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 06 / 01 / 21  की  मुरली  से  चार्ट  

       TOTAL MARKS:- 100 

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∫∫ 1 ∫∫ होमवर्क (Marks: 5*4=20)

 

➢➢ *"विनाश भी शुभ कार्य के लिए है" - यह भी स्मृति में रहा ?*

 

➢➢ *रूहानी भोजन को उगारा ?*

 

➢➢ *सत्संग द्वारा रूहानी रंग लगाया ?*

 

➢➢ *अपने मीठे बोल और उमंग उत्साह के सहयोग से दिलशिकस्त को शक्तिवान बनाया ?*

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  ✰ *अव्यक्त पालना का रिटर्न*

         ❂ *तपस्वी जीवन*

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✧  *अब संगठित रुप में एक ही शुद्ध संकल्प अर्थात् एकरस स्थिति बनाने का अभ्यास करो तब ही विश्व के अन्दर शक्ति सेना का नाम बाला होगा।* जब चाहे शरीर का आधार लो और जब चाहे शरीर का आधार छोड़कर अपने अशरीरी स्वरूप में स्थित हो जाओ। *जैसे शरीर धारण किया वैसे ही शरीर से न्यारे हो जायें, यही अनुभव अन्तिम पेपर में फर्स्ट नम्बर लाने का आधार है।*

 

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∫∫ 2 ∫∫ तपस्वी जीवन (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन शिक्षाओं को अमल में लाकर बापदादा की अव्यक्त पालना का रिटर्न दिया ?*

 

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*अव्यक्त बापदादा द्वारा दिए गए*

             ❂ *श्रेष्ठ स्वमान*

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   *"मैं लाइट हाऊस बन विश्व को लाइट देने वाला रूहानी सेवाधारी हूँ"*

 

   रुहानी सेवाधारी का कर्तव्य है-लाइट हाउस बन सबको लाइट देना- सदा अपने को लाइट हाउस समझते हो? *लाइट हाउस अर्थात् ज्योति का घर। इतनी अथाह ज्योति अर्थात् लाइट जो विश्व को लाइट हाउस बन सदा लाइट देते रहें।*

 

  तो लाइटहाउस में सदा लाइट रहती ही है तब वह लाइट दे सकते हैं। अगर लाइट हाउस खुद लाइट के बिना हो तो औरों को कैसे दें? हाउस में सब साधन इक्ठे होते हैं। *तो यहाँ भी लाइट हाउस अर्थात् सदा लाइट जमा हो, लाइट हाउस बनकर लाइट देना यह ब्राह्मणों का आक्यूपेशन है।*

 

  *सच्चे रुहानी सेवाधारी महादानी अर्थात् लाइट हाउस होंगे। दाता के बच्चे दाता होंगे। सिर्फ लेने वाले नहीं लेकिन देना भी है। जितना देंगे उतना स्वत: बढ़ता जायेगा। बढ़ाने का साधन है 'देना'।*

 

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∫∫ 3 ∫∫ स्वमान का अभ्यास (Marks:- 10)

 

➢➢ *इस स्वमान का विशेष रूप से अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *रूहानी ड्रिल प्रति*

*अव्यक्त बापदादा की प्रेरणाएं*

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✧  जैसे साधनों में जितनी प्रेक्टिस करते हो तो ऑटोमेटिक चलता रहता है ना ऐसे एक सेकण्ड में साधना का भी अभ्यास हो। ऐसे नहीं टाइम नहीं मिला, सारा दिन बहुत बिजी रहे। बापदादा यह बात नहीं मानते हैं। *क्या एक घण्टा साधन को अपनाया, उसके बीच में क्या 5-6 सेकण्ड नहीं निकाल सकते?* ऐसा कोई बिजी है जो 5 मिनट भी नहीं निकाल सके, 5 सेकण्ड भी नहीं निकाल सके। ऐसा कोई है?

 

✧   निकाल सकते हैं तो निकाली। *बापदादा जब सुनते हैं आज बहुत बिजी हैं, बहुत बिजी कह करके शक्ल भी बिजी कर देते हैं।* बापदादा मानते नहीं है। जो चाहे वह कर सकते हो। अटेन्शन कम है। जैसे वह अटेन्शन रखते हो ना - 10 मिनट में यह लेटर पूरा करना है, इसलिए बिजी होते हो ना - टाइम के कारण।

 

✧  ऐसे ही सोची 10 मिनट में यह काम करना है, वह भी तो टाइम-टेबल बनाते हो ना। इसमें एक-दो मिनट पहले से एड कर दो। 8 मिनट लगना है, 6 मिनट नहीं, 8 मिनट लगना है तो 2 मिनट साधना में लगाओ। यह हो सकता है? (अमेरीका की गायत्री से पूछते हैं) *तो अभी कभी नहीं कहना, बहुत बिजी, बहुत बिजी।* बापदादा उस समय चेहरा भी देखते हैं, फोटो निकालने वाला होता है।

 

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∫∫ 4 ∫∫ रूहानी ड्रिल (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर रूहानी ड्रिल का अभ्यास किया ?*

 

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         ❂ *अशरीरी स्थिति प्रति*

*अव्यक्त बापदादा के इशारे*

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〰✧  *फ़रिश्ते अर्थात् जिसका धरनी से कोई रिश्ता नहीं।* सदा डबल लाइट स्थिति का अनुभव करते हो? *डबल लाइट स्थिति की निशानी है - सदा उड़ती कला।* उड़ती कला वाले सदा विजयी। उड़ती कला वाले सदा निश्चय बुद्धि, निश्चिन्त। उड़ती कला क्या है? *उड़ती कला अर्थात् ऊँचे से ऊँची स्थिति।* उड़ते हैं तो ऊँचा जाते हैं ना? ऊँचे ते ऊँची स्थिति में रहने वाली ऊँची आत्मायें समझ आगे बढ़ते चली। उड़ती कला वाले अर्थात् बुद्धि रूपी पाँव धरनी पर नहीं। धरनी अर्थात् देह-भान से ऊपर। *जो देह-भान की धरनी से ऊपर रहते वह सदा फ़रिश्ते हैं जिसका धरनी से कोई रिश्ता नहीं।* देह-भान को भी जान लिया, देही-अभिमानी स्थिति को भी जान लिया। जब दोनों के अन्तर को जान गये तो देह-अभिमान में आ नहीं सकते। जो अच्छा लगता है वही किया जाता है ना! तो सदा यही स्मृति से सदा उड़ते रहेंगे। *उड़ती कला में चले गये तो नीचे की धरनी आकर्षित नहीं करती, ऐसे फ़रिश्ता बन गये तो देह रूपी धरनी आकर्षित नहीं कर सकती।*

 

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∫∫ 5 ∫∫ अशरीरी स्थिति (Marks:- 10)

 

➢➢ *इन महावाक्यों को आधार बनाकर अशरीरी अवस्था का अनुभव किया ?*

 

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∫∫ 6 ∫∫ बाबा से रूहरिहान (Marks:-10)

( आज की मुरली के सार पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :-  हर कर्म का फल अवश्य मिलता है*

 

_ ➳  मीठे मधुबन के डायमण्ड हॉल में, मै भाग्यवान आत्मा... प्यारे बाबा से मिलन मना रही हूँ... और सोच सोचकर अभिभूत हूँ... कितनी मेहनत करके, भगवान ने मुझे देह के दलदल रुपी दुर्गन्ध से निकाल कर... *गुणो की प्रतिमूर्ति बना दिया है... सिवाय मीठे बाबा के भला, किसको मेरी यूँ फ़िक्र थी... कौन मुझे यूँ प्यारा और मीठा... फिर से बना सकता था... सिवाय मेरे बाबा के.*.. आज जीवन पवित्रता और दिव्यता की अनोखी अदाओ से सजकर... विश्व को मेरा जो दीवाना बना रहा है... वह मेरे मीठे बाबा का मुझको दिया हुआ असीम प्यार है... *जिसने मुझ आत्मा को, देह आम से आत्मा खास बना कर.*.. विश्व जगत में अलौकिकता से चमका दिया है...

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को कर्म की गुह्य गति को समझाते हुए कहा :-* "मीठे प्यारे फूल बच्चे... *आत्मिक भाव में स्थित रहकर... सदा एक दूसरे को सम्मान देकर, गुणो की लेनदेन करो.*.. देह ने जो सीमाओ में बांध कर, दिल को जो छोटा कर दिया था... अब अपने असली स्वरूप, आत्मिक भाव में डूबकर... दिल को अपनी विशालता से पुनः सजाओ...विश्व कल्याण कारी बनकर हर कर्म को करो कि... आपका कर्म सबके लिए प्रेरणा बने..."

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के अमृत वचनो को सुनकर अति आनन्द में डूबकर कहती हूँ :-* "मेरे सच्चे सहारे बाबा... आपने मेरे जीवन में आकर... इस मटमैले विकारी जीवन को गुणो के फूलो सा सुगन्धित बनाकर... मुझे इस विश्व धरा पर, अनोखा सजा दिया है... *अब मै आत्मा खुशियो की, और श्रेष्ठ कर्मो की मिसाल बनकर, हर दिल को श्रेष्ठता से सजाती जा रही हूँ.*.."

 

   *प्यारे बाबा ने मुझ आत्मा को अति मीठा और प्यारा बनाकर कहा :-* "मीठे प्यारे लाडले बच्चे... मीठे बाबा की प्यार भरी छाँव में खिलकर... सदा गुणो और शक्तियो की झलक हर कर्म में दिखाओ... आत्मिक गुणो से हर कर्म को सजाओ... *सदा यह स्म्रति रहे कि आप विशेष आत्माओ का... हर कर्म सारे संसार के लिए पथ प्रदर्शक का कार्य करता है.*..इसलिए हर कर्म को श्रीमत प्रमाण कर, जग को दीवाना बनाओ...

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा के ज्ञान रत्नों को पाकर खुशियो में झूमते हुए कहती हूँ :-* "सच्चे सच्चे सखा मेरे... मै आत्मा विकारो की गलियो में खोकर... अपने गुणो और शक्तियो को पूर्णतः खो बेठी थी... मीठे बाबा आपने आकर मुझ पर इतनी मेहनत कर, मुझे फिर से गुणवान बनाया है... अब मै आत्मा *अपने हर कर्म में ईश्वरीय अदा दिखाकर... हर दिल को आदर और सम्मान देती जा रही हूँ.*.."

 

   *मीठे बाबा ने मुझ आत्मा को सर्वगुण सम्पन्न बनाकर देवताई राज्य तिलक देते हुए कहा:-* "मीठे प्यारे सिकीलधे बच्चे... देह के भान में आकर, अपने मौलिक गुणो को पूरी तरहा खो बेठे थे... *अब जो प्यारे बाबा ने सच्चे अहसासो से भरा है... तो हर कर्म में उन मीठी अनुभूतियों को झलकाओ.*.. हर कर्म श्रीमत के रंग में रंगा हो... हर दिल आपसे खुशियां पाये... ऐसा मीठा प्यारा और निराला ईश्वर पुत्र बनकर, जीवन का हर कार्य करो...

 

_ ➳  *मै आत्मा मीठे बाबा से अमूल्य शिक्षाये पाकर, संवरे हुए जीवन को देख, प्रफुल्लित होकर कहती हूँ :-*"सच्चे सच्चे खिवैया बाबा... मीठे बाबा आपने जीवन को मूल्यों से सजाकर, मुझे कितना महान बना दिया है... अब मेरा कर्म असाधारण और महानता से सज गया है... *हर दिल मुझसे पूछता है... कि इतना मीठा, प्यारा और निराला, भला तुम्हें किसने बनाया है... मै मुस्करा कर कहती हूँ सिर्फ मेरे मीठे बाबा ने.*..."मीठे बाबा से दिली रुहरिहान् कर मै आत्मा... अपने कर्मक्षेत्र पर आ गयी...

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∫∫ 7 ∫∫ योग अभ्यास (Marks:-10)

( आज की मुरली की मुख्य धारणा पर आधारित... )

 

✺   *"ड्रिल :- सदा एक ही फुरना रखना है कि सतोप्रधान सच्चा सोना बन ऊंच पद पाना है*"

 

_ ➳  आज के इस तमोप्रधान माहौल में तमोप्रधान बन चुकी हर चीज को और इस तमोप्रधान दुनिया को फिर से सतोप्रधान बनाने के लिए ही भगवान इस धरा पर आयें है और इस श्रेष्ठ कर्तव्य को सम्पन्न करने के लिए तथा सभी आत्माओं की बुद्धि को स्वच्छ, सतोप्रधान  बनाने के लिए परमपिता परमात्मा स्वयं परमशिक्षक बन जीवन को परिवर्तन करने वाली पढ़ाई हर रोज हमे पढ़ा रहें हैं। *तो कितनी महान सौभाग्यशाली हूँ मैं आत्मा जो गॉडली स्टूडेंट बन भगवान से पढ़ रही हूँ। मन ही मन अपने भाग्य की सराहना करते, मैं स्वयं से प्रतिज्ञा करती हूँ कि अपने परमशिक्षक भगवान बाप द्वारा मिलने वाले ज्ञान को अच्छी रीति बुद्धि में धारण कर, अपनी बुद्धि को सतोप्रधान बनाने का मैं पूरा पुरुषार्थ करूँगी*।

 

_ ➳  अपने परमशिक्षक शिव बाबा द्वारा मिलने वाले ज्ञान के अखुट खजानों को बुद्धि में धारण कर बुद्धि को स्वच्छ और पावन बनाने के लिए अब मैं अपने गॉडली स्टूडेंट स्वरूप में स्थित हो जाती हूँ और अपने बाबा द्वारा मुरली के माध्यम से हर रोज मिलने वाले मधुर महावाक्यों पर विचार सागर मंथन करने बैठ जाती हूँ। *एकांत में बैठ मुरली की गुह्य प्वाइंट्स पर विचार सागर मन्थन करते हुए मैं महसूस करती हूँ कि जितना इस पढ़ाई पर मैं मन्थन कर रही हूँ मेरी बुद्धि उतनी ही खुल रही है और इस पढ़ाई को जीवन मे धारण करना बिल्कुल सहज लगने लगा है*। नर से नारायण और नारी से लक्ष्मी बनाने वाली ये पढ़ाई ही परिवर्तन का आधार है जिसे मैं अपने जीवन मे स्पष्ट महसूस कर रही हूँ। *जैसे - जैसे इस पढ़ाई को मैं अपने जीवन मे धारण करती जा रही हूँ वैसे - वैसे मेरी बुद्धि सतोप्रधान बनती जा रही है*।

 

_ ➳  इस ईश्वरीय पढ़ाई से अपने जीवन मे आये परिवर्तन के बारे में विचार कर मन ही मन हर्षित होते हुए अपने परमशिक्षक शिव बाबा का मैं दिल से कोटि - कोटि शुक्रिया अदा करती हूँ और उनकी मीठी याद में खो जाती हूँ *जो मुझे सेकण्ड में अशरीरी स्थिति में स्थित कर देती है और मन बुद्धि के विमान पर बिठा कर मुझे मधुबन की उस पावन धरनी पर ले जाती है जहाँ भगवान स्वयं परमशिक्षक बन साकार में बच्चों को आकर ईश्वरीय पढ़ाई पढ़ाते हैं*।

 

_ ➳  देख रही हूँ मैं स्वयं को अपने गॉडली स्टूडेंट ब्राह्मण स्वरूप में डायमंड हाल में, जहाँ भगवान अपने साकार रथ पर विराजमान होकर मधुर महावाक्य उच्चारण कर रहें हैं। *एकटक अपने परमशिक्षक भगवान बाप को निहारते हुए उनके मुख कमल से निकलने वाले अनमोल ज्ञान को सुनकर उसे बुद्धि में धारण करके मैं वापिस लौट आती हूँ और इस पढ़ाई से अपनी बुद्धि को सतोप्रधान बनाने वाले अपने परमशिक्षक निराकार शिव बाबा से उनके ही समान बन उनसे मिलने मनाने की इच्छा से अब अपने मन और बुद्धि को सब बातों से हटाकर मन बुद्धि को पूरी तरह एकाग्र कर लेती हूँ*। एकाग्रता की शक्ति धीरे - धीरे देह भान से मुक्त कर, मेरे निराकारी सत्य स्वरूप में मुझे स्थित कर देती है और अपने सत्य स्वरूप में स्थित होते ही स्वयं को मैं देह से पूरी तरह अलग विदेही आत्मा महसूस करने लगती हूँ।

 

_ ➳  देह के भान से मुक्त होकर अपने प्वाइंट ऑफ लाइट स्वरूप में स्थित होकर मैं बड़ी आसानी से अपने शरीर रूपी रथ को छोड़ उससे बाहर आ जाती हूँ और हर बन्धन से मुक्त एक अद्भुत हल्केपन का अनुभव करते हुए, देह और देह की दुनिया से किनारा कर ऊपर आकाश की ओर उड़ जाती हूँ। *मन बुद्धि से दुनिया के खूबसूरत नजारो को देखती, अपनी यात्रा पर चलते हुए, मैं आकाश को पार कर, उससे ऊपर सूक्ष्म वतन से परें आत्माओं की उस खूबसूरत निराकारी दुनिया मे प्रवेश करती हूँ जहाँ मेरे शिव पिता रहते हैं*।

 

_ ➳  अपने इस शान्तिधाम, निर्वाणधाम घर मे आकर, गहन शांति की अनुभूति करते हुए इस अंतहीन ब्रह्मांड में विचरण करते - करते मैं पहुँच गई हूँ अपने प्यारे पिता के समीप जो अपनी सर्वशक्तियो की किरणों रूपी बाहों को फैलाये मेरा आह्वान कर रहें हैं। *अपने पिता परमात्मा के प्रेम की प्यासी मैं आत्मा स्वयं को तृप्त करने के लिए अपने पिता के पास पहुँच  कर उनकी किरणों रूपी बाहों में समा जाती हूँ। अपनी किरणों रूपी बाहों में मुझे भरकर मेरे मीठे दिलाराम बाबा अपना असीम स्नेह मुझ पर लुटा रहें हैं*। अपने अंदर निहित गुणों और  शक्तियों को जिन्हें मैं देह भान में आकर भूल गई थी, उन्हें बाबा अपने गुणों और सर्वशक्तियों की अनन्त धाराओं के रूप में मुझ पर बरसाते हुए पुनः जागृत कर रहे हैं। 

 

_ ➳  अपनी खोई हुई शक्तियों को पुनः प्राप्त कर मैं आत्मा बहुत ही शक्तिशाली स्थिति का अनुभव करवा रही हैं। सर्वगुण और सर्वशक्तिसम्पन्न बनकर मैं वापिस साकारी दुनिया में लौट आई हूँ। *अपने ब्राह्मण स्वरूप में स्थित होकर, अपने परमशिक्षक शिव बाबा द्वारा मुरली के माध्यम से हर रोज पढ़ाई जाने वाली पढ़ाई को अच्छी रीति पढ़कर, और अच्छी रीति धारण करके अपने बुद्धि रूपी बर्तन को मैं धीरे - धीरे साफ, स्वच्छ और सतोप्रधान बनाती जा रही हूँ*।

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∫∫ 8 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के वरदान पर आधारित... )

 

   *मैं सत्संग द्वारा रूहानी रंग लगाने वाली आत्मा हूँ।*

   *मैं सदा हर्षित आत्मा हूँ।*

   *मैं डबल लाइट आत्मा हूँ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 9 ∫∫ श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास (Marks:- 5)

( आज की मुरली के स्लोगन पर आधारित... )

 

   *मैं आत्मा सदैव मीठे बोल बोलती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा सदा उमंग उत्साह से सहयोग देती हूँ  ।*

   *मैं आत्मा दिलशिकस्त को शक्तिवान बना देती हूँ  ।*

 

➢➢ इस संकल्प को आधार बनाकर स्वयं को श्रेष्ठ संकल्पों में स्थित करने का अभ्यास किया ?

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∫∫ 10 ∫∫ अव्यक्त मिलन (Marks:-10)

( अव्यक्त मुरलियों पर आधारित... )

 

 अव्यक्त बापदादा :-

 

 _ ➳  आप सबको पता है जगत अम्बा माँ का एक सदा धारणा का स्लोगन रहा हैयाद है? किसको याद है? *(हुकमी हुक्म चलाए रहा...)* तो जगत अम्बा बोली अगर *यह धारणा सब कर लें कि हमें बापदादा चला रहा है, उसके हुक्म से हर कदम चला रहे हैं।* अगर यह स्मृति रहे तो हमारे को चलाने वाला डायरेक्ट बाप है। तो कहाँ नजरजायेगी? *चलने वाले कीचलाने वाले की तरफ ही नजर जायेगीदूसरे तरफ नहीं।* तो यह करावनहार निमित्त बनाए करा रहे हैंचला रहे हैं। जिम्मेवार करावनहार है। *फिर सेवा में जो माथा भारी हो जाता है ना, वह सदा हल्का रहेगाजैसे रूहे गुलाब।*      

 

✺   *ड्रिल :-  "करावनहार की स्मृति से सेवा कर हल्के रहने का अनुभव"*

 

 _ ➳  मैं आत्मा अशरीरी ज्योति स्वरूप में स्थित हो अपने पिता शिवबाबा से मिलने निर्वाणधाम की ओर जा रही हूं... *लाल प्रकाश के परमधाम में शिवबाबा मुझ आत्मा का मुस्कुराकर स्वागत कर रहे है...* मैं आत्मा मीठे बाबा के सम्मुख बैठ जाती हूं... मैं आत्मा बाबा की रूहानी मीठी दृष्टि से निहाल हो रही हूं... *बाबा से आती हुई सकाश ऊर्जा से मैं आत्मा गुण-समृद्ध व शक्ति-सम्पन्न हो रही हूं...*

 

 _ ➳  बाबा मुझ आत्मा को सेवा के लिये तैयार कर रहे है... *सेवाधारी स्वरूप प्रदान कर इस यज्ञ के लिए योग्य बना रहे है...* भिन्न भिन्न सेवा कार्य सौंपकर मुझ आत्मा को भाग्य निर्माण का सुअवसर प्रदान कर रहे है... मीठे बाबा मुझ आत्मा को  विश्व कल्याण की सेवा में करावनहार बन सेवा कार्य करा रहे है... *निमित्त बन सेवा करने की सीख दे रहे है...* मीठे बाबा की सारी शिक्षाएं पाकर मैं आत्मा सफल सेवाधारी बन विश्व सेवा के कार्य मे नियुक्त हो रही हूँ...

 

 _ ➳  मीठे बाबा से सेवा का वादा कर मैं आत्मा अपने कर्मस्थल की ओर लौट रही हूं... सभी आत्मा भाइयों को शुभ भावना शुभ कामना के संकल्पो द्वारा भरपूर करने की सेवा में एक मन हो रही हूं... *मनसा सेवा की वृहत क्षेत्र में अपना योगदान दे बेहद की सेवा सम्पन्न कर रही हूं...* करावनहार बाबा के द्वारा सहज रूप से सेवा कार्य सफल कर रही हूं... प्रति पल बाबा की हजार भुजाओं की मदद से विश्व कल्याण की सेवा में अनेकों के कल्याण के निमित्त बन रही हूं... *मीठे बाबा की दी हुई सेवा के समय करावनहार की स्मृति रख सदा हल्के रहने की प्रेरणा से मैं आत्मा बेहद सेवा में स्वयं को सदा डबल लाइट स्थिति में अनुभव कर रही हूं...*

 

 _ ➳  *मैं आत्मा मीठे शिवबाबा के श्रीमत अनुसार सेवा में रहते हल्का रहने के अभ्यास द्वारा रूहे गुलाब बन महक रही हूं...* अन्य आत्माओ को भी रूहे गुलाब बनने की प्रेरणा दे रही हूं... *इस कांटो के जंगल जैसी दुनिया को गुलाब का बगीचा बनाने की सेवा में अपना तन मन धन सब सौपकर अपना भाग्य बना रही हूं...*

 

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_⊙  आप सभी बाबा के प्यारे प्यारे बच्चों से अनुरोध है की रात्रि में सोने से पहले बाबा को आज की मुरली से मिले चार्ट के हर पॉइंट के मार्क्स ज़रूर दें ।

 

ॐ शांति

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