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 02 / 12 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ "बनी बनायी बन रही" - यह बुधी में रहा ?

 

➢➢ क्लास में आँखें बंद करके तो नहीं बैठे ?

 

➢➢ प्रसन्नता की रूहानी पर्सनालिटी द्वारा सर्व को अधिकारी बनाया ?

 

➢➢ दिल के स्नेह से बाप से सहज ही वरदान प्राप्त किया ?

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  ✰ अव्यक्त पालना का रिटर्न

         ❂ तपस्वी जीवन

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〰✧  जब स्वयं को अकालमूर्त आत्मा समझेंगे तब अकाले मृत्यु से, अकाल से, सर्व समस्याओं से बच सकोगे। मानसिक चिन्तायें, मानसिक परिस्थितियों को हटाने का एक ही साधन है - अपने इस पुराने शरीर के भान को मिटाना। देह-अभिमान को मिटाने से सर्व परिस्थितियाँ मिट जायेंगी।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?

 

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अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए

             ❂ श्रेष्ठ स्वमान

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   "मैं अतीन्द्रिय सुख में रहने वाली आत्मा हूँ"

 

   सदा अतीन्द्रिय सुख में रहते हो? अतीन्दिय सुख अर्थात् आत्मिक सुख। इन्द्रियों का सुख नहीं लेकिन आत्मिक सुख। आत्मा अविनाशी है तो आत्मिक सुख भी अविनाशी होगा। इन्द्रियाँ खुद ही विनाशी हैं तो सुख भी विनाशी होगा। कोई भी विनाशी यानी थोड़े समय का सुख नहीं चाहते हैं। अगर किसी को भी कहो - 2 घण्टे का सुख ले लो और 22 घण्टे का दु:ख ले लो तो कौन मानेगा। यही सोचेगा कि सदा सुख हो, दु:ख का नाम-निशान न हो।

 

  तो अतीन्द्रिय सुख अविनाशी है। इन्द्रियों के सुख के अनुभवी भी हो और अतीन्द्रिय सुख के अनुभवी भी हो। तो क्या अच्छा लगता है? अतीन्द्रिय सुख अच्छा या इन्द्रियों का सुख अच्छा? तो अच्छी चीज को कभी छोड़ा नहीं जाता, भूला नहीं जाता, भूलना चाहें तो भी नहीं भूलेंगे। तो सदा अतीन्द्रिय सुख में रहने वालों के पास दु:ख का नाम-निशान नहीं आ सकता, असम्भव। कई कहते हैं - मेरे को दु:ख नहीं होता लेकिन दूसरा दु:ख देता है तो क्या करें? दूसरा देता है तो लेते क्यों हो? कोई भी चीज आपको दे और आप नहीं लो तो वह किसके पास रहेगी? उसके पास ही रहेगी ना।

 

  देने वाले तो देंगे, उनके पास है ही दु:ख लेकिन आप नहीं लो। आपका स्लोगन है - 'सुख दो, सुख लो। न दु:ख दो, न दु:ख लो'। लेकिन गलती कर देते हो। इसलिए थोड़ी दु:ख की लहर आ जाती है। कोई दु:ख दे तो उसे भी परिवर्तन कर उसको सुख दे दो, उसको भी सुखी बना दो। सुखदाता के बच्चे हो, सुख देना और सुखी रहना - यही आपका काम है।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?

 

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         रूहानी ड्रिल प्रति

अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं

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✧  ये मन बहुत चंचल है और बहुत क्वीक है, एक सेकण्ड में आपको फारेन घुमाकर आ सकता है तो क्या सुना? बालक सो मालिक। ऐसे नहीं खुश रहना - बालक तो बन गये, वर्सा तो मिल गया लेकिन अगर वर्से के मालिक नहीं बने तो बालक-पन क्या हुआ?

 

✧  बालक का अर्थ ही है मालिक। लेकिन स्वराज्य के भी मालिक बनो। सिर्फ वर्से को देख करके खुश नहीं हो, स्वराज्य अधिकारी बनो। इतनी छोटी-सी आँख बिन्दी है, वो भी धोखा दे देती है तो मालिक नहीं हुए तभी धोखा देती है तो बापदादा सभी बच्चों को स्वराज्य अधिकारी राजा देखना चाहते हैं।

 

✧  अधिकारी, अधीन नहीं रहेगा। समझा? क्या बनेंगे? बालक सो मालिक। रावण की चीज को तो यहाँ हॉल में ही छोडकर जाना। ये तपस्या का स्थान है ना तो तपस्या को अग्नि कहा जाता है। तो अग्नि में खत्म हो जायेगा।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?

 

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         ❂ अशरीरी स्थिति प्रति

अव्यक्त बापदादा के इशारे

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〰✧  अन्तिम लक्ष्य पुरुषार्थ के लिए कौन-सा है? वह है- अव्यक्त फ़रिश्ता हो रहना। अव्यक्त रूप क्या है? फ़रिश्तापन। उसमें भी लाइट रूप सामने है- अपना लक्ष्य। वह सामने रखने से जैसे लाइट के कार्ब में यह मेरा आकार है। जैसे वतन में भी अव्यक्त रूप देखते हो, तो अव्यक्त और व्यक्त में क्या अन्तर देखते हो? व्यक्त पाँच तत्वों के कार्ब में हैं और अव्यक्त लाइट के कार्ब में हैं। लाइट का रूप तो है, लेकिन आस पास चारों ओर लाइट ही लाइट है, जैसे कि लाइट के कार्ब में, यह आकार दिखाई देता है। जैसे सूर्य को देखते हो, तो चारों ओर फैली सूर्य की किरणों की लाइट के बीच में, सूर्य का रूप दिखाई देता है। सूर्य की लाइट तो है, लेकिन उसके चारों ओर भी सूर्य की लाइट परछाई के रूप में फैली हुई दिखाई देती है और लाइट में विशेष लाइट दिखाई देती है। इसी प्रकार से, 'मैं आत्मा ज्योति रूप हूँ'- यह तो लक्ष्य है ही। लेकिन मैं आकार में भी कार्ब में हूँ। चारों ओर अपना स्वरूप लाइट ही लाइट के बीच में स्मृति में रहे और दिखाई भी दे तो ऐसा अनुभव हो। जैसे कि आइने में देखते हो तो स्पष्ट रूप दिखाई देता है, वैसे ही नॉलेज रूपी दर्पण में, अपना यह रूप स्पष्ट दिखाई दे और अनुभव हो। चलेते-फिरते और बात करते, ऐसे महसूस हो कि 'मैं लाइट रूप हूँ, मैं फरिश्ता चल रहा हूँ और मैं फ़रिश्ता बात कर रहा हूँ।' तो ही आप लोगों की स्मृति और स्थिति का प्रभाव औरों पर पड़ेगा।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   "ड्रिल :- विनाश के पहले सबको बाप का परिचय देना"
 
➳ _ ➳  इस सुहानी संगम के अमृतवेले मेरे प्राण प्यारे बाबा अलौकिक जन्मदिन की बधाई देते हुए मुझे प्यार से जगाते हैं... मैं आत्मा भी बाबा को जन्मदिन की बधाई देती हूँ... कितना अनोखा संगम है इस अनोखे संगम युग पर... बाप और बच्चे का जन्मदिन एक ही दिन... प्यारे बाबा मुझे गोदी में उठाकर वतन में लेकर जाते हैं... जहाँ चारों ओर रंग बिरंगे हीरों से सजे हुए बैलून्स हैं... इन बैलून्स से रंग बिरंगी किरणें निकलकर मुझ आत्मा की चमक और बढ़ा रही है... प्यारे बाबा मीठी रूह-रिहान करते हुए मुझे ज्ञानामृत पिलाते हैं...
 
❉   सर्व आत्माओं को बाप का परिचय देने सर्विस की भिन्न भिन्न युक्तियाँ बतलाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:- मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता की गोद में फूल सा खिलने का जो सुख पाया है उस सुख को दूसरो के दामन में भी सजाओ... दुखो में तड़फ रहे पुकार रहे हताश और निराश हो गए भाई आत्माओ को सुख और शांति की राह दिखाओ... सच्चे पिता से मिलाकर उनको भी खजानो से भरपूर कर दो...
 
➳ _ ➳  मैं आत्मा प्रभु प्यार की कश्ती में डूबकर अनंत अविनाशी खुशियों से भरपूर होते हुए कहती हूँ:- हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... मै आत्मा आपसे अथाह खुशियो को पाकर सबको इस खान का मालिक बना रही हूँ... पूरा विश्व खुशियो से गूंज उठे ऐसी परमात्म लहर फैला रही हूँ... प्यारे बाबा से हर दिल का मिलन करवा रही हूँ... और आप समान भाग्य सजा रही हूँ...
 
❉   मीठे बाबा खिवैया बन काँटों के समुंदर से फूलों के बगीचे में ले जाते हुए कहते हैं:- मीठे प्यारे लाडले बच्चे... आप समान सबके दुखो को दूर करो... आनन्द प्रेम शांति से हर मन को भरपूर करो... सबको उजले सत्य स्वरूप के भान का अहसास दिलाओ... प्यारा बाबा आ गया है यह दस्तक हर दिल पर दे आओ... सब बिछड़े बच्चों को सच्चे पिता से मिलवाओ और दुआओ का खजाना पाओ...
 
➳ _ ➳  मैं आत्मा फ़रिश्ता बन चारों ओर मेरा बाबा आ गया के ज्ञान फूल बरसाते हुए कहती हूँ:- मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा आपसे पाये प्यार दुलार और ज्ञान रत्नों को हर दिल को बाटने वाली दाता बन गई हूँ... सबको देह से अलग सच्ची मणि आत्मा के नशे से भर रही हूँ... प्यारे बाबा का परिचय देकर उनके दुखो से मुरझाये चेहरे को सुखो से खिला रही हूँ...
 
❉   मेरे बाबा कलियुगी अंधकार को दूर कर अखंड ज्योति बन ज्ञान की लौ जलाते हुए कहते हैं:- प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... अब ईश्वरीय प्रतिनिधि बन सबके जीवन को खुशियो से भर दो... विचार सागर कर नई योजनाये बनाओ... और ईश्वरीय पैगाम हर आत्मा तक पहुँचाओ... सबकी जनमो की पीड़ा को दूर कर ख़ुशी उल्लास उमंगो से जीवन सजा आओ... पिता धरा पर उतर आया है... पुकारते बच्चों को जरा यह खबर सुना आओ...
 
➳ _ ➳  मैं आत्मा सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा को उमंग उत्साह के पंख दे उड़ाते हुए कहती हूँ:- हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा आपसे पायी अनन्त खुशियो की चमक सबको दिखा रही हूँ... प्यारा बाबा खुशियो की खान ले आया है खजानो को लुटाने आया है... यह आहट हर दिल पर करती जा रही हूँ... भर लो अपनी झोलियाँ यह आवाज सबको सुना रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   "ड्रिल :- बुद्धि में रहे बनी बनाई बन रही, बीती का चिन्तन नही करना है"
 
➳ _ ➳  एकांत में बैठ, अपने पुरुषार्थ को तीव्र बनाने की युक्तियां निकालते हुए मैं मन ही मन विचार करती हूँ कि विनाशी धन का सौदा करने वाले एक बिजनेसमैन को हर समय केवल अपने बिजनेस को ही ऊंचा उठाने का ख्याल रहता है लेकिन यहाँ तो सौदा अविनाशी है और सौदा करने वाला भी कोई साधारण मनुष्य नही बल्कि स्वयं भगवान हैं और सौदा भी ऐसा जो एक जन्म के लिए नही बल्कि जन्मजन्मांतर की कमाई कराने वाला है तो एक पक्के बिजनेसमैन की तरह अपने इस अविनाशी सौदे से मुझे भविष्य 21 जन्मो की अविनाशी कमाई करने के लिए, भगवान द्वारा मिले हर खजाने को अब जमा करने का ही पुरुषार्थ करना है और जमा करने की सहज विधि है बिंदी लगाना।

➳ _ ➳  जैसे स्थूल खजाने में भी एक के साथ बिंदी लगाने से खजाना बढ़ता जाता है ऐसे ही अपने इस पुरुषार्थी ब्राह्मण जीवन में मैं आत्मा बिंदी, बाप बिंदी और ड्रामा में जो बीत चुका वह भी फुलस्टॉप अर्थात बिंदी इन तीन बिंदियों की स्मृति का तिलक अपने मस्तक पर हर समय लगा कर रखते हुए मुझे अपने पुरुषार्थ में गैलप करना है। अपने प्यारे बाबा को साक्षी मान स्वयं से यह दृढ़ प्रतिज्ञा करते ही मैं अनुभव करती हूँ जैसे बापदादा इन तीन स्मृतियों का अविनाशी तिलक देने के लिए मुझे वतन में बुला रहें हैं।अपनी लाइट की सूक्ष्म आकारी देह के साथ मैं आत्मा अपनी साकारी देह से बाहर निकलती हूँ और अव्यक्त फ़रिश्ता बन अव्यक्त वतन की ओर चल पड़ती हूँ।

➳ _ ➳  मुझ फ़रिश्ते से श्वेत रश्मियां निकल - निकल कर चारों और फैल रही हैं। बापदादा से मिलने की लगन में मग्न, अपनी रंग बिरंगी किरणो को चारों और फैलाता हुआ मैं फ़रिश्ता आकाश को पार कर, अब सूक्ष्म वतन में प्रवेश करता हूँ। अपने सामने मैं बाप दादा को देख रहा हूँ। बापदादा के अनन्त प्रकाशमय लाइट माइट स्वरूप से सर्व शक्तियों की अनन्त किरणें निकल कर पूरे सूक्ष्म वतन में फ़ैल रही हैं। पूरा सूक्ष्म वतन रंग - बिरंगी किरणों के प्रकाश से आच्छादित हो रहा है। इन्द्रधनुषी रंगों से प्रकाशित सूक्ष्म वतन का यह नजारा मन को असीम आनन्द से भरपूर कर रहा है।

➳ _ ➳  इस खूबसूरत दृश्य का आनन्द लेते - लेते, बाहें पसारे खड़े बाबा के मनमोहक स्वरूप को निहारते हुए अब मैं फ़रिश्ता बाबा की बाहों में समाकर बाबा के प्यार से स्वयं को भरपूर करने लिए धीरे - धीरे उनके पास पहुँचता हूँ। मुझे देखते ही बाबा मुझे अपनी बाहों में भरकर अपना असीम प्रेम और स्नेह मुझ पर बरसाने लगते हैं। अपनी ममतामयी गोद मे बिठाकर अनेक दिव्य अलौकिक अनुभूतियां करवा कर, अपनी स्नेह भरी दृष्टि से मुझे देखते हुए बाबा मेरे अंदर अथाह स्नेह का संचार कर रहें हैं। ऐसा लग रहा है जैसे बापदादा से स्नेह की सहस्त्रो धारायें एक साथ निकलकर मुझ फ़रिश्ते में समा कर मुझे बाप समान मास्टर स्नेह का सागर बना रही हैं।

➳ _ ➳  स्नेह की अविरल धारा मेरे अंदर प्रवाहित कर मुझे असीम शक्तिवान बना कर अब बाबा मेरे मस्तक पर तीन बिंदियों की स्मृति का अविनाशी तिलक लगाकर, बीती को बीती कर पुरुषार्थ में गैलप करने का वरदान देकर मुझे विदा करते हैं। बापदादा द्वारा मिले तीन बिंदियों की स्मृति के अविनाशी तिलक को अपने मस्तक पर सदा के लिए धारण कर, अपनी सूक्ष्म काया के साथ अब मैं सूक्ष्म वतन से वापिस साकार वतन में आती हूँ और अपने स्थूल शरीर में प्रवेश कर अपने अकालतख्त पर विराजमान हो जाती हूँ।
 
➳ _ ➳  अपने पुरुषार्थी ब्राह्मण जीवन में इन तीन बिंदियों की स्मृति का तिलक सदा अपने मस्तक पर लगाकर, स्मृति सो समर्थी स्वरूप बन, बीती को बीती कर, अपने पुरुषार्थ में गैलप करते हुए अब मैं सम्पूर्णता को पाने की दिशा में निरन्तर आगे बढ़ रही हूँ।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   मैं प्रसन्नता की रूहानी पर्सनैलिटी वाली आत्मा हूँ।
✺   मैं सर्व को अधिकारी बनाने वाली आत्मा हूँ।
✺   मैं गायन और पूजन योग्य आत्मा हूँ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺   मैं आत्मा सदा दिल का स्नेह रखती हूँ  ।
✺   मैं आत्मा सदैव बाप से वरदान प्राप्त करती हूँ  ।
✺   मैं स्नेही आत्मा हूँ  ।

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳ 1. डाक्टर्स का वर्ग भी बापदादा को सेवाधारी ग्रुप देखने में आता है। सिर्फ थोड़ा समय इस सेवा को भी देते रहो। कई डाक्टर्स कहते हैं हमको फुर्सत ही नहीं होती है। फुर्सत नहीं होती होगी फिर भी कितने भी बिजी होंअपना एक कार्ड छपा के रखो, जिसमें यह इशारा होअट्रेक्शन का कोई स्लोगन होतो और आगे सफा चाहते हो तो यह यह एड्रेसेज हैंजहाँ आप रहते हो वहाँ के सेन्टर्स की एड्रेस हो यहाँ जाकर अनुभव करोकार्ड तो दे सकते। जब पर्चा लिखकर देते हो यह दवाई लेनायह दवाई लेना। तो पर्चा देने के समय यह कार्ड भी दे दो। हो सकता है कोई कोई को तीर लग जाए क्योंकि डाक्टरों की बात मानते हैं और टेन्शन तो सभी को होता है। एक प्रकृति की तरफ से टेन्शनपरिवार की तरफ से टेन्शन और अपने मन की तरफ से भी टेन्शन। तो टेन्शन फ्री लाइफ की दवाई यह है,ऐसा कुछ उसको अट्रेक्शन की छोटी सी बात लिखो तो क्या होगा,आपकी सेवा के खाते में तो जमा हो जायेगा ना। ऐसे कई करते भी हैंजो नहीं करते हैं वह करो। डबल डाक्टर हो सिंगल थोड़ेही हो। डबल डाक्टर हो तो डबल सेवा करो। 

 

 _ ➳  2. जब पेशेन्ट आते हैं। आपके पास तो पेशेन्ट ही आयेंगे। तो पेशेन्ट हमेशा डाक्टर को भगवान का रूप समझते हैं और भावना भी होती है। अगर डाक्टर किसको कहता है यह चीज नहीं खानी हैतो डर के मारे नहीं खायेंगे और कोई गुरू कहेगा तो भी नहीं मानेंगे। तो मेडीकल वालों को सहज सेवा का साधन है जो भी आवे उनको समय मुकरर करना पड़ता हैक्योंकि काम के समय तो आप कुछ कर नहीं सकतेलेकिन कोई ऐसा विधि बनाओ जो पेशेन्ट थोड़ा भी इन्ट्रेस्टेड होउनको एक टाइम बुलाकर और उन्हों को 15 मिनट आधा घण्टा भी परिचय दो तो क्या होगाआपकी सेवा बढ़ती जायेगी। सन्देश देना वह और बात हैसन्देश से खुश होते हैं लेकिन राजयोगी नहीं बनते हैं।

 

 _ ➳  3. जब तक थोड़ा टाइम भी किसको अनुभव नहीं होता तब तक स्टूडेन्ट नहीं बन सकता।

 

 _ ➳  4. जिसको कोई भी अनुभव होता है वह छोड़ नहीं सकते हैं। बाकी काम तो अच्छा हैकिसके दुख को दूर करना। कार्य तो बहुत अच्छा करते होलेकिन सदा के लिए नहीं करते हो। दवाई खायेंगे तो बीमारी हटेगीदवाई बन्द तो बीमारी फिर से आ जाती है। तो ऐसी दवाई दोजो बीमारी का नाम निशान नहीं होवह है मेडीटेशन।

 

✺   ड्रिल :-  "डबल डाक्टर होने का अनुभव"

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने आत्मिक स्वरूप में स्वयं को स्थित करती हूँ और एक दम शांत अवस्था में अपने मन को केंद्रित करती हूँ... अपने इस संगमयुगी जीवन की प्राप्तियों को देख रही हूँ... बाबा से मिली शक्तियों और ज्ञान रत्नों के ख़ज़ानों को याद करती हूँ और उनका शुक्रिया अदा करती हूँ... आपने मुझे मेरे हर दुख से मुक्त कर मेरे जीवन को खुशियों से भर दिया है...

 

 _ ➳  मैं आत्मा सृष्टि के रंगमंच पर अपने पार्ट को प्ले करते हुए अन्य बहुत सी आत्माओं के संपर्क में आती हूँ... मैं देखती हूँ कि आज हर आत्मा किसी ना किसी कारण वश दुखी है... कुछ आत्मायें पूर्व जन्मों में किये पाप कर्म के कारण दुखों को भोग रही हैं तो कुछ आत्मायें अपने ही कड़े आसुरी स्वभाव संस्कार के वश हो औरों को भी दुख दे रही हैं और स्वयं भी दुखों से घिरी हुई हैं... जिस कारण वो स्वयं भी अशांत रहती हैं और उनके संपर्क में आने वाली आत्मायें भी अशान्ति का अनुभव करती हैं... इन समस्त आत्माओं को मैं आत्मा अपने शांति के वाइब्रेशन देकर उनके मन को शांत कर रही  हूँ...

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने कर्मक्षेत्र में भी बाबा के शक्तिशाली वाइब्रेशन चारों तरफ फैलाती हूँ... आज के इस तमोगुणी वातावरण में आत्माओं के शरीर के साथ साथ उनके मन भी बीमार हैं... समस्त आत्मायें क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, द्वेष, लालच, परचिन्तन, परदर्शन जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं... जैसे मेरे बाबा रूहानी डॉक्टर भी हैं वैसे ही मैं आत्मा भी अपने आत्मा भाइयों के लिए उनका रूहानी डॉक्टर बन उनकी इन सभी बीमारियों का इलाज कर उनको इन बीमारियों से मुक्त कर उनको सशक्त और निरोगी बना रही हूँ...

 

 _ ➳  मैं आत्मा अपने सभी भाई बहनों को बाबा का परिचय देती हूँ... बाबा का परिचय पाकर आत्मायें उनसे अपना कनेक्शन जोड़कर उनसे सर्व शक्तियाँ प्राप्त कर रही हैं और अपने दुखों को अपनी बीमारियों को ठीक कर रही हैं... जिन आत्माओं को मैं आत्मा बाबा का परिचय देती हूँ उन्हें उमंग उत्साह दे आगे भी बढ़ाती जाती हूँ... वो सभी आत्मायें बाबा से संबंध जोड़ उनके प्यार को अनुभव करती हैं... योग में नित नए अनुभव कर रही हैं और अपने सर्व दुखों से छूटती जा रही हैं...

 

 _ ➳  मैं आत्मा किसी न किसी रूप में बाबा का परिचय आत्माओं को देती हूँ... निमित्त बन अपने चेहरे और चलन से सेवा करती हूँ... बाबा से जुड़ कर आत्मायें अपने आत्मिक स्वरूप में स्थित हो अपने गुणों और शक्तियों को इमर्ज कर रही हैं और राजयोग के अभ्यास से अपने को सशक्त बनाती जा रही हैं...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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