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 01 / 12 / 18  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *ज्ञान के नशे में रह अतीन्द्रिय सुख का अनुभव किया ?*

 

➢➢ *"देह सहित देह के सब संबंधो को त्याग बाप को याद करो" - आत्माओं को यह महामंत्र सुनाया ?*

 

➢➢ *ब्रह्मा बाप को फॉलो कर फर्स्ट ग्रेड में आने का पुरुषार्थ किया ?*

 

➢➢ *स्व सेवा और औरों की सेवा साथ साथ की ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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 〰✧  *अब ऐसे ट्रान्सपेरेंट (पारदर्शी) हो जाओ जो आपके शरीर के अन्दर आत्मा विराजमान है, वह स्पष्ट सभी को दिखाई दे। आपका आत्मिक स्वरूप उन्हों को अपने आत्मिक स्वरूप का साक्षात्कार कराये,* इसको ही कहते हैं अव्यक्त वा आत्मिक स्थिति का अनुभव कराना।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाप का सिकीलधा बच्चा हूँ"*

 

  सदा अपने को बाप के सिकीलधे समझते हो? *सिकीलधे अर्थात् बड़े सिक से बाप ने हमें ढूँढ़ा है। बाप ने बड़े सिक व प्रेम से आपको ढूँढ़ा है। आपने ढूँढ़ा लेकिन मिला नहीं। परिचय ही नहीं था तो मिले कैसे? लेकिन बाप ने आपको ढूँढ़ा इसलिए कहते हैं - 'सिकीलधे'। तो जिसको बाप ढू़ढ़े वह कितने भाग्यवान होंगे! दुनिया वाले बाप को ढूँढ़ रहे हैं और आप मिलन मना रहे हो।* कितने थोड़े हो, बहुतों का पार्ट है ही नहीं। थोड़ों का पार्ट है, इसलिए गाया हुआ है - कोटों में कोई। अक्षोणी सेना नहीं गाई हुई है, कोटों में कोई गाया हुआ है। तो यह खुशी वा स्मृति सदा इमर्ज रहे। हर कदम में खुशी अनुभव हो।

 

  अल्पकाल की प्राप्ति वालों के चेहरे पर वह प्राप्ति की रेखा चमकती है। आपको तो सदाकाल की प्राप्ति है। तो चेहरा सदा खुशी में दिखाई दे, उदास न हो। जो माया का दास बनता है वह उदास होता है। आप कौन हो? माया के दास हो या मालिक हो? *माया को अपनी ऑथोरिटी से भगाने वाले हो, ऐसी आत्मा कभी उदास नहीं हो सकती। कोई फिक्र ही नहीं है ना। कोई फिक्र या चिंता होती है तो उदास होते हैं।* आपको कौन-सी चिंता है? पांडवों को चिंता है? कमाने की, परिवार को पालने के लिए पैसे की चिंता है? लेकिन चिंता से पैसा कभी नहीं आयेगा। मेहनत करो, कमाई करो। लेकिन चिंता से कभी कमाई में सफल नहीं होंगे। चिंता को छोड़कर कर्मयोगी बनकर काम करो, तो जहाँ योग है वहाँ कार्य कुशल होगा और सफलता होगी। चिंता से कभी पैसा नहीं आयेगा। अगर चिंता से कमाया हुआ पैसा आयेगा भी तो चिंता ही पैदा करेगा। जैसा बीज होगा वैसा ही फल निकलेगा और खुशी-खुशी से काम करके कमाई करेंगे तो वह पैसा भी खुशी दिलायेगा। वह दो रुपया भी दो हजार का काम करेगा और वह दो लाख दो रुपये का काम करेगा। इतना फर्क हैं, इसलिए चिंता क्या करेंगे!

 

  सच्ची दिल वालों को सच की कमाई मिलती है। बाप भी दाल-रोटी जरूर देते हैं। सुस्त रहने वाले को नहीं देंगे। *काम तो करना ही पड़ेगा क्योंकि पिछले हिसाब भी तो चुक्तू करने हैं। लेकिन चिंता से नहीं, खुशी से। कोई भी काम करो - योगयुक्त होकर करो। योगी का कार्य सहज और सफल होता है, ऐसा अनुभव है ना! याद में कोई भी काम करते तो थकावट नहीं होती।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *तो रोज चेक करो, समाचार पूछो - हे मन मन्त्री, तुमने क्या किया?* कहाँ धोखा तो नहीं दिया? कहाँ अन्दर ही अन्दर ग्रुप बना देवे और आपको राजा की बजाय गुलाम बना दे! तो ऐसा न हो!

 

✧  देखो, *ब्रह्माबाप आदि में रोज ये दरबार लगाते थे* जिसमें सभी सहयोगी साथियों से समाचार पूछते, ये रोज की ब्रह्माबाप की आदि की दिनचर्या है। सुना है ना? तो ब्रह्माबाप ने भी मेहनत की है ना!

 

✧  *अटेन्शन रखा तब स्वराज्य अधिकारी सी विश्व के राज्य अधिकारी बने।* शिव बाप तो है ही निराकार लेकिन ब्रह्माबाप ने तो आपके समान सारी जीवन पुरुषार्थ से प्रालब्ध प्राप्त की। तो *ब्रह्माबाप को फालो करो।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *अभी तो बड़े-बड़े दाग़ भी छुपाने से छुप जाते हैं, क्योंकि अभी शीश महल नहीं बना है जो कि चारों ओर के दाग स्पष्ट दिखाई दे जावें। जब किनारा कर लेते, तो दाग छिप जाता अर्थात् पाप दर्पण के आगे स्वयं को लाने से किनारा कर छिप जाते हैं। छिपता नहीं है, लेकिन किनारा कर और छिपा हुआ समझ स्वयं को खुश कर लेते हैं। बाप भी बच्चों का कल्याणकारी बन अनजान बन जाते हैं जैसे कि जानते ही नहीं।* अगर बाप कह दे कि मैं जनता हूं कि यह दाग इतने समय से व इस रूप से है तो सुनने वाले का क्या स्वरूप होगा? सुनाना चाहते भी मुख बन्द हो जावेगा, क्योंकि सुनाने की विधि रखी हुई है। *बाप जब कि जानते भी हैं, तो भी सुनते क्यों हैं? क्योंकि स्वयं द्वारा किये गये कर्म व संकल्प स्वयं वर्णन करेंगे तो ही महसूसता की सीढ़ी पर पाँव रख सकेंगे।* महसूस करना या अफ़सोस करना या माफ़ी लेना बात एक हो जाती है। *इसलिए सुनाने की अर्थात् स्वयं को हल्का बनाने की या परिवर्तन करने की विधि बनाई गई है। इस विधि से पापों की वृद्धि कम हो जाती है।* इसलिए अगर शीश महल बनने के बाद, स्वयं को स्पष्ट देख कर के स्पष्ट किया तो रिज़ल्ट क्या होगी, यह जानते हो? बापदादा भी ड्रामा प्रमाण उन आत्माओं को स्पष्ट चैलेन्ज देंगे, तो फिर क्या कर सकेंगे? *इसलिए जब महसूसता के आधार पर स्पष्ट हो अर्थात् बोझ से स्वयं को हल्का करो, तब ही डबल लाइट स्वरूप अर्थात् फ़रिश्ता व आत्मिक स्थिति स्वरूप बन सकेंगे।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ईश्वर के बारे में कभी भी झूठ नहीं बोलना*"

 

_ ➳  मै आत्मा कभी अनुभवी थी, सिर्फ झूठ की ठोकरों की... मीठे बाबा ने *जीवन में आकर सत्य का खुबसूरत सवेरा दिखाकर*...मेरे जनमो के अंधकार को एक सेकण्ड में दूर कर दिया...और *आज सच की खनक से जीवन गुंजायमान हो उठा है*... अज्ञान के अंधेरो की आदी मै आत्मा... इसी को जीवन की नियति मानकर जीती जा रही थी... कि सहसा *भगवान ने जीवन में प्रवेश कर... मेरे जीवन से हर झूठ का सफाया कर दिया... मुझे तीसरा नेत्र देकर मुझे त्रिनेत्री सजा दिया.*.. इस नेत्र की बदौलत मै आत्मा अपने खुबसूरत सतयुग को निहार कर... आनन्द की चरमसीमा पर हूँ... और *आनन्द की यही लहरे... हर दिल पर उछालने वाली, ज्ञान गंगा बन मुस्करा रही हूँ.*.. दिल की यह बात मीठे बाबा को सुनाने मै आत्मा... मीठे बाबा के कमरे में प्रवेश करती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अथाह ज्ञान रत्नों की जागीर सौंपते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे...ईश्वर पिता ने मा नॉलेजफुल बनाकर ज्ञान के तीसरे नेत्र से रौशन किया है... तो सत्यता की इस रौशनी मे सच और झूठ का फर्क सिद्धकर दिखाओ... विश्व को ज्ञान की सत्य राहों का मुरीद बनाओ... *अज्ञान के अंधेरो से हर दिल को निकाल कर... सत्य की चमकती मुस्कराती राहों पर चलाओ.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के प्यार में असीम ख़ुशी को पाकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे...मै आत्मा अज्ञान की फिसलती राहो पर चलती हुई गर्त में जा रही थी... आपने मेरा हाथ पकड़कर, मुझे इस दलदल से निकाल, अपने दिल में बसा लिया है... मै आत्मा *इस सत्य का शंखनाद कर, हर दिल को जगा रही हूँ...और सच की चमक से भरे... जीवन की सौगात हर दिल को दिला रही हूँ.*.."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी सारी सम्पत्ति का मालिक बनाते हुए कहा:-* " मीठे प्यारे लाडले बच्चे... सत्य पिता की सत्य भरी बाँहों में जो महके हो... उस ज्ञान की खशबू से हर मन को सुवासित करो... ईश्वर पिता द्वारा सुनी हुई सत्य की लहर को पूरे विश्व में बहाकर, अज्ञान का सूखापन मिटाओ... *दुरांदेशी विशाल बुद्धि बनकर,सच और झूठ का भेद सिद्ध कर, अज्ञान का पर्दा उठाओ..*.

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से ज्ञान धन का अखूट खजाना अपनी बाँहों में भरते हुए कहती हूँ :-* "मीठे दुलारे बाबा मेरे... मै आत्मा देह के भान में पतित हो चली बुद्धि संग यहाँ वहाँ कितना भटक रही थी... आपने प्यारे बाबा *अपनी फूलो सी गोद में बिठाकर... मुझे पावनता से सजाया है... बेहद का ज्ञान देकर मुझे दुरांदेशी बना दिया है.*.. अब यह ख़ुशी मै आत्मा.... हर मन को बाँट रही हूँ... भक्ति और ज्ञान का सच्चा फर्क समझा कर... आप समान बेहद का समझदार बना रही हूँ..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान की कूक सुनाने वाली ज्ञान बुलबुल बनाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... ईश्वर पिता से जिन सच्ची खुशियो को बाँहों में समाकर... इस कदर खुशनुमा बने हो,.. यह सच्ची खुशियां सबके दामन में भी सजा आओ... *झूठ के दायरे से बाहर निकाल सच के सूर्य का अहसास कराओ... हर दिल सच्चाई को ही तो ढूंढ रहा है... उनकी मदद करने वाले सच्चे रहनुमा बनकर.*.. उन्हें भी आप समान ज्ञान का धनी बनाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से सारी शक्तियो को लेकर, शक्तिशाली बनकर कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... मै आत्मा *सच की झनकार को पूरे विश्व में गूंजा रही हूँ... सबके मनो की उलझन को सुलझाकर, सच का सुनहरा सवेरा दिखा रही हूँ..*. मीठे बाबा आपने जो सत्य मुझ आत्मा को दिखाकर देह के जंजालों से छुड़ाया है... मै आत्मा सबके दामन में यह प्रकाश खिला रही हूँ... प्यारे बाबा से वरदानों की सौगात लेकर मै आत्मा कर्मक्षेत्र पर लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सभी को सेकण्ड में मुक्ति - जीवनमुक्ति का अधिकार देने का महामन्त्र देना *

 

_ ➳  सेकण्ड में जीवन मुक्ति का वर्सा देने वाले अपने भगवान बाप का परिचय अपने सभी आत्मा भाइयों को देकर उन्हें भी जीवनमुक्ति का वर्सा दिलाने की मैं अपने प्यारे पिता से प्रतिज्ञा करती हूँ और मन ही मन विचार करती हूँ कि *शास्त्रो में जिस राजा जनक के लिए गायन है कि सेकण्ड में उन्हें जीवनमुक्ति मिली उस राजा जनक के यथार्थ परिचय से तो सारी दुनिया अनजान है। लेकिन कितनी महान सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो ना केवल उस राजा जनक की जीवन कहानी से परिचित हूँ बल्कि उनके मुख कमल से पैदा होकर अनु जनक बन अपने परमपिता परमात्मा से सेकेण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा पाने की मैं भी अधिकारी आत्मा बन गई*।

 

_ ➳  सेकण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा पाकर, फिर सबको उस जीवनमुक्ति का वर्सा दिलाने वाले उस राजा जनक अपने प्यारे ब्रह्मा बाबा का मैं दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ जिनके तन का आधार लेकर भगवान ने हम ब्रह्मा मुख वंशवाली अनु जनक ब्राह्मणों को भी सेकेंड में जीवन मुक्ति का वर्सा दिया। *कदम - कदम अपने प्यारे ब्रह्मा बाप को फॉलो कर, सबको सेकण्ड में जीवनमुक्ति का वर्सा दिलाने केे लिए ब्रह्मा बाप समान देही अभिमानी बन सबको बाप का परिचय देने की रूहानी सेवा करने का दृढ़ संकल्प लेकर मैं अपने प्यारे ब्रह्मा बाप की अव्यक्त पालना और उनके अथाह स्नेह से स्वयं को भरपूर करने के लिए अपने लाइट माइट स्वरूप में स्थित होती हूँ* और लाइट की सूक्ष्म आकारी देह के साथ अपनी स्थूल देह से बाहर आ जाती हूँ।

 

_ ➳  देह से न्यारी लाइट माइट स्थिति में स्थित होकर मैं एक अद्भुत हल्केपन का अनुभव कर रही हूँ। एक ऐसा हल्कापन जो मुझे देह और देह की दुनिया के हर बन्धन से मुक्त करके, एक न्यारे और प्यारेपन की अनुभूति करवाने के साथ - साथ मुझे धरनी के हर आकर्षण से ऊपर आकाश की ओर ले जा रहा है। *अपने लाइट के फरिश्ता स्वरूप में स्थित होकर अपनी श्वेत रश्मियो को चारों और फैलाता हुआ मैं फरिश्ता ऊपर की और उड़ता हूँ औऱ सारे विश्व का चक्कर लगाकर, सेकण्ड में आकाश को पार करके, उससे और ऊपर उड़कर पहुँच जाता हूँ फरिश्तो के वतन में अव्यक्त बापदादा के पास*। देख रहा हूँ मैं वतन के खूबसूरत नजारों को। चारों और फैला सफेद प्रकाश मन को शांति का अनुभव करवा रहा है। सूक्ष्म लाइट की श्वेत काया में अपने सम्पूर्ण स्वरूप में बापदादा मुझे अपने सामने खड़े दिखाई दे रहें हैं जिनसे निकल रही लाइट सारे वतन में फैल कर वतन को श्वेत प्रकाश से प्रकाशित कर रही है।

 

_ ➳  वतन में फैली प्रकाश की इन रश्मियों में समाये शक्तिशाली वायब्रेशन्स को स्वयं में समाता हुआ मैं फरिश्ता अब धीरे - धीरे बापदादा के पास पहुँचता हूँ और उनकी बाहों के विशाल घेरे में जाकर समा जाता हूँ। अपनी बाहों के झूले में झुलाते हुए बाबा का असीम स्नेह उनके मस्तक से निकल रही सर्वशक्तियों की रंग बिरंगी किरणों के रूप में मेरे ऊपर बरसने लगता है*। अपने स्नेह की शीतल धाराओं से बाबा मुझे तृप्त कर देते हैं और बड़े प्यार से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने पास बिठाकर अपनी दृष्टि द्वारा अपनी शक्तियों का बल मेरे अंदर भरने लगते हैं। अपना वरदानी हाथ मेरे सिर पर रखकर वरदानों से बाबा मेरी झोली भर देते हैं।

 

_ ➳  *देह अभिमान से मुक्त होकर देही अभिमानी बन मुक्ति जीवनमुक्ति का वर्सा पाने का रास्ता सबको बताकर सबका कल्याण करने का वचन अपने प्यारे बापदादा को देकर उनसे शक्तियाँ और वरदान लेकर मैं फरिश्ता वतन से नीचे उतरता हूँ और विश्व ग्लोब पर बैठ सारे विश्व की आत्माओं को सेकण्ड में मुक्ति, जीवनमुक्ति का वर्सा पाने का सन्देश देता हुआ, परमात्म शक्तियाँ सारे विश्व में बिखेरता हुआ अब सारे विश्व का चक्कर लगाकर वापिस साकारी दुनिया मे आ जाता हूँ*।

 

_ ➳  अपनी सूक्ष्म प्रकाश की काया के साथ अपने साकार तन में प्रवेश कर, अपने ब्राह्मण स्वरूप में मैं स्थित हो जाती हूँ और सबको परमात्म सन्देश देने की ईश्वरीय सेवा में लग जाती हूँ। अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली सभी आत्माओं को अब मैं यह संदेश देती रहती हूँ। *सेकण्ड में जीवन मुक्ति का वर्सा बाप से मिलता है, बाप का यह परिचय देही अभिमानी स्थिति में स्थित होकर अब मैं हर आत्मा को देते हुए सर्व का कल्याण करने के बाबा को दिए हुए वचन का पालन करके परमात्म दुआओ से अपनी झोली हर समय भरपूर कर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं ब्रह्मा बाप को फॉलो कर फर्स्ट ग्रेड में आने वाली समान आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं स्व सेवा और औरों की सेवा साथ-साथ करके सफलता मूर्त बनने वाली सच्ची सेवाधारी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. *श्रेष्ठ शुद्ध संकल्प में इतनी ताकत है जो आपके कैचिंग पावरवायब्रेशन कैच करने की पावरबहुत बढ़ सकती है।* यह वायरलेसयह टेलीफोन.... जैसे यह साइंस का साधन कार्य करता है वैसे यह शुद्ध संकल्प का खजानाऐसा ही कार्य करेगा जो लण्डन में बैठे हुए *कोई भी आत्मा का वायब्रेशन आपको ऐसे ही स्पष्ट कैच होगा* जैसे यह वायरलेस या टेलीफोन, टी.वी. यह जो भी साधन हैं.... कितने साधन निकल गये हैं, इससे भी स्पष्ट आपकी कैचिंगपावर, एकाग्रता की शक्ति से बढ़ेगी। यह आधार तो खत्म होने ही हैं। यह सब साधन किस आधार पर हैं? *लाइट के आधार पर। जो भी सुख के साधन हैं मैजारिटी लाइट के आधार पर हैं।*  तो क्या आपकी आध्यात्मिक लाइट, आत्म लाइट यह कार्य नहीं कर सकती! जो चाहो वायब्रेशन नजदीक केदूर के कैच कर सकेंगे। अभी क्या है, *एकाग्रता की शक्ति मन-बुद्धि दोनों ही एकाग्र हो तब कैचिंग पावर होगी। बहुत अनुभव करेंगे। संकल्प किया - नि:स्वार्थ, स्वच्छस्पष्ट वह बहुत क्विक अनुभव करायेगा।*  साइलेन्स की शक्ति के आगे यह साइन्स झुकेगी। अभी भी समझते जाते हैं कि साइंस में भी कोई मिसिंग हैं जो भरनी चाहिए।

 

 _ ➳  इसलिए बापदादा फिर से अन्डरलाइन करा रहा है कि *अन्तिम स्टेजअन्तिम सेवा - यह संकल्प शक्ति बहुत फास्ट सेवा करायेगी। इसीलिए संकल्प शक्ति के ऊपर और अटेन्शन दो।* बचाओ, जमा करो। बहुत काम में आयेगी। प्रयोगी इस संकल्प की शक्ति से बनेंगे। साइंस का महत्व क्यों है? प्रयोग में आती है तब सब समझते हैं हाँ साइंस अच्छा काम करती है। तो *साइलेन्स की पावर का प्रयोग करने के लिए एकाग्रता की शक्ति चाहिए और एकाग्रता का मूल आधार है - मन की कन्ट्रोलिंग पावर, जिससे मनोबल बढ़ता है।* मनोबल की बड़ी महिमा हैयह रिद्धि-सिद्धि  वाले भी मनोबल द्वारा अल्पकाल के चमत्कार दिखाते हैं। आप तो विधि पूर्वक, रिधि सिद्धि नहींविधि पूर्वक कल्याण के चमत्कार दिखायेंगे जो वरदान हो जायेंगे, आत्माओं के लिए यह संकल्प शक्ति का प्रयोग वरदान सिद्ध हो जायेगा।

 

 _ ➳  2. *अगर संकल्प शक्ति पावरफुल है तो यह सब स्वत: ही कन्ट्रोल में आ जाते हैं। मेहनत से बच जायेंगे। तो संकल्प शक्ति का महत्व जानो।*

 

 _ ➳  3. आखिर आपके संकल्प की शक्ति इतनी महान हो जायेगी - जो सेवा में मुख द्वारा सन्देश देने में समय भी लगाते हो, सम्पत्ति भी लगाते होहलचल में भी आते होथकते भी हो..लेकिन श्रेष्ठ संकल्प की सेवा में यह सब बच जायेगा। बढ़ाओ। *इस संकल्प शक्ति को बढ़ाने से प्रत्यक्षता भी जल्दी होगी।*

 

✺   *ड्रिल :-  "निःस्वार्थ, स्पष्ट, स्वच्छ संकल्प शक्ति को बढ़ाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  अमृतवेला आंख खुलते ही बाबा की गोद मे स्वयं को विराजित देख अनायास खुशी व सुकून को अनुभव कर मैं आत्मा अशरीरी, फरिश्ता स्वरूप में मीठे बाबा के संग मीठे परमधाम की ओर जा रही हूं... *सर्व शक्तिमान बाबा के स्पर्श से पुलकित मैं आत्मा बाबा के नज़र से निहाल हो रही हूं... बाबा शक्तियों के, गुणों के ख़ज़ाने से मुझ आत्मा को अंदर से भर रहे है...* मुझ आत्मा की आंतरिक कमी कमजोरियों को मिटाने की बाबा की कवायद देख मैं आत्मा सच्चे दिल से बाबा के प्रेम को महसूस कर रही हूं...

 

 _ ➳  मुझे मीठे बाबा की दृष्टि में वही बात दिख रही है कि अविनाशी आत्मा अपने सर्व शक्तियों को सम्पूर्ण विश्व की सेवा में प्रयोग करने की तैयारी का समय आ चुका है... *अब चारों ओर अपने संकल्प शक्ति का प्रयोग कर दुःख कष्ट से मुक्त करने का समय है...* मुझ आत्मा को बाबा की आज्ञा बुद्धि से स्पष्ट समझ आ रही है... जितना जितना *विनाश का समय करीब आ रहा है बाबा, संकल्प शक्ति द्वारा, शांति के वाइब्रेशन द्वारा आत्माओं की सेवा करने का आदेश दे रहे है...* मैं आत्मा मन बुद्धि की एकाग्रता से संकल्प शक्ति की तीव्रता को बढ़ा रही हूँ... मैं आत्मा अपने अविनाशी शक्तियों को और सूक्ष्म रीति प्रयोग करने की कला सीख रही हूं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा स्वयं के फरिश्ता स्वरूप के कर्तव्यों को फिर से याद कर बाबा से विदाई ले वापिस लौट रही हूं... आज मन बुद्धि की एकाग्रता से आत्माओं के वाइब्रेशन कैच करने की आश लिए मैं फरिश्ता विश्व गोले पर विराजमान हो जाती हूं... फरिश्ता स्वरूप में बैठ मन बुद्धि को एकाग्र कर सुनने की कोशिश कर रही हूं... *कुछ ही सेकंड में इतना क्रंदन, आर्तनाद, शोर सुन मैं फरिश्ता एक पल के लिए स्तंभित हो बाबा को याद करने लगती हूं... बाबा इशारा देते है संकल्प की शक्ति का प्रयोग कर उन्हें शांति से भरपूर करना है...*

 

 _ ➳  बाबा का इशारा पाते ही मैं फरिश्ता *अपने समर्थ व शुभ संकल्पों की जादुई छड़ी हाथ मे उठाये विश्व गोले को सफेद प्रकाश से भरपूर करने गोले की परिक्रमा कर रही हूं...* शांति सुख प्रेम एवं शक्ति की ऊर्जा से ओतप्रोत सफेद प्रकाश से विश्व को भरपूर कर रही हूं... *अपने फरिश्ता स्वरूप में स्थित होकर मैं आत्माओं के अंतर्मन के रुदन कुछ शांत होते हुए देख रही हूं...* सभी को मीठे बाबा की मीठी शक्तिशाली सकाश से भरपूर होते देख रही हूं... थोड़ी ही देर में सभी के मुख पर शांति की प्रतिच्छवि देख खुद भी सुकून महसूस कर रही हूं...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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