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 04 / 07 / 20  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *कोई भी कर्मेन्द्रियों के वश हो उल्टा कर्म तो नहीं किया ?*

 

➢➢ *सच्ची कमाई के लिए समय निकाला ?*

 

➢➢ *हर कंडीशन में सेफ रहने वाले एयरकंडीशन की टिकेट के अधिकारी बनकर रहे ?*

 

➢➢ *कैसी भी परिस्थिति में ख़ुशी तो नहीं गयी ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *जैसे साकार रुप को देखा, कोई भी ऐसी लहर का समय जब आता था तो दिन-रात सकाश देने, निर्बल आत्माओं में बल भरने का विशेष अटेंशन रहता था, रात-रात को भी समय निकाल आत्माओं को सकाश भरने की सर्विस चलती थी। तो अभी आप सबको लाइट माइट हाउस बनकर यह सकाश देने की सर्विस खास करनी है* जो चारों ओर लाइट माइट का प्रभाव फैल जाए।

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं बाप की छत्रछाया में रहने वाली सेफ आत्मा हूँ"*

 

✧  अपने को हर समय हर कर्म करते बाप की छत्रछाया के अन्दर रहने वाले अनुभव करते हो? *छत्रछाया सेफ्टी का साधन हो जाये। जैसे स्थूल दुनिया में धूप से वा बारिश से बचने के लिए छत्रछाया का आधार लेते हैं। तो वह तो है स्थूल छत्रछाया। यह है बाप की छत्रछाया जो आत्मा को हर समय सेफ रखती है-आत्मा कोई भी अल्पकाल की आकर्षण में आकर्षित नहीं होती, सेफ रहती है।* तो ऐसे अपने को सदा छत्रछाया में रहने वाली सेफ आत्मा समझते हो? सेफ हो या थोड़ा- थोड़ा सेक आ जाता है?

 

  *जरा भी इस साकारी दुनिया का माया के प्रभाव का सेक-मात्र भी नहीं आये। क्योंकि बाप ने ऐसा साधन दिया है जो सेक से बच सकते हो। वह सबसे सहज साधन है-छत्रछाया। सेकेण्ड भी नहीं लगता, 'बाबा' कहा और सेफ! मुख से नहीं, मुख से 'बाबा-बाबा' कहे और प्रभाव में खिंचता जाये-ऐसा कहना नहीं। मन से 'बाबा' कहा और सेफ।* तो ऐसे सेफ हो? क्योंकि आजकल की दुनिया में सभी सेफ्टी का रास्ता ढूँढते हैं। कोई भी बात करेंगे तो पहले सेफ्टी सोचेंगे, फिर करेंगे। तो आजकल सेफ्टी सब चाहते हैं-चाहे स्थूल, चाहे सूक्ष्म। तो बाप ने भी सदा ब्राह्मण जीवन की सेफ्टी का साधन दे दिया है।

 

  चाहे कैसी भी परिस्थिति आ जाये लेकिन आप सदा सेफ रह सकते हो। ऐसे सेफ हो या कभी हलचल में आ जाते हो? कितना सहज साधन दिया है! मेहनत नहीं करनी पड़ी। *मार्ग मेहनत का नहीं है लेकिन अपनी कमजोरी मेहनत का अनुभव कराती है। जब कमजोर हो जाते हो तब मेहनत लगती है, जब शक्तिशाली होते हो तो सहज लगता है। है सहज लेकिन स्वयं ही मेहनत का अनुभव कराने के निमित्त बनते हो।* मेहनत में थकावट होती है और सहज में खुशी होती है। अगर कोई भी कार्य सहज सफल होता रहता है तो खुशी होगी ना। मेहनत करनी पड़ी तो थकावट होगी।

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  अब क्या करेंगे? *अब कर्म बन्धनी से कर्मयोगी समझो।* अनेक बन्धनों से मुक्त एक बाप के सम्बन्ध में समझो तो सदा एवररेडी रहेंगे। *संकल्प किया और अशरीरी बना, यह प्रैक्टिस करो।* कितना भी सेवा में बिजी हो, कार्य की चारों ओर की खींचातान हो, बुद्धि सेवा के कार्य में अति बिजी हो - ऐसे टाइम पर अशरीरी बनने का अभ्यास करके देखो।

 

✧  *यथार्थ सेवा का कभी बन्धन होता ही नहीं। क्योंकि योग-युक्त, युक्ति-युक्त सेवाधारी सदा सेवा करते भी उपराम रहते हैं।* ऐसे नहीं कि सेवा ज्यादा है इसलिए अशरीरी नहीं बन सकते। याद रखो मेरी सेवा नहीं, बाप ने दी है तो निर्वन्धन रहेंगे। ट्रस्टी हूँ, वन्धन मुक्त हूँ ऐसी प्रैक्टिस करो।

 

✧  अभी के समय अंत की स्टेज, कर्मातीत अवस्था का अभ्यास करो तब कहेंगे तेरे को मेरे में नहीं लाया है। अमानत में ख्यानत नहीं की है समझा, अभी का अभ्यास क्या करना है? *जैसे बीच-बीच में संकल्पों की ट्रैफिक का कन्ट्रोल करते हो वैसे अभि के समय अंत की स्टेज का अनुभव करो तब अंत के समय पास विद ऑनर बन सकेंगे।*

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧ *मैं अशरीरी आत्मा हूँ यह सबसे सहज यथार्थ रीत है।* सहज है ना। जैसे बाप की महिमा है कि वह मुश्किल को सहज करने वाला है। *ऐसे ही बाप समान बच्चे भी मुश्किल को सहज करने वाले हैं। जो विश्व की मुश्किल को सहज करने वाले हैं वह स्वयं मुश्किल अनुभव करें यह कैसे हो सकता है! इसलिए सदा सर्व सहजयोगी।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- उंच बनने के लिए अपना पोतामेल रोज देखना"*

 

   *प्यारे बाबा :-* "मेरे मीठे फूल बच्चे... सत्य पिता के साथ *सदा सत्य भरी राहो पर मुस्कराते हुए सदा उमंगो संग झूमो.*..अपने दिल की हर बात को सत्य पिता को बयाँ करो... हर पल हर कदम पर मीठे बाबा से राय लेते रहो... और श्रीमत का हाथ पकड़े हुए यूँ सदा निश्चिन्त, बेफिक्र बन मौजो से भरा ईश्वरीय जीवन जियो..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा :-* "हाँ मेरे प्यारे बाबा... मैं आत्मा आपके साये में सत्य स्वरूप में खिल उठी हूँ... श्रीमत को पाकर जीवन मूल्यों से भर गयी हूँ... *दिल के हर जज्बातों में आपको साझा कर रही हूँ.*.. आपके साथ और अमूल्य प्यार को पाकर, खुशनुमा जीवन को मालिक हो गयी हूँ..."

 

   *मीठे बाबा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... जनमो की भटकन के पश्चात जो ईश्वर पिता को पाया है तो *उनकी श्रीमत पर चलकर जीवन अनन्त मीठे सुखो का पर्याय बना लो.*.. सच्चे साथी से हर कदम राय लेकर, जीवन को खुशियो की बहार बना दो... सच्चा पोतामेल ईश्वर पिता को देकर, प्यार में वफादारी का सबूत दे दो..."

 

_ ➳  *मैं आत्मा :-* "मेरे प्राणप्रिय बाबा... मै आत्मा परमात्मा पिता को पाकर कितनी भाग्यशाली हो गई हूँ... कभी कहाँ भला सोचा था कि *जीवन ईश्वरीय मत पर चलकर यूँ सुखो का समन्दर हो उठेगा.*.. प्यारे बाबा आपके प्यार को पाने वाले, अपने भाग्य की जादूगरी पर निहाल हो गयी हूँ... "

 

   *प्यारे बाबा :-* "मेरे सिकीलधे मीठे बच्चे... जनमो के भटके मन को अब ईश्वरीय मत पर चलाकर निर्मल पवित्र बनाओ.... *श्रीमत के हाथो में पलकर, अथाह खुशियो से सजा योगी जीवन पाओ.*.. हर कर्म में मीठे बाबा को सच्चा साथी बनाकर राय लो... तो यह जीवन सच्चे सुख प्रेम शांति से भर उठेगा....और इनकी खुशबु से विश्व भी महक उठेगा...."

 

_ ➳  *मैं आत्मा :-* "हाँ मेरे मीठे बाबा... मै आत्मा आपके प्यार के साये तले कितनी मालामाल हो गयी हूँ... श्रीमत को पाकर खुबसूरत जीवन की मालिक हो गयी हूँ... *जीवन असीम खुशियो से लबालब है और ईश्वर पिता हर पल, हर कदम मेरे साथ है.*.. ऐसे प्यारे भाग्य पर कितना न बलिहार जाऊं..."

 

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- कोई भी कर्मेंद्रिय के वश हो उल्टा कर्म नही करना है*"

 

_ ➳  दुनिया मे हो रहे पापाचार, भ्रष्टाचार का दृश्य मैं देख रही हूँ और विचार करती हूं कि यही दुनिया कभी स्वर्ग हुआ करती थी। *एक दूसरे के प्रति सभी के हृदय आपसी स्नेह और प्यार से लबालब थे किंतु आज वो स्नेह, वो प्यार कहाँ चला गया*! अकेले बैठे मैं स्वयं से ही ये सवाल जवाब कर रही हूं।

 

_ ➳  तभी मैं एक दृश्य देखती हूँ जैसे कोई राजदरबार लगी है। सामने सिहांसन पर कोई राजा बैठा है और उसके सामने उसके मंत्री बैठे हैं जिनके साथ वह कुछ विचार विमर्श कर रहा है। *मंत्री गलत सलाह दे कर राजा को गलत कामों के लिए उकसा रहें है। राजा में इतनी समर्थता नही कि वो समझ सके क्या सही है और क्या गलत*। उनके बहकावे में आ कर वो गलत कर्म कर रहा है उसे गलत कर्म करते देख उसके राज्य के सभी लोग भी गलत कर्म कर रहें हैं। मैं सोचती हूँ कि जिस देश का राजा ही भ्रष्ट है तो उस देश में स्वत: ही भ्रष्टाचार का बोलबाला होगा।

 

_ ➳  इस दृश्य को देखते देखते एकाएक स्मृति आती है कि *मैं आत्मा भी तो राजा हूँ किन्तु कर्मेन्द्रियों रूपी मंत्रियों के बहकावे में आ कर जाने अनजाने में मुझ से कितने विकर्म हुए जिनका बोझ मुझ आत्मा पर चढ़ता चला गया*। 63 जन्मो के विकर्मों का बोझ अब मुझ आत्मा को उतारना है और उसे उतारने के लिए मेरे पास केवल यही एक जन्म है। मन में यह ख़्याल आते ही मैं आत्मा 63 जन्मो के विकर्मों की कट को योग अग्नि में भस्म करने के लिए, इस साकारी देह को छोड़ चल पड़ती हूँ शिव बाबा के पास।

 

_ ➳  साकारी और सूक्ष्म लोक से परे आत्माओं की निराकारी दुनिया परमधाम में अब मैं स्वयं को अपने शिव पिता परमात्मा के सम्मुख देख रही हूं। बुद्धि का योग उनसे लगा कर उनसे आ रही सर्वशक्तियों को मैं स्वयं में समा रही हूँ। धीरे धीरे ये शक्तियां जवालस्वरूप धारण करती जा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे एक बहुत बड़ी ज्वाला प्रज्ज्वलित हो उठी हो। *अग्नि का एक बहुत बड़ा घेरा मेरे चारों ओर बनता जा रहा है और उस अग्नि की तपिश से मुझ आत्मा के ऊपर चढ़ी विकर्मों की कट और तमोगुणी संस्कार जल कर भस्म होने लगे हैं*। मैं आत्मा बोझमुक्त हो रही हूं। सच्चा सोना बनती जा रही हूं। स्वयं को अब मैं एकदम हल्का, पापमुक्त अनुभव कर रही हूं। हल्की हो कर अब मैं आत्मा वापिस लौट रही हूं।

 

_ ➳  साकारी दुनिया मे अपने साकारी शरीर मे विराजमान हो कर अब मैं आत्मा मस्तक पर स्वराज्य तिलक लगाए, स्वराज्य अधिकारी बन, मालिकपन की स्मृति में रह हर कर्म कर रही हूं। *राजा बन रोज कर्मेन्द्रियों रूपी मंत्रियों की राजदरबार लगा, उन्हें उचित निर्देश देने से अब मेरे जीवन रूपी शासन की बागडोर सुचारु रूप से चल रही है। अब हर कर्मेन्द्रिय मेरे अधीन है और मेरी इच्छानुसार कार्य कर रही है*। कर्मेन्द्रियों पर सम्पूर्ण नियंत्रण होने और बुद्धि की लाइन क्लीयर होने से अब मैं आत्मा आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छूने लगी हूँ।

 

_ ➳व्यर्थ चिंतन के प्रभाव से अब मैं मुक्त हो गई हूं इसलिये परमात्म पालना के झूले में झूलती रहती हूं। परमात्म शक्तियों से भरपूर होने के कारण शक्तिशाली बन अब मैं सदा उड़ती कला में उड़ती रहती हूं। *परम आनन्द से सदा भरपूर रहने के कारण मास्टर दाता बन सर्व आत्माओं को देने की ही भावना अब मेरे मन मे निरन्तर रहती है* इसलिए सर्व आत्माओं के प्रति शुभभावना रखने से उनके साथ बने कार्मिक एकाउंट चुकतू होने लगे हैं, विकर्मों के खाते बन्द हो रहे हैं और मैं सहज ही विकर्माजीत बनती जा रही हूं। *तीन स्मृतियों का तिलक अब मेरे मस्तक पर सदैव लगा रहता है जिससे मुझे निरन्तर यह स्मृति रहती है कि अब मुझे कर्मेन्द्रियों से ऐसा कोई पाप कर्म नही करना जिससे विकर्म बने*।

 

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं हर कण्डीशन में सेफ रहने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं एयरकण्डीशन की टिकिट की अधिकारी आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा किसी भी परिस्थिति में सदैव खुश रहती हूँ  ।*

   *मैं हर परिस्थिति में खुश रहने वाली आत्मा हूँ  ।*

   *मैं आत्मा खुशी स्वरूप हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

✺ अव्यक्त बापदादा :-

 

➳ _ ➳  सभी कुमारियों ने बाप से पक्का सौदा किया हैक्या सौदा किया हैआपने कहा - बाबा हम आपके और बाप ने कहा बच्चे हमारेयह पक्का सौदा किया?और सौदा तो नहीं करेंगी ना! दो नांव में पांव रखने वाले का क्या हाल होगा! न यहाँ के न वहाँ केतो सौदा करने में होशियार हो ना!  *देखोदेते क्या हो - पुराना शरीर जिसको सुईयों से सिलाई करते रहतेकमजोर मन जिसमें कोई शक्ति नहीं और काला धन... और लेते क्या हो? - 21 जन्म की गैरन्टी का राज्य। ऐसा सौदा तो सारे कल्प में कभी भी नहीं कियातो पक्का सौदा किया? एग्रीमेंट लिख ली।*

 

✺  *"ड्रिल :- "बाबा हम आपके, और आप हमारे" - यह पक्का सौदा करना।*

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा कमल से भरे हुए ताल को देख रही हूँ... कितने मनोहारी लग रहे हैं ये कमल जो तालाब की ऊपरी सतह पर खिले हुए हैं... कमल पुष्प को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है...* पवित्र कमल का पुराणों में भी उल्‍लेख है... देवी-देवताओं को पवित्र कमल पर विराजमान हुए दिखाते हैं... मैं आत्मा पवित्र ब्राह्मण जन्म देने वाले मेरे जन्म दाता, मेरे प्यारे बाबा को याद करती हूं... *तुरंत प्यारे बाबा मेरे पास आते हैं और मुझे मधुबन की पहाड़ियों पर लेकर चलते हैं...*

 

➳ _ ➳  *बाबा अपने सामने सुंदर सी पहाड़ी पर बिठाकर मुझे दृष्टि देते हैं...* बाबा से दिव्य शक्तिशाली तेजस्वी किरणें मुझ आत्मा पर पड़ रही हैं... मैं आत्मा बाबा से आती शक्तिशाली किरणों को स्वयं में ग्रहण कर गुणों शक्तियों से भरपूर हो रही हूँ... मैं आत्मा देहभान से परे होती जा रही हूं... *मैं आत्मा इस पहाड़ की ऊंची चोटी पर बैठ पुरानी कलियुगी सृष्टि के सभी पुरानी चीजों को भूलती जा रही हूं...* देह के पुराने संबंधों से न्यारी हो रही हूं... और बाबा की प्यारी बन रही हूं...

 

➳ _ ➳  मैं आत्मा मधुबन की पहाड़ियों पर बैठ सारे मधुबन के नजारों को देख रही हूं... बाबा मेरा हाथ पकड़ चार धाम की यात्रा कराते हैं... *मैं आत्मा शांति स्तंभ, बाबा की कुटिया, बाबा की झोपड़ी, हिस्ट्री हाल जैसे पवित्र चार धामों की यात्रा कर पावन बन रही हूं... डायमंड हॉल में प्यारे बाबा मुझे ज्ञान मुरली से ज्ञान स्नान कराते हैं...* मैं आत्मा संपूर्ण पवित्र और संपन्न बन रही हूं...

 

➳ _ ➳  *मैं आत्मा बाबा से सच्चा सच्चा सौदा कर रही हूं... बाबा मैं आपकी हूं आप मेरे हो... बाकी कुछ भी मेरा नहीं है...* ना यह देह मेरा है, ना इस देह की कर्मेंद्रियां मेरी हैं... ना इस देह के संबंध मेरे हैं... ना ही ये मन मेरा है... ना यह विनाशी धन मेरा है... कुछ भी मेरा नहीं है बाबा, सब आपका दिया हुआ है... आपका दिया सब आपको समर्पित करती हूं बाबा... और मैं आत्मा सबकुछ बाबा के कदमों में डालती जा रही हूँ... तन मन धन से सब कुछ अर्पण कर रही हूं... *सभी संबंधों को, कर्मबंधनों को बाबा के सामने इमर्ज कर उनके प्रति जो मोह है या घृणा है उसको बाबा की किरणों में भस्म कर रही हूं...*

 

➳ _ ➳  *मेरे प्राण प्यारे बाबा आप मेरे मात-पिता हो, मैं आपकी संतान... आप मेरे शिक्षक हो मैं आपकी गॉडली स्टूडेंट हूं...* आप मेरे सतगुरु हो, मैं आपकी सत शिष्य... *आप मेरे साजन हो, मैं आपकी सजनी... आप रूहानी बगीचे के माली हो, मैं रूहानी गुलाब हूँ...* बाबा आप सागर हो, मैं मास्टर सागर हूँ... आप रुद्र ज्ञान यज्ञ के रचयिता हो, मैं आपकी राइट हैंड हूँ... *आप शमा हो, मैं परवाना... आप दीपराज हो, मैं आपकी दीपक... आप मेरे खुदा दोस्त हो, आप ही मेरे सर्वस्व हो बाबा...*

 

➳ _ ➳  मैं और मेरा बाबा बस और कोई भी नहीं... *मैं आत्मा अविनाशी बाप से पक्का सौदा कर अविनाशी एग्रीमेंट साइन करती हूं... मेरे प्यारे भोले बाबा मेरा सब कुछ पुराना लेकर मुझे 21 जन्मों की नई स्वर्णिम दुनिया की सुख शांति के वर्सा की गारंटी देते हैं...* ऐसा पक्का सौदा पूरे कल्प में कभी भी किसी ने नहीं किया... मीठे बाबा फिर मुझे उसी तालाब के कमल फूल पर बिठा देते हैं... अब मैं आत्मा कभी भी अपने पांव दुनियावी कीचड़ में नहीं रखती हूं... वाह मेरा बाबा वाह, वाह मेरा भाग्य वाह के गुण गाती मैं आत्मा हर कर्म को बाबा की याद में कर रही हूँ...

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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