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 03 / 05 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *कदम कदम बाप की श्रीमत पर चले ?*

 

➢➢ *क्रोध के वश होकर किसी को दुःख तो नहीं दिया ?*

 

➢➢ *साधारण कर्म करते भी श्रेष्ठ स्मृति व स्थिति की झलक दिखाई दी ?*

 

➢➢ *संकल्प मात्र भी कही लगाव तो नहीं रहा ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  तपस्वी की तपस्या सिर्फ बैठने के समय नहीं, तपस्या अर्थात् लगन, चलते-फिरते भोजन करते भी लगन लगी रहे। *एक की याद में, एक के साथ में भोजन स्वीकार करना-यह भी तपस्या हुई।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं खुशियों की खान का मालिक हूँ"*

 

  *बाप की याद से खुशियों के झूलों में झूलने वाले हो ना। क्योंकि इस संगमयुग में जो खुशियों की खान मिलती है, वह और किसी युग में प्राप्त नहीं हो सकती। इस समय बाप और बच्चों का मिलन है, वर्सा है, वरदान है। बाप के रूप में वर्सा देते, सतगुरू के रूप में वरदान देते हैं।* तो दोनों अनुभव हैं ना? दोनो ही प्राप्तियॉं सहज अनुभव कराने वाली हैं। वर्सा या वरदान - दोनों में मेहनत नहीं। इसलिए टाईटल ही है -'सहजयोगी'। क्योंकि आलमाइटी ओथोरिटी बाप बन जाए, सतगुरू बन जाए... तो सहज नहीं होगा? यही अन्तर परम-आत्मा और आत्माओंका है।

 

  कोई महान् आत्मा भी हो लेकिन प्राप्ति कराने के लिए कुछ न कुछ मेहनत जरूर देगी। 63 जन्म के अनुभवी हो ना। इसलिए बापदादा बच्चों की मेहनत देख नहीं सकते। *जब बाप से थोड़ा भी, संकल्प में भी किनारा करते हो तब मेहनत करते हो। उसी सेकेण्ड बाप को साथी बना दो तो सेकेण्ड में मुश्किल सहज अनुभव हो जायेगा।*

 

  *क्योंकि बापदादा आये ही हैं बच्चों की थकावट उतारने। 63 जन्म ढूँढ़ा, भटके। अब बापदादा मन की भी थकावट, तन की भी थकावट और धन के उलझन के कारण भी जो थकावट थी, वह उतार रहे हैं।* सभी थक गये थे ना! बच्चे जो अति प्यारे होते हैं, उन्हों के लिए कहावत है - नयनों पर बिठाकर ले जाते हैं। तो इतने हल्के बने हो जो नयनों पर बिठाकर बाप ले जाये? लाइट (हल्के) हो ना? जब बाप बोझ उठाने के लिए तैयार है तो आप बोझ क्यों उठाते हो?

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *एक सेकण्ड में वाणी से परे स्थिति में स्थित हो सकती हो?* जैसे और कर्म इन्द्रियों को जब चाहो जैसे चाहो वैसे हिला सकते हो। ऐसे ही बुद्धि की लगन को जहाँ चाहो, जब चाहे वैसे और वहाँ स्थित कर सकते हो? एसे पावरफुल बने हो?

  

✧  यह विधि वृद्धि को पाती जा रही है। *अगर विधि यथार्थ है तो  विधि से सिद्धि अर्थात सफलता और श्रेष्ठता अवश्य ही दिन - प्रतिदिन वृद्धि को पाते हुए अनुभव करेंगे।* इस परिणाम से अपने पुरुषार्थ की यथार्थ स्थिति को परख सकते हो।

 

✧  यह सिद्धि विधि को परखने की मुख्य निशानी है। कोई भी बात को परखने के लिए निशानियाँ होती है। *तो इस निशानी से अपने सम्पूर्ण बुद्धि की निशानी को परख सकते हो।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  वातावरण हो तब याद की यात्रा हो, परिस्थिति न हो तब स्थिति हो, *अर्थात् परिस्थिति के आधार पर स्थिति व किसी भी प्रकार का साधन हो तब सफलता हो, ऐसा पुरुषार्थ फाइनल पेपर में फेल कर देगा। इसलिए स्वयं को बाप समान बनाने की तीव्रगति करो।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- बाप समान मीठा बनना"*

 

_ ➳  *मैं आत्मा अमृतवेले प्यारे बापदादा का आह्वान करती हूँ... उनसे दिव्य वरदानों और शक्तियों की किरणें लेकर अपने को भरपूर करती हूँ... फिर मैं आत्मा बापदादा का हाथ पकड मॉर्निंग वाक करने निकल जाती हूँ...* बाबा के साथ वाक करते-करते एक आम के बगीचे में पहुँच जाती हूँ... पेड़ों पर मीठे-मीठे, सुन्दर-सुन्दर आम के रसीले फल लटके हुए हैं... बापदादा एक आम तोड़कर मुझे प्यार से खिलाते हैं... मैं बाबा को खिलाती हूँ... *मीठे-मीठे आम खिलाते हुए मीठे बाबा मीठा बनने की मीठी समझानी देते हैं...*

 

  *सबको सिर्फ सुख देने, अपना मिजाज बहुत-बहुत मीठा बनाने का मुझसे वायदा लेते हुए प्यारे बाबा कहते हैं:-* मेरे लाडले बच्चे... *मीठे बाबा से मिलकर जो प्यार का दरिया बने हो यह प्यार पूरे जहान में लुटाओ... प्यार का प्रतिरूप बनकर सारे संसार को प्रेम सुधा पिलाओ...* सबको सुख देकर जीवन को खुशियो से खिला आओ... और आत्मिक भाव में रह न्यारे प्यारे हो प्यार लुटाओ...

 

_ ➳  *मास्टर प्रेम का सागर बन सब पर प्रेम बरसाते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... *मै आत्मा आपके सागर समान प्रेम को पाकर प्रेम स्वरूप हो गयी हूँ... मेरा रोम रोम प्रेम से भरा हुआ है...* सबको ख़ुशी और सुखो की सौगात दिए जा रही हूँ... और न्यारी बन मुस्करा रही हूँ...

 

  *प्यारे बाबा मीठे बच्चे कहते हुए अपनी मीठी वाणी से मेरे मन में मिठास घोलते हुए कहते हैं:-* मीठे प्यारे फूल बच्चे... देह की मिटटी में फसकर खुद के सुंदर सजीले चमकीले स्वरूप को ही भूल गए... विकारो में जीकर कड़वे विषैले से हो गए... *अब प्यार का सागर से मिले हो तो वही प्रेम वही मिठास इस विश्व में बहाओ... सब को सकून देकर तनमन खुशियो में खिला आओ...* अब इस मिटटी में मटमैले न बनो...

 

_ ➳  *मन के तार परमात्मा से जोड़कर प्रेम रस पीकर सबको पिलाते हुए मैं आत्मा कहती हूँ:-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... *मै आत्मा आपकी मीठी यादो में प्रेम और मिठास की परी बन पूरे विश्व को प्रेम तरंगो से पुलकित कर रही हूँ... प्यारे बाबा से मिलने की ख़ुशी यूँ प्रेममय होकर लुटा रही हूँ...* सब सुखी हो खुशहाल हो यह कामना कर रही हूँ...

 

  *अपनी प्रेममय गोदी में अतीन्द्रिय सुखों की अनुभूति कराते हुए मेरे बाबा कहते हैं:-* प्यारे सिकीलधे मीठे बच्चे... *यह ईश्वरीय प्राप्ति की खुशियो को अपने नूरानी खुशनुमा चेहरों से झलकाओ... सबको प्यार के आगोश में भर आओ...* खूबसूरत सितारे बन विश्व गगन पर मुस्कराओ... हर दिल को सुखो की बयार से आनन्दित कर आओ...

 

_ ➳  *प्रेम के सागर से प्रेम जल भरकर मैं आत्मा प्रेम की बदली बन प्रेम की वर्षा करते हुए कहती हूँ:-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा सब को प्यार की मीठी पालना दे रही हूँ... *प्यारे पिता से पाये सुखो की बरसात विश्व गगन से आत्माओ पर कर रही हूँ...* यह पूरा संसार प्यारा है दुलारा है इस मीठे भाव से भर रही हूँ...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- अपनी चलन बहुत रॉयल रखनी है और मीठा बोलना है*"

 

_ ➳  आप समान अति मीठा बनाने वाले, मेरे अति मीठे शिव बाबा की मीठी याद मेरे अंदर एक ऐसी मिठास घोल देती है जिसमे विकारों की कड़वाहट घुलने लगती है। *अपने ऐसे अति मीठे बाबा की मीठी याद में बैठी मैं जैसे ही उनका आह्वान करती हूँ परमधाम से सीधे अपने ऊपर गिरती उनकी सर्वशक्तियों रूपी किरणों के मीठे झरने के नीचे स्वयं को अनुभव करती हूँ*। सातों गुणों की रंग बिरंगी किरणों का यह मधुर झरना मेरे तन - मन को शीतलता प्रदान कर रहा है। शीतलता की इसी गहन अनुभूति के बीच मैं अनुभव करती हूँ कि मुझ आत्मा को अपनी शीतल किरणों से शीतल बनाने वाले मेरे फर्स्टक्लास मीठे बाबा जैसे परमधाम से नीचे मेरे पास आ रहें हैं।

 

_ ➳  उनकी उपस्थिति से उनकी समीपता का एहसास मुझे स्पष्ट अनुभव होने लगा है। अपने सिर के बिल्कुल ऊपर मुझे उनकी छत्रछाया की अनुभूति हो रही है। मेरे पूरे कमरे में जैसे शीतलता की मीठी लहर दौड़ रही है। पूरे घर मे मेरे मीठे शिव बाबा के शक्तिशाली वायब्रेशन फैल रहें हैं। *एक अति मीठी सुखदाई स्थिति में मैं सहज ही स्थित होती जा रही हूँ। यह स्थिति मुझे देह और देह के झूठे भान से मुक्त कर, लाइट माइट स्वरूप का अनुभव करवा रही है*। धीरे - धीरे मैं इस साकारी देह के बंधन से स्वयं को मुक्त कर अपने लाइट के फ़रिशता स्वरूप को धारण कर रही हूँ।

 

_ ➳  मेरा यह लाइट का फ़रिशता स्वरूप मुझे धरती के आकर्षण से मुक्त कर, ऊपर की ओर ले जा रहा है। मैं स्वयं को धरती से ऊपर उड़ता हुआ अनुभव कर रहा हूँ। छत को पार करते हुए अब मैं खुले आकाश के नीचे पूरी दुनिया मे विचरण कर रहा हूँ। धीरे - धीरे अब मैं आकाश को भी पार करता हुआ लाइट की सूक्ष्म आकारी फरिश्तो की दुनिया मे प्रवेश कर रहा हूँ। इस अति सुन्दर फरिश्तो की दुनिया मे विचरण करता हुआ अब मैं स्वय को अव्यक्त ब्रह्मा बाप के सामने देख रहा हूँ। *फर्स्टक्लास मीठा और रॉयल बन बाप का नाम बाला करने वाले अपने प्यारे ब्रह्मा बाप के सामने बैठ मैं मन ही मन प्रतिज्ञा करता हूँ कि मुझे भी ब्रह्मा बाप समान फर्स्टक्लास मीठा और रॉयल बन बाप का नाम अवश्य बाला करना है*।

 

_ ➳  इस प्रतिज्ञा को पूरा करने का बल मुझमें भरने के लिए अब परमधाम से मेरे अति मीठे शिव बाबा फरिश्तों की इस दुनिया मे प्रवेश करते हैं और आ कर ब्रह्मा बाबा की भृकुटि में विराजमान हो जाते हैं। *बाप दादा अपने वरदानी हस्तों से अब मुझे विजयी भव का वरदान देते हुए, अपनी सर्वशक्तियाँ मेरे अंदर प्रवाहित करते हुए मुझ आत्मा में बल भर रहें हैं ताकि कदम - कदम पर फॉलो फादर कर, अपने शिव बाबा का नाम मैं बाला कर सकूँ*। बापदादा की शक्तिशाली दृष्टि से मेरे पुराने आसुरी स्वभाव संस्कार जल कर भस्म हो रहें हैं और उसके स्थान पर फर्स्टक्लास मीठा और बहुत - बहुत रॉयल बनने के संस्कार इमर्ज हो रहें हैं।

 

_ ➳  आसुरी संस्कारों का त्याग कर इन दैवी संस्कारों को ही अब मुझे अपने जीवन में धारण करने का पुरुषार्थ करना है, इसी दृढ़ प्रतिज्ञा के साथ अपने लाइट माइट स्वरूप को अपने ब्राह्मण स्वरूप में मर्ज करके अब मैं अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ। अपने ब्राह्मण जीवन के नियमो और मर्यादाओं पर चलते हुए अब मैं हर कर्म में ब्रह्मा बाप को फॉलो कर रही हूँ। *अपने मीठे शिव बाबा की श्रीमत पर कदम - कदम चलते हुए अब मैं आसुरी अवगुणों का त्याग करती जा रही हूँ। मेरे मुख से अब किसी भी आत्मा को दुख देने वाले कड़वे बोल नही निकलते। बाप समान सबको सुख देने वाले मीठे बोल ही अपने मुख से बोलते हुए अब मैं सबके जीवन को खुशियों की मिठास से भर रही हूँ*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं साधारण कर्म करते भी श्रेष्ठ स्मृति वा स्थिति की झलक दिखाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं पुरुषोत्तम सेवाधारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं सच्चा राज ऋषि हूँ  ।*

   *मैं आत्मा संकल्प मात्र भी कहां पर लगाव रखने से सदा मुक्त हूँ  ।*

   *मैं बंधन मुक्त आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

अव्यक्त बापदादा :-

 

_ ➳ दूसरी बात - अगर आपकी मंसा द्वारा अन्य आत्माओं को सुख और शांति की अनुभूति नहीं होती अर्थात् पवित्र संकल्प का प्रभाव अन्य आत्मा तक नहीं पहुँचता तो उसका भी कारण चेक करो। किसी भी आत्मा की जरा भी कमज़ोरी अर्थात् अशुद्धि अपने संकल्प में धारण हुई तो वह अशुद्धि अन्य आत्मा को सुख-शान्ति की अनुभूति करा नहीं सकेगी। या तो उस आत्मा के प्रति व्यर्थ वा अशुद्ध भाव है वा अपनी मंसा पवित्रता की शक्ति में परसेन्टेज की कमी है। जिस कारण औरों तक वह पवित्रता की प्राप्ति का प्रभाव नहीं पड़ सकता। स्वयं तक है, लेकिन दूसरों तक नहीं हो सकता। लाइट है, लेकिन सर्चलाइट नहीं है। तो *पवित्रता के सम्पूर्णता की परिभाषा है - सदा स्वयं में भी सुख-शान्ति स्वरूप और दूसरों को भी सुख-शांति की प्राप्ति का अनुभव कराने वाले। ऐसी पवित्र आत्मा अपनी प्राप्ति के आधार पर औरों को भी सदा सुख और शान्ति, शीतलता की किरणें फैलाने वाली होगी।* तो समझा सम्पूर्ण पवित्रता क्या है?

 

✺  *"ड्रिल :- मंसा द्वारा अन्य आत्माओं को सुख और शांति की अनुभूति करवाना*"

 

_ ➳  *मैं आत्मा सुन्दर सरोवर के समीप बैठकर सरोवर के शांत जल को देख रही हूँ...* नीचे से एक कंकड़ उठाकर सरोवर के शांत जल में फेंकती हूँ... सरोवर के शांत जल में जल तरंगे उठने लगती हैं... ऐसे ही मुझ आत्मा के मन में एक व्यर्थ विचार का कंकड़ एक के बाद एक अन्य व्यर्थ विचारों को जन्म देता है... *मैं आत्मा अपने मन में उठने वाले व्यर्थ विचारों के तरंगो को शांत करती हुई मन-बुद्धि को भृकुटी के मध्य एकाग्र करती हूँ...* आत्मिक स्वरुप में टिकते ही मुझ आत्मा का मन शांत सरोवर की तरह शांत हो रहा है...

 

_ ➳  *मैं आत्मा इस स्थूल शरीर को छोड़ अशरीरी बन उड़ चलती हूँ शांतिधाम...* मैं आत्मा शांतिधाम की गहन शांति को गहराई से अनुभव कर रही हूँ... मैं आत्मा बीजरूप अवस्था धारण कर बीजरूप बाबा के समीप बैठ जाती हूँ... बीजरूप बाबा से एक हो जाती हूँ... *बीजरूप बाबा से निकलती किरणों से मैं आत्मा अपनी अपवित्रता और अशुद्धि के संकल्पों को बीज सहित उखाड़कर खत्म कर रही हूँ...*

 

_ ➳  *मैं आत्मा सभी व्यर्थ संकल्पों से मुक्त होकर एकाग्रता का अनुभव कर रही हूँ...* निर्संकल्प स्थिति में स्थित हो रही हूँ... मैं आत्मा सभी संकल्प-विकल्पों से मुक्त हो रही हूँ... *अब मैं आत्मा व्यर्थ पर अटेंशन देकर समर्थ बन रही हूँ...* व्यर्थ को समर्थ में चेंज कर रही हूँ... अब मैं आत्मा पवित्र और सकारात्मक संकल्पों का निर्माण कर रही हूँ...

 

_ ➳  मैं आत्मा सदा चेक करती हूँ कि अपनी मंसा पवित्रता की शक्ति में परसेन्टेज की कमी तो नहीं है... *सदा अटेंशन रखती हूँ कि किसी भी अन्य आत्मा की जरा भी कमज़ोरी वा अशुद्धि मेरे संकल्पों में धारण न हो...* अब मैं आत्मा किसी भी आत्मा के प्रति व्यर्थ वा अशुद्ध भाव नहीं रखती हूँ...

 

_ ➳  मैं आत्मा सदैव सम्बन्ध-सम्पर्क में आने वाले सर्व आत्माओं के प्रति शुद्ध और शुभ भावना रखती हूँ... शुभ कामना और निमित्त भाव के साथ सेवा करती हूँ... *अब मैं आत्मा लाइट होकर सर्चलाइट बन रही हूँ...* मैं आत्मा अपने पवित्र संकल्पों का प्रभाव अन्य आत्माओं तक पहुँचा रही हूँ... शुद्ध संकल्पों से सर्व आत्माओं का कल्याण कर रही हूँ... *मैं आत्मा मंसा द्वारा अन्य आत्माओं को सुख और शांति की अनुभूति करवा रही हूँ...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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