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 03 / 02 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *मनसा वाचा कर्मणा से मर्यादा पुरुषोत्तम बनकर रहे ?*

 

➢➢ *पवित्र बनने की प्रतिज्ञा की ?*

 

➢➢ *सदा कल्याणकारी भावना द्वारा गुणग्राही बनकर रहे ?*

 

➢➢ *अपना सब कुछ बाप को अर्पण कर सदा हलके रहे ?*

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*अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  अभी-अभी आवाज में आना और अभी-अभी आवाज से परे हो जाना - जैसे आवाज में आना सहज लगता है वैसे यह भी सहज अनुभव हो क्योंकि आत्मा मालिक है। *रुहानी एक्सरसाइज में सिर्फ मुख की आवाज से परे नहीं होना है। मन से भी आवाज में आने के संकल्प से परे होना है। ऐसे नहीं मुख से चुप हो जाओ और मन में बातें करते रहो। आवाज से परे अर्थात मुख और मन दोनों की आवाज से परे, शान्ति के सागर में समा जायें।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सच्ची लगन द्वारा विघ्नों को समाप्त करने वाली मास्टर सर्वशक्तिवान आत्मा हूँ"*

 

  *सच्ची लगन विघ्नों को समाप्त कर देती है। कितनी भी रूकावटें आएं लेकिन एक बल एक भरोसे के आधार पर सफलता मिलती रही है और मिलती रहेगी, ऐसा अनुभव होता रहता है ना।*

 

  *जहाँ सर्व शक्तिवान बाप साथ है वहाँ यह छोटी छोटी बातें ऐसे समाप्त हो जाती हैं जैसे कुछ भी थी ही नहीं। असम्भव भी सम्भव हो जाता है क्योंकि सर्व शक्तिवान के बच्चे बन गए। 'मक्खन से बाल' समान सब बातें सिद्ध हो जाती हैं।*

 

  अपने को ऐसे मास्टर सर्वशक्तिवान श्रेष्ठ आत्मायें अनुभव करते हो ना। कमजोरी तो नहीं आती। *बाप सर्वशक्तिवान हैं, तो बच्चों को बाप अपने से भी आगे रखते हैं। बाप ने कितना ऊंच बनाया है, क्या क्या दिया है - इसी का सिमरण करते-करते सदा हर्षित और शक्तिशाली रहेंगे।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अंत मते सो गति क्या होगी? समझदार तो हो ना? इसलिए अपनी मनसा को बिजी रखेंगे ना, *मनसा सेवा का टाइमटेबुल बनायेंगे अपना तो बिन्दी लगाने की आवश्यकता नहीं पडेगी। बस, होंगे ही बिन्दी रूप। इसलिए अभी अपने मन का टाइमटेबुल फिक्स करो।*

 

✧  *मन को सदा बिजी रखो, खाली नहीं रखो।* फिर मेहनत करनी पडती है। ऊँचे-ते-ऊँचे भगवान के बच्चे हो, तो *आपका एक-एक सेकण्ड का टाइमटेबुल फिक्स होना चाहिए* क्यों नहीं बिन्दी लगती, उसका कारण क्या?

 

✧  *ब्रेक पॉवरफुल नहीं है। शक्तियों का स्टॉक जमा नहीं है इसलिए सेकण्ड में स्टॉप नहीं कर सकते।* कई बच्चे कोशिश बहुत करते हैं, जब बापदादा देखते हैं मेहनत बहुत कर रहे हैं, यह नहीं हो, यह नहीं हो, कहते हैं नहीं हो लेकिन होता रहता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  किसको देखते हो? आकार को देखते व अव्यक्त का देखते हो? *अगर अपनी व औरों की आकृति को न देख अव्यक्त को देखेंगे तो आकर्षण मूर्त बनेंगे।* अगर आकृति को देखते तो आकर्षण-मूर्त नहीं बनते हो। *आकर्षण-मूर्त बनना है तो आकृति को मत देखो। आकृति के अन्दर जो आकर्षण रूप है, उसको देखने से ही अपने से औरों को आकर्षण होगा। तो अब यही अव्यक्त सर्विस रही हुई है।* कोई भी चित्र को देखते हो, तो चित्र को नहीं देखो, लेकिन चित्र के अन्दर जो चेतन है उसको देखो। *और उस चित्र के जो चरित्र हैं उन चरित्रों को देखो। चेतन और चरित्र को देखेंगे तो चरित्र तरफ ध्यान जाने से चित्र अर्थात् देह के भान से दूर हो जायेंगे।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पवित्र बन सतयुग का वर्सा लेना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मीठे बाबा को दिल की बात सुनाने के लिये तपस्या धाम में पहुँचती हूँ... एक पिता का विशाल हृदय देख अभिभूत हूँ...* कि बच्चे संगम पर भी अथाह सुखों में... और सतयुगी दुनिया के वैभव भी बच्चों के लिये है... और *शिवपिता तपस्या धाम में बैठा, मुझे सुख की दुनिया में ले चलने की प्रतिज्ञा करवा रहें हैं... कि मेरे प्यारे बच्चे सदा के लिये सुख भरी दुनिया के मालिक बनकर, सदा खुशियों के झूले में झूलते रहें...* मेरा बाबा कितना मीठा और प्यारा है... मीठे बाबा के लिये दिल में अथाह प्यार लेकर, मैं आत्मा... तपस्या धाम में प्रवेश करती हूँ...

 

  *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को पवित्रता की प्रतिज्ञा करवाते हुए बड़े प्यार से कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... अब तुम्हारे 84 जन्म पूरे  हुए, अब तुम यह अंतिम जन्म पवित्र बनो... *इस काम महाशत्रु को जीतो वा माया रावण पर जीत पाओ... इसके लिये तुम्हें पुरुषार्थ करना है..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्यारे बाबा से पवित्रता की सच्ची राखी बंधवाते हुए कहती हूँ :-*"मेरे प्यारे प्यारे बाबा... मैं आत्मा आपकी यादों की छत्रछाया में पलकर, असीम खुशियों की मालिक बन गयी हूँ... *आपने मुझ आत्मा के जीवन को... सदा के लिये सुखों में आबाद किया है... दिव्य गुणों, शक्तियों और पवित्रता से सजाकर, मुझे देवताई रूप दिया है..."*

 

  *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को दिव्य गुणों और शक्तियों से भरकर कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... गृहस्थ जीवन में रहते... कमल फूल समान पवित्र रह... *आजीवन पवित्र रहने की प्रतिज्ञा करो कि यह अंतिम जन्म पवित्र रहेंगे, यह अपवित्र दुनिया विनाश होनी है... इसलिए अब पवित्र रह... सूर्यवंशी घराने में जाने का पुरुषार्थ करो... जो सूर्यवंशी बनेंगे वही गद्दी पर बैठेंगे..."*

 

_ ➳  *मैं आत्मा मीठे बाबा की श्रीमत को दिल से लगाते हुए कहती हूँ :-* "मेरे मीठे मीठे बाबा... आप जब मेरे जीवन में नहीं थे तो... जीवन दुःखों की गठरी सा, अंतर्मन को बोझिल किये हुए था... अब मैं आत्मा... आपकी यादों में और ज्ञान रत्नों की दौलत पाकर बहुत सुखी हो गयी हूँ... *विकर्मो की कालिमा से छूटकर पवित्रता से सज संवर रही हूँ...* आप... सच्चे साथी को साथ रख... हर कर्म को श्रेष्ठ बनाती जा रही हूँ..."

 

*मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को सत्य और असत्य की समझ देकर बेहद का समझदार बनाते हुए कहा :-* "हे मेरे सिकीलधे बच्चे... *मीठे बाबा संग सदा पवित्र मार्ग पर चलो... और ईश्वरीय दौलत, अथाह खजानों को अपनी बाँहो में भरकर मुस्कराते रहो...* मीठे बाबा को पा लिया, सब कुछ पा लिया... तो सदा इस नशे में झूमते रहो... *बाप ही बच्चों को तिलक देकर अपने तख्त पर बिठाते  हैं... तो जो सूर्यवंशी बनेंगे वही गद्दीनशीन बनेंगे...* इसलिए जो बाबा सिखलाते हैं... उन्हीं श्रेष्ठ कर्मो और दिव्य गुणों की धारणा से, जीवन को शानदार बनाओ..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा प्यारे बाबा के प्यार में अतीन्द्रिय सुख पाते हुए कहती हूँ :-* "मेरे दिल के सच्चे-सच्चे मीत... *मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा... सदा आपकी श्रीमत पर चल... सपूत बच्चा बन... पवित्र बन आपसे वर्सा ले रही हूँ...* आपने मुझ आत्मा का कितना प्यारा और शानदार भाग्य सजाया है... *अपनी पालना देकर, मुझे मनुष्य से देवता बना रहे हो... सुखों का फूल मेरे जीवन मे खिला रहे हो...* मीठे बाबा को दिल की गहराईयों से शुक्रिया कर मैं आत्मा... साकार वतन में लौट आई..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- पवित्र बनने की युक्ति सबको सुनानी है*"

 

_ ➳  जिस पवित्र दुनिया की स्थापना करने के लिए भगवान स्वयं इस धरा पर आये हैं उस पवित्र दुनिया की मैं मालिक बनने वाली हूँ, मन मे यह विचार आते ही उस पवित्र दुनिया की खूबसूरत तस्वीर स्वत: ही आँखों के सामने उभर आती है और मन उस दुनिया में विचरण करने लगता है। *लक्ष्मी नारायण की उस पवित्र दुनिया को मैं मन बुद्धि रूपी नेत्रों से देख रही हूँ जहाँ सुख, शांति, सम्पन्नता अखुट है। देवी देवताओं की वो सुन्दर दुनिया जहाँ हर मनुष्य दैवी गुणों से सम्पन्न,16 कला सम्पूर्ण, सम्पूर्ण निर्विकारी, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं*। हर घर मंदिर है। जहाँ चैतन्य में देवी देवता निवास करते हैं। नफरत, घृणा, ईर्ष्या, द्वेष का वहाँ कोई नाम निशान ही नही। सभी के हृदय शुद्ध पवित्र प्रेम से परिपूर्ण हैं। 

 

_ ➳  ना किसी को अपने ऊँच पद का अभिमान है और ना किसी को अपने छोटे पद का मलाल। राजा हो या प्रजा सभी दैहिक भान से मुक्त, अपने जीवन से पूर्णतया सन्तुष्ट हैं। *ऐसी अति सुन्दर पवित्र दुनिया में प्रकृति भी सुख देने वाली है, सदा बहार मौसम, वातावरण में गूंजती सुन्दर - सुन्दर पक्षियों की मधुर संगीत सुनाती मधुर आवाजें। उद्यानों में खिलें रंग बिरंगे खुशबूदार वैरायटी फूल और उनकी सुंगन्ध से महकते राजमहलों के बड़े - बड़े आँगन और उन आंगन में खेलते नन्हे - नन्हे प्रिंस प्रिंसेज*। ये सभी खूबसूरत मन को मोहने वाले दृश्य एक - एक करके मेरी आँखों के सामने आ रहें हैं जो मन को एक सुखद एहसास करा रहे हैं।

 

_ ➳  ऐसे पवित्र दुनिया के अति सुन्दर नजारों का भरपूर आनन्द लेकर मैं दिल की गहराइयों से अपने प्यारे भगवान बाप का शुक्रिया अदा करती हूँ जो *अपने बच्चों के लिए ऐसी खूबसूरत सौगात हथेली पर ले कर आयें हैं और अपने बच्चों को फरमान कर रहें हैं कि पवित्र बन पवित्र दुनिया के मालिक बनो*। ऐसी पवित्र दुनिया के रचयिता अपने भगवान बाप से मैं मन ही मन प्रोमिस करती हूँ कि पवित्र बनने के उनके इस फरमान पर मैं अवश्य चलूँगी और साथ ही साथ मैं सबको बाप का यह ऑर्डिनेंस भी सुनाऊँगी कि पवित्र बनो तो पवित्र दुनिया के मालिक बनेंगे। 

 

_ ➳  अपने प्यारे बाबा से यह प्रोमिस करके, पवित्रता की शक्ति से स्वयं को भरपूर करने के लिए मैं अपने अनादि पवित्र निराकार स्वरूप में स्थित होकर मन बुद्धि के विमान पर बैठ पहुँच जाती हूँ पवित्रता के सागर अपने प्यारे पिता के पास उनकी निर्विकारी दुनिया परमधाम में। *पवित्रता की अनन्त किरणे बिखेरते अपने शिव पिता को मैं देख रही हूँ। स्वयं को पवित्रता की शक्ति से भरपूर करने के लिए मैं धीरे - धीरे उनके पास जाती हूँ उनकी अनन्त किरणो की छत्रछाया के नीचे जा कर बैठ जाती हूँ*। मैं देख रही हूँ बाबा से आ रही वो अनन्त पवित्र किरणें जैसे - जैसे मेरे ऊपर पड़ रही है, जवाला स्वरूप धारण करती जा रही हैं और मुझ आत्मा के ऊपर चढ़ी विकारो की कट को जलाकर भस्म कर रही हैं। 

 

_ ➳  विकारो की कट ने मेरे पवित्रता के जिस निजी गुण को मर्ज कर दिया था वो पतित पावन मेरे प्यारे पिता की पवित्रता की शक्ति पाकर पुनः इमर्ज हो गया है और मैं आत्मा फिर से अपने अनादि सम्पूर्ण पवित्र स्वरूप को प्राप्त कर रही हूँ। *पवित्रता की शक्ति से भरपूर होकर मैं आत्मा अब परमधाम से नीचे आती हूँ और अपने पवित्र फरिश्ता स्वरूप को धारण कर विश्व ग्लोब पर पहुँच, अपने प्यारे बापदादा का आह्वान कर, उनके साथ कम्बाइंड होकर, सारे विश्व मे पवित्रता के वायब्रेशन्स फैलाते हुए, विश्व की सर्व आत्माओ को मनसा सकाश देते, सबको पवित्र रहने का परमात्म फरमान सुना कर, अब मैं अपने निराकारी स्वरूप को धारण कर वापिस साकारी दुनिया मे प्रवेश करती हूँ*।

 

_ ➳  अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, अपने सम्बन्ध सम्पर्क में आने वाली सर्व आत्माओं को, *पवित्र बन पवित्र दुनिया के मालिक बनने का अपने प्यारे पिता का ऑर्डिनेंस  सुना कर मैं अपने भगवान बाप से किये हर प्रोमिस को पूरा करने का पुरुषार्थ करते हुए इस परमात्म कार्य मे अब सदा तत्पर हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं सदा कल्याणकारी भावना रखने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं गुणग्राही आत्मा हूँ।*

   *मैं अचल अडोल आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा अपना सब कुछ बाप को अर्पण करती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा हल्की रहती हूँ  ।*

   *मैं डबल लाइट फरिश्ता हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  1. बापदादा देख रहे थे कि सबसे *तीव्र गति की सेवा है - 'वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाना'। वृत्ति बहुत तीव्र राकेट से भी तेज है।* वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन कर सकते हो। जहाँ चाहो, जितनी आत्माओं के प्रति चाहो वृत्ति द्वारा यहाँ बैठे-बैठे पहुँच सकते हो। वृत्ति द्वारा दृष्टि और सृष्टि परिवर्तन कर सकते हो।

 

 _ ➳  2. आपके जड़ चित्र अब तक, लास्ट जन्म तक वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं ना! देखा है ना! मन्दिर देखा हैं ना!

 

 _ ➳  3. *मन्दिर की मूर्तियाँ प्रत्यक्ष रूप में वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रहे हैं* अर्थात् आप आत्मायें मन्दिर की मूर्तियां सेवा कर रही हैं। कितने भक्त वायब्रेशन द्वारा अपनी सर्व इच्छायें पूर्ण कर रहे हैं। तो हे चैतन्य मूर्तियाँ, *अब अपने शुभ भावना की वृत्ति, शुभ कामनाओं की वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैलाओ।*

 

✺   *ड्रिल :-  "वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं मास्टर सर्वशक्तिमान ब्राह्मण आत्मा *डाइमंड हॉल में बापदादा के समक्ष बिराजमान हूँ... बापदादा मुझे अपनी दृष्टि और वायब्रेशन से निहाल कर रहे है...* बाबा की भृकुटि से नैनो से कभी प्रेम तो कभी सुख तो कभी आनंद कि किरणें फैल रही है... कभी बापदादा मुझे शक्तिशाली फरिश्ता बना देते तो कभी पवित्रता के झरने में नहलाते है... मीठे बाबा को मुझ पर कितना गर्व है... *सबके मुख से यही निकल रहा है मेरा बाबा मेरा बाबा...* मेरा बाबा मीठा बाबा प्यारा बाबा... बापदादा देख रहे थे कि सबसे तीव्र गति की सेवा है - 'वृत्ति द्वारा वायब्रेशन फैलाना'... वृत्ति बहुत तीव्र राकेट से भी तेज है...

 

 _ ➳  जैसी हमारी वृति अर्थात हमारी कामनाएँ और हमारी भावनाएँ होती है वैसा ही वायुमंडल बनता जा रहा है... शुभ कामनाएँ और शुभ भावनाओं की मात्रा में थोडी सी भी कमजोरी आई तो वायुमंडल भी कमजोर संकल्पो का बन रहा है... जब की *बाबा की पॉवरफुल दृष्टि से वायुमंडल भी अचानक पॉवरफुल बन गया...* ये बाबा की पॉवरफुल वृति का ही कमाल है जो हम सब यहाँ मधुबन में बैठे है... इस तरह हम वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को परिवर्तन कर सकते है... *वृत्ति द्वारा जहाँ चाहे, जितनी आत्माओं के प्रति चाहे यहाँ बैठे-बैठे पहुँच सकते है...*

 

 _ ➳  यहाँ बैठे बैठे मैं आत्मा संपूर्ण विश्व में *शुभभावना और शुभकामनाओ की वृत्ति द्वारा आत्माओ की दृष्टि और सृष्टि परिवर्तन कर रही हूँ...* मुझसे शुभभावना और शुभकामनाओ के प्रकंपन फैल रहे है... चाहे कुछ आत्माओ के प्रति हो या कोई आत्मा के प्रति हो या विश्व के प्रति हो सब जगह शुभ वायब्रेशन फैल रहे है... अब मैं आत्मा मंदिरो में स्थापित अपनी ही मूर्तियो को देख रही हूँ... मैं देख रही हूँ की *आज भी लास्ट जन्म तक ये मूर्तियां वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रही हैं...*

 

 _ ➳  मन्दिर की *मूर्तियाँ प्रत्यक्ष रूप में वायब्रेशन द्वारा सेवा कर रही हैं...* अर्थात् मैं आत्मा मन्दिर की मूर्ति सेवा कर रही हूँ... मंदिर में खडे सारे भक्तो की वायब्रेशन द्वारा सर्व इच्छायें पूर्ण कर रही हूँ... घर घर में जहाँ कही भी मेरी मूर्ति विराजमान है उस घर की सारी आत्माएँ निश्चिंत और निर्भय स्थिति की अनुभूति कर रही है... मंदिरो में भीड बढती जा रही हैं... सारे भक्त तृप्त हो रहे है... *सबकी शुभ मनोकामनाएं पूर्ण होने पर सब सुख शांति संपन्न निर्विध्न जीवन जी रहे है...*

 

 _ ➳  जैसे मेरी जड मूर्ति इतना कर सकती है तो मैं तो स्वयं ही चैतन्य मूर्ति हूँ तो कितना कर सकती हूँ... *मैं संबंध संपर्क में आनेवाली हर एक आत्मा के प्रति शुभ भावना की वृत्ति और शुभ कामनाओं की वृत्ति से वायुमण्डल में वायब्रेशन फैलाती जा रही हूँ...* सबके विघ्न नष्ट हो रहे है... पूरे विश्व का भ्रमण करती जा रही हूँ... मैं सुन रही हूँ चारो ओर भक्तो की पुकार को... अपने हस्तो द्वारा, नैनो द्वारा और वायब्रेशन द्वारा सबका कल्याण करती जा रही हूँ... सब सुखी हो रहे है सबका भला हो रहा है... सब स्वयं को भरपूर महसूस कर रहे है... शुक्रिया बाबा आपका बहुत बहुत शुक्रिया...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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