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 04 / 06 / 22  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *नष्टोमोहा बनकर रहे ?*

 

➢➢ *स्वयं को ज्ञान रतनो से शृंगारा ?*

 

➢➢ *दुःख को सुख और ग्लानी को प्रशंसा में परिवर्तित किया ?*

 

➢➢ *बापदादा को नयनो में समाकर रखा ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *योग में जब और सब संकल्प शान्त हो जाते हैं, एक ही संकल्प रहता 'बाप और मैं' इसी को ही पावरफुल योग कहते हैं।* बाप के मिलन की अनुभूति के सिवाए और सब संकल्प समा जायें तब कहेंगे ज्वाला रूप की याद, जिससे परिवर्तन होता है।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं सहजयोगी, सहज ज्ञानी हूँ"*

 

✧  सदा अपने को सहजयोगी, सहज ज्ञानी समझते हो? सहज है या मेहनत है? जब माया बड़े रूप में आती है तो मुश्किल नहीं लगता? मधुबन में बैठे हो तो सहज है, वहाँ प्रवृति में रहते जब माया आती है फिर मुश्किल लगता है? कभी-कभी क्यों लगता है, उसका कारण? मार्ग कभी मुश्किल, कभी सहज है - ऐसे नहीं कहेंगे। *मार्ग सदा सहज है, लेकिन आप कमजोर हो जाते हो इसीलिए सहज भी मुश्किल लगता है। कमजोर के लिए कोई छोटा सा भी कार्य भी मुश्किल लगता है। अपनी कमजोरी मुश्किल बना देती है, बाकी मुश्किल है नहीं।*

 

  कमजोर क्यों होते हैं? *क्योंकि कोई न कोई विकारों के संग दोष में आ जाते हैं। सत का संग किनारे हो जाता है और दूसरा संग दोष लग जाता है। इसलिए भक्ति में भी कहते हैं कि सदा सतसंग में रहो। सतसंग अर्थात् सत बाप के संग में रहना।* तो आप सदा सतसंग में रहते हो या और संग में भी चक्कर लगाते हो? सतसंग की कितनी महिमा है! और आप सबके लिए सत बाप का संग अति सहज है। क्योंकि समीप का सम्बन्ध है।

 

  सबसे समीप सम्बन्ध है बाप और बच्चे का। यह सम्बन्ध सहज भी है और साथ-साथ प्राप्ति कराने वाला भी है। तो आप सभी सदा सतसंग में रहने वाले सहज योगी, सहज ज्ञानी है। *सदैव यह सोचो कि हम औरों की भी मुश्किल को सहज करने वाले हैं। जो दूसरों की मुश्किल को सहज करने वाला होता वह स्वयं मुश्किल में नहीं आ सकता।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  सभी आवाज़ से परे अपने शान्त स्वरूप स्थिति में स्थित रहने का अनुभव बहुत समय से कर सकते हो? *आवाज़ में आने का अनुभव ज्यादा कर सकते हो वा आवाज़ से परे रहने का अनुभव ज्यादा समय कर सकते हो?*

 

✧  *जितना लास्ट स्टेज अथवा कर्मातीत स्टेज समीप आती जाएगी उतना आवाज़ से परे शान्त स्वरूप की स्थिति अधिक प्रिय लगेगी* इस स्थिति में सदा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूती हो।

 

✧   *इस अतीन्द्रिय सुखमय स्थिति द्वारा अनेक आत्माओं का सहज ही आह्वान कर सके़गे।* यह पाँवरफुल स्थिति 'विश्व - कल्याणकारी स्थिति' कही जाती है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ अपने निजस्वरूप और निजधाम की स्थिति सदा याद रहती है? निराकारी दुनिया और निराकारी रूप दोनों की स्मृति इस पुरानी दुनिया में रहते भी सदा न्यारा और प्यारा बना देती है। *इस दुनिया के हैं ही नहीं। हैं ही निराकारी दुनिया के निवासी, यहाँ सेवा अर्थ अवतरित हुए हैं- तो जो अवतार होते हैं उन्हों को क्या याद रहता है? जिस कार्य अर्थ अवतार लेते हैं वही कार्य याद रहता है ना!* अवतार अवतरित होते ही हैं धर्म की स्थापना के लिए तो आप सभी भी अवतरित अर्थात् अवतार हो तो क्या याद रहता है? यही धर्म स्थापन करने का कार्य।

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  अपने बहन-भाइयों को सच्चा रास्ता बताना"*

 

_ ➳  कर्मक्षेत्र पर मीठे बाबा की यादो में खोयी हुई थी... कि मीठे बाबा ने वतन से आवाज दी... और मै आत्मा प्रियतम की आवाज पर मद्होश हो... सूक्ष्म शरीर संग वतन में पहुंची... मीठे बाबा ने कहा :- "बच्चों को जी भर देखने को मुझ पिता का दिल सदा ही आतुर रहता है... मेरे सारे बच्चे सुखी हो जाएँ... सुखो में मुस्कराये... यही चिंतन पिता दिल निरन्तर करता है... मीठे बाबा को देख, मै आत्मा मन्द मन्द मुस्कराने लगी... और कहा मीठे बाबा, *मै हूँ ना... सबको सच्चा रास्ता बताउंगी और आपकी बाँहों में लाकर सजाऊँगी..*."

 

   *मीठे बाबा मुझ आत्मा की ओर एक मीठी आस भरी नजरो से देख रहे हे.. और कह रहे :-* "मीठे प्यारे बच्चे... अपने सभी भाई बहनो को यह सच्चा रास्ता बताओ... *सबके दामन में आप समान खुशियो के फूल खिलाओ..*. सच्चे प्रेम और सुख, शांति का अहसास, हर दिल को कराओ... दुखो में कुम्हलाये से मेरे बच्चों को, सच्ची ज्ञान रश्मियों में लाकर... सच्ची मुस्कान से पुनः महकाओ..."

 

_ ➳  *प्यारे बाबा की मीठी दिली आरजू सुनकर मै आत्मा कह उठी :-*."मीठे बाबा... आपके सारे अरमान मेरी पलको पर है... आपकी सेवाओ में यह दिल तो दीवाना सा है... आपके प्यार में, मै आत्मा *मा ज्ञान सागर बनकर... इन सत्य ज्ञान की किरणों को हर मनुष्य तक पहुंचा रही हूँ.*.. और मीठी मुस्कानों से उन्हें सजा रही हूँ..."

 

   *ईश्वरीय सेवाओ में मेरा दीवानापन देख... मीठे बाबा मनमोहिनी मुस्कान लिए वरदानी हाथो से मुझे श्रंगारने लगे... और बोले :-* " लाडले बच्चे मेरे... इस धरा पर दुःख का अब नामोनिशान भी न रहे... *सारा ब्रह्मांड खुशियो की चहचहाहट से गुंजायमान हो उठे.*.. विश्व की सारी आत्माये अज्ञान अन्धकार से निकल... ज्ञान किरणों में रौशन हो मुस्कराये... "

 

_ ➳  *विश्वकल्याणकारी पिता के मन को सुनकर... मै आत्मा विश्व कल्याण से ओतप्रोत हो उठी... और कहने लगी :-* " हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा सबको सुखदायी बनाती जा रही हूँ... जन्म जन्मांतर के दुखो से सबको मुक्ति दिलाती जा रही हूँ... सारी आत्माये दुःख और पापो के बोझों से छूटती जा रही है... *हर आत्मा सच्चे सुख की अनुभूति में डूब रही है.*.."

 

   *मनमीत बाबा ईश्वरीय सेवाओ में मेरे जोश और जूनून पर फ़िदा हो गए... और कहने लगे :-* "जब संसार पर नजर भर घुमायी तो... आप बच्चों की चमक पर नजरे ही ठहर गयी... मेरे बच्चे ही विश्व का कल्याण कर खुशियो भरा सतयुग इस धरा को बनाएंगे... यह पिता *दिल* बच्चों का दीवाना हो गया... मेरे महकते नन्हे नन्हे फूल बच्चे... *सारे काँटों को सहज ही खुशनुमा पुष्प सा खिलायेंगे, यह बरबस कह उठा..*."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा का इतना प्यार, दुलार और विश्वास देखकर... स्नेह आँसुओ से भर गई... और कहा :-*. "प्यारे बाबा... *आपने सच्चे साथी बनकर मेरा जीवन अथाह खुशियो से सजाया है.*.. यह ख़ुशी की दौलत पाकर मै आत्मा आपकी रोम रोम से ऋणी हूँ... यह सच है की यह खुशियां हर दिल आँचल में भरकर... कण मात्र ऋण भी न उतार पाऊँगी..." ऐसी मीठी गुफ्तगू कर, स्नेह के मोती लिये, मै आत्मा स्थूल जगत में लौट आई...

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- श्रीमत पर बाप का पूरा - पूरा मददगार बनना है*"

 

_ ➳  भृकुटि सिंहासन पर विराजमान मैं तेजस्विनी मणि, बाबा की श्रीमत कर चल, बाबा के कार्य में पूरी पूरी मददगार बन, सर्विस में लग जाने वाली सच्ची सेवाधारी आत्मा हूं। मैं वह कोटो में कोई, कोई में भी कोई महान आत्मा हूँ जिसे स्वयं भगवान ने अपना मददगार चुना है। *सृष्टि परिवर्तन के महान कार्य में मुझे सहयोगी बनाकर, मेरे प्यारे परमपिता परमात्मा शिव बाबा ने मुझे मेरा सर्वश्रेष्ठ भाग्य बनाने का डायमण्ड चांस दिया है*।

 

_ ➳  संगमयुग पर भगवान बाप द्वारा मिली सर्वश्रेष्ठ प्राप्तियों और अपने सर्वश्रष्ठ भाग्य के बारे में मैं जैसे जैसे विचार कर रही हूं उतना ही बाबा से मिलने की तड़प भी तीव्र होती जा रही है। इसलिए *अपने प्यारे भाग्य विधाता बाबा की मीठी-मीठी यादों में खोई मैं उनसे मिलन मनाने, उनकी अनमोल शिक्षाये लेने और उनकी सर्वशक्तियों से स्वयं को भरपूर करने के लिए इस साकारी देह से बाहर निकल कर ऊपर की ओर चल पड़ती हूँ*। आकाश के पार, सूक्ष्म वतन के भी पार अब मैं स्वयं को परमधाम में अपने मीठे प्यारे शिव बाबा के सानिध्य में स्पष्ट देख रही हूं।

 

_ ➳  बाबा अपनी सर्वशक्तियों से मुझे भरपूर कर रहे है। ऐसा लग रहा है जैसे अपनी समस्त ऊर्जा का भंडार बाबा मेरे अंदर समाहित कर रहे हैं ताकि संपूर्ण ऊर्जावान बन मैं विश्व की समस्त आत्माओं का कल्याण करने के निमित बन बाबा के कार्य में मददगार बन सकूँ। *परमात्म शक्तियों से स्वयं को भरपूर कर, शक्तियों का पुंज बन अब मैं परमधाम से नीचे आ जाती हूँ और पहुंच जाती हूँ सूक्ष्म लोक में*। जहां मेरे मीठे प्यारे निराकार शिव भगवान अपने निर्धारित रथ ब्रह्मा बाबा के मुख कमल से मुझे अपनी मीठी मधुर समझानी देने के लिए विराजमान हैं।

 

_ ➳  अपने लाइट के फ़रिशता स्वरूप को धारण कर अब मैं बापदादा के सामने पहुंच जाता हूँ। *बाबा मुझे देखते ही आओ मेरे मददगार सेवाधारी बच्चे कह कर मुझे गले से लगा लेते हैं*और अपने पास बिठा कर बाबा आज की कलयुगी दुनिया का सीन मेरे सामने इमर्ज करते हैं और मुझ से कहते हैं देखो बच्चे कैसे विकारों के वशीभूत हो कर आज सभी एक दूसरे को दुःख दे रहें हैं। रोती, बिलखती, दुःख से पीड़ित आत्माओं को मैं देख रही हूँ।

 

_ ➳  बाबा मेरा ध्यान अपनी और खिंचवाते है और मुझ से कहते हैं मेरे मीठे बच्चे- "इस दुःख से भरी दुनिया को मैं फिर से सुख की दुनिया बनाने आया हूँ और इस कार्य मे आपको मेरा मददगार बनना है"। *सदा इस बात को स्मृति में रखना है कि इस संगम युग पर आपका जन्म बाप की मदद करने के लिए हुआ है*। इसलिए विचार सागर मंथन कर सेवा की नई नई युक्तियां निकालनी है। जो बच्चे आज तक मुझ से बिछुड़े हुए हैं उन तक मेरा सन्देश पहुंचा कर उन्हें मुझ से मिलवाना है ।

 

_ ➳  अपने प्रति बाबा की आशाओं को मैं फ़रिशता स्पष्ट अनुभव कर रहा हूँ जिन्हें पूरा करने के लिए मैं वापिस साकारी दुनिया मे लौट आता हूँ और अपने ब्राह्मण स्वरूप में विराजमान हो कर *अब मैं बाबा से प्रोमिस करती हूं कि श्रीमत पर चल, याद से अपने अंदर बल भरकर अपने योगयुक्त और युक्तियुक्त बोल से, अपनी शक्तिशाली मनसा वृति से और अपने श्रेष्ठ कर्मो से मैं अनेकों आत्माओं को आप समान बनाऊँगी* और सृष्टि परिवर्तन के इस महान कार्य में बाबा की मददगार अवश्य बनूँगी।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं  दुःख को सुख, ग्लानि को प्रशंसा में परिवर्तन करने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं पुण्य आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं बापदादा को नयनों में समाने वाला जहान का नूर हूँ  ।*

   *मैं आत्मा नूरे जहान हूँ  ।*

   *मैं लवलीन आत्मा हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ *"ड्रिल :- बिंदु स्वरूप की स्मृति से ज्ञान गुण और धारणा में सिंधु बनने का अनुभव करना"*

➳ _ ➳ मैं आत्मा इस नश्वर देह की दुनिया से किनारा कर... अब अपने घर की ओर चल पड़ती हूँ... इस साकारी दुनिया को पार करते हुए... मैं निरंतर ऊपर की ओर बढ़ती जा रही हूँ... चाँद-सितारों की दुनियां को पार करते हुए... अपने *निजधाम परमधाम में पहुँच जाती हूँ... जहाँ चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश नजर आ रहा है... शांति ही शांति अनुभव हो रही है*...

➳ _ ➳ यह शांतिधाम ही मेरा असली घर है... मैं आत्मा अपने पिता शिवबाबा... जो मेरी ही तरह ज्योतिपुंज है... प्वाइंट ऑफ़ लाइट है... ऐसे बाप के सम्मुख मैं आत्मा बैठी हूँ... *जिस शांति को सारी दुनिया ढूंढ रही है... वह शान्ति के सागर मेरे पिता... मेरे सामने बैठकर मुझे अपनी... सर्वशक्तियों से भरपूर करते जा रहे है*...

➳ _ ➳ बिंदु बीजरूप बाप की मास्टर बिंदु बीजरूप सन्तान मैं स्वयं को देख रही हूं... बाप और मैं कंबाइंड स्थिति का अनुभव कर रही हूँ... मैं बिंदु, बिंदु बाप में समा जाती हूँ... कुछ देर तक इसी स्थिति में स्थित हो... निर्संकल्प हो बाप के स्नेह की गहराई में समाती जा रही हूँ... *बिंदु बन सिंधु बाप में समा जाती हूँ... आहा!!कितना अलौकिक अनुभव हो रहा है... कितना पावरफुल भी... मैं आत्मा अब इसी अनुभव की गहराइयों में खोती जा रही हूँ*...

➳ _ ➳ यह स्थिति कितनी हल्की और... एक दम ऊंची भी अनुभव हो रही है... मीठे बाबा सर्व गुणों के सिंधु है... वे शांति के सागर है... मुझ आत्मा को उनसे शांति के प्रकम्पन मिल रहे है... ज्ञान का सागर मुझ आत्मा को भी ज्ञान का खजाना दे भरपूर करते जा रहे है... *बाप से सर्व सम्बन्ध की शक्ति... मुझ आत्मा को बहुत बड़ी प्राप्ति की अनुभूति करा रही है*...शुक्रिया बाबा... आपने सदा सफलता के वरदानों से मुझ आत्मा को श्रृंगार रहे है...

➳ _ ➳ मैं आत्मा बाप के समान मास्टर सिंधु बनती जा रही हूँ... मैं आत्मा बाबा की श्रीमत पर चल... बाप द्वारा मिले ज्ञान को, गुणों को जीवन में अच्छी रीति धारण करती जा रही हूँ... *बिंदु बनते ही सभी विस्तार समाप्त हो गए... बाबा ने मुझ आत्मा को ज्ञान के खजाने से भरपूर कर दिया*.. मुझ आत्मा को दिव्यगुण धारण कर सम्पूर्ण बनना ही है... आज *मैं बाप से दृढ़ संकल्प करती हूँ*...

➳ _ ➳ *भगवान बाप ने मुझ आत्मा को इतनी अच्छी समझ दी है... जो सारे कल्प में मुझ आत्मा के काम आने वाली है*... इस समझ को यूज़ करते-करते... मैं आत्मा ज्ञान, गुण और धारणा में सिंधु बनती जा रही हूँ... *जो परमात्म पालन और पढ़ाई मुझ आत्मा को मिली है... वह मुझ में शक्ति भर... मुझ आत्मा को बिंदु रूप की स्मृति में स्थित होने का अनुभव करा रही है*..वाह!! मीठे बाबा वाह!!

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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