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 03 / 08 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *रूहानी यात्रा में कभी भी थके तो नहीं ?*

 

➢➢ *माँ बाप को फॉलो किया ?*

 

➢➢ *निमित भाव के अभ्यास द्वारा सवा की और सर्व की प्रगति की ?*

 

➢➢ *सदा सुख के झूले में झूलते रहे ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *डबल लाइट रहने वाले की लाइट कभी छिप नहीं सकती।* जब छोटी सी स्थूल लाइट टार्च हो या माचिस की तीली हो, लाइट कहाँ भी जलेगी, छिपेगी नहीं, यह तो रूहानी लाइट है, तो इसका हर एक को अनुभव कराओ।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाप के सर्व खजानों का मालिक हूँ"*

 

  सदा अपने को बाप के सर्व खजानों के मालिक हैं-ऐसा अनुभव करते हो? मालिक बन गये हो या बन रहे हो? *जब सभी बालक सो मालिक बन गये, तो बाप ने सभी को एक जैसा खजाना दिया है। या किसको कम दिया, किसको ज्यादा? एक जैसा दिया है।* जब मिला एक जैसा है, फिर नम्बरवार क्यों? खजाना सबको एक जैसा मिला, फिर भी कोई भरपूर, कोई कम। इसका कारण है कि खजाने को सम्भालना नहीं आता है।

 

  कोई बच्चे खजाने को बढ़ाते हैं और कोई बच्चे गँवाते हैं। बढ़ाने का तरीका है-बांटना। जितना बांटेंगे उतना बढ़ेगा। जो नहीं बांटते उनका बढ़ता नहीं। *अविनाशी खजाना है, इस खजाने को जितना बढ़ाना चाहें उतना बढ़ा सकते हो। सभी खजानों को सम्भालना अर्थात् बार-बार खजानों को चेक करना।* जैसे खजाने को सम्भालने के लिए कोई न कोई पहरे वाला रखा जाता है।

 

  तो इस खजाने को सदा सेफ रखने के लिए 'अटेन्शन' और 'चेकिंग'-यह पहरे वाले हों। तो जो अटेन्शन और चेकिंग करना जानता है उसका खजाना कभी कोई ले जा नहीं सकता, कोई खो नहीं सकता। तो पहरे वाले होशियार हैं या अलबेलेपन की नींद में सो जाते हैं? पहरेदार भी जब सो जाते हैं तो खजाना गँवा देते हैं। *इसलिए 'अटेन्शन' और 'चेकिंग'-दोनों ठीक हों तो कभी खजाने को कोई छू नहीं सकता! तो अनगिनत, अखुट, अखण्ड खजाना जमा है ना! खजानों को देख सदा हर्षित रहते हो?*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  *प्रवृत्ति में आते 'कमल' बनना भूल न जाना।* वापिस जाने की तैयारी नहीं भूल जाना, *सदा अपनी अन्तिम स्थिति का वाहन - न्यारे और प्यारे बनने का श्रेष्ठ साधन - सेवा के साधनों में भूल नहीं जाना।* खूब सेवा करो लेकिन न्यारे-पन की खूबी को नहीं छोडना अभी इसी अभ्यास की आवश्यकता है।

 

✧  या तो बिल्कुल न्यारे हो जाते या तो बिल्कुल प्यारे हो जाते। इसलिए *न्यारे और प्यारे-पन का बैलेन्स' रखो।* सेवा करो लेकिन मेरे-पन' से न्यारे होकर करो। समझा क्या करना है? अब नई-नई रस्सियाँ भी तैयार कर रहे हैं। पुरानी रस्सियाँ टूट रही हैं।

 

✧  समझते भी है *नई रस्सियाँ बाँध रहे हैं क्योंकि चमकीली रस्सियाँ हैं।* तो इस वर्ष क्या करना है? बापदादा साक्षी होकर के बच्चों का खेल देखते हैं। रस्सियों के बंधन की रेस में एक-दो से बहुत आगे जा रहे हैं। इसलिए *सदा विस्तार में जाते सार रूप में रहो।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ निश्चय का प्रमाण नशा और नशे का प्रमाण है 'खुशी'। नशे कितने प्रकार के हैं इसका विस्तार बहुत बड़ा है। *लेकिन सार रूप में एक नशा है - अशरीरी आत्मिक स्वरूप का।* इसका विस्तार जानते हो? आत्मा तो सभी हैं *लेकिन रूहानी नशा तब अनुभव होता जब यह स्मृति में रखते कि - 'मैं कौन-सी आत्मा हूँ?'* इसका और विस्तार आपस में निकालना वा स्वयं मनन करना।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  ज्ञानयुक्त बुद्धि से, रूहानी यात्रा करनी और करानी"*

 

_ ➳  मै आत्मा अपने सुंदर भाग्य का... मीठे बाबा से पायी असीम दौलत का... दिव्य गुण और शक्तियो का दुआओ का... इन खजानो को गिनते गिनते आनंद के चर्मोत्कृष् पर पहुंच कर... मीठे बाबा को दिल से पुकारती हूँ... मीठे बाबा मेरे सम्मुख बाहें फैलाये हुए *जी हुजूर, मै आया*कह हाजिर हो जाते है... अपने मीठे आराध्य को... अपने प्यार में इस कदर... साधारण और सरल सहज देख... मै आत्मा निशब्द हो मुस्कराती हूँ...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी यादो में डुबाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *ज्ञानसागर पिता को पाकर जो अथाह धन खजाने पाये है... उसे अपनी बुद्धि में सदैव गिनते रहो.*.. ज्ञान के चिंतन मनन से यादो का सैलाब और ज्यादा बढ़ेगा... रूहानी यात्री बन सदा यादो में खोये रहो... और सबको यह यात्रा सिखलाओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा की अतुलनीय धन सम्पदा की मालिक बनते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... आपके बिना मुझ आत्मा का जीवन कितना सूना कितना कंगाल सा था... *आपको पाकर मै आत्मा ईश्वरीय अमीरी से सम्पन्न हो गयी हूँ.*.. ज्ञान धन ने मुझ आत्मा को गुणो और शक्तियो से भरपूर कर दिया है..."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को अपनी सारी सम्पत्ति देते हुए कहा ;-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... *ईश्वर पिता की गहरी यादो में डूबकर, बुद्धि रुपी पात्र को ईश्वरीय रत्नों से सोने का बनादो.*.. और देहभान से छुड़ाने वाले रूहानी यात्री बनकर मुस्कराओ... अपने मीठे भाग्य के नशे में खो जाओ... कि किसकी सम्पत्ति के वारिस बन रहे हो..."

 

_ ➳  *मै आत्मा अपने महान भाग्य की खुशियां मीठे बाबा संग बांटते हुए कहती हूँ :-* "मीठे मीठे बाबा मेरे... *आपको पाकर सारे जहान की खुशियो से दामन भर गया है*... आपके ज्ञान धन से जीवन कितना पवित्र और प्यारा हो गया है... ईश्वरीय साथ और साये में जीने वाली मै कितनी भाग्यंवान आत्मा हूँ... मेरे जैसा भाग्य भला किसी और का कहाँ..."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को खुशियो की जागीर सौपते हुए कहा :-* "मीठे सिकीलधे बच्चे... ईश्वर पिता ने ज्ञान दौलत से भरपूर कर, मा नॉलेजफुल बनाया है... उस नशे में सदा खोये रहो... *ज्ञान के दिव्य नेत्र को पाकर, अपने श्रेष्ठ भाग्य की स्मर्तियो में सदा खोये रहो.*.. इन रत्नों को पूरे विश्व पर बरसाओ, और सबको आप समान रूहानी यात्रा कराओ..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे साथी भगवान को पाकर आनन्द में मगन होकर कहती हूँ :-* "मीठे साथी बाबा मेरे... मै आत्मा आपकी मीठी यादो में खोयी हुई... ज्ञान चिंतन से गुणवान और शक्तिवान बनती जा रही हूँ... *हर पल, हर संकल्प को यादो में पिरो कर, दिव्यता से सजती जा रही हूँ.*.. और आप समान सबका भाग्य सुंदर बनाती जा रही हूँ..."प्यारे बाबा से अथाह ज्ञान धन से भरपूर होकर मै आत्मा... साकार वतन में लौट आती हूँ...

 

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- शिव बाबा को अपना वारिस बनाए उस पर पूरा  पूरा बलिहार जाना है*"

 

_ ➳  अपने शिव पिता परमात्मा के साथ अलग - अलग सम्बन्धों का सुख अनुभव करते हुए मन बेहद खुशी से भर जाता है और मन मे विचार चलता है कि वो ऑल माइटी ऑथोरिटी भगवान जिसकी भक्त लोग केवल अराधना करते हैं, स्वप्न में भी नही सोच सकते कि भगवान उनका बाप, दोस्त, साजन, बच्चा, भी बन सकता है। लेकिन *मैं कितनी खुशनसीब हूँ जो हर रोज भगवान के साथ एक नया सम्बन्ध बना कर, उस सम्बन्ध का असीम सुख प्राप्त करती हूँ*। ऐसा सुख  जो देह के सम्बन्धो में कभी मिल ही नही सकता। क्योकि वो *अनकंडीशनल प्यार केवल प्यार का सागर भगवान ही दे सकता हैं*।

 

_ ➳  यही विचार करते करते अपने शिव पिता परमात्मा को अपना बच्चा अपना वारिस बनाने का संकल्प मन मे लिए मैं अपने मन बुद्धि को एकाग्र कर उनका आह्वान करती हूँ। आह्वान करते ही सेकेंड में उनकी छत्रछाया को मैं अपने ऊपर अनुभव करती हूं। *अपने चारों और फैले सर्वशक्तियों के रंग बिरंगे प्रकाश को मैं मन बुद्धि की आंखों से स्पष्ट देख रही हूँ*। ये प्रकाश मन को असीम शांति और सुकून का अनुभव करवा रहा है। सुख, शांति, प्रेम, पवित्रता के शक्तिशाली वायब्रेशन चारो और वायुमण्डल में फैल कर मन को असीम आनन्द की अनुभूति करवा रहें हैं। *इस असीम आनन्द की अनुभूति करते करते अपने शिव पिता परमात्मा की सर्वशक्तियों की किरणों रूपी बाहों के झूले में बैठ, मैं आत्मा अपने लाइट के सूक्ष्म शरीर के साथ उड़ चलती हूँ*। और उड़ते उड़ते एक बहुत सुंदर उपवन में पहुंच जाती हूँ।

 

_ ➳  चारों और फैली हरियाली, रंग बिरंगे फूंलो की खुशबू मन को आनन्दित कर रही है। उपवन में बैठी मैं प्रकृति के इस सुंदर नजारे का आनन्द ले रही हूं। तभी कानो में बांसुरी की मधुर आवाज सुनाई देती है औऱ *देखते ही देखते मेरे शिव पिता परमात्मा नटखट कान्हा के रूप में बाँसुरी बजाते हुए मेरे सामने आ जाते हैं*। उनके इस स्वरूप को देख मैं चकित रह जाती हूँ। धीरे धीरे बाँसुरी बजाते हुए मेरे नटखट गिरधर गोपाल मेरी गोदी में आ कर बैठ जाते हैं और अपने नन्हे हाथों को फैला कर मुझे अपनी बाहों में भर लेते हैं। *उनके नन्हे हाथों का कोमल स्पर्श पाकर मन उनके प्रति वात्सलय और प्यार से भर जाता है*। अपने नटखट कान्हा की माँ बन कर मैं उन्हें प्यार कर रही हूँ, उनकी लीलाओं का आनन्द ले रही हूं।

 

_ ➳  स्वयं भगवान नटखट गोपाल का रूप धारण कर, मेरा बच्चा बन मुझे मातृत्व सुख का अनुभव करवा कर अपने लाइट माइट स्वरूप में अब मेरे सामने उपस्थित हो जाते हैं और फिर से अपनी सर्वशक्तियों रूपी किरणों को बाहों में समेटे मुझे ऊपर की और ले कर चल पड़ते हैं। अपने सूक्ष्म आकारी फ़रिशता स्वरूप को सूक्ष्म वतन में छोड़, निराकारी आत्मा बन *अपने शिव पिता की बाहों के झूले में झूलते - झूलते मैं पहुँच जाती हूँ परमधाम और उनकी सर्वशक्तियों रूपी किरणों की छत्रछाया में जा कर बैठ जाती हूँ*। उनकी सर्वशक्तियों से स्वयं को भरपूर करके, तृप्त हो कर अब मैं वापिस साकारी लोक की ओर आ जाती हूँ और अपने साकारी तन में आ कर भृकुटि पर विराजमान हो जाती हूँ।

 

_ ➳  नटखट गिरधर गोपाल के रूप में मेरे शिव पिता परमात्मा ने बच्चा बन कर जिस अविस्मरणीय सुख का मुझे आज अनुभव करवाया उसकी स्मृति बार बार मन को आनन्दित कर रही है। *उसी सुख को बार बार पाने की इच्छा से अब मैं शिव बाबा को अपना वारिस बनाये, तन मन धन से उन पर पूरा पूरा बलिहार जा कर 21 जन्मो के लिए उनसे अविनाशी सुख का वर्सा प्राप्त कर रही हूँ*। जैसे सुदामा में मुट्ठी भर चावल दे कर महल ले लिए ठीक उसी प्रकार इस एक जन्म  में शिवबाबा को अपना वारिस बना कर उन पर बलिहार जाने से, मैं जन्म जन्म के लिए उनकी बलिहारी की पात्र आत्मा बन गई हूं।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं निमित्त भाव के अभ्यास द्वारा स्व की और सर्व की प्रगति करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं न्यारी और प्यारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सुखदाता की बच्ची हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा सुख के झूले में झूलती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा दु:ख की लहर में आने से सदा मुक्त हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ अव्यक्त बापदादा :-

➳ _ ➳  *इसलिए हर आत्मा को प्रत्यक्षफल स्वरूप बनाओ अर्थात् विशेष गुणों के, शक्तियों के अनुभवी मूर्त बनाओ।* वृद्धि अच्छी है लेकिन सदा विघ्न-विनाशक, शक्तिशाली आत्मा बनने की विधि सिखाने के लिए विशेष अटेन्शन दो। वृद्धि के साथ-साथ विधि सिखाने कासिद्धिस्वरूप बनाने का भी विशेष अटेन्शन। *स्नेही सहयोगी तो यथाशक्ति बनने ही हैं लेकिन शक्तिशाली आत्माजो विघ्नों कापुराने संस्कारों का सामना कर महावीर बन जाएइस पर और विशेष अटेन्शन।* स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी ऐसे वारिस क्वालिटी को बढ़ाओ। सेवाधारी बहुत बने होलेकिन सर्व शक्तियों धारी ऐसी विशेषता सम्पन्न आत्माओं को विश्व की स्टेज पर लाओ।

➳ _ ➳  *इस वर्ष- हरेक आत्मा प्रति विशेष अनुभवी मूर्त बन विशेष अनुभवों की खान बनअनुभवी मूर्त बनाने का महादान करो। जिससे हर आत्मा अनुभव के आधार पर अंगदसमान बन जाए।* चल रहे हैंकर रहे हैंसुन रहे हैं,-सुना रहे हैंनहीं। लेकिन अनुभवों का खजाना पा लिया - ऐसे गीत गाते खुशी के झूले में झूलते रहें।

➳ _ ➳  इस वर्ष- सेवा के उत्सवों के साथ उड़ती कला का उत्साह बढ़ता रहे। तो सेवा के उत्सव के साथ-साथ उत्साह अविनाशी रहेऐसे उत्सव भी मनाओ। समझा। *सदा उड़ती कला के उत्साह में रहना है और सर्व का उत्साह बढ़ाना है।*

✺   *ड्रिल :-  "आत्माओं को अनुभवी मूर्त बनाना"*

➳ _ ➳  अपने श्रेष्ठ भाग्य की स्मृतियों का सिमरन करती हुई मैं आत्मा पहुँच जाती हूँ सूक्ष्मवतन... अपने प्यारे मीठे बाबा के पास... बाबा मुझे अपनी गोद में बिठा कर प्यार से गले लगाते हैं... *बाबा के कोमल स्पर्श से मुझ आत्मा में अलौकिक शक्तियों का संचार हो रहा है...* मैं बाबा के प्यार में समाई हुई... अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर रही हूँ...

➳ _ ➳  बाबा मुझे *"अनुभवी मूर्त भव"* का वरदान देते हुए कहते हैं... बच्ची... हर कदम ब्रह्मा बाबा को फॉलो कर तीव्र पुरषार्थ करो... उनके जैसे निमित्त भाव... शुभ भाव... निः स्वार्थ भाव रखने का अभ्यास करो... *मैं आत्मा मनमनाभव स्थिति में स्थित हो... योग अग्नि में अपने विकारों... अपने विकर्मों को भस्म कर रही हूँ...*

➳ _ ➳  सर्व गुणों और शक्तियों को धारण कर मैं आत्मा *धारणा स्वरूप... अनुभवी मूर्त... बन रही हूँ...* मुझसे सतरंगी किरणें निकल कर सभी आत्माओं पर पड़ रही हैं... वे सब भी इन शक्तिशाली किरणों को स्वयं में धारण करती जा रही हैं... *मेरे आचरण को... चाल चलन... को देख कर बहुत सी ब्राह्मण आत्माएं... मेरी ओर आकर्षित हो रही हैं...*  वे भी गुणों और शक्तियों के अनुभवी मूर्त बन रही हैं... उनकी शक्तिशाली स्थिति बनती जा रही है...
 
➳ _ ➳  सभी आत्माएं बाबा के स्नेह में खोई हुई... अनुभवी आत्माएं बन गई हैं... क्योंकि जहाँ स्नेह है वहाँ सब कुछ अनुभव करना सहज हो जाता है... *सभी स्नेही, सहयोगी आत्माएं "पाना था सो पा लिया... अब कुछ नहीं चाहिये... " के गीत गाते हुए ख़ुशी के झूले में झूल रही हैं...* फिर बाबा कहने लगे... बच्ची, स्वराज्य अधिकारी बन विश्व राज्य अधिकारी... वारिस आत्माएं बनाओ... मैं बाबा से कहती हूँ... जी बाबा... मैं स्वयं से कहती हूँ... अब मैं सच्ची सेवाधारी बन हर आत्मा को अनुभवी मूर्त बनाऊँगी...

➳ _ ➳  मैं आत्मा बाबा से वायदा करती हूँ... बाबा, मेरे मीठे बाबा... *अनुभवी मूर्त बन हर आत्मा को सेवा के प्रत्यक्ष फल का अनुभव कराऊँगी... सदा उमंग उत्साह के पंख लगाकर उड़ती कला में उड़ते हुए सर्व आत्माओं के उत्साह को बढ़ाउंगी...* सदा लगन में मगन रह सभी आत्माओं को प्राप्ति का अनुभव कराऊँगी...

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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