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 02 / 02 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *बाप के समान दुःख हर्ता सुखकर्ता बनकर रहे ?*

 

➢➢ *सबको आप समान बनाने की सेवा की ?*

 

➢➢ *अधिकारी पन की स्थिति द्वारा बाप को अपना साथी बनाया ?*

 

➢➢ *सेकंड में सार से विस्तार और विस्तार से सार में जाने का अभ्यास किया ?*

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*अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  जैसे कोई शरीर में भारी है, बोझ है तो अपने शरीर को सहज जैसे चाहे वैसे मोल्ड नहीं कर सकोगें। ऐसे ही *अगर मोटी-बुद्धि है अर्थात् किसी न किसी प्रकार का व्यर्थ बोझ वा व्यर्थ किचड़ा बुद्धि में भरा हुआ है, कोई न कोई अशुद्धि है तो ऐसी बुद्धि वाला जिस समय चाहे, वैसे बुद्धि को मोल्ड नहीं कर सकेगा* इसलिए बहुत स्वच्छ, महीन अर्थात् अति सूक्ष्म-बुद्धि, दिव्य बुद्धि, बेहद की बुद्धि, विशाल बुद्धि चाहिए। ऐसी बुद्धि वाले ही सर्व सम्बन्ध का अनुभव जिस समय, जैसा सम्बन्ध वैसे स्वयं के स्वरूप का अनुभव कर सकोगें।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं एक बाप दूसरा न कोई ऐसी स्मृति में रहने वाला 'महावीर' हूँ"*

 

  सदा अपने को महावीर समझते हो? *महावीर की विशेषता - एक राम के सिवाए और कोई याद नहीं! तो सदा एक बाप दूसरा न कोई ऐसी स्मृति में रहने वाले 'सदा महावीर'। सदा विजय का तिलक लगा हुआ हो।*

 

  जब एक बाप दूसरा न कोई तो अविनाशी तिलक रहेगा। संसार ही बाप बन गया। *संसार में व्यक्ति और वस्तु ही होती, तो सर्व सम्बन्ध बाप से तो व्यक्ति आ गये और वस्तु, वह भी सर्व प्राप्ति बाप से हो गई।*

 

  *सुख-शान्ति-ज्ञान-आनन्द-प्रेम.. सर्व प्राप्तियॉं हो गई। जब कुछ रहा ही नहीं तो बुद्धि और कहाँ जायेगी, कैसे? अच्छा-*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  डबल फारेनर्स को एक सेकण्ड में कोई भी व्यर्थ बात, कोई भी निगेटिव बात, कोई भी बीती बात, उसको मन से बिन्दी लगाना आता है? डबल फारेनर्स जो समझते हैं कि कैसी भी बीती हुई बात, अच्छी बात तो भूलनी है ही नहीं, भूलनी तो व्यर्थ बातें ही होती हैं। तो *कोई भी बात जिसको भूलने चाहते हैं, उसको सेकण्ड में बिन्दी लगा सकते हैं?*

 

✧  जो फारेनर्स लगा सकते हैं, वह सीधा, लम्बा हाथ उठाओ। मुबारक हो। अच्छा, *जो समझते हैं कि एक सेकण्ड में नहीं एक घण्टा तो लगेगा ही? सेकण्ड तो बहुत थोडा है ना! एक घण्टे के बाद बिन्दी लग सकती है, वह हाथ उठाओ। जो घण्टे में बिन्दी लगा सकते हैं, वह हाथ उठाओ।*

 

✧  देखा, फारेनर्स तो बहुत अच्छे हैं। भारतवासी भी जो समझते हैं एक घण्टे में नहीं आधे दिन में बिन्दी लग सकती है, वह हाथ उठाओ। (कोई ने हाथ नहीं उठाया) हैं तो सही, बापदादा को पता है। बापदादा तो देखता रहता है, हाथ नहीं उठाते, लेकिन लगता है। लेकिन *समझो आधा दिन लगे, एक घण्टा लगे और आपको एडवांस पार्टी का निमन्त्रण आ जाए तो? तो क्या रिजल्ट होगी?*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  अगर आवाज से परे निराकार रूप में स्थित हो फिर साकार में आयेंगे, तो फिर औरों को भी उस अवस्था में ला सकेंगे। *एक सेकण्ड में निराकार एक सेकण्ड में साकार - ऐसी ड़िल सीखनी है। अभी-अभी साकारी। जब ऐसी अवस्था हो जायेगी तब साकार रूप में हर एक को निराकार रूप का आप से साक्षात्कार हो।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- खुदा दोस्त को प्यार करना"*

 

_ ➳  *प्रेम के सागर से बिछुडी मैं स्नेह की एक नन्हीं सी बूँद... स्वार्थ के इस सूखे और कंटीले रेगिस्तान में अपने वजूद को बचानें की कोशिशों में जिस राह चली, वो राहें ही मेरे लिए लिए दलदली होती चली*... प्यार के नाम पर स्वार्थ को पाया और स्वार्थ ही अपनाया... मगर अब लौट चली इन राहों से, जब निस्वार्थ प्यार का तोहफा लेकर वो मेरे प्रेम सागर मेरे दर पर आया...  *कल्प कल्प का स्नेह बरसाता वो प्रेम का सागर बैठा है मेरे सामने... और चातक के समान प्यासी मैं आत्मा उस स्नेह की बूँद-बूँद को निरन्तर पिये जा रही हूँ*...

 

  *नयनों से अविरल स्नेह बरसाते स्नेह के सागर बाप मुझ लवलीन आत्मा से बोलें:-"स्नेह सरिता मेरी मीठी बच्ची... जन्म-जन्म की पुकार का प्रत्यक्ष फल ये परमात्म प्यार अब आपने पाया है*... ब्राह्मण जीवन के आधार परमात्म प्यार से तीनो मंजिलों को पार किया... *इस प्रेम में डूबकर क्या देहभान की विस्मृति हुई है? सर्वसबंधो का रस एक बाप में पाया है? और दुनियावी आकर्षणों से छुटकारा पाया... ?*"

 

_ ➳  *निस्वार्थ प्रेम से भरपूर हो कर दैहिक सम्बन्धों के मोहपाश से मुक्त मैं आत्मा रूहानी स्नेह सागर से बोली:-" मीठे बाबा... आपके अनोखे स्नेह ने सब कुछ सहज ही भूलाया है*... त्याग करना नही पडा... स्वतः ही त्याग  कराया है, चत्तियाँ लगी ये अन्तिम जन्म की जर्जर काया, क्या मोल रह गया इसका... बदले में में इसके जब ये चमचमाता फरिश्ता रूप पाया... *सबंध संस्कार दैवी हो रहे... जीवन में दिव्यता को पाया...*"

 

  *ईश्वरीय मर्यादाओं का कंगन बाँध कर हर बंधन से छुडाने वाले मुक्तिदाता बाप मुझ आत्मा से बोले:-*" सर्व सम्बन्धों का सुख मुझ बाप से पाने वाली मेरी मीठी बच्ची... निस्वार्थ प्रेम के लिए तरसती संसार की आत्माओं को भी अब *परमात्म स्नेह का अनुभव कराओं*... सदा ही स्नेह माँगने वालो की कतार में खडे इन स्नेह के प्यासों पर परमात्म स्नेह का मीठा झरना बन बरस जाओं... *दैहिक संबन्धों में बूँद बूँद स्नेह तलाशते इन प्यासों को परमात्म संबन्धों का अनुभव कराओं...*"

 

_ ➳  *एक बाप दूसरा न कोई इस स्मृति से सब कुछ विस्मृत करने वाली मैं आत्मा दिलाराम बाप से बोली:-"मीठे बाबा... आपकी स्मृति से सर्व समर्थियाँ पायी है मैने*... स्नेह सागर को स्वयं में समाँकर अब उसी के रूप में ढलती जा रही हूँ... *परमात्म स्नेह का ये झरना मेरे स्वरूप से बेहद में बरस रहा है... प्रकृति भी परमात्म प्रेम से भरपूर हो गयी है... इस कल्प वृक्ष का तना भी भरपूर हुआ, पत्ता पत्ता प्रभु प्रेम से हरष रहा है...*"

 

  *अव्यक्त रूप में बेहद के सेवाधारी विश्व कल्याणी बाप मुझ आत्मा से बोलें:- "समर्थ संकल्पों के द्वारा व्यर्थ का खाता समाप्त करने वाली मेरी होली हंस बच्ची!... अब ये प्यार शान्ति सुख की किरणें बेहद में फैलाओं*... अपने अन्तिम स्थिति के अन्तःवाहक स्वरूप से अब सबको उडती कला का अनुभव कराओं... *नाजुक समय की नाजुकता को पहचानों और एक एक सेकेन्ड का अभ्यास बढाओं... अपने शक्ति स्वरूप से शक्तिमान का दीदार कराओं...*"

 

_ ➳  *फालो फादर कर मनसा सेवा से कमजोरों में बल भरने वाली मैं आत्मा स्नेह सागर बापदादा से  बोली:-*" मीठे बाबा... आपके निस्वार्थ प्रेम ने मँगतों से देने वालों की कतार में खडा किया है... रोम रोम आपके स्नेह में डूबा है, *जो निस्वार्थ स्नेह आपसे पाया है अब औरों पर लुटा रही हूँ... इस असीम स्नेह का कण कण मैं आप समान मनसा सेवा से चुका रही हूँ*... स्नेह के अविरल झरने अब दोनो ओर से ही झर झर बह रहे है,.. और *मैं आत्मा इस बहते स्नेह के दरिया में फिर से डूबी जा रही हूँ*...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- श्रीमत पर पवित्र बन, हर कदम बाप की मत पर चल विश्व की बादशाही लेनी है*"

 

_ ➳  पवित्रता ही मेरे ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार है। और इस श्रृंगार से सदा सजे सजाये रहने की स्वयं से प्रतिज्ञा करते - करते मैं मन बुद्धि से एक बहुत खूबसूरत पवित्र दुनिया मे पहुँच जाती हूँ। *पवित्रता के अद्भुत श्रृंगार से श्रृंगारित अनेक सुन्दर - सुन्दर परियाँ इस परीलोक में मैं देख रही हूँ*। श्वेत चमकीले वस्त्र, मस्तक पर चमकता हीरे जड़ित क्राउन, उनकी सुंदरता में जैसे चार चांद लगा रहा है। उनके अंग - अंग से निकल रही श्वेत रश्मियों से पूरा परीलोक प्रकाशित हो रहा है। 

 

_ ➳  इस परीलोक के सुंदर - सुन्दर अद्भुत नजारों को देखते - देखते मैं परिमहल के अंदर प्रवेश करती हूँ। *सामने रत्न जड़ित सिहांसन पर रानी परी बैठी है जो मुझे देखते ही बड़े प्यार से अपने पास बुलाती है और जैसे ही मुझे छूती है मेरी काया उसके समान प्रकाश की बन जाती है*। बाकी परियों के समान मैं भी उस परीलोक की परी बन अब उस खूबसूरत परीलोक में उनके साथ विहार कर रही हूँ। 

 

_ ➳  परीलोक के सुंदर नजारो का भरपूर आनन्द लेने के बाद मैं रानीपरी के पास पहुँचकर एक विचित्र दृश्य देखती हूँ। *रानी परी के रूप में मेरे सामने मम्मा बैठी है और बाकी परियों के रूप में वो सभी वरिष्ठ दादियां बैठी है जिन्होंने कठोर तप किया और सम्पूर्ण पवित्रता को अपने ब्राह्मण जीवन मे धारण किया तथा ज्ञान और योग से स्वयं को निखार कर खूबसूरत परीलोक की परियाँ बन गई*। 

 

_ ➳  अब मैं देखती हूँ उन सबको परीलोक की परियाँ बनाने वाले बापदादा एकाएक मेरे सामने उपस्तिथ होते हैं। *मुझे अपने पास आने का इशारा कर, पवित्रता के श्रृंगार से मुझे सदा सजे सजाये रहने का वरदान देकर अपनी शक्तिशाली दृष्टि से बाबा मुझे भरपूर कर देते हैं*। बड़े प्यार से बाबा मुझे अपने पास बिठाकर, प्यार भरी नजरों से मुझे निहारते हुए, पवित्रता की शक्ति से मेरा श्रृंगार करते हैं। *मेरे गले मे दिव्य गुणों का हार और हाथों में मर्यादाओं के कंगन पहना कर सर्व ख़ज़ानों से बाबा मेरी झोली भर देते हैं और सुख, शांति, पवित्रता, प्रेम, आनन्द, शक्ति और गुणों से मुझे भरपूर कर देते हैं*।

 

_ ➳  पवित्रता के श्रृंगार से सजे अपने सुन्दर सलौने स्वरूप को और अधिक निखारने के लिए अब मैं अनादि पवित्र स्वरूप में स्थित होकर, पवित्रता की किरणें चारों ओर फैलाती हुई, पवित्रता के सागर अपने शिव पिता के पास उनकी पवित्र दुनिया परमधाम की ओर चल पड़ती हूँ। *पवित्रता के सागर, अपने प्राणेश्वर शिव बाबा के सम्मुख जा कर मैं बैठ जाती हूँ और उनकी पवित्रता की शक्ति से स्वयं को भरपूर करने लगती हूँ*। पवित्रता की अनन्त किरणे बाबा से निकल कर मुझ आत्मा के ऊपर निरन्तर प्रवाहित हो रही हैं जिससे मुझ आत्मा के उपर चढ़ा विकारों का किचड़ा धुल रहा है और मैं आत्मा स्वच्छ बन रही हूँ।

 

_ ➳  स्वच्छ और पवित्र बन कर मैं आत्मा अब अपने इसी अनादि स्वरूप में परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और नीचे साकार सृष्टि पर आकर अपने साकारी तन में प्रवेश कर जाती हूँ। *अपने ब्राह्मण जीवन के स्लोगन "पवित्रता ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार है" को सदैव स्मृति में रख मनसा, वाचा, कर्मणा सम्पूर्ण पवित्रता को अपने जीवन में धारण करने पर अब मैं पूरा अटेंशन दे रही हूँ*। पवित्रता का हथियाला बांध, गृहस्थ व्यवहार में कमल पुष्प समान रहकर अपनी रूहानियत की खुश्बू अब मैं चारों और फैला रही हूँ। 

 

_ ➳  *अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली सर्व आत्माओं के प्रति आत्मा भाई - भाई की दृष्टि मुझे प्रवृति में रहते भी पर - वृति का अनुभव करवा रही है। पवित्रता की गहन धारणा से अतीन्द्रीय सुख की अनुभूति करते हुए परिस्तान की परी बनने का पुरुषार्थ अब मैं निरन्तर कर रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं अधिकारिपन की स्थिति स्वरूप आत्मा हूँ।*

   *मैं बाप को अपना साथी बनाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सदा विजयी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सेकंड में सार से विस्तार और विस्तार से सार में जाने की अभ्यासी हूँ  ।*

   *मैं राजयोगी आत्मा हूँ  ।*

   *मैं आत्मा तीव्र पुरुषार्थी हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  (बापदादा ने बहुत पावरफुल ड्रिल कराई) अच्छा - यही अभ्यास हर समय बीच-बीच में करना चाहिए। *अभी-अभी कार्य में आये, अभी-अभी कार्य से न्यारे, साकारी सो निराकारी स्थिति में स्थित हो जाएं।* ऐसे ही यह भी अनुभव देखा, *कोई समस्या भी आती है तो ऐसे ही एक सेकण्ड में साक्षीदृष्टा बन, समस्या को एक साइडसीन समझ, तूफान को तोहफा समझ उसको पार करो।* अभ्यास है ना? आगे चलकर तो ऐसे अभ्यास की बहुत आवश्यकता पड़ेगी। फुल स्टाप। क्वेश्चन मार्क नहीं, यह क्यों हुआ, यह कैसे हुआ? हो गया। *फुलस्टाप और अपने फुल शक्तिशाली स्टेज पर स्थित हो जाओ। समस्या नीचे रह जायेगी, आप ऊँची स्टेज से समस्या को साइडसीन देखते रहेंगे।* अच्छा।

 

✺   *ड्रिल :-  "समस्या को साइड-सीन समझ पार करने का अनुभव करना"*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा फरिश्ता स्वरुप की प्रकाशमय काया में हूँ... मेरे सामने मीठे बापदादा खड़े हैं... जिन्हें देखकर मैं फरिश्ता अति आनंदित हो रहा हूँ... मीठे बापदादा मुझे सर्व शक्तियों और गुणों से श्रृंगार रहे हैं...* अपने बापदादा के साथ के ये पल कितने सुंदर हैं... कितने सुहाने हैं... बापदादा मेरा हाथ पकड़ मुझे सैर के लिए ले जाते हैं... मैं आत्मा रूहानी नशे और ख़ुमारी में मगन हो... प्यारे बापदादा के साथ चल रही हूँ...

 

 _ ➳  *बापदादा मुझे प्रकृति के भिन्न-भिन्न सीन दिखा रहे हैं...* मुझे कभी लहलहाते खेतों में ले जाते हैं... कभी सुरम्य वादियों में... जहां की हरियाली मन को आनंदित कर रही है... बाबा कभी मुझे नदी, झील, झरनों के किनारे ले जाते हैं... जहां का कल कल करता जल समूचे वातावरण में... मधुर ध्वनि घोल रहा है... चारों और शीतलता फैला रहा है... पक्षियों का कलरव कानों में मधुरस बरसा रहा है... कभी बापदादा मुझे दुर्गम रास्तों पर, दुर्गम पहाड़ियों पर ले जाते हैं... जहां कुछ कदम चलना ही जोखिम भरा है... कभी बाबा मुझे रेगिस्तान में चिलचिलाती धूप का, कभी अतिवृष्टि, तो कभी अनावृष्टि का सीन दिखाते हैं... *ये विभिन्न सीन सीनरियाँ दिखाते हुए मानो बाबा कह रहे हैं कि... यह विविधता ही प्रकृति का सौंदर्य है... हमें हर सीन का आनंद लेना है...*

 

 _ ➳  बाबा से मिली इस टचिंग पर मैं आत्मा गहराई से चिंतन कर रही हूँ... बाबा अब मुझे रूहानी ड्रिल करा रहे हैं... मैं निराकारी स्थिति में स्थित हूँ... मैं प्रकाश की मणि हूँ... ज्योतिबिंदु आत्मा हूँ... अपने बिंदी बाबा से सर्व शक्तियां स्वयं में समाती जा रही हूँ... *मैं प्रकाशमय आत्मा अपने स्थूल शरीर में प्रवेश करती हूँ... मैं सब प्रकार के कर्मबन्धनों से, कर्मों के प्रभाव से मुक्त हूँ...* मैं देह से न्यारी निराकार आत्मा हूँ... मैं आत्मा निमित्त मात्र ट्रस्टी बनकर हर कर्म कर रही हूँ... देह, कर्म का बंधन मुझे बांध नहीं सकता... मैं सर्व बंधनों से मुक्त न्यारी और प्रभु प्यारी आत्मा हूँ... *मैं आत्मा सेकेंड में देह से न्यारे होने का अभ्यास कर रही हूँ... कर्म में आना और सेकंड में अशरीरी बनना... मुझ आत्मा के लिए सहज बनता जा रहा है...*

 

 _ ➳  मैं साक्षी होकर हर परिस्थिति को देख रही हूँ... जीवन में सुखदाई पल भी आते हैं... तो चैलेंजिंग घड़ियाँ भी आती हैं... *हर परिस्थिति में मैं आत्मा स्वयं को डिटैच देख रही हूँ... मैं आत्मा हर पल का आनंद ले रही हूँ...* जैसे ट्रेन, बस में यात्रा करते हैं उसमें हर सीन का हम आनंद लेते हैं क्योंकि हमें पता होता है कि यह साइड सीन हैं... ये आने ही हैं... इन्हें हम बदल नहीं सकते... ठीक इसी प्रकार *मैं आत्मा जीवन में आने वाली हर परिस्थिति को साक्षी होकर देख रही हूँ...*

 

 _ ➳  जीवन यात्रा में आने वाला हर विघ्न, समस्या मुझ शक्तिशाली आत्मा के लिए एक तोहफा बन रही है... जो मुझे आगे बढ़ाने की, सफलता और संपूर्णता की ओर ले जाने की सीढ़ी बन गई है... *मैं सेकंड में बिंदी रूप में स्थित हो रही हूँ... क्यों, क्या के प्रश्नों से मुक्त होकर मैं प्रसन्नचित आत्मा बन रही हूँ...* मैं व्यर्थ बातों से मुक्त होती जा रही हूँ... मैं कल्याणकारी आत्मा, कल्याणकारी बाबा और कल्याणकारी ड्रामा की स्मृति से व्यर्थ को सेकंड में फुलस्टॉप लगा रही हूँ... बातों को जल्दी जल्दी खत्म कर रही हूँ... *फुलस्टॉप लगाने और अपने शक्तिशाली फरिश्ता स्टेज की ऊंची स्थिति में... स्थित होने के कारण बातें नीचे ही रह जाती हैं... और बातों का प्रभाव मुझ पर नहीं हो रहा है...* मैं बातों को साइडसीन मानकर उन्हें सहजता से क्रॉस कर रही हूँ... जीवन के हर पल का मीठे बाबा के साथ से आनंद ले रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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