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 02 / 12 / 18  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *आत्माओं को अंचली दे उनकी शांति की प्यास को बुझाया ?*

 

➢➢ *आत्मिक रूप के भाइयों को भाई-भाई की दृष्टि दी ?*

 

➢➢ *अशांति की विदाई सेरेमनी मनाई ?*

 

➢➢ *सर्व आत्माओं के प्रति शुभ भावना रखी ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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〰✧  जब स्वयं को अकालमूर्त आत्मा समझेंगे तब अकाले मृत्यु से, अकाल से, सर्व समस्याओं से बच सकोगे। *मानसिक चिन्तायें, मानसिक परिस्थितियों को हटाने का एक ही साधन है - अपने इस पुराने शरीर के भान को मिटाना। देह-अभिमान को मिटाने से सर्व परिस्थितियाँ मिट जायेंगी।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं अतीन्द्रिय सुख में रहने वाली आत्मा हूँ"*

 

   सदा अतीन्द्रिय सुख में रहते हो? *अतीन्दिय सुख अर्थात् आत्मिक सुख। इन्द्रियों का सुख नहीं लेकिन आत्मिक सुख। आत्मा अविनाशी है तो आत्मिक सुख भी अविनाशी होगा। इन्द्रियाँ खुद ही विनाशी हैं तो सुख भी विनाशी होगा। कोई भी विनाशी यानी थोड़े समय का सुख नहीं चाहते हैं।* अगर किसी को भी कहो - 2 घण्टे का सुख ले लो और 22 घण्टे का दु:ख ले लो तो कौन मानेगा। यही सोचेगा कि सदा सुख हो, दु:ख का नाम-निशान न हो।

 

  तो अतीन्द्रिय सुख अविनाशी है। इन्द्रियों के सुख के अनुभवी भी हो और अतीन्द्रिय सुख के अनुभवी भी हो। तो क्या अच्छा लगता है? अतीन्द्रिय सुख अच्छा या इन्द्रियों का सुख अच्छा? *तो अच्छी चीज को कभी छोड़ा नहीं जाता, भूला नहीं जाता, भूलना चाहें तो भी नहीं भूलेंगे। तो सदा अतीन्द्रिय सुख में रहने वालों के पास दु:ख का नाम-निशान नहीं आ सकता, असम्भव।* कई कहते हैं - मेरे को दु:ख नहीं होता लेकिन दूसरा दु:ख देता है तो क्या करें? दूसरा देता है तो लेते क्यों हो? कोई भी चीज आपको दे और आप नहीं लो तो वह किसके पास रहेगी? उसके पास ही रहेगी ना।

 

  *देने वाले तो देंगे, उनके पास है ही दु:ख लेकिन आप नहीं लो। आपका स्लोगन है - 'सुख दो, सुख लो। न दु:ख दो, न दु:ख लो'। लेकिन गलती कर देते हो। इसलिए थोड़ी दु:ख की लहर आ जाती है। कोई दु:ख दे तो उसे भी परिवर्तन कर उसको सुख दे दो, उसको भी सुखी बना दो। सुखदाता के बच्चे हो, सुख देना और सुखी रहना - यही आपका काम है।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  ये मन बहुत चंचल है और बहुत क्वीक है, एक सेकण्ड में आपको फारेन घुमाकर आ सकता है तो क्या सुना? बालक सो मालिक। *ऐसे नहीं खुश रहना - बालक तो बन गये, वर्सा तो मिल गया लेकिन अगर वर्से के मालिक नहीं बने तो बालक-पन क्या हुआ?*

 

✧  *बालक का अर्थ ही है मालिक। लेकिन स्वराज्य के भी मालिक बनो।* सिर्फ वर्से को देख करके खुश नहीं हो, स्वराज्य अधिकारी बनो। इतनी छोटी-सी आँख बिन्दी है, वो भी धोखा दे देती है तो मालिक नहीं हुए तभी धोखा देती है तो बापदादा सभी बच्चों को स्वराज्य अधिकारी राजा देखना चाहते हैं।

 

✧  अधिकारी, अधीन नहीं रहेगा। समझा? क्या बनेंगे? बालक सो मालिक। *रावण की चीज को तो यहाँ हॉल में ही छोडकर जाना।* ये तपस्या का स्थान है ना तो तपस्या को अग्नि कहा जाता है। तो अग्नि में खत्म हो जायेगा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *अन्तिम लक्ष्य पुरुषार्थ के लिए कौन-सा है? वह है- अव्यक्त फ़रिश्ता हो रहना। अव्यक्त रूप क्या है? फ़रिश्तापन। उसमें भी लाइट रूप सामने है- अपना लक्ष्य। वह सामने रखने से जैसे लाइट के कार्ब में यह मेरा आकार है।* जैसे वतन में भी अव्यक्त रूप देखते हो, तो अव्यक्त और व्यक्त में क्या अन्तर देखते हो? व्यक्त पाँच तत्वों के कार्ब में हैं और अव्यक्त लाइट के कार्ब में हैं। लाइट का रूप तो है, लेकिन आस पास चारों ओर लाइट ही लाइट है, जैसे कि लाइट के कार्ब में, यह आकार दिखाई देता है। *जैसे सूर्य को देखते हो, तो चारों ओर फैली सूर्य की किरणों की लाइट के बीच में, सूर्य का रूप दिखाई देता है। सूर्य की लाइट तो है, लेकिन उसके चारों ओर भी सूर्य की लाइट परछाई के रूप में फैली हुई दिखाई देती है और लाइट में विशेष लाइट दिखाई देती है। इसी प्रकार से, 'मैं आत्मा ज्योति रूप हूँ'- यह तो लक्ष्य है ही। लेकिन मैं आकार में भी कार्ब में हूँ।* चारों ओर अपना स्वरूप लाइट ही लाइट के बीच में स्मृति में रहे और दिखाई भी दे तो ऐसा अनुभव हो। *जैसे कि आइने में देखते हो तो स्पष्ट रूप दिखाई देता है, वैसे ही नॉलेज रूपी दर्पण में, अपना यह रूप स्पष्ट दिखाई दे और अनुभव हो। चलेते-फिरते और बात करते, ऐसे महसूस हो कि 'मैं लाइट रूप हूँ, मैं फरिश्ता चल रहा हूँ और मैं फ़रिश्ता बात कर रहा हूँ।' तो ही आप लोगों की स्मृति और स्थिति का प्रभाव औरों पर पड़ेगा।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  शांति की शक्ति का महत्व*"

 

_ ➳  प्रकृति का खुशनुमा मौसम और कलकल करते हुए झरने... की मदमाती आवाज का आनन्द लेते हुए सोच रही हूँ... कि प्यारे बाबा से मिलकर... आज जब मुझ आत्मा को अपने स्वधर्म शांति का पता चला है... तो भीतरी की गहरी शांति मुझे सहज ही साक्षी भाव में ले आती है... और मै आत्मा द्रष्टा बनकर, बाहर की अशांत आवाजो को सहज ही सुन पा रही हूँ... और *शांति के अपार सागर से... शांतमय लहरे, हर दिल पर उछाल कर उन्हें भी सहज ही आप समान शांति दूत बना रही हूँ.*.. मेरा शांत मन, शांत तरंगो को निरन्तर इस वायुमण्डल में प्रवाहित कर रहा है... मीठे बाबा ने मेरी सुप्त शक्तियो को जगाकर... मुझे विश्व कल्याणकारी बना दिया है.. *मेरा जीवन ऐसा जादूगरी वाला प्यारा और अनोखा तो भगवान ही कर सकता था... और भगवान ने ही आकर मेरा कायाकल्प किया है.*..अपने प्यारे पिता के उपकारों में भीगी, दिल से आभार करने मै आत्मा... तपस्या धाम में पहुंचती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी सारी सुप्त शक्तियो से जाग्रत करते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *दुखो में तपते हुए विश्व को, अपनी शांति की शक्ति का अनुभव कराकर... शन्ति की शीतल तरंगो से तन मन को सुवासित करो... सदा शुभ संकल्प के यन्त्र को यूज करके... सिद्धि स्वरूप को प्रत्यक्ष करने वाले शांति के अवतार बनो... इसी शक्ति की बदौलत, तन, मन की भोगना सूली से कांटा बन जायेगी...* और आप बाप का प्यारा और न्यारा बनकर, सदा डबल लाइट बन दमकेंगे...

 

_ ➳  *मै आत्मा प्यारे बाबा की श्रीमत को पाकर ख़ुशी में झूमते हुए कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे बाबा मेरे... *यह जीवन इतना प्यारा और खुबसूरत बनाकर, आपने मुझे खुशियो की महारानी बना दिया है.*.. आपकी श्रीमत को पाकर मै आत्मा आंतरिक पुरुषार्थ में सबसे आगे बढ़ती जा रही हूँ... *सब जगह शांति की शक्ति की प्रयोगी बन रही हूँ... और शांति की अवतार बनकर, हर दिल को चन्दन सी शीतलता देती जा रही हूँ..."*

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अपने सम्पूर्ण खजानो का मालिक बनाकर कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *शांति की शक्ति का प्रयोग करके शांति की शक्ति के केंद्र को प्रत्यक्ष करो...* साइलेन्स शक्ति की अदभुत जादु दिखाकर, विश्व परिवर्तन के महान कार्य मे मीठे बाबा के सहयोगी बनो... *ईश्वरीय प्यार में, ख़ुशी का देवता बनकर, खुशियो में, उमंगो में, झूमते ही रहो... दूसरो को भी इन सच्ची खुशियो का पता देने वाले, सदा खुश देवता बन मुस्कराओ.*..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के असीम प्यार को पाकर,खुशियो की चरमसीमा पर पहुंच कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... मै आत्मा इस कदर खुशियो की मल्लिका बनकर मुस्कराऊंगी... और सबको खुशियां बाँटने वाली परी बनकर इठलाऊँगी... यह भला मेने कब सोचा था... *आपने जीवन में आकर, कितना प्यारा जादु कर दिया है...मेरी खुशियां और रूहानियत देखकर, हर दिल चात्रक हो पूछता है...कौन मिल गया है... और मै आत्मा प्यारे बाबा से मिला देती हूँ.*.."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपने श्रेष्ठ भाग्य के मीठे अनुभवो में भिगोते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे.... भगवान को साथी बनाकर, साथ चलने वाले महान भाग्यवान हो... नथिंग न्यू के पाठ को पक्का करके... विघ्नो को खिलौना समझ उड़ाते चलो... *अपना राज्य बस...आया की आया... इन खुशियो में नाचो गाओ... मीठे बाबा के प्यार में समाना, यानि समान बन गये... तो इस मीठे नशे की खुमारी में सदा झूमते रहो.*.."

 

_ ➳  *मै आत्मा सच्चे प्यार की तरंगो में अभिभूत होकर मीठे बाबा से कहती हूँ :-* "मीठे प्यारे दुलारे बाबा... मै आत्मा आपके प्यार के साये तले प्रेम की प्रतिमूर्ति बनकर मुस्करा उठी हूँ... जब भगवान ही मेरे साथ है तो विघ्न में मेरी सदा की जीत निश्चित है... *आपका हाथ पकड़कर, मै आत्मा... बेफिक्र बादशाह बनकर, खुशियो के आसमाँ में उड़ रही हूँ.*.."प्यारे बाबा से मीठी प्यारी रुहरिहानं करके मै आत्मा... इस कर्मक्षेत्र पर लौट आयी...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- आत्माओं को अंचली दे शांति की प्यास बुझाना*"

 

_ ➳  "विश्व की सर्व आत्मायें शांति की तलाश में भटक रही है, उन तड़पती हुई आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाओ" अपने शिव पिता परमात्मा के इस फरमान का पालन करने के लिए, अपनी शांत स्वरूप स्थिति में स्थित हो कर मैं शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा की याद में बैठ जाती हूँ। *अशरीरी स्थिति में स्थित होते ही मैं स्वयं को शान्तिधाम में शांति के सागर अपने शिव पिता परमात्मा के सन्मुख पाती हूँ जो शांति की अनन्त शक्तियों से मुझे भरपूर कर रहें हैं*। अपने शिव पिता से आ रही शांति की शक्तिशाली किरणों को स्वयं में समा कर मैं जैसे शांति का पुंज बनती जा रही हूं।

 

_ ➳  शांति की असीम शक्ति का स्टॉक अपने अंदर जमा करके अब मैं परमधाम से नीचे आ कर विश्व की उन सर्व आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाने चल पड़ती हूँ जो पल भर की शांति की तलाश में भटक रही हैं। *सूक्ष्म लोक में पहुंच कर अपना लाइट का फ़रिशता स्वरूप धारण कर, शांति दूत बन बापदादा के साथ कम्बाइंड हो कर अब मैं विश्व ग्लोब पर आ कर बैठ जाता हूँ*। मैं देख रहा हूँ बापदादा से अविरल शांति की धाराएं निकल रही हैं जो निरन्तर मुझ फ़रिश्ते में समा रही है। शांति की इन धाराओं को मैं फ़रिशता अब विश्व ग्लोब के ऊपर प्रवाहित कर रहा हूँ। *शांति की इन धाराओं के विश्व ग्लोब पर पड़ते ही शांति के शक्तिशाली वायब्रेशन पूरे विश्व मे फैल रहें हैं*।

 

_ ➳  जैसे - जैसे ये वायब्रेशन वायुमण्डल में फैल रहें हैं वैसे - वैसे वायुमण्डल में एक दिव्यता छाने लगी है। *जैसे सुबह की ताजी हवा शरीर को सुखद अहसास करवाती है वैसे ही वायुमण्डल में फैले ये शांति के वायब्रेशन आत्माओं को एक अद्भुत सुख का अनुभव करवा रहें हैं*। उनके अशांत मन शांति का अनुभव करके तृप्त हो रहे हैं। सबके चेहरे पर एक सकून दिखाई दे रहा है। *जन्म जन्मान्तर से शांति की एक बूंद की प्यासी आत्माओं की प्यास बुझ रही है*। शांति के सागर शिव पिता से आ रही शांति की किरणों का प्रवाह और भी तीव्र होता जा रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे शांति की शक्ति की किरणों की बरसात हो रही है।

 

_ ➳  *जैसे चात्रक पक्षी अपनी प्यास बुझाने के लिए स्वांति की एक बूंद पाने की इच्छा से व्याकुल निगाहों के साथ निरन्तर आकाश की ओर देखता रहता है*। इसी प्रकार शांति की तलाश में भटकती और तड़पती हुई आत्मायें भी शांति की एक बूंद पाने की इच्छा से व्याकुल निगाहों से ऊपर देख रही है और शांति की किरणों की बरसात में नहा कर जैसे असीम शांति का अनुभव करके प्रसन्न हो रही हैं। *विश्व की सर्व आत्माओं को शांति की अनुभूति करवाकर अब मैं फ़रिशता बापदादा के साथ फिर से सूक्ष्म लोक में पहुंचता हूँ*। अपनी फ़रिशता ड्रेस को उतार कर अपने निराकारी स्वरूप में स्थित हो कर अब मैं आत्मा अपने शांत स्वरूप में स्थित हो कर वापिस साकारी दुनिया मे अपने साकारी शरीर मे प्रवेश करती हूं।

 

_ ➳  साकारी दुनिया मे आ कर अब मैं आत्मा अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो कर, निरन्तर अपने शांत स्वधर्म में रहकर शांति के वायब्रेशन चारों ओर फैला रही हूँ। सर्व आत्माओ को शांति के सागर बाप का परिचय दे कर, उन्हें भी अपने शांत स्वधर्म में स्थित हो कर शांति पाने का सहज उपाय बता रही हूं। *स्वयं को शांति के सागर अपने शिव पिता के साथ सदा कम्बाइंड अनुभव करने से मेरे सम्पर्क में आने वाली परेशान आत्मायें डेड साइलेन्स की अनुभूति करके सहज ही अपनी सर्व परेशानियों से मुक्त हो रही हैं*। "विश्व की सर्व आत्माओं को शांति का अनुभव कराना" यही मेरा कर्तव्य है। इस बात को सदा स्मृति में रख अब मैं इसी ईश्वरीय सेवा में निरन्तर लगी रहती हूं।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं अमृतवेले से रात तक याद के विधिपूर्वक हर कर्म करने वाली सिद्धि स्वरूप आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   *मैं स्वयं को निमित्त समझ हर कर्म करके न्यारी और प्यारी रहने वाली, मैं पन से मुक्त आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳ 1. डाक्टर्स का वर्ग भी बापदादा को सेवाधारी ग्रुप देखने में आता है। सिर्फ थोड़ा समय इस सेवा को भी देते रहो। *कई डाक्टर्स कहते हैं हमको फुर्सत ही नहीं होती है। फुर्सत नहीं होती होगी फिर भी कितने भी बिजी होंअपना एक कार्ड छपा के रखो, जिसमें यह इशारा होअट्रेक्शन का कोई स्लोगन होतो और आगे सफा चाहते हो तो यह यह एड्रेसेज हैंजहाँ आप रहते हो वहाँ के सेन्टर्स की एड्रेस हो यहाँ जाकर अनुभव करोकार्ड तो दे सकते।* जब पर्चा लिखकर देते हो यह दवाई लेनायह दवाई लेना। तो पर्चा देने के समय यह कार्ड भी दे दो। हो सकता है कोई कोई को तीर लग जाए क्योंकि डाक्टरों की बात मानते हैं और टेन्शन तो सभी को होता है। एक प्रकृति की तरफ से टेन्शनपरिवार की तरफ से टेन्शन और अपने मन की तरफ से भी टेन्शन। तो टेन्शन फ्री लाइफ की दवाई यह है,ऐसा कुछ उसको अट्रेक्शन की छोटी सी बात लिखो तो क्या होगा,आपकी सेवा के खाते में तो जमा हो जायेगा ना। ऐसे कई करते भी हैंजो नहीं करते हैं वह करो। डबल डाक्टर हो सिंगल थोड़ेही हो। डबल डाक्टर हो तो डबल सेवा करो। 

 

 _ ➳  2. जब पेशेन्ट आते हैं। आपके पास तो पेशेन्ट ही आयेंगे। तो पेशेन्ट हमेशा डाक्टर को भगवान का रूप समझते हैं और भावना भी होती है। *अगर डाक्टर किसको कहता है यह चीज नहीं खानी हैतो डर के मारे नहीं खायेंगे और कोई गुरू कहेगा तो भी नहीं मानेंगे।* तो मेडीकल वालों को सहज सेवा का साधन है जो भी आवे उनको समय मुकरर करना पड़ता हैक्योंकि काम के समय तो आप कुछ कर नहीं सकतेलेकिन कोई ऐसा विधि बनाओ जो पेशेन्ट थोड़ा भी इन्ट्रेस्टेड होउनको एक टाइम बुलाकर और उन्हों को 15 मिनट आधा घण्टा भी परिचय दो तो क्या होगाआपकी सेवा बढ़ती जायेगी। सन्देश देना वह और बात हैसन्देश से खुश होते हैं लेकिन राजयोगी नहीं बनते हैं।

 

 _ ➳  3. *जब तक थोड़ा टाइम भी किसको अनुभव नहीं होता तब तक स्टूडेन्ट नहीं बन सकता।*

 

 _ ➳  4. *जिसको कोई भी अनुभव होता है वह छोड़ नहीं सकते हैं। बाकी काम तो अच्छा हैकिसके दुख को दूर करना। कार्य तो बहुत अच्छा करते होलेकिन सदा के लिए नहीं करते हो। दवाई खायेंगे तो बीमारी हटेगीदवाई बन्द तो बीमारी फिर से आ जाती है। तो ऐसी दवाई दोजो बीमारी का नाम निशान नहीं होवह है मेडीटेशन।*

 

✺   *ड्रिल :-  "डबल डाक्टर होने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने आत्मिक स्वरूप में स्वयं को स्थित करती हूँ और एक दम शांत अवस्था में अपने मन को केंद्रित करती हूँ... अपने इस संगमयुगी जीवन की प्राप्तियों को देख रही हूँ... *बाबा से मिली शक्तियों और ज्ञान रत्नों के ख़ज़ानों को याद करती हूँ और उनका शुक्रिया अदा करती हूँ...* आपने मुझे मेरे हर दुख से मुक्त कर मेरे जीवन को खुशियों से भर दिया है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा सृष्टि के रंगमंच पर अपने पार्ट को प्ले करते हुए अन्य बहुत सी आत्माओं के संपर्क में आती हूँ... मैं देखती हूँ कि आज हर आत्मा किसी ना किसी कारण वश दुखी है... कुछ आत्मायें पूर्व जन्मों में किये पाप कर्म के कारण दुखों को भोग रही हैं तो कुछ आत्मायें अपने ही कड़े आसुरी स्वभाव संस्कार के वश हो औरों को भी दुख दे रही हैं और स्वयं भी दुखों से घिरी हुई हैं... जिस कारण वो स्वयं भी अशांत रहती हैं और उनके संपर्क में आने वाली आत्मायें भी अशान्ति का अनुभव करती हैं... *इन समस्त आत्माओं को मैं आत्मा अपने शांति के वाइब्रेशन देकर उनके मन को शांत कर रही  हूँ...*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने कर्मक्षेत्र में भी बाबा के शक्तिशाली वाइब्रेशन चारों तरफ फैलाती हूँ... आज के इस तमोगुणी वातावरण में आत्माओं के शरीर के साथ साथ उनके मन भी बीमार हैं... समस्त आत्मायें क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, लालच, परचिन्तन, परदर्शन जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं... *जैसे मेरे बाबा रूहानी डॉक्टर भी हैं वैसे ही मैं आत्मा भी अपने आत्मा भाइयों के लिए उनका रूहानी डॉक्टर बन उनकी इन सभी बीमारियों का इलाज कर उनको इन बीमारियों से मुक्त कर उनको सशक्त और निरोगी बना रही हूँ...*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने सभी भाई बहनों को बाबा का परिचय देती हूँ... *बाबा का परिचय पाकर आत्मायें उनसे अपना कनेक्शन जोड़कर उनसे सर्व शक्तियाँ प्राप्त कर रही हैं और अपने दुखों को अपनी बीमारियों को ठीक कर रही हैं... जिन आत्माओं को मैं आत्मा बाबा का परिचय देती हूँ उन्हें उमंग उत्साह दे आगे भी बढ़ाती जाती हूँ...* वो सभी आत्मायें बाबा से संबंध जोड़ उनके प्यार को अनुभव करती हैं... योग में नित नए अनुभव कर रही हैं और अपने सर्व दुखों से छूटती जा रही हैं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा किसी न किसी रूप में बाबा का परिचय आत्माओं को देती हूँ... निमित्त बन अपने चेहरे और चलन से सेवा करती हूँ... *बाबा से जुड़ कर आत्मायें अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित हो अपने गुणों और शक्तियों को इमर्ज कर रही हैं और राजयोग के अभ्यास से अपने को सशक्त बनाती जा रही हैं...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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