━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 03 / 03 / 19  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *सच्चाई , सफाई के साथ सरल स्वभाव और शुभ भाव बना रहा ?*

 

➢➢ *"पा लिया" - इसी ख़ुशी में नाचते गाते रहे ?*

 

➢➢ *बिंदु के रहस्य में स्थित रहे ?*

 

➢➢ *शुद्ध संकल्प की बूँद द्वारा मिलन की सिद्धि का अनुभव किया ?*

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

✧  *बच्चों से बाप का प्यार है इसलिए सदा कहते हैं बच्चे जो हो, जैसे हो-मेरे हो। ऐसे आप भी सदा प्यार में लवलीन रहो, दिल से कहो बाबा जो हो वह सब आप ही हो।* कभी असत्य के राज्य के प्रभाव में नहीं आओ।

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

   *"मैं निश्चयबुद्धि विजयी रत्न हूँ"*

 

✧  सदा अपने को निश्चय बुद्धि विजयी रत्न समझते हो? *सदा के निश्चय बुद्धि अर्थात् सदा के विजयी। जहाँ निश्चय है वहाँ विजय स्वत: है। अगर विजय नहीं तो निश्चय में कहाँ न कहाँ कमी है। चाहे स्वयं के निश्चय में, चाहे बाप के निश्चय में, चाहे नॉलेज के निश्चय में, किसी भी निश्चय में कमी माना विजय नहीं। निश्चय की निशानी है - 'विजय'।* अनुभवी हो ना।

 

  *निश्चय बुद्धि को माया कभी भी हिला नहीं सकती। वह माया को हिलाने वाले होंगे, स्वयं हिलने वाले नहीं। निश्चय का फाउण्डेशन अचल है तो स्वयं भी अचल होंगे। जैसा फाउण्डेशन वैसी मजबूत बिल्डिंग बनती है। निश्चय का फाउण्डेशन अचल है तो कर्म रूपी बिल्डिंग भी अचल होगी।*

 

  माया को अच्छी तरह से जान गये हो ना। माया क्यों और कब आती है, यह ज्ञान है ना। जिसको पता है कि इस रीति से माया आती है। तो वह सदा सेफ रहेंगे ना। अगर मालूम है कि यहाँ से इस रीति से दुश्मन आयेगा तो सेफ्टी करेंगे ना। आप भी समझदार हो तो माया वार क्यों करे। माया की हार होनी चाहिए। *सदा विजयी रत्न हैं, कल्प-कल्प के विजयी हैं, इस स्मृति से समर्थ बन आगे बढ़ते चलो। कच्चे पत्तों को चिड़ियायें खा जाती है इसलिए पक्के बनो। पक्के बन जायेंगे तो माया रूपी चिड़िया खायेगी नहीं। सेफ रहेंगे।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

✧  जैसे सइंस ने लाइट हाऊस, माइट हाऊस बनाया है, तो सेकण्ड में स्विच ऑन करने से लाइट हाऊस चारों ओर लाइट देने लगता है, माइट देने लगता है। *ऐसे आप स्मृति के संकल्प का स्विच ऑन करने से लाइट हाऊस, माइट हाऊस हाक आत्माओं का लाइट, माइट दे सकते हो?*

 

✧  *एक सेकण्ड का ऑर्डर हो अशरीरी बन जाओ, बन जायेंगे ना!* कि युद्ध करनी पडेगी? यह अभ्यास बहुत काल का ही अंत में सहयोगी बनेगा। *अगर बहुतकाल का अभ्यास नहीं होगा तो उस समय अशरीरी बनना, मेहनत करनी पडेगी।*

 

✧  इसलिए बापदादा यही इशारा देते हैं - कि सारे दिन में कर्म करते हुए भी बार-बार यह अभ्यास करते रहो। इसके लिए मन के कन्ट्रोलिंग पॉवर की आवश्यकता है। *अगर मन कन्ट्रोल में आ गया तो कोई भी कर्मेन्द्रिय वशीभूत नहीं कर सकती।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

〰✧  *जितना साक्षी रहेंगे उतना साक्षात्कारमूर्त और साक्षात् मूर्त बनेंगे।* साक्षीपन कम होने के कारण साक्षात् और साक्षात्कारमूर्त भी कम बने हैं। *इसलिए यह अभ्यास करो। कौन सा अभ्यास? अभी-अभी आधार लिया, अभी-अभी न्यारे हो गये। यह अभ्यास बढ़ाना अर्थात् सम्पूर्णता और समय को समीप लाना है।*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

 

∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚✰✧゚゚

────────────────────────

 

∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बिंदु और बूँद का रहस्य"*

 

_ ➳ खूबसूरत बगीचे मे टहलते हुए, *बाबा के चित्र को मन और बुद्धि में बसाकर मैं आत्मा... उस चित्र में छुपी विचित्रता को मन ही मन देख मुस्कुरा रही हूँ*... बाबा के बिना ये आत्मा क्या थी... औऱ अब क्या हूँ यही विचार कर रही हूँ... *बाबा ने तो मुझ आत्मा में हजारों रंग भर दिए हैं... उस बिंदु रूप विचित्र बाप को याद करते करते मै आत्मा सूक्ष्म वतन पहुँच जाती हूँ...* 

 

 *बाबा तो मानो मुझ आत्मा का इंतजार ही कर रहा था, बाबा ने मुझ आत्मा को अपने बिंदु रूप पर मोहित होते देख कहा* :- "प्यारे बच्चे... मेरे मीठे बच्चे... तुम्हें इस चित्र मे छुपे विचित्र रूप वाले चित्र को ही याद रखना है... *ये विचित्र रूप ही तुम्हें इस दुनिया का मालिक बनाता हैं... जितना इस चित्र की विचित्रता में गहराई से उतरोगे उतना ही भरपूर होते जाओगे* ... मै तो तुम्हें भरपूर करने ही इस संगमयुग पर आता हूँ..."

 

_ ➳  *मीठे बाबा को अपने से बात करता देख खुशी मे लवलीन हुई मैं आत्मा बाबा से कहती हूं*... मेरे प्यारे बाबा... आपके इस विचित्र रूप ने, *बिंदु रूप ने तो मुझे आप संग बांध ही दिया हैं... इस बिंदु से मिली शांति, प्रेम, आनंद का तो वर्णन ही नही किया जा सकता* ... कल्प कल्प तरसती आत्मा को अब इस बिंदु ने आकर भरपूर किया हैं..."

 

*मीठे बाबा मेरे हर्षित मुख को देख कर बोले* :- "मेरे रूप मे डूबने वाले सिकीलधे बच्चे... *मैं तो तुम पर अपना सब कुछ न्योछावर करने ही तो अपना धाम छोड़ कर आता हूँ... तुम्हें 21 जन्मो की बादशाही देता हूँ... तुम्हें विश्व का राजा बनाता हूँ* ... हमेशा इस मेरे विचित्र रूप से प्यार करते रहना... हमेशा आनंदित रहना और श्रीमत का पालन करना..."

 

_ ➳  *मै आत्मा बाबा की इतनी प्यारी मन को मोह लेने वाली बातों को सुन कर कहती हूँ* :- "मेरे प्यारे हम पर सर्वस्व लुटाने वाले बाबा... मैं आत्मा आपका प्यार पा कर धन्य हो गईं हूँ... *खुशियाँ क्या होती हैं मुझे पता ही नही था... आपने आते ही मुझ आत्मा को रंक से राजा बना दिया... तीनो लोक का मालिक बन दिया* ... बाबा आपके इस विचित्र रूप ने तो कमाल कर दिया..."

 

  *परमपिता मेरी बातों से खुश हो कहते है* :- "मेरे सपूत बच्चे... तुझे इस रूप मे इस कदर मगन देख बाप का प्यार और भी गहरा हो गया... *बस इसी तरह इस इस चित्र को देखते हुए अपने विचित्र बाप का हाथ पकड़े रहना... कभी भी मुझ को छोड़ना नही... ये विचित्र बाप ही तुम्हारी नैया का खिवैया हैं... इस को पूरा पूरा यूज़ करना घबराना नही* ..."

 

_ ➳  *बाबा के इतने प्यार में डूबे अनमोल वचन सुनकर मैं आत्मा जैसे भावुक ही हो जाती हूँ औऱ बाबा को बोलती हूँ* :- "वाह मेरे सबसे प्यारे बाबा... तूने तो इस छोटे से बिंदु रूप में कमाल ही कर दिया... *इस छोटी सी मुझ आत्मा को मस्तक मणी ही बना दिया... मै आत्मा भी आज आप से वायदा कर रही हूं कि मै दिन पर दिन औऱ भी गहराई से, पूरी शिद्दत से... बाबा के इस विचित्र रूप में डूबती जा रही हूँ* ... विचित्र बाप की यादों को अपनी पूरी दिनचर्या बनाती जा रही हूँ... बाप से ये मीठा वायदा कर मैं आत्मा ख़ुशी ख़ुशी अपने साकार लोक में, साकार शरीर में वापिस आ जाती हूँ..."

 

────────────────────────

 

∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- "पा लिया" - इसी ख़ुशी में नाचते गाते रहना*"

 

 _ ➳  अपने संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की सर्वश्रेष्ठ प्राप्तियों के बारे में विचार करते ही, मन संगमयुग की मौजों के आनन्द की मीठी यादों में खो जाता है। *स्वयं भगवान के साथ मौज मनाने के सुन्दर पलों की मधुर स्मृतियाँ यादगार बन कर विभिन दृश्यों के रूप में बार - बार आंखों के सामने चित्रित होने लगती है*।  मन्त्रमुग्ध होकर इन सभी दृश्यों का मैं आनन्द ले रही हूँ। कहीं परमात्मा की अवतरण भूमि मधुबन में भगवान के साथ साकार मिलन मनाने का खूबसूरत दृश्य, तो कही वतन में अव्यक्त बापदादा के साथ स्नेह मिलन मनाते उनसे मीठी - मीठी रूहरिहान करने वाले मनमोहक दृश्य, *कहीं सर्वसम्बन्धो का सुख देते बाबा के भिन्न भिन्न स्वरूप, और कही दाता बन परमात्म गुणों, शक्तियों और खजानो से मुझे भरपूर करते मेरे दिलाराम बाबा का अति सुन्दर लाइट माइट स्वरूप*।

 

 _ ➳  इन अनेक दृश्यों में खोई, संगमयुग की मौजो का आनन्द लेते हुए मैं अपने सर्वश्रेष्ठ भाग्य की सराहना करती हूँ कि कितनी सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा! *दुनिया वाले तो बेचारे थोड़ी सी मौज मनाने के लिए  भी मौके की तलाश करते हैं। त्योहारों का सहारा लेते हैं किन्तु मेरा तो हर दिन मौजों से भरपूर है*। अपने प्यारे बाबा के साथ संगमयुग का हर दिन, हर पल, हर सेकेण्ड मेरे लिए मन की, बेहद की मौज मनाने का समय है। *मन ही मन अपने भाग्य का गुणगान करती, अपने भाग्यविधाता बाबा का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करती अब मैं उनकी यादों में खोकर, उनके साथ बेहद की मौज मनाने के लिए अंतर्मुखता की गुफा में चली जाती हूँ*।

 

 _ ➳  देह और देह की दुनिया की हर बात से किनारा कर, हर संकल्प विकल्प से अपना ध्यान हटाकर, अपने मन और बुद्धि को मैं पूरी तरह से एकाग्र कर लेती हूँ। *एकाग्रता की यह शक्ति सेकण्ड में मुझे बाबा के समान विदेही बना कर, देह के भान से मुक्त कर देती है। अपने आत्मिक स्वरूप में मैं स्थित हो जाती हूँ और अपने अति सुंदर सतोगुणी स्वरूप को निहारते हुए, उसमे से निकल रही रंग बिरंगी किरणों का आनन्द लेते हुए, देह रूपी पिंजरे से बाहर निकल आती हूँ*। देह से डिटैच यह अवस्था बहुत न्यारी और प्यारी है। हद की मौजों के आकर्षण से मुक्त इस अवस्था मे बेहद की मौजो का आनन्द लेने के लिए अब मैं चमकती हुई मणि जागती ज्योति बन ऊपर आकाश की ओर प्रस्थान कर जाती हूँ।

 

 _ ➳  स्थूल और सूक्ष्म देह के हर प्रकार के बन्धन से मुक्त अपने निराकारी ज्योति बिंदु स्वरूप में मैं आत्मा तीव्र गति से ऊपर आकाश की और उड़ती जा रही हूँ। *अपने निराकार शिव पिता के सुंदर सलौने स्वरूप को मन बुद्धि के दिव्य चक्षु से निहारते हुए, उनके प्रेम की लग्न में मग्न मैं आत्मा आकाश और अंतरिक्ष को पार कर, फरिश्तो की आकारी दुनिया से परे, चमकते हुए चैतन्य सितारों की निराकारी दुनिया में प्रवेश करती हूँ और निरसंकल्प होकर अपने बीज रूप प्यारे पिता की सर्वशक्तियों की किरणों की शीतल छाया के नीचे जा कर बैठ जाती हूँ* और मन बुद्धि के दिव्य नेत्र से उनकी एक - एक किरण को निहारने लगती हूँ। उन्हें बड़े प्यार से निहारते - निहारते मैं उनके बिल्कुल समीप पहुँच जाती हूँ और जाकर उन्हें टच करती हूँ।

 

 _ ➳  बाबा को छूते ही मैं महसूस करती हूँ जैसे बाबा ने अपनी सर्वशक्तियों की किरणों रूपी बाहों में मुझे समा लिया है। और अपना असीम स्नेह और प्रेम अपनी ममतामयी किरणों के रूप में मुझ पर बरसा रहें हैं। *बाबा का यह अथाह प्यार मुझमे असीम बल भर कर मुझे शक्तिशाली बना रहा है। अपने बीज रूप प्यारे पिता के सानिध्य में मास्टर बीज रूप बन, उनकी शक्तियों को स्वयं में भरकर, उनके साथ मनाए स्नेह मिलन की सुखद अनुभूति के साथ अब मैं आत्मा वापिस साकारी दुनिया मे आकर अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ*। स्वयं ईश्वर बाप से मिली अपने संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की अखुट सौगातों को स्मृति में रख, स्वयं को श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ समझते हुए, मैं मन की, बेहद की मौज मनाते हुए, अपने बुहमूल्य ब्राह्मण जीवन के एक - एक सेकण्ड का भरपूर आनन्द ले रही हूँ।

 

────────────────────────

 

∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं महादानी बन फ्राकदिली से खुशी का खजाना बांटने वाली मास्टर रहमदिल आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं योग की शक्ति द्वारा हर कर्मेन्द्रिय को ऑर्डर में चलाने वाली स्वराज्य अधिकारी आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

────────────────────────

 

∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  *अन्तकाल चाहे जवान है, चाहे बुढ़ा है, चाहे तन्दरूस्त है, चाहे बीमार है, किसका भी कभी भी आ सकता है। इसलिए बहुतकाल साक्षीपन के अभ्यास पर अटेन्शन दो।* चाहे कितनी भी प्रकृतिक आपदायें आयेंगी लेकिन यह अशरीरीपन की स्टेज आपको सहज न्यारा और बाप का प्यारा बना देगी। इसलिए बहुतकाल शब्द को बापदादा अण्डरलाइन करा रहे हैं। *क्या भी हो, सारे दिन में साक्षीपन की स्टेज का, करावनहार की स्टेज का, अशरीरीपन की स्टेज का अनुभव बार-बार करो, तब अन्त मते फरिश्ता सो देवता निश्चित है।* बाप समान बनना है तो बाप निराकार और फरिश्ता है, ब्रह्मा बाप समान बनना अर्थात् फरिश्ता स्टेज में रहना। जैसे फरिश्ता रूप साकार रूप में देखा, बात सुनते, बात करते, कारोबार करते अनुभव किया कि जैसे बाप शरीर में होते न्यारे हैं। कार्य को छोड़कर अशरीरी बनना, यह तो थोड़ा समय हो सकता है लेकिन कार्य करते, समय निकाल अशरीरी, पावरफुल स्टेज का अनुभव करते रहो। आप सब फरिश्ते हो, बाप द्वारा इस ब्राह्मण जीवन का आधार ले सन्देश देने के लिए साकार में कार्य कर रहे हो। फरिश्ता अर्थात् देह में रहते देह से न्यारा और यह एक्जैम्पुल ब्रह्मा बाप को देखा है, असम्भव नहीं है। देखा अनुभव किया।

 

 _ ➳  जो भी निमित्त हैं, चाहे अभी विस्तार ज्यादा है लेकिन जितनी ब्रह्मा बाप की नई नालेज, नई जीवन, नई दुनिया बनाने की जिम्मेवारी थी, उतनी अभी किसकी भी नहीं है। तो सबका लक्ष्य है ब्रह्मा बाप समान बनना अर्थात् फरिश्ता बनना। शिव बाप समान बनना अर्थात् निराकार स्थिति में स्थित होना। मुश्किल है क्या? *बाप और दादा से प्यार है ना! तो जिससे प्यार है उस जैसा बनना, जब संकल्प भी है - बाप समान बनना ही है, तो कोई मुश्किल नहीं। सिर्फ बार-बार अटेन्शन। साधारण जीवन नहीं। साधारण जीवन जीने वाले बहुत हैं।* बड़े-बड़े कार्य करने वाले बहुत हैं। लेकिन आप जैसा कार्य, आप ब्राह्मण आत्माओं के सिवाए और कोई नहीं कर सकता है।

 

✺   *ड्रिल :-  "सारे दिन में करावनहार की स्टेज का बार-बार अभ्यास करना"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा सभी बाहरी बातों से मन बुद्धि को हटाए भृकुटि के मध्य स्वयं को निहार रही हूं... *अपने अनादि स्वरुप में स्थित मैं आत्मा बाप समान निराकारी, निरहंकारी, संपूर्ण निर्विकारी स्थिति का अनुभव कर रही हूं...* रूप में बिंदु गुणों में सिंधु मैं आत्मा बाप समान अथक सेवाधारी बन संपूर्ण विश्व में अमूल्य ज्ञान रत्नों की बौछार करती हूं... *मैं आत्मा चैतन्य शक्ति हूं... इस देह से न्यारी... बाबा ने मुझ आत्मा को ये देह साकार लोग को परमात्म परिचय देने अर्थ दिया है...*

 

 _ ➳  *सारे दिन बीच-बीच में मैं करावनहार आत्मा कर्म से न्यारी हो अपनी इन्द्रियों को समेट अशरीरी पन का अभ्यास करती हूं...* इस बहुतकाल के अभ्यास द्वारा मैं आत्मा अपने आस-पास के सभी दृश्यों को साक्षी हो देख रही हूं... *मैं देखती हूं... मेरे चारों ओर दुःख ही दुःख अशांति ही अशांति है...* पापाचार, भ्रष्टाचार अकालमृत्यु बढ़ता ही जा रहा है... चारों ओर त्राहि त्राहि मची हुई है... *आत्माएं सच्ची शांति और सुख की तलाश में इधर उधर भटक रही हैं...*

 

 _ ➳  प्रकृति अपने आपे से बाहर हैं... पांच तत्व भी अपना कहर बरसा रहे हैं... *बीज रूप स्थिति में स्थित मैं करावनहार आत्मा इस दृश्य को बिना हिले बिना डुले साक्षी हो देख रही हूं...* मैं स्वयं इन सब दृश्यों को अचल अडोल हुए सामना करते हुए अनुभव कर रही हूं... अब मैं करावनहार निमित्त आत्मा स्वयं को फरिश्ता स्वरुप में इमर्ज कर बापदादा का आह्वान करती हूं... *फरिश्ता स्वरुप में मैं आत्मा ब्रह्मा बाप समान स्वयं को इस देह से न्यारी अशरीरी अनुभव कर रही हूं...*

 

 _ ➳  यह आ गए बापदादा मेरे सन्मुख... बापदादा और मैं मास्टर करावनहार आत्मा कंबाइंड स्वरुप में स्थित हो सर्व को साकाश दे रहे हैं... *समस्त आत्माएं हमारे सानिध्य में शांति और सुख  का अनुभव करती जा रही है...* चारों ओर शांति का वातावरण छा गया है... आत्माएं तृप्त होती जा रही हैं... *प्रकृति के पांच तत्व भी शांति को प्राप्त हैं...* चारों और रूहानी वातावरण छा जाता है... *धीरे-धीरे सभी आत्माएं सहज ही अपने शरीर से न्यारी कर्मातीत अवस्था को प्राप्त होती जा रही है...*

 

 _ ➳  भक्तिमार्ग में किये वायदे अनुसार *"प्रभु जब आप आएंगे तो और संग बुद्धियोग तोड़ आप संग जोड़ूंगी"...* सभी आत्माएं प्रभु प्रेम में मग्न बाप समान अवस्था का अनुभव कर रही हैं... *सभी अपनी आत्मिक कर्मातीत स्टेज में स्थित हो मच्छरों सदृश्य बापदादा संग परमधाम की ओर चल पड़ी हैं...* मैं आत्मा भी बापदादा संग स्वयं को अनुभव करती हूं... मैं असाधारण करावनहार निमित आत्मा अपने पाठ कों बेखूबी पूरा कर बाबा संग परमधाम की ओर रवाना हो रही हूं...

 

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

 

_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━