे:- इस नई दुनिया के आप मालिक हो" *अब मैं स्वयं को विश्व महाराजन के रूप में देख रहा हूँ। सारे विश्व पर मैं राज्य कर रहा हूँ। मेरे राज्य में डबल ताज पहने देवी देवता विचरण कर रहें हैं। राजा हो या प्रजा सभी असीम सुख, शान्ति और सम्पन्नता से भरपूर हैं*। चारों ओर ख़ुशी की शहनाइयाँ बज रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य भी अवर्णनीय है। रमणीकता से भरपूर सतयुगी नई दुनिया के इन नजारों को देख मैं मंत्रमुग्घ हो रहा हूँ।

 

_ ➳  इस खूबसूरत दृश्य का आनन्द लेने के बाद मैं जैसे ही अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होती हूँ। *स्वयं को एक दिव्य अलौकिक नशे से भरपूर अनुभव करती हूँ और अब मैं सदा इसी रूहानी नशे में रहते हुए कि मैं ब्रह्माण्ड और विश्व की मालिक बन रही हूँ, निरन्तर अपने पुरुषार्थ को आगे बढ़ा रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अपनी दृष्टि और वृत्ति के परिवर्तन द्वारा सृष्टि को बदलने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं साक्षात्कारमूर्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव सेवा के उमंग-उत्साह में रहती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा बेहद की वैराग्य वृत्ति में रहती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा सफलता मूर्त हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. *अमृतवेले से लेकर जब उठते हो तो परमात्म प्यार में लवलीन होके उठते हो। परमात्म प्यार उठाता है।* दिनचर्या की आदि परमात्म प्यार होता है। प्यार नहीं होता तो उठ नहीं सकते। प्यार ही आपके समय की घण्टी है। प्यार की घण्टी आपको उठाती है। सारे दिन में परमात्म साथ हर कार्य कराता है। *कितना बड़ा भाग्य है जो स्वयं बाप अपना परमधाम छोड़कर आपको शिक्षा देने के लिए आते हैं।* ऐसे कभी सुना कि भगवान रोज अपने धाम को छोड़ पढ़ाने के लिए आते हैं! *आत्मायें चाहे कितना भी दूर-दूर से आयें, परमधाम से दूर और कोई देश नहीं है।*

 

 _ ➳  2. *परमधाम ऊंचे ते ऊंचा धाम है। ऊंचे ते ऊंचे धाम से ऊंचे ते ऊंचे भगवानऊंचे ते ऊंचे बच्चों को पढ़ाने आते हैं।*

 

 _ ➳  3. सतगुरू के रूप में हर कार्य के लिए श्रीमत भी देते और साथ भी देते हैं। सिर्फ मत नहीं देते हैंसाथ भी देते हैं।

 

 _ ➳  4. *अगर सुनते हो तो परमात्म टीचर सेअगर खाते भी हो तो बापदादा के साथ खाते हो।* अकेले खाते हो तो आपकी गलती है। बाप तो कहते हैं मेरे साथ खाओ। आप बच्चों का भी वायदा है - साथ रहेंगे, साथ खायेंगेसाथ पियेंगेसाथ सोयेंगे और साथ चलेंगे..... सोना भी अकेले नहीं है। अकेले सोते हैं तो बुरे स्वप्न वा बुरे ख्यालात स्वप्न में भी आते हैं। लेकिन बाप का इतना प्यार है जो सदा कहते हैं मेरे साथ सोओ, अकेले नहीं सोओ। तो उठते हो तो भी साथ, सोते हो तो भी साथखाते हो तो भी साथ, चलते हो तो भी साथ।

 

 _ ➳  *अगर दफ्तर में जाते होबिजनेस करते हो तो भी बिजनेस के आप ट्रस्टी हो लेकिन मालिक बाप है।* दफ्तर में जाते हो तो आप जानते हो कि हमारा डायरेक्टर, बास बापदादा हैयह निमित्त मात्र हैउनके डायरेक्शन से काम करते हैं। कभी उदास हो जाते हो तो बाप फ्रेन्ड बनकर बहलाते हैं। फ्रेन्ड भी बन जाता है। *कभी प्रेम में रोते होआंसू आते हैं तो बाप पोछने के लिए भी आते हैं और आपके आंसू दिल के डिब्बी में मोती समान समा देते हैं।* अगर कभी-कभी नटखट होके रूठ भी जाते होरूसते भी हो बहुत मीठा-मीठा। लेकिन बाप रूठे हुए को भी मनाने आते हैं। बच्चे कोई बात नहींआगे बढ़ो। जो कुछ हुआ बीत गयाभूल जाओ, बीती सो बीती करोऐसे मनाते भी हैं। *तो हर दिनचर्या किसके साथ हैबापदादा के साथ।*

 

✺   *ड्रिल :-  "सारे दिन में बापदादा के साथ का अनुभव करना"*

 

 _ ➳  *परमात्मा जो मुझ आत्मा जैसा ही है... हम आत्माओं के परमपिता...* जो प्यार का सागर है... शांति का सागर है... सुख का सागर है... गुणों का भंडार है... हमसे कितना प्यार करता है.... अनकंडीशनल प्यार... *परमपिता जो सारे दिन हर सम्बन्धों में साथ रहते हैं... सदा साथ निभाते हैं...*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा कितनी भाग्यवान हूँ जो अमृतवेले परमात्म प्यार में लवलीन हो उठती हूँ...* वो परमात्म प्यार की ही घंटी है जो मुझ आत्मा को जगा देता है... कल्प-कल्प की भाग्यवान आत्मा जिसकी दिनचर्या का आदी स्वयं परमात्मा के प्यार से शुरू होता है... वाह रे मैं... *मैं आत्मा बापदादा का साथ  सर्व सम्बन्धों में अनुभव करती हूँ...* टीचर रूप में ऊंचे ते ऊंचे बाप... ऊंचे ते ऊंचे बच्चों को पढ़ाने दूर देश से आते हैं...

 

 _ ➳  *जब मैं आत्मा कर्म क्षेत्र पर आती हूँ... तो सद्गुरु बाबा से मिली श्रीमत रूपी लगाम थाम लेती हूँ... ट्रस्टी बन जाती हूँ...* कभी जो डगमग हो जाऊं तो वह झट साथ देने के लिए खड़ा रहता है... *बाबा से जन्मों जन्म वायदा करते आयी हूँ... कि बाबा जब आयेंगे... साथ रहेंगे, साथ खायेंगेसाथ पियेंगेसाथ सोयेंगे और साथ चलेंगे...*

 

 _ ➳  *मीठे बाबा माँ के रूप में असीम प्यार देते हैं... निस्वार्थ प्रेम... जब चाहूँ शिव माँ की गोद में आ जाती हूँ...* और सुकून पाती हूँ... मुझ आत्मा के पिता रूप में पालना देते रहते हैं... सुख, शान्ति, पवित्रता, शक्ति, ज्ञान का वर्षा देते हैं... पिता रूप में साथ पाकर किसी बात की फिकर नहीं, कोई डर नहीं...

 

 _ ➳  जो मैं आत्मा कभी उदास हो जाऊँ...  जो कभी प्रेम में आँसू आ जाये... तो खुदा दोस्त बन बहलाते हो... *साजन रूप में, साथी बन मेरे आँसू दिल की डिब्बी में मोती समान समा देते हो...* रुठ जाऊँ तो तुम्हें बहुत मीठा लगता है और मनाने आ जाते हो... मेरे पास बैठ समझानी देते हो जो बीता भूल जाओ... बीती को बीती कर दो... आज को देखो... आने वाले सुनहरे भविष्य को देखो... मैं आत्मा मुस्कुरा देती हूँ... कितना अहोभाग्य मेरा जो परमात्मा स्वयं हर सम्बन्ध में सारे दिन साथ देता है... दैहिक सम्बन्ध तो विनाशी होता है... लेकिन बापदादा से सम्बन्ध तो अविनाशी है... *वाह रे मैं आत्मा... वाह बाबा वाह... ओम् शान्ति।*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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