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 01 / 11 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *पीछे वालों को भी आगे बढाया ?*

 

➢➢ *स्वयं के प्रति कुछ स्वीकार तो नहीं किया ?*

 

➢➢ *मुरली से सांप के विष को भी समाप्त किया ?*

 

➢➢ *हर संकल्प में दृढ़ता धारण की ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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〰✧  अपने हर संकल्प को हर कार्य को अव्यक्त बल से अव्यक्त रुप द्वारा वेरीफाय कराना है। *बापदादा को अव्यक्त रुप से सदा सम्मुख और साथ रखकर हर संकल्प, हर कार्य करना है।* साथी और साथ के अनुभव से बाप समान साक्षी अर्थात् न्यारा और प्यारा बनना है।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं ऊंच ते ऊंच ब्राह्मण आत्मा हूँ"*

 

  अपने को ऊंचे ते ऊंचे बाप की ऊंचे ते ऊंची ब्राह्मण आत्मायें समझते हो? *ब्राह्मण सबसे ऊंचे गाये जाते हैं, ऊंचे की निशानी सदा ब्राह्मणों को चोटी पर दिखाते हैं। दुनिया वालों ने नामधारी ब्राह्मणों की निशानी दिखा दी है। तो चोटी रखने वाले नहीं लेकिन चोटी की स्थिति में रहने वाले। उन्होंने स्थूल निशानी दिखा दी है, वास्तव में हैं ऊंची स्थिति में रहने वाले।*

 

  *ब्राह्मणों को ही पुरुषोत्तम कहा जाता है। पुरुषोत्तम अर्थात् पुरुषों से उत्तम, साधारण मनुष्य आत्माओं से उत्तम। ऐसे पुरुषोत्तम हो ना! पुरुष आत्मा को भी कहते हैं श्रेष्ठ आत्मा बनने वाले अर्थात् पुरुषों से उत्तम पुरुष बनने वाले। देवताओंको भी पुरुषोत्तम कहते हैं क्योंकि देव-आत्मायें हैं। *आप देव-आत्माओंसे भी ऊंचे ब्राह्मण हो - यह नशा सदा रहे। दूसरे नशे के लिए कहेंगे - कम करो, रुहानी नशे के लिए बाप कहते हैं - बढ़ाते चलो।*

 

  क्योंकि यह नशा नुकसान वाला नहीं है, और सभी नशे नुकसान वाले हैं। यह चढ़ाने वाला है, वह गिराने वाले हैं। *अगर रुहानी नशा उतर गया तो पुरानी दुनिया की स्मृति आ जायेगी। नशा चढ़ा हुआ होगा तो नई दुनिया की स्मृति रहेगी। यह ब्राह्मण संसार भी नया संसार है। सतयुग से भी यह संसार अति श्रेष्ठ है! तो सदा इस स्मृति से आगे बढ़ते चलो।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  तखत पर रहना अर्थात राज्य अधिकारी बनना। तो तख्त नशीन हो या कभी उतर आते हो? सदा स्मृति रखो कि - मैं आत्मा तो हूँ लेकिन कौन-सी आत्मा? *राजा आत्मा, राज्य अधिकारी आत्मा हूँ, साधारण आत्मा नहीं हूँ।'*

 

✧  राज्य अधिकारी आत्मा का नशा और साधारण आत्मा का नशा - इसमें कितना फर्क होगा ! तो राजा बन अपनी राज्य कारोवार को चेक करो - कौन-सी कर्मेन्द्रिय वार-वार धोखा देती है? *अगर धोखा देती है तो उसको चेक करके अपने ऑर्डर में रखो।*

 

✧  अगर अलबेले होकर छोड देंगे तो उसकी धोखा देने की आदत और पक्की हो जायेगी और नुकसान किसको होगा? अपने को होगा ना। इसलिए क्या करना है? *अकालतखा-नशीन बन चेक करो।* (पार्टियों के साथ)

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  इस परिवर्तन के संकल्प को, जैसे बीज को पानी देते रहते हैं ना, तो फल निकलता है। पानी भी चाहिए, धूप भी चाहिए तो इस संकल्प को, बीज को स्मृति का पानी और धूप देते रहना। *बार-बार रिवाइज करो- मेरा बापदादा से वायदा क्या है!*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति जानना"*

 

_ ➳  मै आत्मा मीठे बाबा को अपने दिल की बात सुनाने के लिए झोपडी में पहुंचती हूँ... *एक पिता का विशाल ह्रदय देख देख अभिभूत हूँ.*.. कि बच्चे संगम पर भी अथाह सुखो में... और सतयुगी दुनिया के वैभव भी बच्चों के ही लिए है... और पिता झोपडी में बेठा, मुझे सुखो के अहसासो में भिगो रहा है... *बच्चे सदा के लिए सुख भरी दुनिया के मालिक बनकर, सदा अनन्त खुशियो में चहके.*.. इन्ही जज्बातों में डूबा मेरा अलौकिक बाबा कितना निर्माण, कितना निर्विकारी, और निरहंकारी है... सब कुछ सिर्फ बच्चों के सुख के लिए... और *बच्चों के सम्पूर्ण पावन बनने के इंतजार में बेठा... मेरा बाबा कितना मीठा और प्यारा है.*.. मीठे बाबा के लिए दिल में अथाह प्यार लेकर, मै आत्मा... झोपडी में प्रवेश करती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को विश्व कल्याण की भावनाओ से सजाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... सबके जीवन में आप समान खुशियो की बहारो को सजाओ... *ईश्वर पिता को पाकर, जो सच्चे अहसासो को आपने जिया है... उनकी अनुभूति हर दिल को भी कराओ.*.. उनका भी सोया भाग्य जगाकर, आनन्द के फूलो से दामन सजाओ... सबको पतित से पावन बनाकर देवताई राज्य भाग्य दिलाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के अमूल्य ज्ञान को बुद्धि में समेटकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा *आपकी यादो की छत्रछाया में पलकर, असीम खुशियो की मालिक बन गयी हूँ.*.. यह खुशियां हर दिल पर उंडेल कर, उन्हें भी आप समान भाग्यशाली बना रही हूँ... सबको पावनता भरी सुंदर राहो पर चलाकर... सुख के बगीचे में पहुंचा रही हूँ..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को दिव्य गुणो और शक्तियो से भरकर कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... ईश्वर पिता की यादो में गहरे डूबकर,श्रीमत के हाथो में अपना हाथ देकर... सबको श्रेष्ठ जीवन का मालिक सजाओ... *मीठे बाबा ने जो अपने प्यार की खुशबु में पावनता से सुगन्धित किया है... आप भी पावन बनने की खशबू हर दिल तक पहुँचाओ.*.. सबको पावन बनने की युक्ति बताकर, सच्चे सुखो से दामन सजा आओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे प्यारे बाबा मुझ आत्मा के उज्ज्वल भविष्य को सजाने में खपते हुए देख कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपके अथाह प्यार को पाकर, प्रेम, सुख, शांति की तरंगो से भर गयी हूँ... सबको ईश्वरीय राहो का राही बनाकर... दुखो के दलदल से बाहर निकाल रही हूँ... *सुख भरे फूलो को खिलाकर, अधरों पर मीठी मुस्कान सजा रही हूँ.*..

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपने महान भाग्य के नशे से भरते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *ईश्वर पिता जो धरती पर अथाह खजानो को ले आया है... इस दौलत से हर दिल को रूबरू कराओ.*.. सबको प्यारे बाबा से मिलवाकर, जनमो के दुखो से छुटकारा दिलवाओ...श्रीमत की सुखदायी छाँव में, पावन दुनिया का मालिक बनाओ... सबकी सोयी तकदीर को जगाकर, असीम खजानो का मालिक बनाकर, दिव्यता से भर आओ...

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से महा धनवान् बनकर पूरे विश्व में इस ज्ञान धन की दौलत लुटाकर कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा आपसे पायी अथाह धन सम्पद्दा को... अपनी बाँहों में भरकर, हर दिल को आपकी ओर आकर्षित कर रही हूँ... *मुझे इस कदर प्यारा बनाने वाले, पिता की झलक, अपनी रूहानियत से सबको दिखा रही हूँ.*.. और आपकी बाँहों में पालना दिलवाकर, पुनः पावन बना रही हूँ..."मीठे बाबा को दिल के सारे जज्बात सुनाकर मै आत्मा... अपने कर्म के बीच पुनः लौट आयी...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  हर संकल्प में दृढ़ता धारणा करना*

 

_ ➳  प्यारे बाबा की मीठी याद मन को कितना सुकून और आराम देती है इस बात का अनुभव बार - बार करते हुए मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि रात दिन एक बाबा की ही याद में अब मुझे रहना है और जो बाबा कहे वही करना है। *अपने आप से यह प्रतिज्ञा करते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे देह और देह से जुड़े सम्बन्धियों की याद स्वत: ही भूलती जा रही है और प्यारे पिता की मीठी याद उनके पास जाकर उनके प्रेम का मधुर अहसास करने का जैसे मुझे निमन्त्रण दे रही है*। 

 

_ ➳  वतन में अपनी दोनों बाहों को पसारे खड़े हुए बापदादा का स्वरूप बार -बार आँखों के सामने आ रहा है और बार -बार कानो में जैसे एक मीठी अव्यक्त आवाज सुनाई दे रही है:- "आओ मेरे मीठे लाडले बच्चे मेरे पास आओ"। *भगवान का ये प्यारा सा मीठा सा निमन्त्रण मुझे उनके पास जाने और उनकी बाहों में समाकर उनके प्रेम के सुखद एहसास में डूब जाने के लिये व्याकुल कर रहा है*। अपने प्यारे पिता के साथ स्नेह मिलन के मीठे मधुर एहसास का आनन्द लेने के लिए अब मैं स्वयं को हर संकल्प विकल्प से मुक्त कर, लाइट स्थिति में स्थित करती हूँ और सेकेंड में अपने लाइट माइट स्वरूप को धारण कर वतन की ओर चल पड़ती हूँ।

 

_ ➳  लाइट की फ़रिश्ता ड्रेस धारण किये अपनी श्वेत रश्मियाँ चारों और फैलाते हुए, स्थूल देह और देह के हर बन्धन से मुक्त होकर, अपने प्यारे प्रभु से मिलन मनाने की लगन में मग्न मैं स्थूल दुनिया से किनारा कर, सूक्ष्म लोक की ओर बिल्कुल सहज और उन्मुक्त भाव से उड़ी चली जा रही हूँ। *अपनी बाहों में समा लेने के लिए व्याकुल बापदादा का स्वरूप बार - बार आँखों के सामने आकर, मुझे उमंग उत्साह के पंख लगाकर मेरी गति को जैसे तीव्र कर रहा है* और मैं अति तीव्र गति से उड़ते हुए स्थूल दुनिया को पार कर, उससे भी ऊपर उड़ते हुए अब अपने अव्यक्त वतन में प्रवेश कर रही हूँ।

 

_ ➳  यहाँ पहुँच कर बिना एक पल की भी देरी किये प्यारे बापदादा की बाहों में मैं समा जाती हूँ। उनकी बाहों में समाकर, उनके निस्वार्थ प्यार की गहराई में जाकर उनके साथ स्नेह मिलन करके अब मैं उनके पास बैठ जाती हूँ और उनकी मीठी दृष्टि से मिलने वाली शक्ति से स्वयं को भरपूर करने लगती हूँ। *बाबा की दृष्टि से मिल रही शक्ति मेरे अंदर एक बल भर रही है जिसे मैं स्पष्ट महसूस कर रही हूँ*। बाबा के मस्तक से स्नेह की अनन्त धाराएं निकल रही हैं जो मुझे छू कर एक तेज करेन्ट के रूप में मेरे सारे शरीर में प्रवाहित होकर मुझमें एक विशेष ऊर्जा का संचार कर रही हैं। 

 

_ ➳  परमात्म शक्तियों के बल से, बाबा के हर फरमान का पालन करने की बाबा से प्रतिज्ञा करके, बीज रूप स्थिति की शक्तिशाली याद का अनुभव करने के लिए अपनी फरिश्ता ड्रेस को उतार, *अपने निराकारी बिंदु स्वरूप में स्थित होकर मैं आत्मा अब सूक्ष्म वतन से ऊपर परमधाम  की ओर चल पड़ती हूँ और अपने इस निर्वाणधाम घर में पहुँच कर, मास्टर बीज रूप बन अपने बीजरूप शिव पिता के पास जा कर बैठ जाती हूँ*। इस अति प्यारी निरसंकल्प स्थिति में बीज रूप अपने शिव पिता को निहारते हुए उनकी शक्तिशाली किरणों को स्वयं में समाने का सुखद अनुभव मुझ आत्मा को परमआनन्द से भरपूर कर देता है। 

 

_ ➳  अपने प्यारे प्रभु की याद में मग्न, अतीन्द्रिय सुख के झूले में झूलते हुए आत्मा परमात्मा के लव में जैसे लीन हो जाती है। इस लवलीन स्थिति का भरपूर आनन्द लेकर मैं आत्मा अब वापिस ईश्वरीय सेवा अर्थ साकार सृष्टि पर लौट आती हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, दिल को सुकून देने वाली बाबा की याद में दिन रात रहते हुए, बाबा जो कहे वो करते हुए, बाबा के हाथ और साथ का अनुभव अब मैं प्रतिपल कर रही हूँ और अपने इस सुकून भरे ईश्वरीय जीवन का भरपूर आनंद ले रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं न्यारे और प्यारे बननें का राज जानकर राजी रहने वाली आत्मा हूँ।*

✺   *मैं राजयुक्त आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं आत्मा सेवाओं से सदैव दुआएं प्राप्त करती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा उन दुआओं के आधार से सदा तंदुरुस्त रहती हूँ  ।*

✺   *मैं आत्मा निष्काम सेवाधारी हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *बापदादा एक-एक बच्चे के मस्तक में सम्पूर्ण पवित्रता की चमकती हुई मणी देखना चाहते हैं। नयनों में पवित्रता की झलक,* पवित्रता के दो नयनों के तारे, रूहानियत से चमकते हुए देखने चाहते हैं। *बोल में मधुरता*, विशेषता, अमूल्य बोल सुनने चाहते हैं। *कर्म में सन्तुष्टता, निर्माणता सदा देखना चाहते हैं। भावना में - सदा शुभ भावना और भाव में सदा आत्मिक भाव, भाई-भाई का भाव। सदा आपके मस्तक से लाइट काफरिश्ते पन का ताज दिखाई दे*। दिखाई देने का मतलब है अनुभव हो। ऐसे सजे सजाये मूर्त देखने चाहते हैं। और ऐसी मूर्त ही श्रेष्ठ पूज्य बनेगी। *वह तो आपके जड़ चित्र बनायेंगे लेकिन बाप चैतन्य चित्र देखने चाहते हैं।* 

 

✺   *ड्रिल :-  "बापदादा के सामने सजे सजाये चैतन्य मूर्त बनने का अनुभव"*

 

 _ ➳  तारक जडित गगन की नीली चुनरिया... चुनरियाँ ओढे मधुबन की पावन सी ये धरनी... और उस पर लहराता पावनता का अनन्त सागर... सागर में छिपे एक से एक बहुमूल्य रत्न... और शान्ति स्तम्भ रूपी वो लाईट हाऊस... जो तूफानों से घिरी कश्तियों का मार्ग दर्शक बन गया है... *मैं आत्मा बैठ गयी हूँ देह रूपी कश्ती सहित, इस लाईट हाऊस के सामने...* और भरपूर होती जा रही हूँ... *पावनता से, मधुरता से, सन्तुष्टता से*... मैं आत्मा फरिश्तें रूप में तैर रही हूँ पावनता के इस सागर में... *सामने से हाऊसबोट की तरह तैरकर आती हुई कुटिया* और उसमें हाथ पकडकर, मुझे बिठाते हुए बापदादा *आनन्द से विभोर होता हुआ मैं*... 

 

 _ ➳  देख रहा हूँ हाऊस बोट पर मैं दैवीय श्रृंगार की सारी सामग्री बडे करीने से सजाकर रखी है एक बडे से थाल में... और *बापदादा श्रृंगार कर रहे है किसी दिव्य मूरत का बडी तल्लीनता से... नयनों मे जडे है पावनता के दो तारें*... पावनता की उस कशिश में बंधकर मैं मानो पलके ही झपकाना भूल गया हूँ... और देखे जा रहा हूँ अपलक उस दिव्य से चैतन्य श्रृंगार की एक एक बारीकी को... *वाणी में वीणा की सरगम भरी जा रही है*... वो मिश्री सी मिठास और जादुई सी प्रेरणा से भरते रूहानी बोल... अचानक दिव्य मूरत के शालीनता से हिलते हाथ... *कर्म में सन्तुष्टता और निर्माणता का परिचय देते हुए*...

 

 _ ➳  और अब एकाएक भावों की एक दिलकश सी धारा भिगो जाती है मुझे... *शुभ भावना का ज्वार सा फूट रहा है मेरे रोम रोम से... उस शुभ भाव की धारा के मुझे छूते ही*... और अब केवल आत्मीयता का गहरा भाव शेष है वहाँ... *मैं भूल गया हूँ निज रूप को भी पलभर के लिए* और *बेहद आत्मीयता महसूस कर रहा हूँ उस दिव्य मूरत में*... और अब अन्तिम श्रृंगार के इन्तजार में... मै श्वाँस रोके देख रहा हूँ उत्सुकता से...  *बापदादा ने फरिश्ते पन का ताज थमा दिया है मेरे हाथों में*... इशारा पाकर मैं ताज पहनाने आगे बढ रहा हूँ आहिस्ता आहिस्ता... *और हैरान हो गया हूँ अपनी ही हमशक्ल चैतन्य मूरत को देखकर*... बापदादा की हसरतों का परचम लहराने का वादा मन ही मन करता हुआ... पहन लेता हूँ वो ताज स्वयं ही अधिकार पूर्वक...

 

 _ ➳  *कुछ देर पहले तक मन में चल रही सभी जिज्ञासाओं का समाधान पा लिया है मैने... वो मैं ही हूँ जिसे बापदादा अकेले में और मेले में हर समय श्रृंगारते हैं*... और मूरत की जगह चैतन्य मूरत बनकर खडा हो गया हूँ मैं... अपनी वरदानी दृष्टि से मुझे भरपूर करते बापदादा... और *सजी सजायी चैतन्य मूरत का गहराई से अनुभव करता मैं*... देर तक बापदादा से दृष्टि लेकर मैं लौट आया हूँ अपनी देह रूपी कश्ती में... पावनता के उस सागर को कश्ती में समेटने का मजबूत संकल्प लिए हुए...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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