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 03 / 02 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"हम सैट धर्म की स्थापना के निमित हैं" - सदा यह ख़ुशी रही ?*

 

➢➢ *माली बन कांटो को फूल बनाने की सेवा की ?*

 

➢➢ *हर शक्ति को कार्य में लगाकर वृद्धि की ?*

 

➢➢ *शुद्ध संकल्पों के खजाने से स्वयं को मालामाल किया ?*

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*अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अभी-अभी आवाज में आना और अभी-अभी आवाज से परे हो जाना - जैसे आवाज में आना सहज लगता है वैसे यह भी सहज अनुभव हो क्योंकि आत्मा मालिक है। *रुहानी एक्सरसाइज में सिर्फ मुख की आवाज से परे नहीं होना है। मन से भी आवाज में आने के संकल्प से परे होना है। ऐसे नहीं मुख से चुप हो जाओ और मन में बातें करते रहो। आवाज से परे अर्थात मुख और मन दोनों की आवाज से परे, शान्ति के सागर में समा जायें।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सच्ची लगन द्वारा विघ्नों को समाप्त करने वाली मास्टर सर्वशक्तिवान आत्मा हूँ"*

 

  *सच्ची लगन विघ्नों को समाप्त कर देती है। कितनी भी रूकावटें आएं लेकिन एक बल एक भरोसे के आधार पर सफलता मिलती रही है और मिलती रहेगी, ऐसा अनुभव होता रहता है ना।*

 

  *जहाँ सर्व शक्तिवान बाप साथ है वहाँ यह छोटी छोटी बातें ऐसे समाप्त हो जाती हैं जैसे कुछ भी थी ही नहीं। असम्भव भी सम्भव हो जाता है क्योंकि सर्व शक्तिवान के बच्चे बन गए। 'मक्खन से बाल' समान सब बातें सिद्ध हो जाती हैं।*

 

  अपने को ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान श्रेष्ठ आत्मायें अनुभव करते हो ना। कमजोरी तो नहीं आती। *बाप सर्वशक्तिवान हैं, तो बच्चों को बाप अपने से भी आगे रखते हैं। बाप ने कितना ऊंच बनाया है, क्या क्या दिया है - इसी का सिमरण करते-करते सदा हर्षित और शक्तिशाली रहेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अंत मते सो गति क्या होगी? समझदार तो हो ना? इसलिए अपनी मनसा को बिजी रखेंगे ना, *मनसा सेवा का टाइमटेबुल बनायेंगे अपना तो बिन्दी लगाने की आवश्यकता नहीं पडेगी। बस, होंगे ही बिन्दी रूप। इसलिए अभी अपने मन का टाइमटेबुल फिक्स करो।*

 

✧  *मन को सदा बिजी रखो, खाली नहीं रखो।* फिर मेहनत करनी पडती है। ऊँचे-ते-ऊँचे भगवान के बच्चे हो, तो *आपका एक-एक सेकण्ड का टाइमटेबुल फिक्स होना चाहिए* क्यों नहीं बिन्दी लगती, उसका कारण क्या?

 

✧  *ब्रेक पॉवरफुल नहीं है। शक्तियों का स्टॉक जमा नहीं है इसलिए सेकण्ड में स्टॉप नहीं कर सकते।* कई बच्चे कोशिश बहुत करते हैं, जब बापदादा देखते हैं मेहनत बहुत कर रहे हैं, यह नहीं हो, यह नहीं हो, कहते हैं नहीं हो लेकिन होता रहता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  किसको देखते हो? आकार को देखते व अव्यक्त का देखते हो? *अगर अपनी व औरों की आकृति को न देख अव्यक्त को देखेंगे तो आकर्षण मूर्त बनेंगे।* अगर आकृति को देखते तो आकर्षण-मूर्त नहीं बनते हो। *आकर्षण-मूर्त बनना है तो आकृति को मत देखो। आकृति के अन्दर जो आकर्षण रूप है, उसको देखने से ही अपने से औरों को आकर्षण होगा। तो अब यही अव्यक्त सर्विस रही हुई है।* कोई भी चित्र को देखते हो, तो चित्र को नहीं देखो, लेकिन चित्र के अन्दर जो चेतन है उसको देखो। *और उस चित्र के जो चरित्र हैं उन चरित्रों को देखो। चेतन और चरित्र को देखेंगे तो चरित्र तरफ ध्यान जाने से चित्र अर्थात् देह के भान से दूर हो जायेंगे।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- बाप का परिचय हरेक को देना"*

➳ _ ➳ *इस सुहानी संगम के अमृतवेले मेरे प्राण प्यारे बाबा अलौकिक जन्मदिन की बधाई देते हुए मुझे प्यार से जगाते हैं... मैं आत्मा भी बाबा को जन्मदिन की बधाई देती हूँ...* कितना अनोखा संगम है इस अनोखे संगम युग पर... बाप और बच्चे का जन्मदिन एक ही दिन... प्यारे बाबा मुझे गोदी में उठाकर वतन में लेकर जाते हैं... जहाँ चारों ओर रंग बिरंगे हीरों से सजे हुए बैलून्स हैं... इन बैलून्स से रंग बिरंगी किरणें निकलकर मुझ आत्मा की चमक और बढ़ा रही है... प्यारे बाबा मीठी रूह-रिहान करते हुए मुझे ज्ञानामृत पिलाते हैं...

❉ *सर्व आत्माओं को बाप का परिचय देने सर्विस की भिन्न भिन्न युक्तियाँ बतलाते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे मीठे फूल बच्चे... ईश्वर पिता की गोद में फूल सा खिलने का जो सुख पाया है उस सुख को दूसरो के दामन में भी सजाओ... *दुखो में तड़फ रहे पुकार रहे हताश और निराश हो गए भाई आत्माओ को सुख और शांति की राह दिखाओ... सच्चे पिता से मिलाकर उनको भी खजानो से भरपूर कर दो...*

➳ _ ➳ *मैं आत्मा प्रभु प्यार की कश्ती में डूबकर अनंत अविनाशी खुशियों से भरपूर होते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे प्यारे बाबा... *मै आत्मा आपसे अथाह खुशियो को पाकर सबको इस खान का मालिक बना रही हूँ... पूरा विश्व खुशियो से गूंज उठे ऐसी परमात्म लहर फैला रही हूँ...* प्यारे बाबा से हर दिल का मिलन करवा रही हूँ... और आप समान भाग्य सजा रही हूँ...

❉ *मीठे बाबा खिवैया बन काँटों के समुंदर से फूलों के बगीचे में ले जाते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे लाडले बच्चे... आप समान सबके दुखो को दूर करो... आनन्द प्रेम शांति से हर मन को भरपूर करो... सबको उजले सत्य स्वरूप के भान का अहसास दिलाओ... *प्यारा बाबा आ गया है यह दस्तक हर दिल पर दे आओ... सब बिछड़े बच्चों को सच्चे पिता से मिलवाओ और दुआओ का खजाना पाओ...*

➳ _ ➳ *मैं आत्मा फ़रिश्ता बन चारों ओर मेरा बाबा आ गया के ज्ञान फूल बरसाते हुए कहती हूँ:-* मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा आपसे पाये प्यार दुलार और ज्ञान रत्नों को हर दिल को बाटने वाली दाता बन गई हूँ... *सबको देह से अलग सच्ची मणि आत्मा के नशे से भर रही हूँ... प्यारे बाबा का परिचय देकर उनके दुखो से मुरझाये चेहरे को सुखो से खिला रही हूँ...*

❉ *मेरे बाबा कलियुगी अंधकार को दूर कर अखंड ज्योति बन ज्ञान की लौ जलाते हुए कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *अब ईश्वरीय प्रतिनिधि बन सबके जीवन को खुशियो से भर दो... विचार सागर कर नई योजनाये बनाओ... और ईश्वरीय पैगाम हर आत्मा तक पहुँचाओ...* सबकी जनमो की पीड़ा को दूर कर ख़ुशी उल्लास उमंगो से जीवन सजा आओ... पिता धरा पर उतर आया है... पुकारते बच्चों को जरा यह खबर सुना आओ...

➳ _ ➳ *मैं आत्मा सम्बन्ध संपर्क में आने वाली हर आत्मा को उमंग उत्साह के पंख दे उड़ाते हुए कहती हूँ:-* हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपसे पायी अनन्त खुशियो की चमक सबको दिखा रही हूँ... प्यारा बाबा खुशियो की खान ले आया है खजानो को लुटाने आया है...* यह आहट हर दिल पर करती जा रही हूँ... भर लो अपनी झोलियाँ यह आवाज सबको सुना रही हूँ...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  सदा खुशी रहे कि स्वयं भगवान हमें पढ़ाते हैं*

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स्वयं भगवान ऊंचे ते ऊंचे धाम से मुझे पढ़ाने आते हैं यह स्मृति एक रूहानी नशे से मुझ आत्मा को भरपूर कर देती है और *अपने परमशिक्षक से भविष्य 21 जन्मों के लिए श्रेष्ठ प्रालब्ध बनाने वाले अविनाशी ज्ञान रत्नो को धारण करने के लिए अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित होकर, उनकी याद में मैं तेज - तेज कदमो से चलते हुए पहुँच जाती हूँ अपने ईश्वरीय विश्वविद्यालय में और जा कर क्लास रूम में बैठ जाती हूँ*। मन ही मन अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य के बारे में मैं विचार करती हूँ कि कितनी पदमापदम सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो स्वयं भगवान मुझे पढ़ाने के लिए अपने ऊंचे ते ऊंचे धाम को छोड़ मेरे पास आते हैं। अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की स्मृति में खोई, अपने भाग्य का गुणगान करते - करते मैं महसूस करती हूँ जैसे मेरे परमशिक्षक शिव बाबा मेरे सामने आकर उपस्थित हो गए हैं।

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देख रही हूँ मैं अपने सामने संदली पर बैठे सम्पूर्ण अव्यक्त फ़रिश्ता स्वरूप में अपने प्यारे बापदादा को जो शिक्षक के रूप में मेरे सामने बैठे मुझे निहार रहें हैं। *अपने नयनो में असीम स्नेह को समाये अपनी मीठी दृष्टि से मुझे निहारते हुए बापदादा मन्द - मन्द मुस्करा रहें हैं। अपने परमशिक्षक के इस मनभावन, सुन्दर सलौने स्वरूप को अपनी आंखों में बसाकर मैं एकटक उन्हें निहारती जा रही हूँ*। बाबा की मीठी दृष्टि एक रूहानी नशे से मुझ आत्मा को भरपूर कर रही है। बापदादा के मुख कमल से निकल रहे एक - एक महावाक्य को चात्रिक बन मैं आत्मा सुन रही हूँ और अपनी बुद्धि में उसे धारण करती जा रही हूँ। *बाबा का एक - एक महावाक्य गहराई तक मेरे अंदर समाता जा रहा है। अपने शिव भोलानाथ की सच्ची पार्वती बन उनके मुख कमल से उच्चारित अमरकथा को मैं बड़े प्यार से और बड़े ध्यान से सुन रही हूँ*।

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अपनी बुद्धि रूपी झोली को अपने परमशिक्षक शिव बाबा के अविनाशी ज्ञान रत्नों से भरपूर करके, मन ही मन मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि हर रोज़ भगवान मुझे जो पढ़ाई पढ़ाने के लिए आते हैं उसे अच्छी रीति पढ़ कर, अपने जीवन मे धारण करके, भविष्य जन्म जन्मांतर के लिए अपनी श्रेष्ठ प्रालब्ध बनाने का पुरुषार्थ मैं अवश्य करूँगी । *अपने आप से यह प्रतिज्ञा करके अपने प्यारे बापदादा की और मैं जैसे ही नजर घुमाती हूँ, मैं महसूस करती हूँ जैसे बाबा का वरदानी हाथ मेरे सिर के ऊपर है और बाबा के वरदानी हस्तों से शक्तियों की अनन्त धारायें निकल कर मेरे अंदर समाकर, मेरी हर प्रतिज्ञा को पूरा करने का बल मेरे अंदर भरती जा रही हैं*। रंग बिरंगी शक्तियों की सहस्त्रो किरणों की बरसात मेरे ऊपर हो रही है जो मुझे बहुत ही शक्तिशाली बना रही हैं। *शक्तियों की ये अनन्त किरणे मुझे शक्तिशाली बनाने के साथ - साथ डबल लाइट स्थिति में स्थित करती जा रही है*।

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स्थूल देह और सूक्ष्म देह इन दोनों के भान से मुक्त एक अति सुन्दर निराकारी स्थिति में मैं स्थित होकर अब अपने आपको देख रही हूँ एक अति सूक्ष्म बिंदु के रूप में जो एक प्रकाशपुंज के समान चमकता हुआ दिखाई दे रहा हैं। *कुछ क्षणों के लिए मैं अपने इस स्वरूप में खो जाती हूँ और अपने स्व स्वरूप में टिक कर, अपने अंदर समाये गुणों और शक्तियों के अनुभव का आनन्द लेने लगती हूँ*। यह आत्म स्मृति बहुत गहरी फीलिंग का मुझे अनुभव करवाकर तृप्त कर देती हैं। अपने इस निराकार स्वरूप में स्थित अब मैं देख रही हूँ अपने सामने अपने प्यारे शिव बाबा को भी उनके निराकार बिंदु स्वरूप में। *महाज्योति के रूप में अनन्त शक्तियों की किरणों को बिखेरते हुए मेरे प्यारे पिता मेरे सम्मुख है। उनकी किरणों रूपी बाहों में समाकर अब मैं आत्मा उनके साथ उनके वतन की ओर जा रही हूँ*।

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अपनी किरणों रूपी बाहों में मुझ बिंदु आत्मा को समाये मेरे मीठे बाबा अब मुझे साकारी दुनिया से निकाल, आकारी दुनिया को पार करके अपनी निराकारी दुनिया मे ले आये हैं। अपने इस मूलवतन घर में अब मैं ज्ञान सागर अपने प्यारे पिता के सामने बैठी हूँ। *उनसे आ रही सर्वशक्तियों की सतरंगी किरणे मुझ पर बरस रही हैं। ज्ञान सागर मेरे प्यारे पिता के ज्ञान की रिमझिम फुहारों का शीतल स्पर्श मेरी बुद्धि को स्वच्छ बना रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे ज्ञान की शक्तिशाली किरणो के रूप में ज्ञान की बरसात मेरे ऊपर करके, बाबा मुझे समपूर्ण ज्ञानवान बना रहे हैं*। मास्टर नॉलेजफुल बन कर, ज्ञान की शक्ति से भरपूर होकर अब मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट रही हूँ।

➳ _ ➳ 
अपने साकार तन में भृकुटि के अकालतख्त पर अब मैं फिर से विराजमान हूँ और अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरुप को सदा स्मृति में रखते हुए अब मैं हर पल इस खुशी में रहती हूँ कि ऊंचे ते ऊंचे धाम से भगवान मुझे पढ़ाने आते हैं। *यह स्मृति मुझे अपने परमशिक्षक शिव पिता की शिक्षाओं को जीवन मे धारण करने का बल प्रदान करने के साथ - साथ मेरे पुरुषार्थी जीवन को भी उमंग उत्साह से सदा भरपूर रखती है*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

✺   *मैं हर शक्त्ति को कार्य मे लगाकर वृद्धि करने वाली आत्मा हूँ।*
✺   *मैं श्रेष्ठ धनवान आत्मा हूँ।*
✺   *मैं समझदार आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

✺ *मैं शुद्ध संकल्पों को अपने जीवन का अनमोल खजाना बनाने वाली आत्मा हूँ ।*
✺ *मैं आत्मा मालामाल हूँ ।*
✺ *मैं समर्थ आत्मा हूँ ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. बापदादा देख रहे थे कि सबसे *तीव्र गति की सेवा है - 'वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाना'। वृत्ति बहुत तीव्र राकेट से भी तेज है।* वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन कर सकते हो। जहाँ चाहो, जितनी आत्माओं के प्रति चाहो वृत्ति द्वारा यहाँ बैठे-बैठे पहुँच सकते हो। वृत्ति द्वारा दृष्टि और सृष्टि परिवर्तन कर सकते हो।

 

 _ ➳  2. आपके जड़ चित्र अब तक, लास्ट जन्म तक वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं ना! देखा है ना! मन्दिर देखा हैं ना!

 

 _ ➳  3. *मन्दिर की मूर्तियाँ प्रत्यक्ष रूप में वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं* अर्थात् आप आत्मायें मन्दिर की मूर्तियां सेवा कर रही हैं। कितने भक्त वायब्रेशन द्वारा अपनी सर्व इच्छायें पूर्ण कर रहे हैं। तो हे चैतन्य मूर्तियाँ, *अब अपने शुभ भावना की वृत्ति, शुभ कामनाओं की वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैलाओ।*

 

✺   *ड्रिल :-  "वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं मास्टर सर्वशक्तिमान ब्राह्मण आत्मा *डाइमंड हॉल में बापदादा के समक्ष बिराजमान हूँ... बापदादा मुझे अपनी दृष्टि और वायब्रेशन से निहाल कर रहे है...* बाबा की भृकुटि से नैनो से कभी प्रेम तो कभी सुख तो कभी आनंद कि किरणें फैल रही है... कभी बापदादा मुझे शक्तिशाली फरिश्ता बना देते तो कभी पवित्रता के झरने में नहलाते है... मीठे बाबा को मुझ पर कितना गर्व है... *सबके मुख से यही निकल रहा है मेरा बाबा मेरा बाबा...* मेरा बाबा मीठा बाबा प्यारा बाबा... बापदादा देख रहे थे कि सबसे तीव्र गति की सेवा है - 'वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाना'... वृत्ति बहुत तीव्र राकेट से भी तेज है...

 

 _ ➳  जैसी हमारी वृति अर्थात हमारी कामनाएँ और हमारी भावनाएँ होती है वैसा ही वायुमंडल बनता जा रहा है... शुभ कामनाएँ और शुभ भावनाओं की मात्रा में थोडी सी भी कमजोरी आई तो वायुमंडल भी कमजोर संकल्पो का बन रहा है... जब की *बाबा की पॉवरफुल दृष्टि से वायुमंडल भी अचानक पॉवरफुल बन गया...* ये बाबा की पॉवरफुल वृति का ही कमाल है जो हम सब यहाँ मधुबन में बैठे है... इस तरह हम वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन कर सकते है... *वृत्ति द्वारा जहाँ चाहे, जितनी आत्माओं के प्रति चाहे यहाँ बैठे-बैठे पहुँच सकते है...*

 

 _ ➳  यहाँ बैठे बैठे मैं आत्मा संपूर्ण विश्व में *शुभभावना और शुभकामनाओ की वृत्ति द्वारा आत्माओ की दृष्टि और सृष्टि परिवर्तन कर रही हूँ...* मुझसे शुभभावना और शुभकामनाओ के प्रकंपन फैल रहे है... चाहे कुछ आत्माओ के प्रति हो या कोई आत्मा के प्रति हो या विश्व के प्रति हो सब जगह शुभ वायब्रेशन फैल रहे है... अब मैं आत्मा मंदिरो में स्थापित अपनी ही मूर्तियो को देख रही हूँ... मैं देख रही हूँ की *आज भी लास्ट जन्म तक ये मूर्तियां वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रही हैं...*

 

 _ ➳  मन्दिर की *मूर्तियाँ प्रत्यक्ष रूप में वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रही हैं...* अर्थात् मैं आत्मा मन्दिर की मूर्ति सेवा कर रही हूँ... मंदिर में खडे सारे भक्तो की वायब्रेशन द्वारा सर्व इच्छायें पूर्ण कर रही हूँ... घर घर में जहाँ कही भी मेरी मूर्ति विराजमान है उस घर की सारी आत्माएँ निश्चिंत और निर्भय स्थिति की अनुभूति कर रही है... मंदिरो में भीड बढती जा रही हैं... सारे भक्त तृप्त हो रहे है... *सबकी शुभ मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सब सुख शांति संपन्न निर्विध्न जीवन जी रहे है...*

 

 _ ➳  जैसे मेरी जड मूर्ति इतना कर सकती है तो मैं तो स्वयं ही चैतन्य मूर्ति हूँ तो कितना कर सकती हूँ... *मैं संबंध संपर्क में आनेवाली हर एक आत्मा के प्रति शुभ भावना की वृत्ति और शुभ कामनाओं की वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैलाती जा रही हूँ...* सबके विघ्न नष्ट हो रहे है... पूरे विश्व का भ्रमण करती जा रही हूँ... मैं सुन रही हूँ चारो ओर भक्तो की पुकार को... अपने हस्तो द्वारा, नैनो द्वारा और वायब्रेशन द्वारा सबका कल्याण करती जा रही हूँ... सब सुखी हो रहे है सबका भला हो रहा है... सब स्वयं को भरपूर महसूस कर रहे है... शुक्रिया बाबा आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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