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 02 / 09 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *ड्रामा का कोई सीन देखकर हर्ट फ़ैल तो नहीं हुआ ?*

 

➢➢ *सर्व आत्माओं का कल्याण किया ?*

 

➢➢ *डबल सेवा द्वारा अलोकिक शक्ति का साक्षातकार करवाया ?*

 

➢➢ *सर्व प्रति गुणग्राहक बन ब्रह्मा बाप को फॉलो किया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जैसे वृक्ष का रचयिता बीज, जब वृक्ष की अन्तिम स्टेज आती है तो वह फिर से ऊपर आ जाता है। ऐसे बेहद के मास्टर रचयिता सदा अपने को इस कल्प वृक्ष के ऊपर खड़ा हुआ अनुभव करो, बाप के साथ-साथ वृक्ष के ऊपर मास्टर बीजरूप बन शक्तियों की, गुणों की, शुभ भावना-शुभ कामना की, स्नेह की, सहयोग की किरणें फैलाओ।* जैसे सूर्य ऊंचा रहता है तो सारे विश्व में स्वत: ही किरणें फैलती हैं। ऐसे मास्टर रचयिता वा मास्टर बीजरूप बन सारे वृक्ष को किरणें वा पानी दे सकते हो।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सफलता का सितारा हूँ"*

 

✧  सदा अपने को चमकता हुआ सितारा अनुभव करते हो? जैसे आकाश के सितारे सभी को रोशनी देते हैं ऐसे आप दिव्य सितारे विश्व को रोशनी देने वाले हो ना! सितारे कितने प्यारे लगते हैं! तो आप दिव्य सितारे भी कितने प्यारे हो! सितारों में भी भिन्न-भिन्न प्रकार के सितारे गाये जाते हैं। *एक हैं साधारण सितारे और दूसरे हैं लक्की सितारे और तीसरे हैं सफलता के सितारे। तो आप कौन-से सितारे हो? सभी सफलता के सितारे हो! सफलता मिलती है कि मेहनत करनी पड़ती है? कम्बाइन्ड कम रहते हो इसलिए सफलता भी कम मिलती है।*

 

✧  क्योंकि जब सर्वशक्तिमान् कम्बाइण्ड है तो शक्तियां कहाँ जायेंगी? साथ ही होगी ना। *और जहाँ सर्व शक्तियां हैं वहाँ सफलता न हो, यह असम्भव है। तो सदा बाप से कम्बाइन्ड रहने में कमी है इस कारण सफलता कम होती है या मेहनत करने के बाद सफलता होती है। क्योंकि जब बाप मिला तो बाप मिलना अर्थात् सफलता जन्म सिद्ध अधिकार है।* नाम ही अधिकार है तो अधिकार कम मिले, यह हो नहीं सकता। तो सफलता के सितारे, विश्व को ज्ञान की रोशनी देने वाले हैं। मास्टर सर्वशक्तिमान् के आगे सफलता तो आगे-पीछे घूमती है। तो कम्बाइन्ड रहते हो या कभी कम्बाइन्ड रहते हो, कभी माया अलग कर देती है। जब बाप कम्बाइन्ड बन गये तो ऐसे कम्बाइन्ड रूप को छोड़ना हो सकता है क्या? कोई अच्छा साथी लौकिक में भी मिल जाता है तो उसको छोड़ सकते हैं? ये तो अविनाशी साथी है। कभी धोखा देने वाला साथी नहीं है। सदा ही साथ निभाने वाला साथी है। तो ये नशा, खुशी है ना, जितना नशा होगा कि स्वयं बाप मेरा साथी है उतनी खुशी रहेगी। तो खुशी रहती है? (बहुत रहती है) बढ़ती रहती है या कम और ज्यादा होती रहती है? कोई बात आती है तो कम होती है? थोड़ा तो कम होती है! फिर सोचते हैं क्या करें, वैसे तो ठीक है, लेकिन बात ही ऐसी हो गई ना।

 

✧  कितनी भी बड़ी बात हो लेकिन आप तो मास्टर रचता हो, बात तो रचना हैं। तो रचता बड़ा होता है या रचना बड़ी होती है? कभी कोई बात में घबराने वाले तो नहीं हो? वहाँ जाकर कोई बात आ जाये तो घबरायेंगे नहीं? देखना, वहाँ जायेंगे तो माया आयेगी। फिर ऐसे तो नहीं कहेंगे कि मैंने तो समझा नहीं था, ऐसे भी हो सकता है! *नये-नये रूप में आयेगी, पुराने रूप में नहीं आयेगी। फिर भी बहादुर हो। निश्चय है कि अनेक बार बने हैं, अब भी हैं और आगे भी बनते रहेंगे। निश्चय की विजय है ही। मास्टर सर्वशक्तिमान् की स्मृति में रहने वाले कभी घबरा नहीं सकते।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  हर कर्म करते कर्मयोगी आत्मा' अनुभव करते हो? कर्म और योग सदा साथ-साथ रहता है? *कर्मयोगी हर कर्म में स्वतः ही सफलता को प्राप्त करता है।* कर्मयोगी आत्मा कर्म का प्रत्यक्ष फल उसी समय भी अनुभव करता और भविष्य भी जमा करता, तो डबल फायदा हो गया ना।

 

✧  ऐसे डबल फल लेने वाली आत्मायें हो। *कर्मयोगी आत्मा कभी कर्म के बंधन में नहीं फंसेगी।* सदा न्यारे और सदा बाप के प्यारे। *कर्म के बंधन से मुक्त - इसको ही कर्मातीत कहते हैं।* कर्मातीत का अर्थ यह नहीं है कि कर्म से अतीत हो जाओ। *कर्म से न्यारे नहीं, कर्म के बंधन में फँसने से न्यारे,* इसको कहते हैं - कर्मातीत।

 

✧  *कर्मयोगी स्थिति कर्मातीत स्थिति का अनुभव कराती है।* तो किसी बंधन में बंधने वाले तो नहीं हो ना? औरों को भी बंधन से छुडाने वाले। *जैसे बाप ने छुडाया, ऐसे बच्चों का भी काम है छुडाना,* स्वयं कैसे बंधन में बंधेगे?

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ सेवा का विस्तार भल कितना भी बढ़ाओ लेकिन विस्तार में जाते सार की स्थिति का अभ्यास कम न हो, *विस्तार में सार भूल न जाये। खाओ-पियो, सेवा करो लेकिन न्यारेपन को नही भूलो। वाणी द्वारा भी कहां तक सेवा करेंगे, कितने की करेंगे! अब तो रूहानी वायब्रेशन, अशरीरीपन की स्थिति के वायब्रेशन, न्यारे और प्यारेपन के शक्तिशाली वायब्रेशन वायुमण्डल में फैलाओ। सेवा की तीव्रगति का साधन भी यही है।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  सबको अमरपुरी का रास्ता बताना"*

 

_ ➳  कर्मक्षेत्र पर मीठे बाबा की यादो में खोयी हुई थी... कि मीठे बाबा ने वतन से आवाज दी... और मै आत्मा प्रियतम की आवाज पर मद्होश हो... सूक्ष्म शरीर संग वतन में पहुंची... मीठे बाबा ने कहा :- "बच्चों को जी भर देखने को मुझ पिता का दिल सदा ही आतुर रहता है... मेरे सारे बच्चे सुखी हो जाएँ... सुखो में मुस्कराये... यही चिंतन पिता दिल निरन्तर करता है... मीठे बाबा को देख, मै आत्मा मन्द मन्द मुस्कराने लगी... और कहा मीठे बाबा, *मै हूँ ना... सबको सच्चा रास्ता बताउंगी और आपकी बाँहों में लाकर सजाऊँगी..*."

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा की ओर एक मीठी आस भरी नजरो से देख रहे हे.. और कह रहे :-* "मीठे प्यारे बच्चे... अपने सभी भाई बहनो को यह सच्चा रास्ता बताओ... *सबके दामन में आप समान खुशियो के फूल खिलाओ..*. सच्चे प्रेम और सुख, शांति का अहसास, हर दिल को कराओ... दुखो में कुम्हलाये से मेरे बच्चों को, सच्ची ज्ञान रश्मियों में लाकर... सच्ची मुस्कान से पुनः महकाओ..."

 

_ ➳  *प्यारे बाबा की मीठी दिली आरजू सुनकर मै आत्मा कह उठी :-* " मीठे बाबा... आपके सारे अरमान मेरी पलको पर है... आपकी सेवाओ में यह दिल तो दीवाना सा है... आपके प्यार में, मै आत्मा *मा ज्ञान सागर बनकर... इन सत्य ज्ञान की किरणों को हर मनुष्य तक पहुंचा रही हूँ.*.. और मीठी मुस्कानों से उन्हें सजा रही हूँ..."

 

   *ईश्वरीय सेवाओ में मेरा दीवानापन देख... मीठे बाबा मनमोहिनी मुस्कान लिए वरदानी हाथो से मुझे श्रंगारने लगे... और बोले :-* " लाडले बच्चे मेरे... इस धरा पर दुःख का अब नामोनिशान भी न रहे... *सारा ब्रह्मांड खुशियो की चहचहाहट से गुंजायमान हो उठे.*.. विश्व की सारी आत्माये अज्ञान अन्धकार से निकल... ज्ञान किरणों में रौशन हो मुस्कराये... "

 

_ ➳  *विश्वकल्याणकारी पिता के मन को सुनकर... मै आत्मा विश्व कल्याण से ओतप्रोत हो उठी... और कहने लगी :-* " हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा सबको सुखदायी बनाती जा रही हूँ... जन्म जन्मांतर के दुखो से सबको मुक्ति दिलाती जा रही हूँ... सारी आत्माये दुःख और पापो के बोझों से छूटती जा रही है... *हर आत्मा सच्चे सुख की अनुभूति में डूब रही है.*.."

 

   *मनमीत बाबा ईश्वरीय सेवाओ में मेरे जोश और जूनून पर फ़िदा हो गए... और कहने लगे :-* "जब संसार पर नजर भर घुमायी तो... आप बच्चों की चमक पर नजरे ही ठहर गयी... मेरे बच्चे ही विश्व का कल्याण कर खुशियो भरा सतयुग इस धरा को बनाएंगे... यह पिता दिल बच्चों का दीवाना हो गया... मेरे महकते नन्हे नन्हे फूल बच्चे... *सारे काँटों को सहज ही खुशनुमा पुष्प सा खिलायेंगे, यह बरबस कह उठा..*."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा का इतना प्यार, दुलार और विश्वास देखकर... स्नेह आँसुओ से भर गई... और कहा :-*. "प्यारे बाबा... *आपने सच्चे साथी बनकर मेरा जीवन अथाह खुशियो से सजाया है.*.. यह ख़ुशी की दौलत पाकर मै आत्मा आपकी रोम रोम से ऋणी हूँ... यह सच है की यह खुशियां हर दिल आँचल में भरकर... कण मात्र ऋण भी न उतार पाऊँगी..." ऐसी मीठी गुफ्तगू कर, स्नेह के मोती लिये, मै आत्मा स्थूल जगत में लौट आई...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- ड्रामा की किसी भी सीन को देख कर हार्ट फेल नही होना है*"

 

_ ➳  ड्रामा के पट्टे पर खड़े होकर, इस बेहद के ड्रामा में वैरायटी आत्माओं के वैरायटी पार्ट को देख मन ही मन मैं विचार करती हूँ कि कितना वन्डरफुल है ये ड्रामा! *इस सृष्टि ड्रामा में हर आत्मा अपना - अपना पार्ट प्ले कर रही है और एक का पार्ट भी दूसरे के पार्ट से मैच नही करता। हर आत्मा कल्प पहले मुआफ़िक अपना पार्ट बिल्कुल ऐक्यूरेट बजा रही है*। बाबा ने ड्रामा के इस राज को स्पष्ट करके जीवन को कितना सहज बना दिया है। इस राज को जानने से क्या, क्यो और कैसे की क्यू में उलझने की बजाए  सेकण्ड में फुल स्टॉप लगाना कितना सरल हो गया है। *ड्रामा के पट्टे पर खड़े होकर, ड्रामा के हर राज को अच्छी रीति समझ लेने से जीवन को जैसे एक नई दिशा मिल गई है*।

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण जीवन मे निरन्तर आगे बढ़ते हुए, ड्रामा के हर राज को अच्छी रीति समझ अडोल रहने का पुरुषार्थ करते हुए, अब मुझे अपने सम्पूर्णता के लक्ष्य को जल्द से जल्द प्राप्त करना है *मन ही मन स्वयं से दृढ़ प्रतिज्ञा कर, ड्रामा के हर खूबसूरत पहलू से परिचित कराने वाले अपने प्यारे मीठे बाबा से मीठी मीठी रूहरिहान करने, उनसे मंगल मिलन मनाने और ड्रामा के पट्टे पर सदा अचल, अडोल रहने का उनसे वरदान प्राप्त करने के लिए मैं अपने प्यारे बाबा की याद में अपने मन और बुद्धि को एकाग्र करती हूँ* और सेकेण्ड में अशरीरी होकर, देह से बिल्कुल न्यारा एक अति सूक्ष्म चैतन्य सितारा बन भृकुटि के अकालतख्त से बाहर आ जाता हूँ और अपने बिंदु बाप के पास उनके धाम की ओर चल पड़ता हूँ।

 

 

_ ➳  परमधाम में स्थित मेरे बिंदु बाप से आ रही परमात्म शक्तियों की लाइट मुझ बिंदु सितारे के साथ कनेक्ट होकर मुझे बिल्कुल सहज रीति ऊपर की ओर खींच रही है और *मैं चैतन्य सितारा, इस परमात्म लाइट के साथ कनेक्ट होकर, स्वयं को हर चीज से उपराम अनुभव करते हुए, धीरे - धीरे ऊपर आकाश की ओर उड़ता जा रहा हूँ*। मेरे बिंदु पिता से आ रही परमात्म शक्तियों की लाइट मुझे अति शीघ्र 5 तत्वों की बनी साकारी दुनिया को पार कराये, फरिश्तो की आकारी दुनिया से ऊपर, आत्माओं की उस निराकारी दुनिया में ले आई है जहाँ पहुँच कर मैं आत्मा गहन विश्राम की स्थिति का अनुभव कर रही हूँ। 

 

_ ➳  एक ऐसी दुनिया में मैं स्वयं को देख रही हूँ जहाँ ना साकार देह का कोई बन्धन है और ना ही सूक्ष्म देह का कोई भान है केवल चमकती हुई निराकारी बिंदु आत्मायें अपने बिंदु बाप की अनन्त शक्तियों की किरणों रूपी बाहों में सिमट कर, उनके प्यार और उनकी शक्तियों से स्वयं को भरपूर कर रही हूँ। *बिंदु बाप के साथ अपने बिंदु बच्चो का यह मंगल मिलन मन को असीम आनन्द का अनुभव करवा रहा है*। अपने बिंदु पिता से मिलन मनाने के लिए मैं बिंदु आत्मा अब धीरे - धीरे उनके पास पहुँचती हूँ ओर उनकी सर्वशक्तियों की किरणों की छत्रछाया के नीचे जाकर बैठ जाती हूँ। 

 

_ ➳  विकारों की प्रवेशता के कारण मुझ आत्मा की बैटरी जो डिसचार्ज हो गई थी वो अब परमात्म शक्तियों से चार्ज हो गई है और मैं आत्मा जैसे लाइट हाउस बन गई हूँ। *परमात्म शक्तियों से भरपूर होकर स्वयं को मैं बहुत ही शक्तिशाली अनुभव कर रही हूँ। शक्तियों का पुंज बनकर, बेहद के सृष्टि ड्रामा में अपना खूबसूरत पार्ट बजाने के लिए मैं वापिस साकार सृष्टि पर लौट आती हूँ*। फिर से 5 तत्वों की साकारी दुनिया में, अपने साकारी तन में प्रवेश कर ड्रामा के पट्टे पर आकर खड़ी हो जाती हूँ। 

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर ड्रामा के हर राज को गहराई से समझ, साक्षी दृष्टा बन, ड्रामा की हर सीन को साक्षी होकर देखते हुए, हर परिस्थिति में अचल अडोल रहने का अब मैं पुरुषार्थ कर रही हूँ। *"सृष्टि का यह नाटक अब पूरा हो रहा है" यह स्मृति मुझे हर आकर्षण से मुक्त और हर चीज से उपराम करके, ड्रामा के राज को अच्छी रीति समझ, स्वयं को अचल, अडोल और एकरस बनाने में सहयोग दे रही है*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं डबल सेवा द्वारा अलौकिक शक्त्ति का साक्षात्कार कराने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं विश्व सेवाधरी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सर्व प्रति गुणग्राहक हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा फॉलो ब्रह्मा बाप को करती हूँ  ।*

   *मैं संगमयुगी ब्राह्मण आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  १. अभी भी समय और संकल्प - ना अच्छे मेंना बुरे में होते हैं। *तो बुरे में नहीं हुआ ये तो बच गये लेकिन अच्छे में जमा हुआ? समझा?* समय कोसंकल्प को बचाओजितना अभी बचत करेंगेजमा करेंगे तो सारा कल्प उसी प्रमाण राज्य भी करेंगे और पूज्य भी बनेंगे।

 

 _ ➳  २. लेकिन एक अटेन्शन रखना - अगर मानो आपका आज के दिन जमा का खाता बहुत कम हुआ तो कम देख करके दिलशिकस्त नहीं होना। और ही समझो कि अभी भी हमको चांस है जमा करने का। अपने को उमंग- उत्साह में लाओ। *अपने आपसे रेस करोदूसरे से नहीं। अपने आपसे रेस करो कि आज अगर ८ घण्टे जमा हुए तो कल १० घण्टे हो। दिलशिकस्त नहीं होना*। क्योंकि अभी फिर भी जमा करने का समय है। अभी टू लेट का बोर्ड नहीं लगा है। फाइनल रिजल्ट का टाइम अभी एनाउन्स नहीं हुआ है। जैसे लौकिक में पेपर की डेट फाइनल हो जाती है तो अच्छे पुरुषार्थी क्या करते हैं? दिलशिकस्त होते हैं या पुरुषार्थ में आगे बढ़ते हैंतो आप भी दिलशिकस्त नहीं बनना। और ही उमंग-उत्साह में आकरके दृढ़ संकल्प करो कि मुझे अपने जमा का खाता बढ़ाना ही है। समझा?दिलशिकस्त तो नहीं होंगेफिर बाप को मेहनत करनी पड़े! फिर बड़े-बड़े पत्र लिखना शुरु कर देंगे - बाबा क्या हो गया... ऐसा हो गया... ! बाबा बचाओबचाओ - ऐसे नहीं कहना। *देखो आपके जड़ चित्रों से जाकर मांगनी करते हैं कि हमको बचाओ। तो आप बचाने वाले होबचाओ-बचाओ कहने वाले नहीं*।

 

 _ ➳  ३.  ये अपने आप चेक करो और चेक करके चेंज करो। *दिलशिकस्त नहीं बनोचेंज करो। जब बाप साथ है तो बाप को यूज करो ना*! यूज कम करते होसिर्फ कहते हो बाबा साथ हैबाबा साथ है। यूज करो। *जब सर्वशक्तिमान साथ है तो सफलता तो आपके चरणों में दौड़नी है*। 

 

✺   *ड्रिल :-  "समय और संकल्प जमा करने में बापदादा को यूज करना"*

 

 _ ➳  अपने लाइट के सूक्ष्म आकारी स्वरूप में मैं नन्हा सा फ़रिशता अपनी शिव माँ की किरणों रूपी गोद मे बैठा उनकी ममतामयी गोद का अनुपम सुख प्राप्त कर रहा हूँ। मेरी शिव माँ अपनी सर्वशक्तियों रूपी किरणों की बाहों के झूले में मुझे झुला रही है। उनकी किरणों रूपी बाहों का कोमल स्पर्श मेरे मन को आनन्दित कर रहा है। *अपनी बाहों के झूले में झुलाते - झुलाते मेरी शिव माँ अब मुझे अपनी गोद मे उठाये कहीं दूर ले कर चल पड़ती है*। एक बहुत खूबसूरत प्रकृतिक सौंदर्य से भरपूर, दुनिया की भीड़ से अलग बहुत खुले स्थान पर मेरी शिव माँ मुझे ले आती है और अपनी किरणों रूपी बाहों की गोद से मुझे नीचे उतार कर मेरे साथ खेलने लगती है।

 

 _ ➳  कभी मैं नन्हा फ़रिशता उड़ कर अपनी शिव माँ को पकड़ता हूँ और कभी मेरी शिव मां मुझे पकड़ती है। *अपनी शिव माँ के साथ अनेक प्रकार के खेल खेलने के बाद मैं उनकी गोद मे सिर रख कर सो जाता हूँ* और जब नींद से जागता हूँ तो स्वयं को परियों की एक बहुत सुंदर दुनिया मे देखता हूँ। जहां अथाह खजानों के ढेर लगे हुए हैं।

 

 _ ➳  तभी मेरी शिव माँ अव्यक्त ब्रह्मा माँ के आकारी रथ में विराजमान हो कर मेरे पास आती है और मेरे हाथ मे सर्व खजानों की चाबी रख देती है और मुझ से कहती है मेरे बच्चे इन सर्व खजानों के आप मालिक हो। जितना चाहे इन खजानों को यूज़ करो। जितना यूज़ करेंगे उतने यह खजाने बढ़ते जायेंगे। *अपनी शिव माँ से सर्व खजानों की चाबी ले कर मैं फ़रिशता सर्व खजानों को बढ़ाने का जो मुख्य आधार है "समय और संकल्प" उसे जमा करने के तीव्र पुरुषार्थ में लग जाता हूँ*।

 

 _ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर, *बापदादा को यूज़ करते हुए अब मैं शुद्ध संकल्पो की रूहानी लिफ्ट पर सवार हो कर कभी निराकारी स्थिति में, कभी आकारी स्थिति में और कभी साकारी स्थिति में स्थित हो कर स्वयं को शक्तिशाली बना रही हूँ*। समय के वरदानों को स्वयं प्रति और सर्व प्रति कार्य मे लगा कर मैं हर सेकण्ड को सफल कर रही हूं।

 

 _ ➳  मनबुध्दि को शुद्ध और श्रेष्ठ संकल्पो में बिजी रख अपनी स्वस्थिति को शक्तिशाली बना कर मैं मायाजीत बनती जा रही हूं। *सर्वशक्तिवान बाप की छत्रछाया के नीचे स्वयं को सदा अनुभव करने से, बापदादा की सर्वशक्तियों की अधिकारी बन मैं उचित समय पर उचित शक्ति का प्रयोग कर हर प्रकार की मेहनत से स्वयं को मुक्त अनुभव कर रही हूं*। कोई भी परिस्थिति अब मुझे दिलशिकस्त नही बना सकती।

 

 _ ➳  कदम कदम पर बापदादा को अपने साथ अनुभव करने और बाबा की शिक्षाओं पर बार - बार मनन करने से मेरी बुद्धि समर्थ बनती जा रही है। *ज्ञान रत्नों को धारण कर अपनी बुद्धि को समर्थ बना कर, ज्ञान रत्नों की व्यापारी बन अब मैं अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली सर्व आत्माओं को ज्ञान रत्न दे कर सर्व खजानों के जमा का आधार "समय" और "संकल्प" के श्रेष्ठ खजाने को सफल करते हुए सदा और सहज सफ़लतामूर्त बनती जा रही हूं*।

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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