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 02 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बाप की याद में रह सदा राज़ी ख़ुशी रहे ?*

 

➢➢ *सदा श्रीमत का रीगार्ड रखा ?*

 

➢➢ *कनेक्शन और रिलेशन द्वारा मनसा शक्ति का प्रतक्ष्य प्रमाण देखा ?*

 

➢➢ *सर्व खजानों को सफल कर महादानी बनकर रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अभ्यास करो - देह और देह के देश को भूल अशरीरी *परमधाम निवासी बन जाओ, फिर परमधाम निवासी से अव्यक्त स्थिति में स्थित हो जाओ, फिर सेवा के प्रति आवाज में आओ, सेवा करते हुए भी अपने स्वरूप की स्मृति में रहो, अपनी बुद्धि को जहाँ चाहो वहाँ एक सेकेण्ड से भी कम समय में लगा लो तब पास विद आनर बनेंगे।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं हर कदम में चढ़ती कला का अनुभव करने वाली विशेष आत्मा हूँ"*

 

✧  सदा चढ़ती कला में जा रहे हो? *हर कदम में चढ़ती कला के अनुभवी। संकल्प, बोल, कर्म सम्पर्क और सम्बन्ध सबमें सदा चढ़ती कला। क्योंकि समय ही है चढ़ती कला का और कोई भी युग चढ़ती कला का नहीं है।*

 

✧  *संगमयुग ही चढ़ती कला का युग है, तो जैसा समय वैसा ही अनुभव होना चाहिए। जो सेकण्ड बीता उसके आगे का सेकण्ड आया, तो चढ़ती कला।*

 

  ऐसे नहीं दो मास पहले जैसे थे वैसे ही अभी हो। हर समय परिवर्तन। लेकिन परिवर्तन भी चढ़ती कला का। *किसी भी बात में रुकने वाले नहीं। चढ़ती कला वाले रुकते नहीं हैं, वे सदा औरों को भी चढ़ती कला में ले जाते हैं।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  तो कर्मातीत बनना है ना? बापदादा भी कहते हैं आप को ही बनना है। और कोई नहीं आयेंगे, आप ही हो। आपको ही साथ में ले जायेंगे लेकिन कर्मातीत को ले जायेंगे ना। *साथ चलेंगे या पीछे-पीछे आयेंगे? (साथ चलेगे)*

 

✧  यह तो बहुत अच्छा बोला। साथ चलेंगे, हिसाब चुक्त करेंगे? इसमें हाँ जी नहीं बोला। कर्मातीत बनके साथ चलेंगे ना। *साथ चलना अर्थात साथी बनकर चलना।* जोडी तो अच्छी चाहिए या लम्बी और छोटी? समान चाहिए ना!

 

✧  तो कर्मातीत बनना ही है। तो क्या करेंगे? अभी अपना राज्य अच्छी तरह से सम्भालो। रोज अपनी दरबार लगाओ। राज्य अधिकारी तो हो ना! तो *अपनी दरबार लगाओ, कर्मचारियों से हालचाल पूछो।* चेक करो ऑर्डर में हैं?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *फ़रिश्ते अर्थात् अपने फ्युचर द्वारा अन्य आत्माओं के फ्युचर बनाने वाले सदा अपना फ्युचर सामने रहता है?* जितना निमित्त बनी हुई आत्मायें अपने फ्युचर को सदा सामने रखेंगी उतना अन्य आत्माओं को भी अपना फ्युचर बनाने की प्रेरणा दे सकेंगी। *अपना फ्युचर स्पष्ट नहीं तो दूसरों को भी स्पष्ट बनाने का रास्ता नहीं बता सकेंगी।* अपना फ्युचर स्पष्ट है? महाराजा या महारानी- जो भी बने, लेकिन उससे पहले अपना भविष्य फ़रिश्तेपन का, कर्मातीत अवस्था का- वह सामने स्पष्ट आता है? ऐसा अनुभव होता है कि मैं हर कल्प में फ़रिश्ते स्वरूप में ये पार्ट बजा चुकी हूँ और अभी बजाना है? वो झलक सामने आती है? जैसे दर्पण में अपने स्वरूप की झलक देखते हो ऐसे नॉलेज के दर्पण में अपने पुरुषार्थ से फ़रिश्तेपन की झलक स्पष्ट दिखाई देती है? *जब तक फ़रिश्तेपन की झलक स्पष्ट दिखाई नहीं देगी तब तक भविष्य भी स्पष्ट नहीं होगा।* यह संकल्प आता ही रहेगा कि शायद मैं ये बनूँ या वो बनूँ? लेकिन फ़रिश्तेपन की झलक स्पष्ट दिखाई देगी तो वह भी स्पष्ट दिखाई देगी। तो वह दिखाई देता है या अभी घूंघट में है? जैसे चित्र का अनावरण कराते हो तो अपने फ़रिश्ते स्वरूप का अनावरण कब करेंगे? आपे ही करेंगे या चीफ़ गेस्ट को बुलायेंगे? *यह पुरुषार्थ की कमज़ोरी का पद हटाओ तो स्पष्ट फ़रिश्ता रूप हो जायेगा।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- मुरली कभी भी मिस नहीं करना"*

 

_ ➳  *मुरली की तान पर थिरकता ये मधुबन सारा... मैं दीवानी मुरली की, मुरली मेरे प्राणों का सहारा*... अन्तर्मन के पट खुले ये पहेली अब समझ में आई है... *मुरली की खातिर भक्ति में जिन गोपियो ने सुधबुध बिसराई, वो मुरली और वो गोपियाँ मैने आज खुद में ही पाई है*...  क्षुद्र जन्म से ये श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ ब्राह्मण जन्म, खुदा जब खुद हर रोज प्रेमपाति भेज रहा है... किस कदर मन के मैल धुल गये है वो सम्मुख बैठ देख रहा है और *मेरे सम्मुख बैठे है बापदादा... और मैं मंन्त्रमुग्ध सी बस सुन रही हूँ और समाँ रही हूँ श्रेष्ठ पद का आधार एक एक महावाक्य को ...बडी तल्लीनता के साथ*...

 

  *श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का ज्ञान और रुहानी पालना से भरपूर करने वाले बापदादा मुझ आत्मा से बोले:-* "मेरी चक्रधारी बच्ची... *ये प्रेम पाँति सर्वश्रेष्ठ पद का आधार है... एक एक महावाक्य में प्राप्तियों की लम्बी कतार है... एक एक महावाक्य अन्तर में समाँ लो... मनन चिन्तन से उसे धारणा अपनी बना लो*... क्या विधि की सिद्धि का ये राज आपको मालूम है... *पदमापदम भाग्यशाली बन गये हो आप क्या ये नशा सदा रहता है...?"*

 

_ ➳  *ईश्वरीय मस्ती में मस्त मै देही विदेही बाप से बोली:-* "मीठे बाबा... *सदा एकव्रता बन तीनो लोको की सैर कराती है ये मुरली, सूक्ष्म वतन में कभी तो कभी देवताई झलक दिखाती है ये मुरली*... आपके संग संग फरिश्ता बन उड जाती हूँ मैं... जमाने भर की खुशियाँ मुट्ठी मे समेट लाती हूँ... संगम पर ये ऊँच ते ऊँच ब्राह्मण जन्म पाया है... *मुझ सा भाग्य किसका होगा... मुझे स्वराज्य अधिकारी बनना यही पर सिखलाया है...*"

 

  *अव्यक्त वतनवासी बाप मुझ साक्षात्कार मूर्त आत्मा से बोले:-* "मीठी बच्ची... *जैसे पाँच तत्वों के शरीर में बिन्दु बन रहती हो... वैसे ही अब लाइट के कार्ब में रहों... फरिश्ता बन धरा पर सेवार्थ कदम रखों ...* कारोबार पूरा कर फिर उपराम हो जाओ... अपने लाइट रूप से सबको साक्षात्कार कराओं... मुरली का स्वरूप बन विधि की सिद्धि सबको सिखाओं... *ज्वाला स्वरूप बन योग अग्नि से हर आत्मा को विकारों के बंधन से मुक्त कराओं"...*

 

_ ➳  *स्वविकारों पर पैनी नजर रख उन्हें समाप्त करने वाली मैं मायाजीत आत्मा भोलेनाथ बाबा से बोली:-* "मेरे बाबा...  *विकारों से अशान्त आत्माओं पर मैं फरिश्ता शान्ति की बदली  बरसा रही हूँ... ज्ञान के खजानों से भरने सबको ज्ञान मुरली का वर्सा दिला रही हूँ*... लास्ट सो फास्ट जाने का तरीका श्रीमत पर ही सबको बता रही हूँ... बेफ्रिक बादशाह बनाया मुझे मुरली ने कैसे... अनुभव अपना मैं सबको बता रही हूँ..."

 

  *सच्चे सच्चे सेवाधारी बाप मुझ ज्ञानमूर्त आत्मा से बोले:-* "मेरी बच्ची... *अज्ञान और भक्ति के घने बीहड में काठ की मुरली और मुरली धर को अभी भी जो आत्माए खोज रही है उनको सदगुरू की सच्ची-सच्ची ज्ञान मुरली का रसपान कराओं*... मुरली से श्रेष्ठपद की प्राप्ति का अनुभव कराओं... मुरली को समालेना और स्वरूप बन जाने की विधि सिखाओं... अब अन्तिम समय का अन्तिम पुरूषार्थ और मायाजीत का अनुभव कराओं"...

 

_ ➳  *सर्व खजानों से सम्पन्न धारणामूर्त मैं आत्मा बापदादा से बोली:-* "प्यारे बाबा... *मै तो निमित्त मात्र हूँ बाबा... ये ज्ञान मुरली ही सब करा रही है... महापरिवर्तन की वेला का आधार ये मुरली ही बनी है बाबा... जो पल मे तीनो लोको का भ्रमण करा देती है*... फरिश्ता बनाकर मुझे पल में दुआओं का कारोबार कराती है... मूढ पतित आत्माओं को पावन बना रही है... मेरे दैवी रूप का दीदार कराती है... प्रभु मिलन को बेताब आत्माओं को आपसे मिला देती है... *और कहते कहते मैं बीजरूप बन समाँ गयी हूँ मै बापदादा की गोद में..."*

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  सदा श्रीमत का रिगार्ड रखना है*

 

_ ➳  मन बुद्धि का कनेक्शन अपने शिव पिता के साथ जुड़ते ही इस नश्वर भौतिक जगत से कनेक्शन टूटने लगता है और मन मगन हो जाता है प्रभु प्यार में। *मन को सुकून देने वाली मीठे बाबा की मीठी याद में मैं जैसे खो जाती हूँ और प्रभु यादों की डोली में बैठ उड़ कर पहुँच जाती हूँ उस खूबसूरत लाल प्रकाश की दुनिया में जहाँ मेरे मीठे बाबा रहते हैं*। देह, देह की दुनिया से बहुत दूर आत्माओं की इस निराकारी दुनिया में निराकार अपने शिव पिता को अनन्त प्रकाश के एक ज्योतिपुंज के रूप में मैं देख रही हूँ। मन को तृप्ति प्रदान करने वाला उनका अति मनमोहक प्रकाशमय स्वरूप मुझे अपनी ओर खींच रहा है। उनके आकर्षण में बंधी मैं आत्मा एक चमकती हुई ज्योति अब धीरे धीरे उस महाज्योति के पास जा रही हूँ।

 

_ ➳  ऐसा लग रहा है जैसे मेरे मन और बुद्धि की तार उस महाज्योति के साथ जुड़ी हुई है और उस तार में बिजली के तार की भांति एक तेज करेन्ट निकल रहा है जो मेरे शिव पिता से सीधा मुझ बिंदु आत्मा के साथ कनेक्ट हो रहा है और अपनी सारी शक्तियों का प्रवाह मेरे अंदर प्रवाहित करता जा रहा है। *ये सर्व शक्तियाँ मुझ आत्मा में समाकर मेरे अंदर अनन्त शक्ति का संचार कर रही है और मुझे शक्तिशाली बनाने के साथ - साथ ये शक्तियाँ मुझे छू कर अनन्त फ़ुहारों के रूप में चारों और फैल रही हैं और मेरे ऊपर बरस कर मुझे गहन शीतलता का अनुभव करवा रही हैं*। ऐसा अनुभव हो रहा है जैसे शक्तियों का कोई सतरँगी फव्वारा मेरे ऊपर चल रहा है और अपनी मीठी - मीठी, हल्की - हल्की फ़ुहारों से मेरे अन्तर्मन की सारी मैल को धोकर साफ कर रहा है।

 

_ ➳  एक बहुत ही प्यारी लाइट माइट स्थिति का मैं अनुभव कर रही हूँ। हर बोझ, हर बन्धन से मुक्त यह लाइट स्थिति मुझे परम आनन्द प्रदान कर रही है। अतीन्द्रीय सुख के सुखदाई झूले में मैं आत्मा झूल रही हूँ। *परम आनन्द की गहन अनुभूति करते - करते अब मैं बिंदु आत्मा सम्पूर्ण समर्पण भाव से अपने महाज्योति शिव पिता की किरणों रूपी बाहों में समाकर उनके और भी समीप पहुँच गई हूँ। समर्पणता के उस अंतिम छोर पर मैं स्वयं को देख रही हूँ जहाँ दोनों बिंदु एक दिखाई दे रहे हैं*। यह अवस्था मुझे बाबा के समान सम्पूर्ण स्थिति का अनुभव करवा रही है। अपनी इस सम्पूर्ण स्थिति में मैं स्वयं को सर्व गुणों और सर्वशक्तियों के मास्टर सागर के रूप में देख रही हूँ। अपने इस सम्पूर्ण स्वरूप के साथ मैं आत्मा परमधाम से नीचे आकर सूक्ष्म वतन में प्रवेश कर जाती हूँ।

 

_ ➳  दिव्य प्रकाश की काया वाले फरिश्तो के इस अव्यक्त वतन में अपने सम्पूर्ण फ़रिश्ता स्वरूप को धारण कर, अव्यक्त बापदादा के सामने मैं उपस्थित होती हूँ और अपने अव्यक्त स्वरूप में स्थित होकर, बाहें पसारे खड़े अव्यक्त बापदादा की बाहों में समाकर, उनके प्रेम से स्वयं को भरपूर करके उनके सम्मुख बैठ जाती हूँ। *अपनी मीठी दृष्टि और मधुर मुस्कान के साथ बाबा मुझे निहारते हुए अपनी लाइट और माइट मुझ फ़रिश्ते में प्रवाहित करते जा रहें हैं*। बाबा की शक्तिशाली दृष्टि मेरे अंदर एक अनोखी शक्ति का संचार कर रही है और मुझे बाबा की श्रीमत पर चलने और उनके हर फरमान का पालन करने की प्रेरणा दे रही है।

 

_ ➳  बाबा से दृष्टि लेते हुए मैं मन ही मन सदा बाबा की श्रीमत पर चलने की स्वयं से दृढ़ प्रतिज्ञा करती हूँ और अपने निराकारी बिंदु स्वरूप में स्थित होकर अब उस प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए वापिस अपनी कर्मभूमि पर लौट आती हूँ। *कर्म करने के लिए जो शरीर रूपी रथ मुझ आत्मा को मिला हुआ है उस शरीर रूपी रथ पर पुनः विराजमान होकर मैं आत्मा अब फिर से सृष्टि रंगमंच पर अपना पार्ट बजा रही हूँ*। शरीर का आधार लेकर हर कर्म करते हुए अब बुद्धि का कनेक्शन केवल अपने शिव पिता के साथ  निरन्तर जोड़ कर, उनकी जो श्रीमत मिलती है उसे राइट समझ उस पर चलने का पूरा पुरुषार्थ अब मैं कर रही हूँ और अपने प्यारे पिता के साथ अपने सँगमयुगी ब्राह्मण जीवन का भरपूर आनन्द ले रही हूँ।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं कनेक्शन और रिलेशन द्वारा मन्सा शक्त्ति के प्रत्यक्ष प्रमाण देखने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सूक्ष्म सेवाधारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सर्व खज़ानों को सदैव सफल करती हूँ  ।*

   *मैं महादानी आत्मा हूँ  ।*

   *मैं सदा संपन्न आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  अभी समय अनुसार जैसे कहाँ-कहाँ पानी के प्यासी हैंऐसे वर्तमान समय शुद्ध, शान्तिमयसुखमय वायब्रेशन के प्यासी हैं। *फरिश्ते रूप से ही वायब्रेशन फैला सकते हो।* *फरिश्ता अर्थात् सदा ऊँच स्थिति में रहने वाले।* फरिश्ता अर्थात् *पुराने संसार और पुराने संस्कार से नाता नहीं।* अभी *संसार परिवर्तन आप सबके संस्कार परिवर्तन के लिए रुका हुआ है।* इस नये वर्ष में लक्ष्य रखो - संस्कार परिवर्तन, स्वयं का भी और सहयोग द्वारा औरों का भी। *कोई कमजोर है तो सहयोग दोन वर्णन करोन वातावरण बनाओ। सहयोग दो।*

 

 _ ➳  इस वर्ष की टापिक 'संस्कार परिवर्तन' फरिश्ता संस्कार, *ब्रह्मा बाप समान संस्कार।* तो सहज पुरुषार्थ है या मुश्किल हैथोड़ा-थोड़ा मुश्किल हैकभी भी कोई बात मुश्किल होती नहीं हैअपनी *कमजोरी मुश्किल बनाती है।* इसीलिए बापदादा कहते हैं 'हे *मास्टरसर्वशक्तिवान बच्चे,* अभी शक्तियों का वायुमण्डल फैलाओ'। अभी *वायुमण्डल को आपकी बहुत-बहुत-बहुत आवश्यकता है।* जैसे आजकल विश्व में पोल्यूशन की प्राब्लम हैऐसे विश्व में *एक घड़ी मन में शान्ति सुख के वायुमण्डल की आवश्यकता है* *क्योंकि मन का पोल्यूशन बहुत हैहवा की पोल्यूशन से भी ज्यादा है। अच्छा।*

 

✺   *ड्रिल :-  "संस्कार परिवर्तन से मन का पोल्यूशन हटाकर, शक्तियों का वायुमण्डल फैलाना"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा बाबा के प्यार की वर्सा के नीचें उनकीं याद में खोई हुईं हूँ... बाबा बड़े प्यार से ज्ञान स्नान करा रहे हैं... *चारों ओर प्रकृति भी मुझ आत्मा को देख हर्षित हो रही हैं...* मैं आत्मा प्रकृति और सर्व आत्माओ को शुद्ध, शांतिमय और सुखमय वायब्रेशन दे रही हूँ... *बाबा की याद से मुझ आत्मा से शक्तिशाली वायब्रेशन निकल रहे हैं...* जिससे सर्व आत्माओं को सुख की अनुभूति हो रही हैं... सर्व आत्माओं को लग रहा हैं कि कोई उन्हें शांति की अनुभूति करा रहा है... *उनके विचलित और अशांत मन शांत हो रहे हैं... मैं आत्मा फ़रिश्ता बन सारे ग्लोब में सुख, शांति का वायब्रेशन दे रही हूँ...* जिससे सारे विश्व में शांति और सुख की किरणें फ़ैल रही हैं... मै आत्मा देख रही हूँ... *कि प्रकृति के पाचों तत्व शांत हो गये हैं...*

 

 _ ➳  फ़रिश्ता पन की स्थिति से मै आत्मा अपने ऊचें ते ऊचें स्वमान में अपने ऊचें ते ऊचें *बाप की याद से सर्व आत्माओं को सुख और शांति का वायब्रेशन दे रही हूँ...* और ना ही *इस पुरानीं दुनियाँ से कोई रिश्ता हैं...* मैं फ़रिश्ता सारे विश्व की सेवा में बिजी हूँ... *मुझ आत्मा के सारे पुराने और कड़े संस्कार परिवर्तित हो चुके है...* और मुझ आत्मा में दैवीय संस्कार आ चुके हैं... *स्व के सहयोग और सर्व के सहयोग से मुझ आत्मा के सारे पुरानें संस्कार ख़त्म हो चुकें हैं...*  

 

 _ ➳  *मै आत्मा मास्टर सर्व शक्तिमान की स्टेज से सर्व कमज़ोर आत्माओं को सकाश दे रही हूँ...* और उन्हें सहयोग की शक्ति दे रही हूँ... *मै आत्मा किसी और आत्माओं की कमी कमज़ोरी ना देख, ना ही उनका वर्णन कर उन आत्माओं को सहयोग दे रही हूँ...* और उन्हें आगे बढ़ा रही हूँ...

 

 _ ➳  बाबा ने मुझ आत्मा को संस्कार परिवर्तन का वरदान दिया हैं... *बाबा के साथ और सर्व शक्तियों से मैं आत्मा अपने सारे पुरानें संस्कार परिवर्तन कर चुकी हूँ... जैसे ब्रह्मा बाप ने सेकंड में अपने सारे संस्कार परिवर्तित कर के फ़रिश्ता बन गए...* वैसे मै आत्मा भी अपने सारे संस्कार परिवर्तन कर चुकी हूँ... *कोई भी बात अब मुझ आत्मा के लिए मुश्किल नहीं हैं...* और ना ही कोई कमज़ोरी मुझ आत्मा में हैं... *मै आत्मा सर्व कमज़ोरियो को समाप्त कर आगे बढ़ चुकी हूँ...* 

 

 _ ➳  बाबा की दी हुई शक्तियों से *चारों ओर दिव्य वायुमंडल बन गया हैं... जिससे सर्व आत्माओ को सुख, शांति का अनुभव हो रहा है...* चारों तरफ़ दिव्य और पवित्र वायुमंडल बन चुका हैं... *सारी प्रकृति और सर्व आत्माओं को सुख और शांति की अनुभूति हो रही हैं...* सारे विश्व में शांति का वायुमंडल बन गया हैं... कितना सुखद अनुभव हैं... कि *चारों ओर शांति का वायुमंडल हैं... सबके मन से अशुद्ध संकल्प, विकल्प सब ख़त्म हो चुकें हैं...* और सर्व का सर्व शक्तियों से भर चूका हैं... *मुझ फ़रिश्ता आत्मा के साथ सारा विश्व बाबा का दिल से धन्यवाद कर रहे हैं... कि पाना था जो वो पा लिया...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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